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The News Air - Breaking News - Jagtar Singh Hawara: चौंकाने वाला मोड़, 3 महीने टली सुनवाई

Jagtar Singh Hawara: चौंकाने वाला मोड़, 3 महीने टली सुनवाई

मां से मिलने के लिए पंजाब की जेल में शिफ्ट होने की मांग पर चुनाव बाद सुनवाई होगी।

The News Air Team by The News Air Team
मंगलवार, 3 नवम्बर 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, पंजाब
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Jagtar Singh Hawara
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Jagtar Singh Hawara फिलहाल दिल्ली की तिहाड़ जेल से पंजाब की किसी जेल में शिफ्ट नहीं होगा। 3 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने उसकी याचिका पर सुनवाई 3 महीने के लिए टाल दी। यह फैसला इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की रिपोर्ट देखने के बाद लिया गया, जिसमें पंजाब के आगामी विधानसभा चुनावों पर असर की आशंका जताई गई है।

हवारा पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में सजा काट रहा है। उसने याचिका इसलिए लगाई है ताकि वह अपनी बुजुर्ग मां से मिल सके। मां की उम्र 90 साल से ज्यादा और हालत गंभीर बताई गई है।

सुनवाई जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने की। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने खुद IB से पूछा था कि Jagtar Singh Hawara को शिफ्ट करने पर क्या असर पड़ सकता है। इस बार वही रिपोर्ट अदालत के सामने रखी गई।

🔍 यह भी पढ़ें- Punjab Target Killing Case में बड़ा ट्विस्ट, NIA का खुलासा- एक गवाह की मौत, दूसरा विदेश!

Jagtar Singh Hawara के ट्रांसफर पर सरकार की दलील

दिल्ली सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने IB की रिपोर्ट का हवाला दिया। उन्होंने कानून-व्यवस्था और पंजाब के आने वाले चुनावों पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई। साथ ही पंजाब सरकार के हलफनामे का जिक्र किया, जिसमें कहा गया है कि हवारा को शिफ्ट करने से राज्य की कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

भाटी की दलील का एक बड़ा हिस्सा हवारा के पुराने रिकॉर्ड पर था। उन्होंने कहा कि वह पहले जेल से फरार होने की घटना में शामिल रहा है। बेअंत सिंह हत्याकांड में उसे सुनाई गई फांसी की सजा बाद में उम्रकैद में बदल दी गई थी। चंडीगढ़ की जेल में सुरंग खोदने के मामले में भी वह दोषी ठहराया जा चुका है।

देखा जाए तो सरकार का तर्क सीधा है। पंजाब की जेल में शिफ्ट करने से फरार होने की संभावना बढ़ सकती है। भाटी ने केंद्रीय गृह मंत्रालय की उस एडवाइजरी का भी हवाला दिया, जिसमें हाई रिस्क कैदियों को एक जेल से दूसरी जेल में भेजने के दिशा-निर्देश हैं।

एस. मुरलीधर का सवाल: क्या तिहाड़ वाकई सबसे सुरक्षित है?

हवारा की ओर से सीनियर एडवोकेट एस. मुरलीधर ने इस दलील पर आपत्ति जताई कि हाई-सिक्योरिटी कैदियों के लिए तिहाड़ ज्यादा सुरक्षित है। उन्होंने कम से कम इतनी मांग रखी कि हवारा को अपनी मां से मिलने दिया जाए।

मुरलीधर ने अदालत में कहा, “उनकी मां 90 वर्ष से अधिक उम्र की हैं। यदि जेल में मुलाकात की अनुमति दी जा सकती है, तो मैंने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में पैरोल के लिए आवेदन किया है, जो अभी लंबित है। यह नहीं कहा जा सकता कि तिहाड़ जेल पंजाब की किसी अन्य जेल से अधिक सुरक्षित है। गृह मंत्रालय ऐसा नहीं कह सकता।”

दोनों पक्षों की बात एक नजर में:

मुद्दासरकार की ओर सेहवारा की ओर से
शिफ्ट करने का असरकानून-व्यवस्था और चुनाव पर असर की आशंकामां से मिलने की अनुमति कम से कम दी जाए
सुरक्षा का सवालपंजाब की जेल में फरार होने की संभावना बढ़ सकती हैतिहाड़ को पंजाब की जेल से ज्यादा सुरक्षित नहीं कहा जा सकता
पुराना रिकॉर्डजेल से फरार होने की घटना और सुरंग खोदने के मामले में दोषीइस पर अलग से दलील नहीं रखी गई
दूसरा रास्तागृह मंत्रालय की हाई रिस्क कैदियों वाली एडवाइजरीहाई कोर्ट में पैरोल की अर्जी लंबित
जस्टिस सुंदरेश की टिप्पणी और सुनवाई टलने की वजह

जस्टिस सुंदरेश ने साफ कहा कि आमतौर पर अदालत को जेल में मुलाकात की अनुमति देने में कोई आपत्ति नहीं होती। लेकिन इस बार IB की रिपोर्ट बेहद गंभीर है। उनके मुताबिक मौजूदा हालात में ऐसा कोई आदेश आगामी चुनावों में उथल-पुथल पैदा कर सकता है।

इसके बाद मुरलीधर ने एक सुझाव दिया। अगर चिंता चुनावों की है, तो मामले को चुनाव खत्म होने के बाद सुना जा सकता है। अदालत ने यह सुझाव मान लिया और सुनवाई 3 महीने बाद के लिए स्थगित कर दी।

दिलचस्प बात यह है कि याचिकाकर्ता की तरफ से ही यह रास्ता सुझाया गया। इसका मतलब है कि बहस मां से मिलने की जरूरत बनाम चुनावी माहौल की चिंता के बीच फंसी थी, और अदालत ने समय को ही समाधान चुना।

आगे क्या? Jagtar Singh Hawara, चुनाव और एक मां का इंतजार

इससे साफ होता है कि अदालत ने इस बार मामले के गुण-दोष पर फैसला नहीं दिया। उसने सिर्फ वक्त के हिसाब से सुनवाई आगे खिसकाई है। यानी अगले कुछ महीनों तक Jagtar Singh Hawara की स्थिति जस की तस रह सकती है। वह तिहाड़ में ही रहेगा, और पंजाब की जेल वाली मांग पर सुनवाई 3 महीने बाद होगी।

एक अहम फर्क भी दिखता है। पिछली बार अदालत सिर्फ जानकारी मांग रही थी। इस बार केंद्रीय एजेंसी की रिपोर्ट सामने आई और उसी ने सुनवाई की दिशा तय कर दी। यह दर्शाता है कि संवेदनशील कैदियों के मामलों में सुरक्षा एजेंसियों की राय का वजन काफी बड़ा है।

इन अगले महीनों में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में लंबित पैरोल की अर्जी पर नजर रहेगी। यह अलग रास्ता है, जिसका जिक्र मुरलीधर ने किया। सवाल उठता है कि क्या वहां से कोई राहत मिल पाएगी? ट्रांसक्रिप्ट में इसका कोई संकेत नहीं है।

आम आदमी के नजरिए से देखें तो यह एक परिवार का इंतजार है। 90 साल से ऊपर की बीमार मां अपने बेटे से मिलना चाहती हैं, और अब उन्हें कम से कम 3 महीने और रुकना होगा। चिंता का विषय यही है कि मां की हालत गंभीर बताई गई है, जबकि फैसला चुनावी माहौल को देखकर टला।

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क्या है पृष्ठभूमि

जगतार सिंह हवारा को 1995 के बेअंत सिंह हत्याकांड में दोषी ठहराया गया था। उसे पहले फांसी की सजा सुनाई गई थी, जो बाद में उम्रकैद में बदल दी गई। सरकार की ओर से अदालत में बताया गया कि वह पहले जेल से फरार होने की घटना में शामिल रहा है और चंडीगढ़ की जेल में सुरंग खोदने के मामले में भी दोषी ठहराया जा चुका है। हवारा अभी तिहाड़ जेल में है और पंजाब की जेल में शिफ्ट होने की मांग कर रहा है, जिस पर पंजाब सरकार पहले ही कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता जता चुकी है।

मुख्य बातें (Key Points)
  • सुप्रीम कोर्ट ने Jagtar Singh Hawara की याचिका पर सुनवाई 3 महीने के लिए टाली।
  • फैसला IB की रिपोर्ट देखने के बाद लिया गया, जिसमें पंजाब चुनावों पर असर की आशंका है।
  • हवारा की मांग है कि उसे पंजाब की जेल में भेजा जाए, ताकि वह 90 साल से ज्यादा उम्र की बीमार मां से मिल सके।
  • हवारा के वकील का सुझाव था कि मामला चुनाव खत्म होने के बाद सुना जाए, जिसे अदालत ने मान लिया।
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. Jagtar Singh Hawara को पंजाब की जेल में शिफ्ट क्यों नहीं किया गया?

सुप्रीम कोर्ट ने IB की रिपोर्ट देखी, जिसमें शिफ्ट करने से पंजाब के आगामी विधानसभा चुनावों पर असर की आशंका जताई गई है। सरकार ने कानून-व्यवस्था और फरार होने की संभावना को लेकर भी चिंता रखी। इसी वजह से याचिका पर सुनवाई फिलहाल टाल दी गई।

Q2. सुप्रीम कोर्ट ने हवारा की याचिका पर सुनवाई कब तक टाली है?

अदालत ने सुनवाई 3 महीने के लिए स्थगित की है। हवारा के वकील ने सुझाव दिया था कि मामला चुनाव खत्म होने के बाद सुना जाए, जिसे कोर्ट ने स्वीकार किया।

Q3. Jagtar Singh Hawara पंजाब की जेल में क्यों जाना चाहता है?

उसकी याचिका के मुताबिक वह अपनी बुजुर्ग मां से मिलना चाहता है। उसकी मां की उम्र 90 साल से ज्यादा है और हालत गंभीर बताई गई है।

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