Hindu Calendar October 2026 Festival Dates: वर्ष 2026 का अक्टूबर महीना सनातन धर्म और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण रहने वाला है। आश्विन और कार्तिक मास के संधिकाल में पड़ने वाले इस महीने की शुरुआत पितृपक्ष के पावन दिनों से होगी, जिसमें सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को संपन्न होगी। इसके ठीक बाद 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि का महापर्व शुरू होगा, जिसकी घटस्थापना के साथ ही नौ दिनों तक मां दुर्गा की महा-आराधना की जाएगी। 20 अक्टूबर को विजयादशमी (दशहरा), 25 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा और 29 अक्टूबर को सुहागिनों का महान पर्व करवाचौथ मनाया जाएगा।
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देखा जाए तो यह महीना महज तारीखों का एक पन्ना नहीं, बल्कि यह सनातन परंपरा की आत्मा को छू लेने वाला वह पावन कालखंड है जिसका इंतजार हर सनातनी वर्ष भर करता है। जब आकाश में शारदीय पूर्णिमा की चांदनी अमृत बरसाएगी और मां शेरावाली का आगमन जन-जन के हृदय को शक्ति से भर देगा, तो उस दिव्य ऊर्जा का एहसास कैसा होगा? समझने वाली बात यह है कि इस महीने में अध्यात्म के जितने रंग और भाव देखने को मिलेंगे, वह पूरे वर्ष हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि और शांति का संचार करेंगे।
1-10 अक्टूबर: पितृ पक्ष—पूर्वजों को श्रद्धांजलि का समय
अक्टूबर महीने की शुरुआत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष यानी पितृ पक्ष के पावन दिनों से होती है। 1 अक्टूबर से लेकर 10 अक्टूबर तक का समय हमारे पूर्वजों और पितरों को याद कर उनके प्रति कृतज्ञता और श्रद्धा प्रकट करने वाला समय है।
प्रमुख तिथियां:
| तारीख | तिथि/व्रत | विशेष महत्व |
|---|---|---|
| 1 अक्टूबर | षष्ठी श्राद्ध | छठी तिथि को गए पितरों का श्राद्ध |
| 2 अक्टूबर | सप्तमी श्राद्ध | महात्मा गांधी जयंती भी |
| 3 अक्टूबर | अष्टमी श्राद्ध, महालक्ष्मी व्रत पूर्ण, जीवित्पुत्रिका व्रत, कालाष्टमी | अत्यंत महत्वपूर्ण दिन |
| 6 अक्टूबर | इंदिरा एकादशी | मोक्षदायिनी एकादशी, पितरों को बैकुंठ की प्राप्ति |
| 8 अक्टूबर | गुरु प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि | दुर्लभ संयोग |
| 10 अक्टूबर | सर्वपितृ अमावस्या | सभी ज्ञात-अज्ञात पूर्वजों का तर्पण |
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि 3 अक्टूबर का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। इस दिन अष्टमी श्राद्ध के साथ-साथ महालक्ष्मी व्रत पूर्ण होगा और सनातनियों की दीर्घ आयु तथा सुरक्षा के लिए रखा जाने वाला अति कठोर जीवित्पुत्रिका व्रत भी रखा जाएगा।
दिलचस्प बात यह है कि 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ पितृ पक्ष का समापन होगा, जहां हम अपने सभी ज्ञात और अज्ञात पूर्वजों का तर्पण कर उनका असीम आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।
11-20 अक्टूबर: शारदीय नवरात्रि—मां दुर्गा की महा-आराधना
पितरों की विदाई के ठीक अगले ही दिन यानी 11 अक्टूबर 2026 को उदित होगा आश्विन शुक्ल पक्ष का वह सूर्य जो पूरी दुनिया को भगवती दुर्गा के जयकारों से गुंजा देगा।
नवरात्रि की प्रमुख तिथियां:
| तारीख | दिन/आयोजन | विशेष कार्यक्रम |
|---|---|---|
| 11 अक्टूबर | घटस्थापना, नवरात्रि प्रथमा | शारदीय नवरात्रि शुरू |
| 12 अक्टूबर | नवरात्रि द्वितीया | चंद्र दर्शन |
| 15 अक्टूबर | नवरात्रि पंचमी | उपांग ललिता व्रत |
| 16 अक्टूबर | नवरात्रि षष्ठी | सरस्वती आवाहन, कल्प प्रारंभ, अकाल बोधन (बंगाल में दुर्गा पूजा शुरू) |
| 17 अक्टूबर | नवरात्रि सप्तमी | तुला संक्रांति, नवपत्रिका पूजा, सरस्वती पूजा |
| 19 अक्टूबर | महाष्टमी-महानवमी | संधि पूजा (सबसे महत्वपूर्ण), कन्या पूजन, चंडी पाठ |
| 20 अक्टूबर | विजयादशमी/दशहरा | रावण दहन, दुर्गा विसर्जन, अपराजिता पूजा |
11 अक्टूबर को शुभ मुहूर्त में घटस्थापना के साथ ही शारदीय नवरात्रि का महापर्व प्रारंभ हो जाएगा। नौ दिनों तक दसों दिशाएं, माँ की नौ शक्तियां और नौ दिव्य स्वरूपों की आराधना में पवित्र होंगी।
16 अक्टूबर का दिन बंगाल परंपरा और शक्ति पूजा के लिए अत्यंत विशेष है। इस दिन सरस्वती आवाहन, बेल (बिल्व) निमंत्रण और कल्प प्रारंभ और अकाल बोधन के साथ दुर्गा पूजा का मुख्य महोत्सव शुरू होगा।
अगर गौर करें, तो 19 अक्टूबर को महाष्टमी और महानवमी की विशेष संधि पूजा का वो अलौकिक क्षण आएगा जब मां दुर्गा के परम तेजोमय रूप का महा अभिषेक और पूजन किया जाएगा। घर-घर में कन्या पूजन, चंडी पाठ और हवन की आहुतियों से संपूर्ण वातावरण पूरी तरह से अलौकिक और शक्तिमय हो जाएगा।
20 अक्टूबर: विजयादशमी—सत्य की विजय का पर्व
और फिर आएगा वह ऐतिहासिक और शौर्य से भरा दिन—20 अक्टूबर 2026। असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म और अंधकार पर प्रकाश की विजय का अमर प्रतीक—विजयादशमी यानी दशहरा।
त्रेता युग में भगवान श्री राम द्वारा लंकापति रावण के वध की याद में पूरे देश में रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतलों का दहन किया जाएगा। इस दिन अयुध पूजा, दुर्गा विसर्जन और अपराजिता पूजा भी संपन्न होगी।
21 अक्टूबर को दक्षिण भारत का प्रसिद्ध मैसूर दशहरा, बंगाल में विजया दशमी विसर्जन, विद्या प्रारंभ संस्कार और काशी का ऐतिहासिक भरत मिलाप आयोजन होगा जो भारत की अनूठी संस्कृति और एकता की मिसाल प्रस्तुत करता है।
यह दिन केवल बुराई के अंत का नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति के विजय पताका के लहराने का दिन है।
22-25 अक्टूबर: एकादशी से शरद पूर्णिमा तक
विजयादशमी के उल्लास के बाद भक्ति का यह सफर प्रेम, धन और अखंड सौभाग्य के पर्वों की ओर मुड़ता है।
| तारीख | तिथि/व्रत | महत्व |
|---|---|---|
| 22 अक्टूबर | मोक्षदायिनी पापांकुशा एकादशी | अत्यंत पवित्र एकादशी |
| 23 अक्टूबर | शुक्र प्रदोष व्रत | शुक्रवार प्रदोष का दुर्लभ योग |
| 25 अक्टूबर | शरद पूर्णिमा/कोजागरी पूर्णिमा | मां लक्ष्मी का पृथ्वी पर विचरण |
25 अक्टूबर की रात आकाश से मानो अमृत की बूंदें बरसेंगी क्योंकि यह रात होगी शरद पूर्णिमा यानी कोजागरी पूजा की।
मान्यता है कि इस रात मां लक्ष्मी स्वयं पृथ्वी लोक पर विचरण करती हैं और पूछती हैं: “को जागर्ति?” यानी “कौन जाग रहा है?”
शरद पूर्णिमा की खीर और चंद्रमा की शीतल किरणें स्वास्थ्य और समृद्धि का वरदान देती हैं। इस रात चांदनी में रखी गई खीर को अमृत तुल्य माना जाता है।
26-29 अक्टूबर: संतों की जयंती से करवाचौथ तक
26 अक्टूबर को महर्षि वाल्मीकि जयंती और संत मीराबाई जयंती मनाई जाएगी। यह दोनों ही संत भारतीय साहित्य और भक्ति परंपरा के महान स्तंभ हैं।
और फिर 29 अक्टूबर को आएगा सुहागनों का सबसे महान और अटूट तप का दिन—करवाचौथ।
निर्जला व्रत रखकर जब देश की करोड़ों महिलाएं हाथ में पूजा की थाली लिए छन्नी से अपने जीवनसाथी और चांद का दीदार करेंगी, तो पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते की ऐसी अद्भुत मिसाल पूरे ब्रह्मांड को कहीं और देखने को नहीं मिलेगी।
अक्टूबर 2026: सनातन संस्कृति का जीवंत प्रमाण
पूर्वजों के प्रति तर्पण और कृतज्ञता से शुरू हुआ यह सफर मां जगदंबा की शक्ति आराधना, विजयादशमी के शौर्य और करवाचौथ के अखंड सौभाग्य तक पहुंचकर पूरा होता है।
अक्टूबर 2026 का यह महीना सिर्फ पंचांग की तिथियां नहीं, बल्कि यह हमारी सनातन जड़ें, हमारी परंपराओं और हमारी अटूट आस्था का जीवंत प्रमाण है।
इस पूरे महीने में अध्यात्म के जितने रंग और भाव देखने को मिलेंगे, वह पूरे वर्ष हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि और शांति का संचार करेंगे।
मुख्य बातें (Key Points)
- 1-10 अक्टूबर: पितृ पक्ष, सर्वपितृ अमावस्या 10 को
- 11 अक्टूबर: शारदीय नवरात्रि घटस्थापना
- 16 अक्टूबर: बंगाल में दुर्गा पूजा शुरू, सरस्वती आवाहन
- 19 अक्टूबर: महाष्टमी-महानवमी संधि पूजा
- 20 अक्टूबर: विजयादशमी/दशहरा
- 25 अक्टूबर: शरद पूर्णिमा (कोजागरी पूर्णिमा)
- 29 अक्टूबर: करवाचौथ










