NRI Deposit: विदेश में रह रहे भारतीयों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी मुद्रा जमा को आकर्षित करने के लिए एक नई योजना की घोषणा की है। इस कदम से NRI डिपॉजिट में फिर से तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है, जो वित्त वर्ष 2026 में थम गई थी।
देखा जाए तो यह कदम उस समय आया है जब बैंक ऑफ बड़ौदा की एक ताजा शोध रिपोर्ट ने बताया कि NRI जमा राशियों में पिछले कुछ महीनों से ठहराव देखने को मिल रहा था। अब RBI की नई पहल से इस रुके हुए प्रवाह को फिर से गति मिल सकती है।
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क्या है RBI की नई योजना?
रिजर्व बैंक ने 30 सितंबर 2026 तक नए FCNR(B) यानी Foreign Currency Non-Resident (Bank) डिपॉजिट जुटाने वाले बैंकों के हेजिंग खर्च का पूरा बोझ खुद उठाने का फैसला किया है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इससे बैंकों पर वित्तीय दबाव कम होगा और वे विदेशी मुद्रा जमा के लिए बेहतर ब्याज दरें पेश कर सकेंगे।
हेजिंग कॉस्ट वह खर्च होता है जो बैंकों को विदेशी मुद्रा की विनिमय दर में उतार-चढ़ाव से बचने के लिए करना पड़ता है। अब जब यह खर्च RBI खुद वहन करेगा, तो बैंकों के लिए NRI ग्राहकों को आकर्षित करना आसान हो जाएगा।
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2013 की सफलता की पुनरावृत्ति?
दिलचस्प बात यह है कि RBI ने इससे पहले भी 2013 में ऐसी ही एक स्कीम लॉन्च की थी जब रुपया भारी दबाव में था। उस समय शुरू की गई स्वैप विंडो सुविधा ने FCNR(B) डिपॉजिट में जबरदस्त तेजी लाई थी।
आंकड़ों के मुताबिक, कुल NRI डिपॉजिट वित्त वर्ष 2013 में 71 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2016 में 127 अरब डॉलर हो गया था। इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण FCNR(B) डिपॉजिट का 15 अरब डॉलर से बढ़कर 45 अरब डॉलर होना था। अब सवाल उठता है कि क्या इस बार भी वही जादू दोहराया जा सकेगा?
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FY26 में NRI डिपॉजिट में ठहराव क्यों?
बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट “How NRI deposits and its components have moved over the years” के अनुसार, पिछले एक दशक में लगातार बढ़ने के बाद वित्त वर्ष 2026 में कुल NRI डिपॉजिट लगभग स्थिर रहा है। यह एक साल पहले के 165 बिलियन डॉलर से मामूली बढ़कर 166 बिलियन डॉलर तक पहुंचा है।
अगर गौर करें तो पिछले 5 सालों में जहां कुल जमा राशियां डॉलर के रूप में सालाना 7.8 फीसदी की दर से बढ़ीं, वहीं NRI डिपॉजिट में सिर्फ 3.1 फीसदी की वृद्धि हुई। यह अंतर साफ तौर पर दिखाता है कि NRI निवेशकों को आकर्षित करने के लिए और प्रयास की जरूरत थी।
NRO खातों में रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि
समझने वाली बात यह है कि जबकि FCNR(B) योजना RBI की रणनीति का मुख्य हिस्सा है, लेकिन NRI डिपॉजिट के भीतर एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है। NRO यानी Non-Resident Ordinary खाते सबसे तेजी से बढ़ने वाले हिस्से के रूप में उभरे हैं।
आंकड़ों की बात करें तो NRO डिपॉजिट ने पिछले 5 सालों में 12.1 फीसदी और पिछले 10 सालों में 12.6 फीसदी की सालाना चक्रवृद्धि विकास दर (CAGR) दर्ज की है। इससे यह NRI डिपॉजिट उत्पादों में सबसे तेजी से बढ़ने वाली श्रेणी बन गई है।
कुल NRI डिपॉजिट में इसका हिस्सा वित्त वर्ष 2019 के 11.7 फीसदी से तेजी से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 20.1 फीसदी हो गया है। खासकर कोविड के बाद के समय में इसमें काफी तेजी देखी गई।
NRI डिपॉजिट के प्रकार और विकास दर (पिछले 5 वर्ष)
| डिपॉजिट का प्रकार | CAGR (5 वर्ष) | FY19 में हिस्सेदारी | FY26 में हिस्सेदारी |
|---|---|---|---|
| NRO खाते | 12.1% | 11.7% | 20.1% |
| NR(E)RA खाते | कम | अधिक | मध्यम |
| FCNR(B) | स्थिर | मध्यम | मध्यम |
| कुल NRI डिपॉजिट | 3.1% | – | 166 बिलियन USD |
NRO खातों में क्यों आ रही तेजी?
बैंक ऑफ बड़ौदा के विश्लेषण के मुताबिक, NRO खातों में बढ़ती राशि का कारण NRI लोगों द्वारा भारत में किराए, लाभांश, पेंशन या संपत्ति बेचकर कमाई गई उच्च घरेलू आय है। यह पैसा इसी खाते के जरिए जमा होता है।
इसके अलावा, NRO खातों में बढ़ती जमा राशि यह भी दर्शाती है कि विदेशी भारतीयों का भारतीय अर्थव्यवस्था की उच्च विकास संभावना पर भरोसा लगातार बढ़ रहा है। दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले भारत में निवेश को सुरक्षित और लाभदायक माना जा रहा है।
आगे क्या उम्मीद?
भविष्य की ओर देखें तो रिपोर्ट में उम्मीद जताई गई है कि RBI के ताजा FCNR(B) कदमों की बदौलत अगले पांच सालों में NRI डिपॉजिट में 8 से 10 फीसदी की विकास दर देखने को मिल सकती है।
यह भारतीय बैंकिंग सेक्टर और विदेशी मुद्रा भंडार दोनों के लिए सकारात्मक संकेत है। और बस यहीं से शुरू हो सकती है विदेशी निवेश की नई लहर।
मुख्य बातें (Key Points)
- RBI ने FCNR(B) डिपॉजिट के लिए 30 सितंबर 2026 तक हेजिंग खर्च वहन करने का फैसला किया
- NRI डिपॉजिट FY26 में 166 बिलियन डॉलर पर स्थिर, पिछले साल 165 बिलियन डॉलर था
- NRO खाते 12.1% CAGR के साथ सबसे तेजी से बढ़ रहे, कुल हिस्सेदारी 20.1% हो गई
- 2013 की तरह इस बार भी बड़ी सफलता की उम्मीद
- अगले 5 सालों में NRI डिपॉजिट में 8-10% वृद्धि संभावित













