Monsoon Withdrawal 2026 की तैयारी अब साफ दिखने लगी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 1 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया है कि पहले हफ्ते यानी 1 से 7 अक्टूबर के दौरान मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत के ज्यादातर हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के हालात अनुकूल होने की संभावना है।
यह विज्ञप्ति पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत जारी हुई है और 1 से 14 अक्टूबर के दो हफ्तों का पूर्वानुमान देती है। इसमें जून से सितंबर तक के पूरे मानसून सीजन का लेखा-जोखा भी है, जो देश के लिए कुछ खास राहत भरा नहीं रहा।
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पूरे मानसून सीजन में कितनी बारिश हुई?
जून से सितंबर 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन में देश भर में बारिश लंबी अवधि के औसत (LPA) की 87 फीसदी रही। यानी 1 जून से 30 सितंबर तक देश में कुल बारिश औसत से 13 फीसदी कम दर्ज हुई।
इलाकों के हिसाब से देखें तो उत्तर-पश्चिम भारत में 94 फीसदी, मध्य भारत में 97 फीसदी, दक्षिणी प्रायद्वीप में 76 फीसदी और पूर्वोत्तर भारत में 74 फीसदी बारिश हुई। महीनों के हिसाब से जून में 65 फीसदी, जुलाई में 101 फीसदी, अगस्त में 84 फीसदी और सितंबर में 92 फीसदी बारिश रही।
| क्षेत्र | सीजन की असल बारिश (मिमी) | सामान्य (मिमी) | अंतर |
|---|---|---|---|
| पूर्व और पूर्वोत्तर भारत | 1017.1 | 1367.3 | -26% |
| उत्तर-पश्चिम भारत | 553.0 | 587.6 | -6% |
| मध्य भारत | 952.8 | 978.0 | -3% |
| दक्षिणी प्रायद्वीप | 542.0 | 716.2 | -24% |
| पूरा देश | 759.4 | 868.6 | -13% |
आंकड़े क्या कहते हैं?
अगर गौर करें तो पूरे सीजन में सबसे ज्यादा कमी पूर्व और पूर्वोत्तर भारत (26 फीसदी) और दक्षिणी प्रायद्वीप (24 फीसदी) में रही। मध्य भारत और उत्तर-पश्चिम भारत में कमी बहुत मामूली रही, क्रमशः 3 और 6 फीसदी। समझने वाली बात है कि पूरे देश का 13 फीसदी का घाटा असल में इन्हीं दो कमजोर इलाकों की वजह से बना है।
महीनों के आंकड़ों में सिर्फ जुलाई ही 100 फीसदी के पार गया। जून 65 फीसदी पर काफी कमजोर रहा। अगस्त के 84 फीसदी के मुकाबले सितंबर में 92 फीसदी बारिश हुई, यानी आखिरी महीने में थोड़ी बेहतर तस्वीर दिखी।
पिछले हफ्ते दो मौसमी सिस्टम ने मचाई हलचल
पिछले हफ्ते उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश के ऊपर बना डीप डिप्रेशन उत्तर-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ा। 25 सितंबर की सुबह यह कमजोर होकर डिप्रेशन के रूप में दक्षिणी आंतरिक ओडिशा और छत्तीसगढ़ के पास, नुआपाड़ा (ओडिशा) के नजदीक था। 27 सितंबर की सुबह तक यह मध्य उत्तर प्रदेश के ऊपर वेल-मार्क्ड लो प्रेशर एरिया बन गया और 28 सितंबर की सुबह तक कम असरदार हो गया।
इसकी वजह से 24 सितंबर को तटीय आंध्र प्रदेश और यानम में, 25 सितंबर को छत्तीसगढ़ और ओडिशा में, और 26-27 सितंबर को पूर्वी उत्तर प्रदेश में कुछ जगहों पर बेहद भारी बारिश दर्ज हुई। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी 26 सितंबर को ऐसी ही बारिश हुई।
दूसरा सिस्टम 28 सितंबर को उत्तरी अंडमान सागर और म्यांमार तट के पास डीप डिप्रेशन बना। यह 28 सितंबर की शाम 7:30 से 9:30 बजे के बीच क्यांइक्तो के पूर्व में म्यांमार तट पार कर गया। उस वक्त हवाओं की रफ्तार 50 से 60 किमी प्रति घंटा थी और झोंके 70 किमी प्रति घंटा तक पहुंचे। इसने थाईलैंड और दक्षिणी म्यांमार में भयंकर बाढ़ ला दी।
पहला हफ्ता (1 से 7 अक्टूबर): मानसून की वापसी और पश्चिमी विक्षोभ
पहले हफ्ते में मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत के ज्यादातर हिस्सों से मानसून लौटने के हालात बन सकते हैं। साथ ही एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करेगा।
इसके असर से केरल और माहे में 1 से 7 अक्टूबर तक काफी व्यापक से व्यापक बारिश की संभावना है। तटीय कर्नाटक में 1-2 अक्टूबर और दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक में 1 अक्टूबर को भी बारिश हो सकती है।
पूरे देश के लिए देखें तो हफ्ते में बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है।
| क्षेत्र | कब और कैसी बारिश |
|---|---|
| केरल और माहे | 1 अक्टूबर को कहीं-कहीं बहुत भारी, 4-6 अक्टूबर को कहीं-कहीं भारी |
| तटीय कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल | 1 अक्टूबर को कहीं-कहीं भारी |
| दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक | 1 और 5 अक्टूबर को कहीं-कहीं भारी |
| अरुणाचल प्रदेश | 1-2 अक्टूबर को कहीं-कहीं भारी |
| हिमाचल प्रदेश | 5-7 अक्टूबर को छिटपुट बारिश |
| हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब | 6-7 अक्टूबर को छिटपुट बारिश |
| बिहार और झारखंड | 5-7 अक्टूबर को छिटपुट बारिश |
इनके अलावा 1-7 अक्टूबर के दौरान पूर्वोत्तर के राज्यों, कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र, अंडमान-निकोबार, ओडिशा और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम में भी छिटपुट बारिश की संभावना है।
दूसरा हफ्ता (8 से 14 अक्टूबर): बंगाल की खाड़ी पर नजर
दूसरे हफ्ते में पूर्व, पूर्वोत्तर और उत्तर प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों से मानसून की वापसी के हालात अनुकूल होंगे। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि 12 अक्टूबर के आसपास उत्तरी अंडमान सागर के ऊपर ऊपरी हवाओं का चक्रवाती सर्कुलेशन बन सकता है। इसके असर से 13 अक्टूबर के आसपास अंडमान सागर में लो प्रेशर एरिया बनने की संभावना है।
हफ्ते के आखिर में, यानी 15 अक्टूबर के आसपास, दक्षिणी बंगाल की खाड़ी के मध्य हिस्से और उससे सटे मध्य बंगाल की खाड़ी में डिप्रेशन बनने की संभावना कम है। इस हफ्ते भी पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करेगा और देशभर में बारिश सामान्य से कम रह सकती है।
पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र, पूर्वोत्तर और दक्षिणी प्रायद्वीप में कुछ दिन हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। तटीय आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक और केरल में कहीं-कहीं भारी बारिश के आसार हैं।
तापमान: न लू, न गर्म रातें
पहले हफ्ते में देश के ज्यादातर हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य के आसपास रहेगा। मध्य भारत के कुछ इलाकों में कुछ दिन यह सामान्य से 1 से 3 डिग्री कम रह सकता है। दक्षिण-पश्चिम प्रायद्वीप के कुछ हिस्सों में यह 1 से 2 डिग्री ज्यादा रह सकता है।
दूसरे हफ्ते में उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ अलग-थलग हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से 1 से 3 डिग्री ज्यादा हो सकता है। पश्चिमी राजस्थान और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में यह 1 से 3 डिग्री कम रह सकता है। राहत की बात यह है कि दोनों हफ्तों में कहीं भी लू या गर्म रातों की संभावना नहीं है।
El Niño और बड़े समुद्री संकेत
मौसम विभाग के मुताबिक भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अभी मजबूत एल नीनो हालात बने हुए हैं और आने वाले महीनों में इनके और मजबूत होने की उम्मीद है। मानसून मिशन कपल्ड फोरकास्ट सिस्टम के अनुमान भी साल के आखिर तक एल नीनो के मजबूत होते रहने की ओर इशारा करते हैं।
हिंद महासागर में फिलहाल तटस्थ IOD (हिंद महासागर द्विध्रुव) की स्थिति है, जो पूर्वानुमान अवधि में जारी रहने की संभावना है। कुछ अंतरराष्ट्रीय जलवायु केंद्र मानते हैं कि मानसून सीजन के आखिर तक यह पॉजिटिव IOD में बदल सकता है।
केरल में बहुत भारी बारिश का असर और बचाव
मौसम विभाग ने 1 अक्टूबर को केरल और माहे में कहीं-कहीं बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। इसके असर में पेड़ों की टहनियां टूट सकती हैं, केले, पपीते और सहजन जैसे छोटे पेड़ उखड़ सकते हैं। तेज हवा और बारिश से बागान और खड़ी फसलों को नुकसान हो सकता है। कच्चे मकानों, दीवारों, झोपड़ियों और सड़कों को हल्का नुकसान पहुंच सकता है।
छोटे जहाज, ट्रॉलर और नावें प्रभावित हो सकती हैं। सड़क और रेल यातायात पर असर पड़ सकता है। निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसे हालात बन सकते हैं, और कुछ जगह भूस्खलन भी हो सकता है।
लोगों को सलाह है कि मौसम पर नजर रखें और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित जगहों पर जाने को तैयार रहें। पेड़ के नीचे शरण न लें, क्योंकि बिजली गिरने का खतरा रहता है। बिजली कड़कने की आशंका हो तो बिजली के उपकरण तुरंत अनप्लग करें, पानी से बाहर निकल आएं और बिजली संचालित करने वाली चीजों से दूर रहें।
किसानों के लिए क्या सलाह है?
सबसे पहले, कई राज्यों में खड़ी फसलों के खेतों से पानी की निकासी ठीक रखने की सलाह दी गई है। केरल में धान, केला, नारियल, काली मिर्च, अदरक, हल्दी और सब्जियों के खेतों में जलनिकासी सुनिश्चित करने को कहा गया है। जब तक खेत की हालत न सुधरे, सिंचाई, खाद और कीटनाशक का काम टालने की सलाह है।
तमिलनाडु में चावल, ज्वार, मक्का, उड़द और सब्जियों के खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने को कहा गया है। जहां हालात इजाजत दें, वहां पकी हुई धान की कटाई करें और कटे अनाज को सूखी जगह पर रखें।
कटी हुई उपज को सुरक्षित जगह पहुंचाने या खेत में तिरपाल से ढकने की सलाह दी गई है। पशुओं को भारी बारिश के दौरान शेड के अंदर रखें और संतुलित चारा दें। चारे को सुरक्षित जगह रखें ताकि वह खराब न हो।
आम आदमी और किसान पर क्या असर?
इस पूर्वानुमान का सीधा मतलब यह है कि उत्तर और मध्य भारत में बारिश का दौर अब थमने की ओर है, जबकि दक्षिण और पूर्वोत्तर में अभी बारिश के दिन बाकी हैं। सवाल उठता है कि जिन इलाकों में पूरे सीजन में बारिश की कमी रही, वहां के किसान अब आगे क्या करेंगे। जवाब फिलहाल मौसम विभाग के बयानों में नहीं है, लेकिन कटाई और भंडारण को लेकर दी गई सलाह साफ संकेत देती है कि अब ध्यान उपज को बचाने पर है।
केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक के तटीय इलाकों के लोगों के लिए चिंता का विषय पहले दिन यानी 1 अक्टूबर की बारिश है। पहले ही दिन भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी है।
जानें पूरा मामला
मौसम विभाग ने 1 अक्टूबर 2026 को जारी विज्ञप्ति में बताया कि 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन में देश में कुल बारिश औसत की 87 फीसदी रही। पिछले हफ्ते आंध्र प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के ऊपर बना सिस्टम अब खत्म हो चुका है। अंडमान सागर और म्यांमार तट से टकराया दूसरा सिस्टम थाईलैंड और दक्षिणी म्यांमार में बाढ़ ला चुका है। अब विभाग अगले दो हफ्तों के लिए मानसून की वापसी, पश्चिमी विक्षोभ और बंगाल की खाड़ी में संभावित हलचल का पूर्वानुमान जारी कर चुका है।
मुख्य बातें (Key Points)
- Monsoon Withdrawal 2026 के लिए पहले हफ्ते में मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत के ज्यादातर हिस्सों में हालात अनुकूल रहने की संभावना है।
- जून से सितंबर तक देश में बारिश औसत की 87 फीसदी रही, यानी 13 फीसदी कम।
- केरल और माहे में 1 अक्टूबर को कहीं-कहीं बहुत भारी बारिश की चेतावनी है।
- दोनों हफ्तों में न लू की संभावना है, न गर्म रातों की, और देशभर में बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है।










