पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की पत्नी का हुआ देहांत, 17 साल लड़ी राम रहीम के ख़िलाफ़ क़ानूनी..

The News Air- पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की पत्नी कुलवंत कौर नहीं रहीं। गुरुवार रात को सिरसा में बुधवार रात क़रीब एक बजे हार्ट अटैक से का 85 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। सिरसा में ही वीरवार दोपहर उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। डेरा मुखी राम रहीम के इशारे पर डेरे के तीन अनुयायियों ने उनके पति की गोली मारकर हत्या की थी। कुलवंत कौर ने पति की हत्या के बाद अपने चारों बच्चों का पालन पोषण किया और 17 साल लंबी क़ानूनी लड़ाई लड़ी। तब बड़ा बेटा अंशुल महज़ 14 साल का था।

परिवार का रिश्तेदारों ने साथ छोड़ दिया। वे कहते थे कि कुछ नहीं होना, डेरा मुखी के पास नोटों की पेटियां हैं। 11 जनवरी 2019 को जब छत्रपति की हत्या के आरोप में डेरा मुखी को दोषी ठहराया गया तो कुलवंत कौर ने भावुक होकर अपने संघर्ष की कहानी सुनाते हुए कहा था कि रिश्तेदार कहते थे कि डेरा मुखी का कुछ नहीं होगा तो यह सुनकर दल टूट जाता था। परंतु उसने बेटे अंशुल के साथ मिलकर लंबी लड़ाई लड़ी और डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को सलाख़ों के पीछे पहुंचाया।

परिवार को हर दिन मिलती थी धमकी

राम रहीम और उसके साथियों को सीबीआई की अदालत ने 11 जनवरी 2019 को दोषी ठहराया था। 17 जनवरी 2018 को उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई थी। उस दिन छत्रपति के घर में जश्न जैसा माहौल था। तब कुलवंत कौर ने कहा था कि आज उसके संघर्ष की लड़ाई पूरी हुई। जो दर्द मैंने और मेरे बच्चों ने झेला, मैं बता नहीं सकती। क्या कुछ नहीं सहा हमने। पति रामचंद्र छत्रपति जब डेरे के ख़िलाफ़ ख़बरें छाप रहे थे तो मेरे टोकने पर कहते थे कि मैं अपना कफ़न साथ बांधकर रखता हूं।

पति की हत्या के बाद परिवार को हर दिन धमकी मिलती थी। कुलवंत कौर ने क़ानूनी लड़ाई जीतने का हीरो अपनी बेटे अंशुल को बताया था। परंतु अंशुल ने इसका श्रेय अपनी मां कुलवंत कौर के संघर्ष को दिया था। कुलवंत कौर ने कहा कि जब पहली बार साध्वी यौन शोषण में राम रहीम को सज़ा हुई तो महसूस हुआ कि वे सही काम करके गए थे। पति की हत्या के बाद उन्होंने अपने बेटे और बेटियों की शादी की, लेकिन ख़ुशी से नहीं।

पूरा सच अख़बार निकालते थे छत्रपति

डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह के ख़िलाफ़ ख़बरें छापने वाले पत्रकार छत्रपति पूरा सच अख़बार निकालते थे। साध्वी यौन शोषण की ख़बरें छापने पर ही डेरा अनुयायियों ने राम रहीम के इशारे पर पत्रकार की घर जाकर 24 अक्टूबर 2002 को गोलियां मारकर उसकी हत्या कर दी थी। उस दिन करवा चौथ था। इस मामले में डेरा प्रबंधक कृष्ण लाल, कुलदीप, निर्मल सिंह को भी उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई है।

Leave a Comment