Punjab Target Killing Case: पंजाब (Punjab) में हुई टारगेट किलिंग के मामलों की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट (Patiala House Court) में एक अहम जानकारी दी है। ब्रिटिश नागरिक जगतार सिंह जोहल (Jagtar Singh Johal) , उर्फ जग्गी जोहल से जुड़े दो संरक्षित गवाहों (प्रोटेक्टेड गवाह) में से एक की मौत हो चुकी है, जबकि दूसरा गवाह विदेश में रहता है। यह जानकारी NIA अधिकारी ने अदालत में पेश होकर दी।
इस मामले में वकील जसपाल सिंह मझपुर (Jaspal Singh Majhpur) ने अदालत से मांग की थी कि जगतार सिंह जोहल से जुड़े प्रोटेक्टेड गवाहों के बयान दर्ज किए जाएं। इस पर NIA अधिकारी ने बताया कि दो गवाहों में से एक की मौत हो चुकी है और दूसरा विदेश में रहता है। अदालत ने NIA को निर्देश दिया है कि अगली पेशी पर बताया जाए कि विदेश में रह रहे गवाह का बयान किस तरह दर्ज किया जाएगा।
12 तारीखें पड़ीं, छह गवाहों के बयान दर्ज
वकील जसपाल सिंह मझपुर के अनुसार, टारगेट किलिंग मामलों में हरदीप सिंह शेरा, रमनदीप सिंह और जगतार सिंह जोहल समेत कई आरोपियों के खिलाफ पटियाला हाउस कोर्ट में केस चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने 11 दिसंबर 2025 को ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया था कि इन मामलों की सुनवाई दिन-प्रतिदिन (डे-टू-डे) की जाए और प्रोटेक्टेड गवाहों के बयान दर्ज किए जाएं। इसके बाद अब तक कुल 12 तारीखें पड़ चुकी हैं, जिनमें छह प्रोटेक्टेड गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं।
क्या है पंजाब टारगेट किलिंग मामला?
पंजाब में टारगेटेड किलिंग की ये घटनाएं मुख्य रूप से 2016-2017 के दौरान हुई थीं। इनमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) , शिव सेना (Shiv Sena) और अन्य धार्मिक संगठनों से जुड़े लोगों को निशाना बनाया गया था। इन हमलों में कुल 9 लोगों की मौत हुई थी। ज्यादातर मामलों में हमलावर मोटरसाइकिल पर सवार होकर फायरिंग करते थे। अधिकारियों के अनुसार, ये हमले खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (KLF) से जुड़े बताए गए, जिसे भारत में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है, और इस पर पाकिस्तान की आईएसआई से फंडिंग मिलने के आरोप भी लगे हैं।
कौन है जगतार सिंह जोहल (जग्गी जोहल)?
जगतार सिंह जोहल एक ब्रिटिश सिख हैं, जिन्हें नवंबर 2017 में पंजाब में गिरफ्तार किया गया था। उन पर 2016-2017 की इन टारगेटेड किलिंग्स में शामिल होने के आरोप हैं, खासतौर पर ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) जगदीश गगनेजा, RSS नेता रविंदर गोसाईं और पादरी सुल्तान मसीह की हत्या के मामलों में। उन पर केएलएफ को फंडिंग देने का भी आरोप है, जिसमें 2013 में पेरिस में £3,000 देने और 2016-2017 के हमलों के लिए हथियार खरीदने के आरोप शामिल हैं।
जोहल की गिरफ्तारी पर क्या बोली थी यूनाइटेड नेशन?
NIA इन सभी मामलों की जांच कर रही है। कुल 11 मामलों में से एक में उन्हें डिस्चार्ज किया जा चुका है, तीन में जमानत मिली है, और 4 मार्च 2025 को मोगा जिला अदालत ने एक मामले (साजिश और आतंकवादी गिरोह की सदस्यता) में उन्हें बरी कर दिया था। हालांकि, आठ अन्य आतंकवाद से जुड़े मामले अभी भी लंबित हैं, जिनकी सुनवाई दिल्ली की अदालत में चल रही है। जोहल 2017 से हिरासत में हैं, और 2022 में संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के एक पैनल ने उनकी हिरासत को “मनमाना” (अर्बिट्रेरी) बताया था।
विश्लेषण: NIA की मुश्किलें बढ़ीं?
टारगेट किलिंग केस में दो महत्वपूर्ण संरक्षित गवाहों में से एक की मौत और दूसरे के विदेश चले जाने से NIA की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने तेजी से सुनवाई के आदेश दिए हैं, लेकिन गवाहों के उपलब्ध न होने से केस कमजोर हो सकता है। अदालत ने अब NIA से यह स्पष्ट करने को कहा है कि विदेश में रह रहे गवाह का बयान कैसे दर्ज किया जाएगा। इससे साफ है कि अदालत इस मामले को गंभीरता से ले रही है और सुनवाई को आगे बढ़ाना चाहती है। आरोपी जग्गी जोहल की ओर से भी लगातार यह दावा किया जाता रहा है कि वह निर्दोष है और उसे फंसाया गया है। अब देखना यह होगा कि अदालत इस नए घटनाक्रम के बीच कैसा रुख अपनाती है।
मुख्य बातें (Key Points)
पंजाब टारगेट किलिंग केस में अहम गवाहों में से एक की मौत, दूसरा विदेश में रहता है।
दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई के दौरान NIA ने यह जानकारी दी।
यह केस 2016-17 में RSS और शिवसेना नेताओं की हत्या से जुड़ा है।
ब्रिटिश नागरिक जगतार सिंह जोहल (Jagtar Singh Johal) समेत कई आरोपी हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने डे-टू-डे सुनवाई के आदेश दिए हैं, अब तक 12 तारीखों में 6 गवाहों के बयान दर्ज।













