India Sugar Shortage Australia Import की चर्चा इस बार त्योहारी सीजन से पहले तेज हो गई है। भारत में खंड (चीनी) की बढ़ रही मांग और त्योहारी सीजन में पैदा हुई कमी को ऑस्ट्रेलिया आसानी से पूरा करने की समर्था रखता है।
सबसे बड़ी बात कीमत की है। ऑस्ट्रेलियन खंड भारत को प्रति क्विंटल करीब 3500 रुपये से भी कम कीमत में मिल सकती है।
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‘भारत बेचता रहा, अब दबाव क्यों’
ऑस्ट्रेलिया में भारतीय खुराकी वस्तुओं के कारोबारी वरुण गुप्ता के मुताबिक भारत खुद भी लंबे समय से दूसरे देशों को खंड बेचता रहा है।
मगर तस्वीर बदल गई। त्योहारों और घरेलू मांग बढ़ने के कारण अब सप्लाई पर दबाव बन गया है।
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‘ऑस्ट्रेलिया का निर्यात गणित एक नजर में’
| बिंदु | ब्योरा |
|---|---|
| संभावित कीमत | भारत को प्रति क्विंटल करीब 3500 रुपये से भी कम |
| ऑस्ट्रेलिया का निर्यात | कुल खंड पैदावार का लगभग 85 फीसदी |
| मुख्य बाजार | दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया, जपान, मलेशिया |
| भारत के लिए फायदा | नजदीकी और बड़ी समर्था वाला विकल्प |
अगर गौर करें, तो 85 फीसदी निर्यात वाला देश भारत जैसे बड़े बाजार के लिए तैयार सप्लाई-चेन जैसा है।
‘समझौते में चीनी शामिल नहीं: यही सबसे बड़ा पेच’
हालांकि दिसंबर 2022 में लागू हुए भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते में खंड को मुक्त व्यापार की सूची में शामिल नहीं किया गया था।
इसका मतलब है कि संभावना मौजूद है, मगर रास्ता अभी खुला नहीं है।
‘अब बातचीत किस दिशा में’
अब दोनों देश समझौते को और वस्तुओं तक बढ़ाने के बारे में विचार कर रहे हैं। यहीं से असली मोलभाव शुरू होता है।
भारत ने डेयरी, दूध, पनीर, दही, खंड, मसाले, खाने वाले तेल, प्याज और रबड़ समेत कई उत्पादों को ‘संवेदनशील’ माना है। इसका मतलब है कि इन वस्तुओं पर ऑस्ट्रेलिया को बड़ी टैरिफ रियायत देने के लिए भारत अभी तैयार नहीं।
‘आम आदमी की रसोई पर असर’
समझने वाली बात है कि यह पूरी बहस सिर्फ व्यापार की भाषा में नहीं समझी जा सकती। चीनी की कीमत सीधे मिठाई, चाय और त्योहारों के बजट से जुड़ी है।
इससे साफ होता है कि अगर आयात का रास्ता खुले तो कीमतों पर राहत की गुंजाइश बनती है : मगर ‘संवेदनशील’ सूची में शामिल होने के कारण यह फैसला घरेलू किसानों और उत्पादकों के हितों को देखकर ही होगा।
‘जानें पूरा मामला’
भारत में त्योहारी सीजन के दौरान चीनी की मांग बढ़ने से सप्लाई पर दबाव बना है। ऑस्ट्रेलिया अपनी कुल पैदावार का करीब 85 फीसदी दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया, जपान और मलेशिया जैसे बाजारों को निर्यात करता है, इसलिए वह भारत के लिए नजदीकी विकल्प बन सकता है। लेकिन दिसंबर 2022 में लागू भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते में खंड मुक्त व्यापार सूची में शामिल नहीं था, और भारत ने चीनी को ‘संवेदनशील’ वस्तुओं में रखा है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- ऑस्ट्रेलियन खंड भारत को प्रति क्विंटल करीब 3500 रुपये से भी कम में मिल सकती है।
- ऑस्ट्रेलिया अपनी कुल खंड पैदावार का लगभग 85 फीसदी निर्यात करता है।
- दिसंबर 2022 के भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापार समझौते में खंड शामिल नहीं थी।
- भारत ने खंड समेत डेयरी, मसाले, खाने वाले तेल, प्याज और रबड़ को ‘संवेदनशील’ माना है।











