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The News Air - Breaking News - Pitru Paksha में Shopping करना शुभ या अशुभ? जानिए पंडित जी ने क्या कहा

Pitru Paksha में Shopping करना शुभ या अशुभ? जानिए पंडित जी ने क्या कहा

पितृ पक्ष में नई गाड़ी, सोना, कपड़े या मकान खरीदने को लेकर फैली भ्रांतियां, जानिए धार्मिक विशेषज्ञ की राय में क्या सच है और क्या केवल लोक-मान्यता

Ajay Kumar by Ajay Kumar
शनिवार, 26 सितम्बर 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, धर्म
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Pitru Paksha
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Pitru Paksha Shopping Rules 2026: क्या पितृ पक्ष (श्राद्ध) में नई गाड़ी, सोना, कपड़े या मकान खरीदना अशुभ होता है? या फिर यह केवल एक लोक-मान्यता है? हर साल जब पितृ पक्ष शुरू होता है, तो लाखों लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या इन 15-16 दिनों में कोई शुभ काम—जैसे शॉपिंग, दाढ़ी-बाल कटवाना, या कोई नया काम शुरू करना—करना चाहिए या नहीं। इसी सवाल का जवाब देने के लिए एक धार्मिक विशेषज्ञ ने बेहद रोचक और तार्किक व्याख्या की है जो परंपराओं और आधुनिक जीवनशैली के बीच संतुलन बनाती है।

देखा जाए तो पितृ पक्ष को लेकर समाज में कई तरह की मान्यताएं प्रचलित हैं। कुछ लोग इसे अत्यंत पवित्र और संवेदनशील समय मानते हैं जिसमें किसी भी तरह के शुभ कार्य वर्जित हैं। वहीं कुछ लोग इसे केवल पितरों को याद करने और श्रद्धांजलि देने का समय मानते हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस वीडियो में धार्मिक विशेषज्ञ ने बड़ी ही सरल भाषा में और व्यावहारिक उदाहरणों के साथ इन सभी भ्रांतियों को दूर किया है।

🔍 यह भी पढ़ें- पितृ पक्ष तिथियां 2024: जानें श्राद्ध पक्ष का महत्व और अनुष्ठान के बारे में

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पितृ पक्ष में शॉपिंग की मनाही: कहां से शुरू हुई यह परंपरा?

धार्मिक विशेषज्ञ ने एक बेहद रोचक तर्क दिया है। उन्होंने कहा कि पितृ पक्ष में शुभ काम न करने की परंपरा के पीछे एक व्यावहारिक कारण था।

उन्होंने समझाया कि पितृ पक्ष में पंडितों को दिनभर 6-7 घरों में जाकर श्राद्ध कर्म करना पड़ता है। हर घर में उन्हें पूरी-सब्जी, मिठाई और भारी भोजन खिलाया जाता है। दोपहर 2-3 बजे तक लगातार भोजन करने के बाद पंडित इतने थक जाते हैं कि उन्हें आराम की जरूरत होती है। वे किसी भी अन्य काम—जैसे शादी का मुहूर्त निकालना या कोई पूजा करना—के लायक नहीं रह जाते।

समझने वाली बात यह है कि जब पंडित के पास समय ही नहीं होगा, तो स्वाभाविक है कि उस दिन का मुहूर्त “अच्छा नहीं” बताया जाएगा। धीरे-धीरे यह एक परंपरा बन गई कि पितृ पक्ष में कोई शुभ काम नहीं होता।

लेकिन विशेषज्ञ का मानना है कि यह सिर्फ व्यावहारिक कारणों से शुरू हुई परंपरा थी, न कि कोई धार्मिक नियम।

क्या पितृ पक्ष में शॉपिंग करना वाकई अशुभ है?

धार्मिक विशेषज्ञ ने बड़ी स्पष्टता से कहा: “नहीं, पितृ पक्ष में खूब शॉपिंग करें। कुछ भी करें। कोई दिक्कत नहीं है। निश्चिंत होकर करें।”

उन्होंने एक बेहद सरल उदाहरण दिया: “अगर पितृ पक्ष में किसी की लॉटरी लग जाए या किसी के बेटा हो जाए, तो क्या आप हॉस्पिटल छोड़ कर आओगे? उस समय तो आप कहते हैं हमारे पितर बड़े खुश हैं! हमारे बेटा हो गया!”

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि जब अच्छी चीजें होती हैं, तो हम पितरों का आशीर्वाद मानते हैं। लेकिन जब शॉपिंग की बात आती है, तो हम उन्हीं पितरों को नाराज होने का डर दिखाते हैं। यह तर्क में विरोधाभास है।

क्या सेविंग, दाढ़ी-बाल कटवाना और नाखून काटना मना है?

इस सवाल पर भी विशेषज्ञ ने बहुत व्यावहारिक जवाब दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस, मिलिट्री, आर्मी, IAS, IPS, डॉक्टर, वकील, एंकर, मीडिया के लोग—अगर ये रोज सेविंग नहीं करेंगे, रोज सूट-बूट बनकर नहीं जाएंगे, तो उनकी ड्यूटी कैसे चलेगी?

उन्होंने कहा: “आपको पूरा अधिकार है। आप सेविंग करें। आप कहीं आएं-जाएं, कुछ करें। पितर कुछ नहीं कहते हैं।”

अगर गौर करें, तो यह बात बिल्कुल तार्किक है। अगर हर पेशे वाला व्यक्ति पितृ पक्ष में अपना काम बंद कर दे, तो समाज कैसे चलेगा?

असली सवाल: जिंदा लोगों की सेवा पहले या पितरों की पूजा?

विशेषज्ञ ने बहुत महत्वपूर्ण बात कही: “पितरों को मानें, लेकिन पहले जिंदा जी को मान लो।”

उनका कहना था कि अगर आपने अपने माता-पिता, दादा-दादी की जीवित रहते सेवा नहीं की, तो मरने के बाद श्राद्ध करने का क्या मतलब? पितृ पक्ष उन लोगों के लिए है जो:

  • अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए (कैंसर, एक्सीडेंट, किडनी फेल, आदि)
  • जिनकी मृत्यु अचानक हुई
  • जो लापता हो गए

ऐसे पितरों के प्रति दयावान बनें, श्रद्धावान बनें, उनको स्मरण करें। भगवान से प्रार्थना करें कि उनकी आत्मा को शांति मिले।

महिलाओं के श्राद्ध और संतान न होने पर क्या करें?

एक महत्वपूर्ण सवाल था कि महिलाओं के श्राद्ध के लिए कोई खास स्थिति है क्या? विशेषज्ञ ने कहा कि नहीं, जिस तिथि में जो देवी जी गई हैं, उसी तिथि में श्राद्ध मनाया जाता है। नियम सबके लिए समान है।

और अगर किसी की संतान नहीं है? तो विशेषज्ञ ने कहा कि बेटा-बेटी में कोई अंतर नहीं है। बेटी को पूरा अधिकार है अपने माता-पिता का श्राद्ध करने का।

उन्होंने सुझाव दिया कि बेटी द्वारा किए गए श्राद्ध में:

  • केले, पेड़े और दूध
  • दक्षिणा
  • विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ
  • गजेंद्र मोक्ष का पाठ

—ये सब करने चाहिए।

गजेंद्र मोक्ष का महत्व: पितरों को मोक्ष दिलाने की प्रार्थना

विशेषज्ञ ने गजेंद्र मोक्ष की कथा का बहुत सुंदर वर्णन किया। उन्होंने बताया:

एक हाथी भगवान विष्णु के लिए रोज तालाब से कमल का फूल लाता था। एक दिन मगरमच्छ ने उसका पैर पकड़ लिया। हाथी परेशान होकर विष्णु भगवान को याद करने लगा: “हे नारायण, मेरी रक्षा करो।”

भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र चलाकर मगरमच्छ की गर्दन काट दी और हाथी को मुक्त किया। हाथी ने भगवान का धन्यवाद किया कि आज आपने मुझे मोक्ष दिलाया।

इसलिए गजेंद्र मोक्ष का पाठ अपने पितरों के नाम से कराएं ताकि उनको मोक्ष मिले। वो किसी योनि में भटक रहे हों, तो उन्हें मुक्ति मिले।

अगर पैसे नहीं हैं तो क्या करें? सबसे सरल उपाय

विशेषज्ञ ने उन लोगों के लिए भी सरल उपाय बताए जो आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं। उन्होंने कहा:

पीपल के पेड़ के नीचे:

  • दीपक जलाएं
  • जल चढ़ाएं
  • “ॐ नमो नारायण भगवते वासुदेवाय” का जाप करें
  • दोनों हाथ ऊपर करके प्रार्थना करें: “हे नारायण, मैं आपकी शरण में आया हूं। आप हमारे पूर्वजों के भी अपराध माफ करें और हमारे भी अपराध माफ करें। उनकी आत्मा की शांति के लिए आपसे प्रार्थना करता हूं।”

ऐसा करने से निश्चित रूप से उनकी आत्मा को शांति मिलेगी।

पितृ पक्ष में क्या सावधानियां बरतें?

विशेषज्ञ ने कुछ बुनियादी सावधानियां बताईं:

  1. 16 दिन शुद्ध-पवित्र रहें: लहसुन-प्याज न खाएं (जितना संभव हो)
  2. भगवान का स्मरण करें
  3. निर्धन को भोजन कराएं: किसी गरीब स्त्री, पुरुष, बाल-बच्चे को भोजन कराएं
  4. फल-मिठाई बांटें: अपनी सामर्थ के अनुसार
  5. पराठा-सब्जी, खीर, दूध, दही: जो भी बन सके, बांटें
  6. कुछ नहीं है तो: सबको राम-राम कर लीजिए, पंडितों के चरण स्पर्श कर लीजिए
आधुनिक युवाओं के लिए सुझाव: YouTube और भागवत कथा

आज बहुत से युवा ऐसे हैं जो अपने घरों से दूर रहते हैं। उनको अपने गांव की परंपराएं नहीं पता। उनके लिए विशेषज्ञ ने सुझाव दिया:

  • YouTube पर पंडितों के विडियो देखें
  • भागवत कथा सुनें
  • जहां भी बड़े-बड़े बैनर लगे हों—भागवत, राम कथा, शिव पुराण—वहां जाकर सुनें
  • भगवान का स्मरण करते हुए सुनें: “आज जो मैं भागवत सुन रहा हूं, हे नारायण, मेरे पितरों की आत्मा की शांति के लिए सुन रहा हूं। आप उनकी आत्मा को शांति दें।”
निष्कर्ष: परंपरा और तर्क का संतुलन

इस पूरी चर्चा से यह स्पष्ट होता है कि पितृ पक्ष में शॉपिंग या शुभ काम करना कोई धार्मिक रूप से वर्जित नहीं है। यह केवल एक परंपरा है जो व्यावहारिक कारणों से शुरू हुई थी।

समझने वाली बात यह है कि:

  • पितरों की पूजा जरूरी है, लेकिन जिंदा लोगों की सेवा पहले
  • अपनी ड्यूटी, जॉब, जिम्मेदारियां निभाएं
  • साथ ही पितरों को याद करें, उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना करें
  • अपनी सामर्थ के अनुसार दान-पुण्य करें

मुख्य बातें (Key Points)
  • पितृ पक्ष में शॉपिंग पूरी तरह जायज है: कोई धार्मिक वर्जना नहीं
  • सेविंग, दाढ़ी-बाल कटवाना मना नहीं: हर पेशे वाले को अपनी ड्यूटी निभानी चाहिए
  • बेटी को भी श्राद्ध का अधिकार: बेटा-बेटी में कोई अंतर नहीं
  • गजेंद्र मोक्ष और विष्णु सहस्त्रनाम: पितरों की आत्मा की शांति के लिए महत्वपूर्ण
  • गरीबों को भोजन कराना सबसे बड़ा पुण्य: पैसे नहीं हैं तो पीपल के नीचे प्रार्थना करें
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पत्रकारिता में एक दशक से अधिक का ठोस अनुभव रखने वाले अजय कुमार 'शोर से ज़्यादा सार' की पत्रकारिता पर दृढ़ विश्वास करते हैं। वर्तमान में वे The News Air में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे समाचारों की रणनीति, लेखन, तथ्य-सत्यापन (Fact-Checking) और सटीक प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं।पत्रकारिता का सफर और अनुभव - अजय कुमार का करियर ग्राउंड ज़ीरो की रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज़ डेस्क के कुशल प्रबंधन तक विस्तृत है। The News Air में पिछले 3 वर्षों से नेतृत्व करने से पहले, उन्होंने 'दैनिक जागरण' और 'सिटी न्यूज़' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके काम करने के तरीके को बेहद व्यावहारिक और तथ्य-आधारित बनाया है।विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र (Expertise & Beats) - वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा, स्पष्ट तथ्यों और निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं। उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है:राजनीतिक कवरेज: लोकसभा चुनावों और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड और डेस्क रिपोर्टिंग।कानूनी और संसदीय खबरें: संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों की नियमित और रियल-टाइम कवरेज।खोजी पत्रकारिता: ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ रिपोर्टिंग के जरिए अंदरूनी खबरों की पड़ताल।विश्वसनीयता और डिजिटल योगदान (Trust & Authority) - सटीक और प्रामाणिक ख़बरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें पाठकों के बीच एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और फेक न्यूज़ से लड़ने की दिशा में, अजय कुमार गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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