LPG Distributors Protest Delhi: देश भर के एलपीजी वितरक अब केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ खुलकर मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। LPG Distributors Association of India ने 26 अक्तूबर 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक विशाल रोष प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। वितरकों का आरोप है कि सरकारी क्षेत्र की कंपनियों की जगह निजी कंपनियों के जरिए पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन को जबरदस्ती बढ़ावा दिया जा रहा है।
देखा जाए तो यह सिर्फ वितरकों की लड़ाई नहीं है। यह उन 33 करोड़ एलपीजी उपभोक्ताओं से भी जुड़ा मामला है जिन्हें आने वाले समय में महंगी PNG की तरफ धकेला जा रहा है। और सबसे बड़ी बात – प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना पर खर्च किए गए 45,000 करोड़ रुपये बर्बाद हो सकते हैं।
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PNG कनेक्शन पर क्यों भड़के वितरक?
एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष गुरपाल सिंह मान ने चिंता जताते हुए कहा कि सरकार PNG कनेक्शन को जबरदस्ती लागू कर रही है। उन्होंने बताया कि एक PNG कनेक्शन लेने के लिए उपभोक्ताओं को 8,000 से 10,000 रुपये तक का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा।
समझने वाली बात यह है कि एलपीजी में यह खर्च नहीं है। आप फ्री में कनेक्शन ले सकते हैं और सिर्फ सिलेंडर के पैसे देते हैं। लेकिन PNG के लिए आपको पाइप लाइन बिछाने, मीटर लगाने का खर्च उठाना पड़ेगा।
दिलचस्प बात यह है कि वितरकों को डर है कि एक बार PNG का नेटवर्क फैल गया तो निजी कंपनियों की मोनोपॉली बन जाएगी। और फिर कीमतें आसमान छुएंगी। आज PNG सस्ती लग रही है, लेकिन कल जब विकल्प ही नहीं बचेगा, तो कंपनियां मनमानी करेंगी।
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उज्ज्वला योजना का 45,000 करोड़ बर्बाद?
मान ने आगे कहा कि देश भर में लगभग 33 करोड़ एलपीजी उपभोक्ता हैं। केंद्र सरकार ने हाल ही में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना पर लगभग 45,000 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इस योजना के तहत गरीब महिलाओं को फ्री में एलपीजी कनेक्शन दिए गए।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अगर अब PNG को बढ़ावा दिया गया और लोगों ने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कर दिए, तो वह 45,000 करोड़ रुपये का राष्ट्रीय निवेश बर्बाद हो जाएगा।
हैरान करने वाली बात यह भी है कि एक तरफ सरकार उज्ज्वला योजना पर हजारों करोड़ खर्च करती है, दूसरी तरफ PNG को बढ़ावा देकर उसी योजना को कमजोर कर रही है। यह कैसी नीति है?
लाखों लोग हो जाएंगे बेरोजगार
मान ने चेतावनी दी कि एलपीजी प्लांट्स, ट्रांसपोर्टेशन और वितरण प्रणाली में लगे लाखों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। खाली सिलेंडरों के ढेर लग जाएंगे और पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर बेकार हो जाएगा।
अगर गौर करें तो एलपीजी इंडस्ट्री बहुत बड़ी है:
• वितरक: देश भर में हजारों एलपीजी एजेंसियां हैं
• डिलीवरी बॉय: हर एजेंसी में कई डिलीवरी बॉय काम करते हैं
• ट्रांसपोर्टर्स: सिलेंडर ले जाने वाले ट्रक ड्राइवर और हेल्पर्स
• प्लांट वर्कर्स: बॉटलिंग प्लांट में काम करने वाले
• सप्लाई चेन: पूरी सप्लाई चेन में लगे लोग
अगर एलपीजी की जगह PNG ले लेता है, तो इन सभी की नौकरी खतरे में आ जाएगी। और यह कोई छोटी संख्या नहीं है – लाखों परिवार इस पर निर्भर हैं।
50% वितरक शहीदों और विधवाओं के परिवार से
मान ने एक बहुत महत्वपूर्ण बात बताई कि लगभग 50% एलपीजी वितरक युद्ध विधवाओं, देशभक्तों के परिवारों, अपाहिज सैनिकों और शहीदों के वारिस हैं। उन्हें ये गैस एजेंसियां उनकी कुर्बानियों के सम्मान के रूप में दी गई थीं।
यह बहुत भावुक करने वाली बात है। जिन लोगों ने देश के लिए अपनी जान दी, उनके परिवारों को रोजी-रोटी के लिए ये एजेंसियां दी गईं। और अब सरकार की इस नीति से उनकी आजीविका छिन सकती है।
देखा जाए तो यह सिर्फ व्यापार का मामला नहीं है। यह उन परिवारों के सम्मान का भी मामला है जिन्होंने देश के लिए सबकुछ कुर्बान किया।
कमीशन में कोई बढ़ोतरी नहीं
वितरकों ने एक और बड़ा मुद्दा उठाया – पिछले कई वर्षों से कमीशन में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। उन्हें उपभोक्ताओं की e-KYC करने के लिए भी कोई वित्तीय सहायता नहीं मिल रही है।
समझने वाली बात यह है कि महंगाई बढ़ी है, खर्चे बढ़े हैं, लेकिन वितरकों की कमाई वैसी की वैसी है। ऊपर से अब PNG का खतरा। वे कैसे अपना कारोबार चलाएंगे?
PNG vs LPG: क्या है फर्क?
| पहलू | LPG | PNG |
|---|---|---|
| शुरुआती खर्च | लगभग शून्य (फ्री कनेक्शन) | ₹8,000-10,000 |
| सुविधा | पोर्टेबल, कहीं भी ले जा सकते हैं | फिक्स्ड, पाइप से जुड़ा |
| उपलब्धता | पूरे देश में | सिर्फ शहरी इलाकों में |
| कंट्रोल | सरकारी PSU कंपनियां | निजी कंपनियां (ज्यादातर) |
26 अक्तूबर को दिल्ली में होगा प्रदर्शन
एसोसिएशन ने देश भर के सभी वितरकों को 26 अक्तूबर की दिल्ली रैली में बढ़-चढ़कर पहुंचने की अपील की है। जंतर-मंतर पर विशाल धरना होगा जहां वे अपनी मांगें रखेंगे।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि जंतर-मंतर दिल्ली में प्रदर्शनों का मुख्य केंद्र है। संसद के पास होने की वजह से यहां के प्रदर्शन सरकार तक सीधे पहुंचते हैं।
देखिए, अगर हजारों वितरक एक साथ जुटेंगे तो यह बहुत बड़ा प्रदर्शन होगा। सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना होगा।
आम उपभोक्ताओं पर क्या असर?
यह प्रदर्शन सीधे तौर पर 33 करोड़ एलपीजी उपभोक्ताओं से जुड़ा है। अगर वितरकों की बात में दम है और PNG की मोनोपॉली बनती है, तो आम आदमी को नुकसान होगा।
आज PNG सस्ती लग सकती है, लेकिन जब कोई विकल्प नहीं रहेगा, तो निजी कंपनियां मनमानी दरें वसूलेंगी। और एलपीजी की तरह सरकारी नियंत्रण भी नहीं होगा।
दूसरी बात, PNG हर जगह नहीं पहुंच सकती। गांवों में, दूरदराज के इलाकों में एलपीजी ही एकमात्र विकल्प है। अगर एलपीजी नेटवर्क कमजोर हुआ, तो वहां के लोग क्या करेंगे?
सरकार का क्या है तर्क?
हालांकि सरकार की तरफ से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन PNG को बढ़ावा देने के पीछे कुछ तर्क हो सकते हैं:
• पर्यावरण: PNG को ज्यादा क्लीन फ्यूल माना जाता है
• सुविधा: घर में पाइप लाइन से सीधी सप्लाई
• कीमत: फिलहाल PNG कुछ सस्ती पड़ रही है
लेकिन वितरकों का कहना है कि यह सब दिखावा है। असली मकसद निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाना है।
यह लड़ाई किसकी?
चिंता का विषय यह है कि यह लड़ाई सिर्फ वितरकों की नहीं है। यह उन शहीदों के परिवारों की है जिन्हें सम्मान के साथ ये एजेंसियां मिली थीं। यह उन लाखों कर्मचारियों की है जो एलपीजी इंडस्ट्री में काम करते हैं। और यह उन 33 करोड़ उपभोक्ताओं की है जो आसानी से मिलने वाली एलपीजी पर निर्भर हैं।
26 अक्तूबर को जंतर-मंतर पर जो प्रदर्शन होगा, वह इन सभी की आवाज होगा। देखना यह है कि सरकार इसे कैसे लेती है।
मुख्य बातें (Key Points)
• LPG वितरक एसोसिएशन ने 26 अक्तूबर 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर विशाल प्रदर्शन का ऐलान किया
• PNG कनेक्शन लेने में ₹8,000-10,000 का अतिरिक्त खर्च, निजी कंपनियों की मोनोपॉली का खतरा
• उज्ज्वला योजना के 45,000 करोड़ रुपये बर्बाद होने और लाखों लोगों के बेरोजगार होने की चेतावनी
• 50% वितरक शहीदों, विधवाओं और अपाहिज सैनिकों के परिवार से हैं
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