EVM Controversy फिर से सुर्खियों में है। हर चुनाव के बाद यह बहस छिड़ जाती है कि क्या Electronic Voting Machines के साथ छेड़छाड़ हो सकती है या नहीं। और इस बार पश्चिम बंगाल के चुनाव में Mamata Banerjee ने यह मुद्दा फिर से उठाया है।
दिलचस्प बात यह है कि 2014 से पहले BJP भी कई बार EVM को लेकर सवाल उठाती रही है। लेकिन जब वे सत्ता में आए तो यह मुद्दा शांत हो गया। अब विपक्षी दल – चाहे TMC हो, Congress हो या AAP – सभी EVM को लेकर संदेह जताते हैं।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पश्चिम बंगाल का यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है। 294 सीटों पर चुनाव हुआ है। Exit polls में कुछ ने BJP को आगे बताया तो कुछ ने TMC को। 4 मई को नतीजे आने वाले हैं। और ठीक नतीजों से पहले यह controversy खड़ी हो गई है।
294 सीटों का चुनाव, Exit Polls में कन्फ्यूजन
पश्चिम बंगाल विधानसभा में कुल 294 सीटें हैं। यहां मुख्य मुकाबला TMC और BJP के बीच है।
Mamata Banerjee 2011 से लगातार मुख्यमंत्री हैं। यह लंबी incumbency है। दूसरी ओर, BJP के लिए यह “last major state” है जहां अभी तक उनकी सरकार नहीं बनी।
Exit polls आए तो पूरी तरह divided थे। कुछ ने BJP को clear majority दी। कुछ ने TMC को आगे बताया। कुछ ने hung assembly का अनुमान लगाया।
इस uncertainty के कारण ही यह चुनाव critical हो गया है। और इसी tension में EVM का मुद्दा उभर आया।
ममता बनर्जी ने क्या किया? हाथ जोड़कर अपील
चुनाव के अंतिम चरण के बाद ही ममता बनर्जी सीधे अपने party workers के सामने हाथ जोड़कर खड़ी हो गईं।
उन्होंने कहा: “Please इस इलेक्शन को बचाइए। जो EVM की tampering है, उसकी सुरक्षा आपकी जिम्मेदारी है। एक-एक चीज को आपको देखना है।”
यह अपील बहुत emotional थी। एक मुख्यमंत्री का अपने workers से हाथ जोड़कर कहना कि “चुनाव बचाओ” – यह दिखाता है कि कितनी गहरी चिंता है।
स्ट्रॉन्ग रूम में 4 घंटे का धरना
इसके बाद ममता बनर्जी सीधे strong room चली गईं जहां EVMs रखी जाती हैं।
वे वहां late night 4 घंटे से ज्यादा बैठी रहीं। यह कोई साधारण visit नहीं था – यह एक तरह का धरना था।
चूंकि TMC अभी सत्ता में है, इसलिए यह possible भी था। Security arrangements में TMC का कुछ influence तो है ही।
लेकिन समझने वाली बात यह है कि उनकी इस हरकत से जो message गया वह यह था कि उन्हें system पर भरोसा नहीं है।
TMC वर्कर्स को 24×7 चौकसी के निर्देश
ममता बनर्जी ने अपने सभी party workers को निर्देश दिया कि strong room की 24 घंटे निगरानी करनी है।
हर पल नजर रखनी है कि कहीं कोई EVM के साथ छेड़छाड़ तो नहीं कर रहा। Polling के दिन से लेकर counting day तक – हर वक्त vigilant रहना है।
यह legally valid भी है। Election Commission के guidelines के मुताबिक political parties अपने workers को strong room के बाहर तैनात कर सकते हैं।
लेकिन यहां सवाल यह है कि इतनी जोरदार अपील क्यों? क्या वाकई कोई खतरा है या फिर यह एक pre-emptive strategy है?
क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा? Counting से ठीक पहले
यह सब counting day से ठीक पहले हो रहा है। 4 मई को नतीजे आने वाले हैं।
ऐसे में यह allegations लगाना एक तरह का narrative setting है। अगर नतीजे TMC के खिलाफ गए तो वे कह सकते हैं – “देखो, हमने पहले ही बोला था कि tampering हो रही है।”
यह political strategy का हिस्सा भी हो सकता है। Results में distrust पैदा करना ताकि अगर हार हो तो उसे accept करने में आसानी हो – या फिर उसे challenge किया जा सके।
Election Commission का जवाब: कुछ नहीं हुआ
Election Commission of India ने तुरंत clarification जारी किया कि सभी आरोप निराधार हैं।
जो videos circulate हो रहे थे जिनमें postal ballots को handle किया जा रहा था – EC ने कहा कि वह routine procedure था।
EVM तो properly locked और sealed हैं। उनके साथ कोई tampering हो ही नहीं सकती।
Postal ballots अलग होते हैं – वे paper में होते हैं। उन्हें segregate करना होता है, count करना होता है। उसी का process चल रहा था।
EVM सुरक्षा व्यवस्था: Polling से पहले
अब समझते हैं कि EVM को कैसे सुरक्षित रखा जाता है।
Polling से पहले: सभी EVMs की testing होती है। यह सभी candidates के agents के सामने होती है।
Random तरीके से constituencies में से एक-एक EVM उठाई जाती है। उसमें mock voting की जाती है – हर button press करके check किया जाता है कि vote सही जगह जा रहा है या नहीं।
Total count match होना चाहिए। यह सब transparent process है।
Polling Day: वोटिंग के दिन क्या होता है
Polling day पर voters अपना vote डालते हैं। अब तो VVPAT (Voter Verifiable Paper Audit Trail) भी है।
VVPAT का मतलब है कि जब आप button press करते हैं तो एक paper slip generate होती है जिसमें आप देख सकते हैं कि किस party को vote गया।
यह slip एक sealed box में गिर जाती है। बाद में random verification के लिए इसका use होता है।
इससे transparency और बढ़ गई है।
Post-Polling: सबसे महत्वपूर्ण चरण
Polling खत्म होने के बाद:
Sealing: EVMs को proper तरीके से seal किया जाता है। Special paper seal होता है जिस पर polling agents के signatures होते हैं।
एक बार seal हो गया तो उसे बिना damage किए खोला नहीं जा सकता। अगर कोई tampering करेगा तो seal टूटेगा और पता चल जाएगा।
Transportation: EVMs को polling station से strong room तक ले जाया जाता है। यह transportation armed security escort के साथ होता है।
GPS monitored vehicles होती हैं। Real-time tracking होती है कि vehicle कहां जा रही है।
Strong Room Storage: फिर EVMs को highly secured strong room में रखा जाता है जहां counting day तक वे रहती हैं।
Strong Room की सुरक्षा कैसी होती है?
यह सबसे critical part है।
Double Lock System: Strong room में दो ताले लगते हैं। एक Election Commission का, दूसरा candidates का। Dono चाबियों के बिना room नहीं खुल सकता।
Three-Tier Security:
- Inner layer: CAPF (Central Armed Police Forces)
- Middle layer: State police
- Outer layer: Local administration
तीन परतों में security होती है। किसी को अंदर घुसना लगभग impossible है।
24×7 CCTV Surveillance: पूरे strong room की continuous video recording होती है।
Candidates इसे live देख सकते हैं अपने phones पर। एक परिंदा भी पर नहीं मार सकता।
Political Oversight: जैसा मैंने बताया, political parties अपने workers को बाहर तैनात कर सकते हैं।
यह भी एक check है। अगर कुछ गड़बड़ हो तो तुरंत पता चल जाएगा।
Postal Ballot अलग क्यों है?
ममता बनर्जी ने जो videos का हवाला दिया, वे postal ballots से related थे।
Postal ballot उन लोगों के लिए होता है जो polling day पर vote नहीं कर सकते:
- Election officials
- Security forces
- 85+ age के senior citizens (जिनके घर पर जाकर vote लिया जाता है)
- Differently-abled persons
ये paper ballots होते हैं। इन्हें handle करने का तरीका अलग है – segregate करना होता है, category-wise arrange करना होता है।
EC ने कहा कि जो दिखाया जा रहा था वह यही routine handling था। कोई tampering नहीं थी।
क्या EVM को hack किया जा सकता है?
यह सबसे बड़ा सवाल है।
Technical Design: EVM standalone machine है। इसमें कोई internet connectivity नहीं, bluetooth नहीं, WiFi नहीं।
यह किसी network से connect ही नहीं होती। तो remotely hack करना impossible है।
One-Time Programmable Chip: EVM में जो chip होती है वह one-time programmable होती है। एक बार program हो गई तो burn हो जाती है।
उसे reprogram नहीं किया जा सकता। कोई software update नहीं हो सकता।
VVPAT as Safeguard: VVPAT से paper trail भी मिलती है। Random constituencies में VVPAT slips की counting होती है। अगर mismatch हो तो पकड़ में आ जाएगा।
Physical Access Needed: अगर कोई कुछ करना भी चाहे तो उसे physically machine को access करना पड़ेगा।
लेकिन मैंने आपको बताया कि machine को कैसे handle किया जाता है। Physical access पाना लगभग impossible है।
फिर पार्टियां आरोप क्यों लगाती हैं?
कई कारण हो सकते हैं:
Pre-emptive Excuse: अगर हार की आशंका हो तो पहले से narrative set करना – “EVM में गड़बड़ी है इसलिए हारे।”
Mobilizing Supporters: अपने base को mobilize करने के लिए। बोल दो कि “system तुम्हारे खिलाफ है” तो supporters और aggressive हो जाते हैं।
Competitive Politics: चुनाव बहुत competitive हो गए हैं। हर तरीके से advantage लेने की कोशिश होती है।
Trust Deficit: Overall system में trust की कमी भी है। Polarization बढ़ा है।
Technical Misunderstanding: आम जनता को EVM, VVPAT, postal ballot – इनके बारे में ठीक से पता नहीं होता। तो confusion का फायदा उठाया जाता है।
राहुल गांधी और ममता बनर्जी का अलग रुख
दिलचस्प बात यह है कि 2024 के Lok Sabha elections में Rahul Gandhi ने बड़े पैमाने पर “vote chori” का मुद्दा उठाया था।
लेकिन उस समय ममता बनर्जी ने ज्यादा बढ़-चढ़कर support नहीं किया। उन्होंने कहा था कि हां कुछ चीजें ठीक होनी चाहिए, लेकिन उतना aggressive नहीं थीं।
अब जब खुद पश्चिम बंगाल में चुनाव है तो वे पूरी ताकत से यह मुद्दा उठा रही हैं।
यह भी political convenience दिखाता है। जब अपनी सीट पर चुनाव हो तो मुद्दा बड़ा हो जाता है।
90% से ज्यादा Voter Turnout: रिकॉर्ड भागीदारी
एक positive बात यह है कि पश्चिम बंगाल में voter turnout बहुत ज्यादा रहा। 90% से ऊपर।
यह भारतीय चुनावों के इतिहास में सबसे ज्यादा में से एक है।
इतनी बड़ी भागीदारी दिखाती है कि लोगों में लोकतंत्र के प्रति विश्वास है।
लेकिन अगर EVM पर इतने सवाल उठते रहेंगे तो यह विश्वास कमजोर हो सकता है। यह चिंताजनक है।
15 बूथों पर Re-Polling
कुछ बूथों पर गड़बड़ियां हुईं – झगड़े, violence – जिसकी वजह से 15 booths पर re-polling हो रही है।
यह standard procedure है। जहां भी कोई problem हो, वहां दोबारा voting करवाई जाती है।
यह दिखाता है कि Election Commission अपनी जिम्मेदारी ले रहा है। Transparency बनाए रखने की कोशिश है।
लोकतंत्र की परीक्षा
आखिरकार यह मुद्दा सिर्फ EVM का नहीं है। यह trust का मुद्दा है।
लोकतंत्र तभी काम करता है जब सभी पक्ष electoral process को accept करें। अगर हर बार हारने वाला पक्ष कहे कि “EVM में गड़बड़ी है” तो system का क्या भरोसा?
दूसरी ओर, system को इतना transparent बनाना चाहिए कि किसी को शक की गुंजाइश ही न रहे।
क्या हो समाधान?
कुछ सुझाव:
- VVPAT slips की 100% verification (अभी random होती है)
- और ज्यादा transparency – live streaming, public access
- Political parties को EVM की technical training
- Voter education – लोगों को समझाना कि EVM कैसे काम करती है
और सबसे जरूरी – political maturity। हार को स्वीकार करने की हिम्मत।
मुख्य बातें (Key Points)
- पश्चिम बंगाल में 294 सीटों पर चुनाव, 4 मई को नतीजे
- Mamata Banerjee ने EVM tampering का आरोप लगाया
- Strong room में 4 घंटे बैठीं, TMC workers को 24×7 vigilance के निर्देश
- Election Commission ने सभी आरोप खारिज किए
- EVM standalone machine है, internet/bluetooth नहीं
- VVPAT से paper trail भी मिलती है
- Strong room में three-tier security, 24×7 CCTV
- Political parties अपने workers तैनात कर सकते हैं (legally valid)
- यह counting day से ठीक पहले का मुद्दा है – narrative setting की strategy
- 90%+ voter turnout – record participation













