Jantar Mantar Protest में बुधवार को राजधानी दिल्ली का सियासी पारा चरम पर पहुंच गया। इंडिया (INDIA) गठबंधन के लगभग 300 सांसदों ने कथित ‘वोट चोरी’ और मुख्य चुनाव आयुक्त ग्यानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर धरना दिया। यह फैसला मंगलवार को संसद से चुनाव आयोग मुख्यालय तक हुए विपक्षी मार्च, दिल्ली पुलिस से तीखी झड़प और राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई वरिष्ठ नेताओं की हिरासत के ठीक एक दिन बाद लिया गया।
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‘सागर रत्ना से जंतर-मंतर तक: कैसे बनी रणनीति’
देखा जाए तो इस पूरे प्रदर्शन की रणनीति जनपथ स्थित ‘सागर रत्ना’ रेस्तरां में तैयार हुई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्षी सांसदों को दोपहर के खाने पर बुलाया और अगली रणनीति पर चर्चा की। बैठक खत्म होते ही सांसद बसों में सवार होकर एक किलोमीटर दूर जंतर-मंतर के लिए रवाना हो गए।
और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी। मध्य दिल्ली में सुरक्षा इतनी कड़ी थी कि विपक्ष को कहीं और धरने की इजाजत नहीं मिली। ऐसे में संवैधानिक रूप से निर्धारित प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर ही एकमात्र विकल्प बचा।
’45 FIR मेरे लिए मेडल हैं: 100 कर दो’
अगर गौर करें तो राहुल गांधी का बयान इस पूरे प्रदर्शन का सबसे चर्चित हिस्सा रहा। जब पत्रकारों ने मंगलवार की झड़प के बाद दर्ज FIR के बारे में पूछा, तो राहुल ने बेफिक्र अंदाज में जवाब दिया कि उन पर पहले से ही 45 मामले दर्ज हैं और वह चाहते हैं कि यह संख्या 100 तक पहुंच जाए।
उन्होंने हर FIR को अपने लिए एक ‘मेडल’ करार दिया। यह बयान जहां विपक्षी खेमे में जोश भरने वाला था, वहीं सत्ता पक्ष के लिए एक सीधी चुनौती भी। राहुल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और मुख्य चुनाव आयुक्त ने मिलकर देश के लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाया है।
‘पुलिस बनाम संविधान: धारा 19 की जंग’
दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सीधे तौर पर अमित शाह के अधीन आने वाली दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाया कि वह राजधानी में कहीं भी प्रदर्शन की इजाजत नहीं दे रही है। उन्होंने संविधान की धारा 19 का हवाला देते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।
वहीं कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने बताया कि उनका नाम भी FIR में शामिल किया गया है, लेकिन विपक्षी नेता डरने वालों में से नहीं हैं। ‘लोकतंत्र और संविधान बचाओ’ मुहिम जारी रहेगी।
‘मंगलवार का हंगामा: संसद से आकाशवाणी भवन तक’
समझने वाली बात यह है कि बुधवार का यह धरना मंगलवार की हंगामेदार घटनाओं की सीधी प्रतिक्रिया था। मंगलवार को विपक्षी सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च निकाला था, लेकिन सुरक्षा बलों ने उन्हें बीच रास्ते में ही रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शन का केंद्र आकाशवाणी भवन के बाहर शिफ्ट हो गया, जहां राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य वरिष्ठ नेता लंबे समय तक धरने पर बैठे रहे। बाद में दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
‘इस टकराव का लोकतांत्रिक मतलब’
इस पूरे घटनाक्रम को अगर गहराई से देखा जाए तो यह सिर्फ एक दिन का प्रदर्शन नहीं है। यह भारतीय लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका, चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर एक बड़ी बहस का हिस्सा है। विपक्ष का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया में धांधली हो रही है, जबकि सत्ता पक्ष इसे राजनीतिक ड्रामा करार देता है। आने वाले दिनों में यह लड़ाई और तेज होने के पूरे आसार हैं।
‘जानें पूरा मामला’
INDIA गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ग्यानेश कुमार के इस्तीफे और कथित ‘वोट चोरी’ की जांच की मांग को लेकर दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन किया। मंगलवार को पुलिस से झड़प और नेताओं की हिरासत के बाद बुधवार को 300 सांसद जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- INDIA गठबंधन के 300 सांसदों ने जंतर-मंतर पर ‘वोट चोरी’ के खिलाफ धरना दिया।
- राहुल गांधी ने कहा कि 45 FIR उनके लिए मेडल हैं, 100 कर दो।
- CEC ग्यानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई गई।
- मंगलवार को संसद से चुनाव आयोग मार्च में पुलिस से झड़प हुई, राहुल-प्रियंका हिरासत में लिए गए।
- पवन खेड़ा ने धारा 19 का हवाला देते हुए दिल्ली पुलिस पर प्रदर्शन रोकने का आरोप लगाया।













