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The News Air - Breaking News - बड़ा मुद्दा! Political Parties को Cash Donation पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 31 को

बड़ा मुद्दा! Political Parties को Cash Donation पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 31 को

सुप्रीम कोर्ट सियासी पार्टियों को दो हजार रुपये से कम का नकद चंदा हासिल करने की इजाजत देने वाले आयकर कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर 31 अगस्त को सुनवाई करेगा।

Ajay Kumar by Ajay Kumar
शुक्रवार, 28 अगस्त 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, राष्ट्रीय
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Political Cash Donation: सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई 31 अगस्त को – सुप्रीम कोर्ट राजनीतिक पार्टियों को ₹2,000 से कम का नकद चंदा हासिल करने की इजाजत देने वाली आयकर कानून की व्यवस्था की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर 31 अगस्त को सुनवाई करेगा। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी।

देखा जाए तो यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक पारदर्शिता और चुनावी सुधारों से भी जुड़ा है। अगर कोर्ट इस व्यवस्था को गैर-संवैधानिक करार देता है, तो यह भारतीय राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है।

🔍 यह भी पढ़ें- AAP Political Affairs Committee की अहम मीटिंग 11 जून को, टिकट वितरण पर चर्चा

क्या है पूरा मामला?

याचिकाकर्ता खेम सिंह भाटी ने आयकर अधिनियम-1961 की धारा 13A की उप-धारा (D) को गैर-संवैधानिक करार देते हुए रद्द करने की मांग की है।

याचिका में कहा गया है कि नकद चंदे की इजाजत से चुनाव प्रक्रिया प्रभावित होती है और मतदाताओं को दान देने वालों तथा फंड के स्रोत के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी नहीं मिल पाती। यह लोकतांत्रिक पारदर्शिता के खिलाफ है।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि वर्तमान कानून के तहत राजनीतिक दल ₹2,000 से कम की राशि नकद में ले सकते हैं, और इसकी कोई रिपोर्टिंग जरूरी नहीं है। इससे काले धन और बेनामी चंदे को बढ़ावा मिलता है।

🔍 यह भी पढ़ें- Political Funding in India: चुनावी चंदे का खेल कैसे शुरू हुआ? जानें पूरी कहानी

याचिका में क्या मांगें की गई हैं?

याचिका में चुनाव आयोग को यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि वह सियासी पार्टियों की रजिस्ट्रेशन और चुनाव निशान की अलॉटमेंट के दौरान यह शर्त लगाए कि राजनीतिक दल किसी भी तरह का नकद चंदा स्वीकार नहीं कर सकतीं।

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याचिका में यह भी मांग की गई है कि सियासी पार्टियां चंदा देने वाले का नाम और अन्य जानकारी सार्वजनिक करें और कोई भी राशि नकद में न ली जाए ताकि सियासी फंडिंग की पारदर्शिता कायम रहे।

समझने वाली बात यह भी है कि यह मांग चुनावी बॉन्ड योजना को रद्द करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आई है।

इलेक्टोरल बॉन्ड फैसले का संदर्भ

याचिका में 2024 के सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का भी हवाला दिया गया है, जिसके जरिए चुनावी बॉन्ड योजना को रद्द कर दिया गया था। उस फैसले में कोर्ट ने कहा था कि चुनावी फंडिंग में पारदर्शिता होनी चाहिए और मतदाताओं को यह जानने का अधिकार है कि राजनीतिक दलों को किससे और कितना चंदा मिल रहा है।

अगर गौर करें तो इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर भी यही आपत्ति थी कि यह गुमनाम चंदे को बढ़ावा देता है। अब नकद चंदे पर भी यही सवाल उठाया जा रहा है।

कब हुई थी पहली सुनवाई?

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 24 नवंबर को याचिका पर केंद्र सरकार और अन्य पक्षों से जवाब मांगा था। अब 31 अगस्त को इस मामले की अगली सुनवाई होनी है।

दिलचस्प बात यह है कि इस याचिका पर अभी तक केंद्र सरकार का पूरा जवाब सामने नहीं आया है। सरकार का रुख क्या होगा, यह देखना अहम होगा।

क्यों अहम है यह मुद्दा?

राजनीतिक फंडिंग की पारदर्शिता लोकतंत्र की मजबूती के लिए बेहद जरूरी है। अगर राजनीतिक दल बड़ी मात्रा में नकद चंदा लेते रहेंगे और उसकी कोई जवाबदेही नहीं होगी, तो यह भ्रष्टाचार और काले धन को बढ़ावा देगा।

यहां ध्यान देने वाली बात यह भी है कि छोटे-छोटे चंदे के नाम पर बड़ी रकम इकट्ठा की जा सकती है। उदाहरण के लिए, अगर कोई पार्टी 10 लाख लोगों से ₹2,000-₹2,000 का नकद चंदा लेती है, तो यह ₹200 करोड़ हो जाता है, और इसकी कोई रिपोर्टिंग नहीं होती।

दुनिया के अन्य देशों में क्या व्यवस्था है?

अगर हम दुनिया के अन्य लोकतांत्रिक देशों की बात करें, तो अधिकांश देशों में राजनीतिक चंदे की पूरी जानकारी सार्वजनिक करना अनिवार्य है। कई देशों में नकद चंदे पर पूर्ण प्रतिबंध है और सभी लेनदेन डिजिटल या चेक के जरिए होने चाहिए।

भारत में भी अब समय आ गया है कि राजनीतिक फंडिंग को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए।

मुख्य बातें (Key Points)
  • सुप्रीम कोर्ट 31 अगस्त को नकद चंदे पर सुनवाई करेगा
  • आयकर कानून की धारा 13A(D) को चुनौती दी गई है
  • याचिकाकर्ता का कहना है कि नकद चंदा पारदर्शिता के खिलाफ है
  • चुनाव आयोग को नकद चंदे पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश देने की मांग
  • इलेक्टोरल बॉन्ड रद्द करने के फैसले का हवाला दिया गया
  • जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच करेगी सुनवाई

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: राजनीतिक दल कितना नकद चंदा ले सकते हैं?

उत्तर: वर्तमान आयकर कानून के तहत राजनीतिक दल ₹2,000 से कम की राशि नकद चंदे के रूप में ले सकते हैं। इससे अधिक राशि के लिए डिजिटल या चेक के जरिए भुगतान जरूरी है।

प्रश्न 2: इलेक्टोरल बॉन्ड योजना क्यों रद्द की गई थी?

उत्तर: सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को इसलिए रद्द किया था क्योंकि यह गुमनाम चंदे को बढ़ावा देती थी और राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता के खिलाफ थी। कोर्ट ने कहा था कि मतदाताओं को यह जानने का अधिकार है कि राजनीतिक दलों को किससे चंदा मिल रहा है।

प्रश्न 3: क्या नकद चंदे पर पूर्ण प्रतिबंध लग सकता है?

उत्तर: यह सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगा। याचिकाकर्ता ने नकद चंदे पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग की है, लेकिन कोर्ट क्या फैसला देगा, यह 31 अगस्त की सुनवाई के बाद ही पता चलेगा।

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पत्रकारिता में एक दशक से अधिक का ठोस अनुभव रखने वाले अजय कुमार 'शोर से ज़्यादा सार' की पत्रकारिता पर दृढ़ विश्वास करते हैं। वर्तमान में वे The News Air में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे समाचारों की रणनीति, लेखन, तथ्य-सत्यापन (Fact-Checking) और सटीक प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं।पत्रकारिता का सफर और अनुभव - अजय कुमार का करियर ग्राउंड ज़ीरो की रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज़ डेस्क के कुशल प्रबंधन तक विस्तृत है। The News Air में पिछले 3 वर्षों से नेतृत्व करने से पहले, उन्होंने 'दैनिक जागरण' और 'सिटी न्यूज़' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके काम करने के तरीके को बेहद व्यावहारिक और तथ्य-आधारित बनाया है।विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र (Expertise & Beats) - वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा, स्पष्ट तथ्यों और निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं। उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है:राजनीतिक कवरेज: लोकसभा चुनावों और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड और डेस्क रिपोर्टिंग।कानूनी और संसदीय खबरें: संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों की नियमित और रियल-टाइम कवरेज।खोजी पत्रकारिता: ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ रिपोर्टिंग के जरिए अंदरूनी खबरों की पड़ताल।विश्वसनीयता और डिजिटल योगदान (Trust & Authority) - सटीक और प्रामाणिक ख़बरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें पाठकों के बीच एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और फेक न्यूज़ से लड़ने की दिशा में, अजय कुमार गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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