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The News Air - Breaking News - President Murmu Protocol Row: वेन्यू बदला, प्रोटोकॉल तोड़ा, ममता पर भड़कीं राष्ट्रपति

President Murmu Protocol Row: वेन्यू बदला, प्रोटोकॉल तोड़ा, ममता पर भड़कीं राष्ट्रपति

दार्जिलिंग में संथाल कॉन्फ्रेंस का वेन्यू अचानक बदला गया, हजारों आदिवासी नहीं पहुंच सके, राष्ट्रपति मुर्मू ने जताई नाराजगी, PM मोदी ने बताया शर्मनाक, ममता बनर्जी ने आरोप किए खारिज

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
रविवार, 8 मार्च 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, पश्चिम बंगाल, सियासत
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President Murmu Protocol Row
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President Murmu Protocol Row : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मामला है दार्जिलिंग जिले में आयोजित 9वीं अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस का, जहां अचानक वेन्यू बदल दिया गया और राष्ट्रपति के स्वागत में प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया। राष्ट्रपति मुर्मू ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की और कहा कि हजारों संथाल समुदाय के लोग नए वेन्यू तक पहुंच ही नहीं सके। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृह मंत्री अमित शाह तक ने पश्चिम बंगाल सरकार पर जमकर निशाना साधा, जबकि TMC ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।

क्या है संथाल कॉन्फ्रेंस और क्यों है खास

President Murmu Protocol Row को समझने के लिए पहले यह जानना जरूरी है कि यह कॉन्फ्रेंस क्या थी और इसकी अहमियत क्या है। संथाल समुदाय भारत के सबसे बड़े आदिवासी समूहों में से एक है, जिसकी मौजूदगी बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में है। इतिहास में संथाल विद्रोह (1855-56) ब्रिटिश शासन के खिलाफ शुरुआती संगठित आदिवासी विद्रोहों में से एक माना जाता है, जो जमींदारों और साहूकारों के शोषण के खिलाफ खड़ा हुआ था।

9वीं अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस का मकसद संथाल संस्कृति और भाषा को बढ़ावा देना, आदिवासी विकास पर चर्चा करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संथाल पहचान को मजबूत करना था। इस कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रपति मुर्मू की उपस्थिति का विशेष महत्व था क्योंकि वे न सिर्फ भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति हैं, बल्कि वे खुद संथाल समुदाय से ताल्लुक रखती हैं।

अचानक बदल दिया गया वेन्यू: 5 लाख की जगह सिमटकर रह गई भीड़

President Murmu Protocol Row का सबसे बड़ा मुद्दा वेन्यू बदलने को लेकर है। मूल योजना के मुताबिक यह कॉन्फ्रेंस सिलीगुड़ी के विधान नगर में होनी थी। यह जगह इसलिए चुनी गई थी क्योंकि वहां एक बड़ा खुला मैदान था, जहां लाखों लोग आ सकते थे। आदिवासी समुदायों के लिए वहां तक पहुंचना भी आसान था।

लेकिन अचानक पश्चिम बंगाल प्रशासन ने वेन्यू बदलकर गोसैनपुर कर दिया, जो बागडोगरा एयरपोर्ट के पास है। राज्य सरकार ने इसके पीछे सुरक्षा चिंताएं, प्रशासनिक लॉजिस्टिक्स और ट्रैफिक मैनेजमेंट जैसे कारण बताए। लेकिन नया वेन्यू पुराने की तुलना में काफी छोटा था और इसका सीधा नतीजा यह हुआ कि हजारों संथाल समुदाय के लोग वहां तक पहुंच ही नहीं सके। जितनी भीड़ की उम्मीद थी, उसका एक छोटा हिस्सा ही आ पाया। किसी भी सांस्कृतिक सम्मेलन की जान जनभागीदारी होती है और वही इस वेन्यू बदलाव से खत्म हो गई।

राष्ट्रपति मुर्मू खुद गईं पुराने वेन्यू पर: बोलीं, 5 लाख लोग आ सकते थे

President Murmu Protocol Row में सबसे अहम मोड़ तब आया जब राष्ट्रपति मुर्मू ने नए वेन्यू पर जाने के बाद मूल वेन्यू विधान नगर का भी खुद दौरा किया। वहां जाकर उन्होंने देखा कि वह मैदान इतना बड़ा है कि 5 लाख लोग आराम से आ सकते थे। इसके बाद राष्ट्रपति ने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की।

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा: “उन्होंने (पश्चिम बंगाल सरकार ने) कहा कि यह जगह कंजेस्टेड है, आप वहां नहीं जा पाएंगी। लेकिन जब मैं वहां गई तो मुझे लगा कि यहां तो 5 लाख लोग आ सकते हैं। बहुत बड़ा वेन्यू है। मुझे नहीं पता कि उन्होंने हमें वहां क्यों भेजा। मुझे नहीं पता कि प्रशासन के दिमाग में क्या चल रहा था कि उन्होंने कॉन्फ्रेंस के लिए एक ऐसी जगह चुनी जहां संथाल लोग पहुंच ही नहीं सके।” राष्ट्रपति की यह प्रतिक्रिया बेहद दुर्लभ मानी जा रही है क्योंकि आमतौर पर राष्ट्रपति पद पर बैठे व्यक्ति इस तरह के सार्वजनिक बयान नहीं देते।

प्रोटोकॉल का मसला: मुख्यमंत्री नहीं आईं, कोई सीनियर मंत्री भी नहीं

President Murmu Protocol Row का दूसरा बड़ा पहलू है प्रोटोकॉल का उल्लंघन। भारत के राष्ट्रपति देश के प्रथम नागरिक और सर्वोच्च संवैधानिक पद पर होते हैं। गृह मंत्रालय और राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा जारी प्रोटोकॉल गाइडलाइंस के मुताबिक, जब भी राष्ट्रपति किसी राज्य का दौरा करते हैं, तो उस राज्य के मुख्यमंत्री को राष्ट्रपति का स्वागत करना होता है। राज्य के वरिष्ठ मंत्री या अधिकारी कार्यक्रम में मौजूद रहते हैं। राज्य प्रशासन पूरे लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा का समन्वय करता है।

लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कार्यक्रम में नहीं गईं और राष्ट्रपति को रिसीव नहीं किया। कोई वरिष्ठ राज्य मंत्री भी वेन्यू पर मौजूद नहीं था। राष्ट्रपति और राज्य सरकार के बीच जो प्रशासनिक समन्वय होना चाहिए था, वह भी कमजोर दिखा। ये नियम इसलिए बनाए गए हैं ताकि राष्ट्रपति पद की गरिमा बनी रहे।

राष्ट्रपति मुर्मू ने इस पर कहा: “कोई भी राष्ट्रपति जब किसी राज्य में आता है, तो मुख्यमंत्री या मंत्रियों को आना चाहिए। ममता बनर्जी मेरी छोटी बहन की तरह हैं। बंगाल मेरी बेटी की तरह है। फिर भी वो नहीं आईं। प्रोटोकॉल मेरे लिए नहीं, बल्कि इस पद की गरिमा के लिए मेंटेन करना चाहिए था।” राष्ट्रपति के ये शब्द दर्शाते हैं कि उन्हें व्यक्तिगत स्तर पर नहीं बल्कि संवैधानिक पद की गरिमा को लेकर गहरी चिंता थी।

PM मोदी बोले “शर्मनाक”, अमित शाह ने कहा “अराजक व्यवहार”

President Murmu Protocol Row पर राष्ट्रपति का बयान आते ही भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल सरकार पर चौतरफा हमला बोल दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा: “यह शर्मनाक और अभूतपूर्व है। लोकतंत्र और आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण में विश्वास रखने वाला हर व्यक्ति दुखी है। TMC सरकार ने सच में सारी हदें पार कर दी हैं। उनका प्रशासन राष्ट्रपति के अपमान के लिए जिम्मेदार है।” मोदी ने यह भी कहा कि जो विषय संथाल संस्कृति जैसा गंभीर था, उसे इतने कैजुअल तरीके से लिया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

गृह मंत्री अमित शाह ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी और कहा: “पश्चिम बंगाल में TMC सरकार ने आज अपने अराजक व्यवहार में एक नया निचला स्तर छू लिया है। प्रोटोकॉल की घोर अवहेलना करके भारत के राष्ट्रपति का अपमान किया गया है।” BJP के कई अन्य नेताओं ने भी इसे आदिवासी समुदायों का अपमान और कमजोर प्रशासनिक समन्वय करार दिया।

ममता बनर्जी का जवाब: प्राइवेट संस्था का कार्यक्रम, मेरा हिस्सा नहीं था

President Murmu Protocol Row पर TMC और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। ममता बनर्जी ने देर रात सोशल मीडिया पर अपना पक्ष रखते हुए कई बातें कहीं। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय संथाल काउंसिल एक प्राइवेट संगठन है, जिसने राष्ट्रपति मुर्मू को आमंत्रित किया था।

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ममता बनर्जी ने बताया कि एडवांस सिक्योरिटी लाइसेंस के बाद जिला प्रशासन ने खुद राष्ट्रपति सचिवालय को वेन्यू बदलने के बारे में लिखित और फोन दोनों तरीकों से सूचित किया था। राष्ट्रपति को रिसीव करने सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर, दार्जिलिंग के जिलाधिकारी और सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट के अधिकारी मौजूद थे। राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा जो लाइन-अप शेयर किया गया था, उसका सख्ती से पालन किया गया।

ममता ने कहा कि चूंकि यह कार्यक्रम उनका हिस्सा नहीं था, इसलिए वे वहां नहीं जा पाईं। उन्होंने BJP पर पलटवार करते हुए कहा कि BJP जानबूझकर राष्ट्रपति की यात्रा को राजनीतिक रंग दे रही है और देश की सर्वोच्च कुर्सी का दुरुपयोग कर रही है। ममता ने प्रोटोकॉल उल्लंघन के किसी भी इरादे से इनकार किया और कहा कि वेन्यू बदलने का फैसला पूरी तरह सुरक्षा कारणों से लिया गया था।

असली सवाल: राष्ट्रपति पद की गरिमा किसकी जिम्मेदारी

President Murmu Protocol Row सिर्फ एक वेन्यू बदलने या मुख्यमंत्री के न आने का मामला नहीं है। यह सवाल इससे कहीं गहरा है। भारत का राष्ट्रपति देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद है और इस पद की गरिमा बनाए रखना हर राज्य सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है। जब राष्ट्रपति खुद कहें कि प्रोटोकॉल मेंटेन नहीं हुआ और संथाल समुदाय के लोग कार्यक्रम तक नहीं पहुंच सके, तो यह गंभीर बात है।

दूसरी तरफ यह सवाल भी उठता है कि क्या केंद्र और राज्य के बीच राजनीतिक तनाव का असर संवैधानिक पदों की गरिमा पर पड़ रहा है। पश्चिम बंगाल में TMC और BJP के बीच लंबे समय से कड़वाहट है। राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच भी अक्सर टकराव देखने को मिलता है। ऐसे माहौल में राष्ट्रपति की यात्रा भी विवादों में फंस गई। चाहे सुरक्षा कारण सही हों या राजनीतिक मंशा, नतीजा यह हुआ कि हजारों आदिवासी जो अपनी संस्कृति का जश्न मनाने आए थे, वे दर-दर भटककर लौट गए और राष्ट्रपति पद के सम्मान पर भी सवाल खड़े हो गए।

आम आदिवासी पर क्या असर पड़ा

President Murmu Protocol Row में सबसे ज्यादा नुकसान उन हजारों संथाल आदिवासियों को हुआ जो दूर-दराज के गांवों से इस कॉन्फ्रेंस में शामिल होने आए थे। कई लोग लंबी यात्रा करके पहुंचे लेकिन बदले हुए वेन्यू तक पहुंच ही नहीं सके। किसी भी आदिवासी सांस्कृतिक सम्मेलन की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसमें समुदाय के कितने लोग शामिल हो पाए। वेन्यू बदलने से यह मकसद ही विफल हो गया। जो कॉन्फ्रेंस संथाल पहचान और गौरव का जश्न मनाने के लिए थी, वह राजनीतिक विवाद में दब गई।


मुख्य बातें (Key Points)
  • वेन्यू बदला गया: दार्जिलिंग जिले में 9वीं अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस का वेन्यू सिलीगुड़ी के विधान नगर से बदलकर गोसैनपुर कर दिया गया, जो काफी छोटा था। राष्ट्रपति ने खुद पुराने वेन्यू का दौरा किया और कहा कि वहां 5 लाख लोग आ सकते थे।
  • प्रोटोकॉल उल्लंघन: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राष्ट्रपति को रिसीव करने नहीं आईं और कोई वरिष्ठ राज्य मंत्री भी मौजूद नहीं था, जो प्रोटोकॉल गाइडलाइंस के विपरीत है।
  • PM मोदी और अमित शाह की कड़ी प्रतिक्रिया: मोदी ने इसे “शर्मनाक और अभूतपूर्व” बताया, अमित शाह ने TMC के “अराजक व्यवहार” की निंदा की।
  • TMC का बचाव: ममता बनर्जी ने कहा कि यह प्राइवेट संगठन का कार्यक्रम था, वेन्यू बदलना सुरक्षा कारणों से था और BJP जानबूझकर राष्ट्रपति की यात्रा को राजनीतिक रंग दे रही है।

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. राष्ट्रपति मुर्मू और ममता बनर्जी के बीच विवाद क्या है?

दार्जिलिंग में 9वीं अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस का वेन्यू अचानक बदल दिया गया, जिससे हजारों आदिवासी पहुंच नहीं सके। साथ ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति को रिसीव नहीं किया और कोई वरिष्ठ मंत्री भी मौजूद नहीं था, जिसे प्रोटोकॉल उल्लंघन माना जा रहा है।

Q2. राष्ट्रपति की यात्रा पर प्रोटोकॉल क्या कहता है?

गृह मंत्रालय और राष्ट्रपति सचिवालय की गाइडलाइंस के अनुसार, जब भी राष्ट्रपति किसी राज्य का दौरा करते हैं तो मुख्यमंत्री को उन्हें रिसीव करना होता है, वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी मौजूद रहते हैं और राज्य प्रशासन सुरक्षा तथा लॉजिस्टिक्स का समन्वय करता है।

Q3. ममता बनर्जी ने प्रोटोकॉल उल्लंघन पर क्या कहा?

ममता बनर्जी ने कहा कि यह एक प्राइवेट संगठन का कार्यक्रम था, वेन्यू बदलना सुरक्षा कारणों से था और जिला प्रशासन ने राष्ट्रपति सचिवालय को पहले ही सूचित कर दिया था। उन्होंने BJP पर यात्रा को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया।

 

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अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

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