NEET 2026 Cancelled: 12 मई 2026 की शाम देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों के लिए बड़ा झटका लेकर आई, जब NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने की खबर सामने आई। एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA)। पेपर लीक, सॉल्वर गैंग और देश की परीक्षा व्यवस्था—सब कुछ फिर उसी जगह खड़ा था जहां 2024 में था।
तारीख 12 मई 2026 की शाम अचानक देश के लाखों घरों में बेचैनी छोड़ गई। टीवी चैनलों पर लाल पट्टी दौड़ रही थी—”NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द“। मोबाइल स्क्रीन पर लगातार नोटिफिकेशन आ रहे थे। कुछ स्टूडेंट्स कोचिंग से लौट रहे थे, कुछ रिजल्ट और काउंसलिंग की तैयारी में थे और कुछ ऐसे थे जिन्होंने महीनों की मेहनत के बाद पहली बार राहत की सांस ली थी। लेकिन शाम होते-होते सब बदल गया।
देखा जाए तो देश को लगा जैसे वो फिर 2024 की कहानी में लौट आया हो। पेपर लीक, जांच, CBI, और सवालों के घेरे में NTA।
यह सिर्फ एक परीक्षा नहीं, करोड़ों सपनों का इम्तिहान है
NEET सिर्फ एक एंट्रेंस एग्जाम नहीं है। यह करोड़ों परिवारों के सपनों का इम्तिहान है। हर साल लगभग 23 लाख छात्र इस परीक्षा में बैठते हैं। कोई गांव से पढ़कर डॉक्टर बनने का सपना देखता है तो कोई मध्यमवर्गीय परिवार की उम्मीद लेकर तैयारी करता है।
यही वजह है कि जब 2024 में पहली बार बड़े स्तर पर पेपर लीक और धांधली के आरोप सामने आए थे, तो सोशल मीडिया पर छात्रों ने शक जताना शुरू कर दिया। फिर बिहार से खबर आई कि परीक्षा से पहले कुछ छात्रों को प्रश्न पत्र उपलब्ध कराया गया था।
2024 का व्यापम जैसा मामला—हजारीबाग से पेपर लीक
जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि कई राज्यों में सॉल्वर गैंग सक्रिय थे। कुछ छात्रों को होटल और लाउंज में बिठाकर प्रश्न पत्र याद कराए गए। आरोप लगा कि लाखों रुपए लेकर प्रश्न पत्र बेचा गया है।
देश भर में प्रदर्शन हुए। पहली बार आम लोगों को एहसास हुआ कि भारत की सबसे बड़ी परीक्षा व्यवस्था कितनी कमजोर हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंचा और इसकी जांच के लिए जिम्मेदारी दी गई CBI को।
23 जून 2024 को CBI ने साइंटिफिक तरीके से डिजिटल फुटप्रिंट निकालना शुरू कर दिया। तो पेपर लीक का मेन सोर्स झारखंड का हजारीबाग सामने आया। यहां के OES स्कूल को परीक्षा केंद्र बनाया गया था।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि मास्टरमाइंड ने कूरियर कंपनी से स्कूल तक पेपर ले जाने के दौरान ही सुरक्षा में सेंध लगाई थी। कूरियर के बक्सों को बड़ी ही सफाई से काटा गया, पेपर निकाला गया, उसकी फोटो खींची गई और फिर उसे वापस सील कर दिया गया—ताकि किसी को भी शक ना हो।
CBI की चार्जशीट के दौरान खुलासा हुआ कि यह गिरोह अंतर-राज्य स्तर पर काम कर रहा था। खुलासे ऐसे हुए कि पूरा देश हिल गया।
2024 में कानून बना, फिर भी 2026 में वही गड़बड़
सरकार पर दबाव बना और इसके बाद Public Examination (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 लागू किया गया। इस कानून में पेपर लीक, सॉल्वर गैंग और परीक्षा में तकनीकी छेड़छाड़ को गंभीर अपराध बनाया गया। दोषियों को 10 साल तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया।
सरकार का दावा था कि इससे परीक्षा माफिया पर लगाम लगेगी। लेकिन अब 2 साल बाद 2026 में फिर वही संकट सामने खड़ा है।
समझने वाली बात है कि अगर कानून बनाने के बाद भी वही गड़बड़ी हो रही है, तो सवाल implementation पर उठता है।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बयान: अगले साल से CBT
12 मई को पेपर लीक की बात सामने आई और तीन दिन बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा:
“CBI गहराई तक जाएगी। किसी को इस बार बख्शा नहीं जाएगा। पिछली बार भी बख्शा नहीं गया था। लेकिन इस बार…राधाकृष्ण कमेटी को पूरा लागू करने के बावजूद भी यह घटना हुई है। CBI ने तुरंत कारवाई की है और वो इसको तह तक जाएगी।”
दिलचस्प बात यह है कि शिक्षा मंत्री ने एक बड़ी घोषणा की—”अगले साल से NEET की परीक्षा Computer Based Test (CBT) से होगी।”
यानी अब पेन-पेपर मोड खत्म होगा और डिजिटल सिस्टम आएगा।
क्या CBT से पेपर लीक रुक जाएगा?
शिक्षा मंत्री का बयान आते ही एक बहस का नया दौर शुरू हो गया। सवाल उठता है कि क्या सिर्फ ऑनलाइन परीक्षा कराने से पेपर लीक रुक जाएगा?
चिंता का विषय यह है कि भारत जैसे देश में जहां लाखों छात्र छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों से परीक्षा देने आते हैं, वहां डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर भी एक बड़ी चुनौती है।
अभी तक NEET पेन-पेपर के मोड में होता रहा है। यानी प्रश्न पत्र पहले से छपकर सील बंद पैकेट में परीक्षा केंद्र तक पहुंचाए जाते हैं। जांच एजेंसियों को शक है कि सबसे ज्यादा रिस्क इसी ट्रांसपोर्ट और प्रिंटिंग चेन में होता है।
इसीलिए अब सरकार डिजिटल डिलीवरी सिस्टम पर काम कर रही है, जिसमें प्रश्न पत्र एन्क्रिप्टेड फॉर्म में सीधे सेंटर तक पहुंचेगा और परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले सिस्टम पर खुलेगा।
राजनीतिक बयानबाजी: लाखों बच्चों के साथ खिलवाड़
विपक्षी नेताओं ने सरकार पर जमकर हमला बोला। एक नेता ने कहा:
“ये लाखों बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ है। उनका कॉन्फिडेंस तोड़ा जा रहा है। और सबसे दुर्भाग्यपूर्ण क्या है पता है? दो साल पहले 2024 में भी same घटनाएं हुई थीं। CBI इंक्वायरी हुई, कुछ नतीजा नहीं निकला। जिसका मनोबल बढ़ गया, फिर इस बार किया उन्होंने।”
उन्होंने आगे कहा:
“लाखों बच्चों का भविष्य खराब होता है इससे और confidence खराब हुआ अलग। और आपको सबसे बड़ी बात क्या लगेगी—इसकी जानकारी किसी एजेंसी ने नहीं दी, बल्कि इसकी जानकारी सबसे पहले बच्चों ने सरकार के पास पहुंचाई कि हमारा पेपर लीक हो गया है।”
यह सवाल उठता है कि अगर छात्रों को ही पेपर लीक की जानकारी देनी पड़ रही है तो NTA और सुरक्षा एजेंसियां क्या कर रही हैं?
NEET का प्रश्न पत्र बनता कैसे है?
अब सवाल यह है कि जिस परीक्षा को देश की सबसे सुरक्षित परीक्षाओं में गिना जाता है, उसका पूरा सिस्टम आखिर कैसे काम करता है?
NEET का पूरा प्रोसेस NTA के कंट्रोल में होता है। यही एजेंसी पेपर तैयार करवाने से लेकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने की जिम्मेदारी संभालती है।
Step 1: सिलेबस और पैटर्न तैयार करना
सबसे पहले एग्जाम का सिलेबस और पैटर्न तैयार किया जाता है। फिर देश भर के subject experts और professors का selection किया जाता है।
Step 2: गोपनीय पैनल बनाना
Physics, Chemistry और Biology के experts का पैनल तैयार किया जाता है। इसमें देश भर के professors, senior teachers और subject experts शामिल होते हैं। उनकी पहचान बेहद गोपनीय रखी जाती है। यहां तक कि कई बार एक expert को भी नहीं पता होता कि दूसरे पैनल में कौन शामिल है।
Step 3: प्रश्न पत्र तैयार करना
Experts हजारों सवाल बनाते हैं। सभी प्रश्न Question Bank में जमा किए जाते हैं। एक Moderation Committee बैठती है जो यह जांचती है कि सवाल का स्तर क्या है, कहीं गलती तो नहीं है या फिर कोई सवाल out of syllabus तो नहीं है।
Step 4: अलग-अलग सेट बनाना
Cheating रोकने के लिए अलग-अलग सेट बनाए जाते हैं। System के जरिए random तरीके से प्रश्न चुने जाते हैं और इसके बाद final question paper बनाया जाता है।
Step 5: High Security Printing
Final प्रश्न पत्र को encrypted form में high-security printing press तक भेजा जाता है। वहां CCTV निगरानी, limited entry और multi-layer security के बीच printing होती है।
Step 6: Transport और Strong Room
Print होने के बाद question paper seal-बंद packet में रखे जाते हैं। हर packet पर center code और समय लिखा जाता है। इसके बाद यह packet मजबूत trunks में रखकर अलग-अलग राज्यों के strong room तक पहुंचाए जाते हैं।
लेकिन 2024 की जांच में एजेंसियों को शक हुआ कि सबसे ज्यादा खतरा इसी transport और handling chain में है।
भारत में परीक्षा घोटालों का इतिहास
भारत में परीक्षा घोटालों का इतिहास नया नहीं है। हर कुछ सालों में कोई ना कोई ऐसी घटना सामने आती रहती है।
2013: व्यापम घोटाला (Vyapam Scam)
सबसे बड़ा और भयावह मामला 2013 में सामने आया—मध्य प्रदेश का व्यापम घोटाला। व्यापम यानी Vyavasayik Pariksha Mandal। यह वही संस्था थी जो medical admission और सरकारी नौकरियों की परीक्षाएं कराती थी।
जांच में सामने आया कि यहां सिर्फ पेपर लीक ही नहीं बल्कि पूरा exam mafia system पर काम कर रहा था। फर्जी उम्मीदवार असली छात्रों की जगह परीक्षा दे रहे थे। Roll number set किए जा रहे थे। Sitting plan तक में हेरफेर हो रहा था।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस घोटाले से जुड़े कई लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत भी हो गई।
2016: बिहार टॉपर घोटाला
2016 में बिहार टॉपर घोटाले ने देश को हैरान कर दिया। Bihar Board परीक्षा के toppers जब TV cameras के सामने आए तो वो सामान्य सवालों के जवाब तक नहीं दे पा रहे थे। एक छात्रा ने Political Science को “Prodical Science” बता दिया।
2018: SSC CGL परीक्षा घोटाला
2018 में SSC CGL exam घोटाला सामने आया। छात्रों ने आरोप लगाया कि online परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी हुई और पेपर लीक हुआ।
2021: राजस्थान REET पेपर लीक
2021 में Rajasthan Teacher Recruitment Exam (REET) का पेपर लीक हुआ। परीक्षा से पहले ही प्रश्न पत्र viral हो गए।
2022: Railway Recruitment (RRB NTPC)
2022 में Railway भर्ती परीक्षा यानी RRB NTPC विवाद भी सुर्खियों में रहा। छात्रों ने result प्रक्रिया और परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप लगाए।
| NEET Registration & Appearance – 5 साल का आंकड़ा | Registration | Appeared |
|---|---|---|
| 2024 | 24,67,900 | 23,32,970 |
| 2023 | 20,87,462 | 20,38,596 |
| 2022 | 18,72,343 | 17,64,571 |
| 2021 | 16,47,700 | 15,44,273 |
| 2020 | 15,97,435 | 13,69,450 |
दुनिया में मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम कैसे होते हैं?
अमेरिका: MCAT
अमेरिका में Medical College Admission Test (MCAT) होता है। यह परीक्षा सिर्फ रटने की क्षमता नहीं बल्कि छात्र की analytical ability और scientific understanding जैसी logical reasoning को भी परखती है।
ब्रिटेन: UCAT और BMAT
ब्रिटेन में UCAT और BMAT जैसी परीक्षाएं होती हैं। यहां भी सिर्फ numbers के आधार पर selection नहीं होता। Interview, personality test और aptitude assessment का बड़ा role होता है।
पाकिस्तान: MDCAT
पाकिस्तान में MDCAT का exam होता है जो काफी हद तक भारत की NEET जैसा माना जाता है।
चीन: Gaokao
चीन में medical admission का रास्ता वहां की बेहद कठिन राष्ट्रीय परीक्षा Gaokao से होकर गुजरता है।
लेकिन इन सबके बीच भारत की NEET दुनिया की सबसे बड़ी medical entrance exam मानी जाती है—वजह इसका syllabus या कठिनाई नहीं, बल्कि इसमें बैठने वाले छात्रों की संख्या है।
NEET को लेकर विवाद क्यों?
एक सवाल और उठ रहा है कि आखिर हमारे देश में NEET जैसे बड़े entrance exam कराने की जरूरत क्या है? और क्यों ना 12वीं के अंकों और merit list के आधार पर सीधे medical college में दाखिला दिया जाए?
दरअसल NEET को शुरू करने के पीछे का मकसद था कि medical education में पारदर्शिता लाई जा सके। NEET से पहले भारत में medical colleges में admission का system बिखरा हुआ था।
हर state की अपनी अलग परीक्षा, private colleges का अलग entrance और AIIMS, JIPMER जैसी संस्थाओं की अपनी अलग प्रवेश प्रक्रिया थी।
इसी समस्या को खत्म करने के लिए “One Nation, One Medical Entrance” का विचार आया। पहली बार 2013 में NEET लागू करने की कोशिश हुई। बाद में Supreme Court के फैसले के बाद 2016 से पूरे देश में NEET लागू कर दिया गया।
लेकिन विडंबना देखिए—आज वही परीक्षा खुद पारदर्शिता के सवालों में घिरी हुई है।
मुख्य बातें (Key Points)
- 12 मई 2026 को NEET-UG परीक्षा रद्द होने की घोषणा
- 2024 के बाद फिर पेपर लीक, झारखंड के हजारीबाग से मुख्य सोर्स
- Public Examination Act 2024 बनने के बाद भी गड़बड़ी
- शिक्षा मंत्री ने घोषणा की—अगले साल से CBT mode में होगा NEET
- 23 लाख से ज्यादा छात्र हर साल NEET में शामिल होते हैं
- व्यापम घोटाला (2013), बिहार टॉपर घोटाला (2016), REET लीक (2021) जैसे मामले
- NTA की विफलता पर सवाल, छात्रों को ही leak की सूचना देनी पड़ी
- CBI जांच फिर शुरू, लेकिन नतीजे का इंतजार










