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The News Air - NEWS-TICKER - FSSAI Action on Food Brands: No Added Sugar और 100% Natural दावों पर 12 कंपनियों को नोटिस

FSSAI Action on Food Brands: No Added Sugar और 100% Natural दावों पर 12 कंपनियों को नोटिस

भारतीय खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण ने बड़े ब्रांड्स को भेजा कारण बताओ नोटिस, किंडरजॉय, सफोला, मास्टर चाऊ समेत कई उत्पाद जांच के दायरे में

Ajay Kumar by Ajay Kumar
सोमवार, 22 जून 2026
in NEWS-TICKER, Breaking News, हेल्थ
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FSSAI Action on Food Brands
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FSSAI Action on Food Brands : क्या आप भी पैकेट पर लिखा “No Added Sugar” देखकर बिना सोचे खरीद लेते हैं? क्या “100% Natural” लिखा होने का मतलब सच में पूरी तरह प्राकृतिक होता है? और क्या बच्चों की पसंदीदा चीजें भी भ्रामक दावों के साथ बेची जा रही हैं? अगर इन सब सवालों का आपका जवाब हां है तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। क्योंकि देश की खाद्य सुरक्षा संस्था FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) ने कई बड़े फूड ब्रांड्स को नोटिस भेजकर ऐसे दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं जिन पर करोड़ों लोग आंख बंद करके भरोसा करते हैं।

देखा जाए तो यह सिर्फ एक नियामक कार्रवाई नहीं बल्कि उपभोक्ता जागरूकता का एक बड़ा कदम है। आखिर हम जो खा रहे हैं, क्या वाकई वैसा ही है जैसा पैकेट पर लिखा है? या फिर कंपनियां सिर्फ बिक्री बढ़ाने के लिए भ्रामक दावे कर रही हैं?

🔍 यह भी पढ़ें- Strong Bones के लिए 5 Foods और 5 Silent Killers: Expert Doctor ने बताया हड्डियों का सच

FSSAI ने किन ब्रांड्स को नोटिस भेजा?

FSSAI Action on Food Brands के तहत भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने एक दर्जन से ज्यादा फूड ब्रांड्स को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नियामक संस्था का कहना है कि कई कंपनियां अपने उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए ऐसे दावे कर रही हैं जो वास्तविक तथ्यों और वैज्ञानिक प्रमाणों से मेल नहीं खाते हैं।

जांच के दायरे में आए प्रमुख ब्रांड्स:

  • Parle Platina Hide & Seek
  • Bellamy’s Natural Paneer
  • Master Chow Noodles
  • Saffola Cooking Oil
  • Ferrero Kinder Joy
  • Amul Cheese
  • Mountain Chef Products
  • NPro Gold Powder (Vanilla)
  • Korean Red Ginseng Supplement
  • Dendron Nexus Industries (Alkaline Nutrient Water)
  • Rasna Alphonso Mango Fruit Drink

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि ये सभी बड़े और भरोसेमंद माने जाने वाले ब्रांड्स हैं। करोड़ों भारतीय परिवार इन उत्पादों का रोज इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में अगर इनके दावे झूठे या भ्रामक निकलते हैं तो यह उपभोक्ता के स्वास्थ्य और अधिकारों के साथ खिलवाड़ है।

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No Added Sugar: गन्ने के रस का खेल

FSSAI Action on Food Brands में सबसे चौंकाने वाला मामला एक मैंगो जूस का है। जांच के दौरान एक उत्पाद पर बड़े अक्षरों में “No Added Sugar” लिखा मिला। लेकिन जब उसके अंदर मौजूद सामग्री की जांच की गई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

उत्पाद में 51% आम का गूदा और 49% गन्ने का रस था। अब समझने वाली बात यह है कि गन्ने का रस खुद सुक्रोज यानी चीनी का बड़ा स्रोत है। ऐसे में उत्पाद को “No Added Sugar” बताना ग्राहकों को भ्रमित करने जैसा है। FSSAI का कहना है कि इसे No Added Sugar कहना उपभोक्ताओं को सीधे तौर पर गुमराह करना है।

दिलचस्प बात यह है कि कंपनियां तकनीकी रूप से सही हो सकती हैं—उन्होंने “अलग से” चीनी नहीं डाली। लेकिन गन्ने के रस के जरिए भारी मात्रा में शुगर मिला दिया। यह एक चालाकी भरा तरीका है जिससे उपभोक्ता को लगता है कि यह स्वास्थ्यवर्धक है जबकि वास्तव में उतना ही या उससे ज्यादा चीनी है जितनी साधारण जूस में होती।

🔍 यह भी पढ़ें- Fridge Food Safety: कितने दिन तक फ्रिज का खाना रहता है सेफ? बार-बार गर्म करने से बड़ा खतरा

Natural Paneer का काला सच

एक ब्रांड के “Natural Paneer” पर भी FSSAI ने तीखी आपत्ति दर्ज की है। FSSAI का कहना है कि पनीर एक प्रोसेस्ड और मिश्रित खाद्य उत्पाद की श्रेणी में आता है। इसलिए उसे “Natural” बताने के लिए स्पष्ट नियमों का पालन करना जरूरी है।

पनीर बनाने में दूध को गर्म किया जाता है, फिर उसमें एसिड मिलाया जाता है जिससे छेना बनता है। फिर उसे दबाकर पनीर का ब्लॉक तैयार किया जाता है। यह एक प्रक्रिया है, इसलिए इसे पूरी तरह “Natural” नहीं कहा जा सकता।

अगर गौर करें तो Natural शब्द का इस्तेमाल करना भ्रामक ब्रांडिंग के दायरे में आता है। FSSAI ने कंपनी से इस दावे के पक्ष में वैज्ञानिक प्रमाण मांगे हैं। अगर प्रमाण नहीं मिले तो कंपनी को यह दावा हटाना होगा और जुर्माना भी भरना पड़ सकता है।

Kinder Joy और Tofu भी जांच के घेरे में

बच्चों की पसंदीदा चॉकलेट और टॉय कॉम्बिनेशन प्रोडक्ट Kinder Joy भी जांच के दायरे में आ गया है। कंपनी द्वारा किए गए “Rich in Milk Solids” जैसे पोषण संबंधी दावों पर FSSAI ने सवाल उठाए हैं और उनसे पर्याप्त प्रमाण मांगे हैं।

यही नहीं, Tofu भी जांच के दायरे में है। “Gowardhan Healthy Foods” के Silk Tofu पर किए गए “100% Veg” और “Rich in Vitamins” के दावों को भी अनवैरिफाइड पाया गया है। FSSAI चाहता है कि कंपनी साबित करे कि उसके उत्पाद में वाकई विटामिन्स की भरपूर मात्रा है।

समझने वाली बात यह है कि “Rich in” जैसे शब्दों के लिए FSSAI के स्पष्ट मानक हैं। अगर किसी उत्पाद में एक निश्चित प्रतिशत से कम पोषक तत्व है तो उसे “Rich in” नहीं कहा जा सकता। कंपनियां इन नियमों को तोड़कर भ्रामक दावे कर रही हैं।

Master Chow, Saffola और अन्य उत्पाद

FSSAI Action on Food Brands के तहत नूडल्स, कुकिंग ऑयल, हेल्थ सप्लीमेंट और कई अन्य पैक्ड फूड उत्पाद भी जांच के दायरे में हैं। Master Chow के नूडल्स पर लिखे “100% Natural” और “Freshly Made” जैसे दावों पर भी सवाल उठे हैं।

वहीं Saffola के कुछ कुकिंग ऑयल उत्पादों में किए गए स्वास्थ्य संबंधी दावों को भी जांच के दायरे में रखा गया है। कंपनी से उसकी “Losorb” और “Less Oil Absorption” तकनीक के पक्ष में ठोस वैज्ञानिक सबूत पेश करने को कहा गया है।

इसके अलावा “Eat It As It Is” के “Aatock Powdered Wheat” उत्पाद पर लिखे “Pure and Healthy”, “100% Authentic”, “Easy Digestive” और “Rapid Recovery” जैसे भारीभरकम शब्दों के लिए भी वैज्ञानिक प्रमाण मांगे गए हैं।

प्रमुख दावे और उन पर सवाल:

उत्पाददावाFSSAI की आपत्ति
मैंगो जूसNo Added Sugar49% गन्ने का रस (शुगर का स्रोत)
पनीर100% Naturalप्रोसेस्ड उत्पाद, नेचुरल नहीं
Kinder JoyRich in Milk Solidsवैज्ञानिक प्रमाण की कमी
Master ChowFreshly Madeपैक्ड नूडल्स फ्रेश कैसे?
Saffola OilLess Oil Absorptionतकनीक का प्रमाण मांगा गया
FSSAI के सख्त नियम

FSSAI ने साफ कहा है कि अगर कोई कंपनी किसी उत्पाद को “Healthy”, “Natural”, “Sugar Free” या “दिल के लिए अच्छा” बताती है तो उसके पास उसका वैज्ञानिक आधार और पर्याप्त प्रमाण होना चाहिए। केवल आकर्षक शब्द लिख देने से कोई दावा सही नहीं माना जाएगा।

नियामक संस्था ने सभी संबंधित कंपनियों को सुधारात्मक कदम उठाने की चेतावनी दी है। जल्द से जल्द सुधार करने को कहा है। साथ ही कहा है कि अगर नियमों का पालन नहीं किया गया तो खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई और भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि FSSAI की शक्तियां काफी व्यापक हैं। वह उत्पादों को बाजार से वापस बुला सकता है, लाइसेंस रद्द कर सकता है और करोड़ों रुपये का जुर्माना लगा सकता है।

उपभोक्ता को क्या करना चाहिए?

FSSAI Action on Food Brands के बाद सबसे बड़ा सवाल है कि आम ग्राहक क्या करें? एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी भी पैकेट पर लिखे बड़े-बड़े दावों को देखकर तुरंत भरोसा न करें। हमेशा उत्पाद की सामग्री सूची (Ingredients List) जरूर पढ़ें।

उपभोक्ता के लिए टिप्स:

लेबल पढ़ें: हमेशा उत्पाद के पीछे छोटे अक्षरों में लिखी सामग्री सूची पढ़ें। वहां असली सच्चाई छुपी होती है।

पोषण तालिका देखें: Nutrition Facts Table में देखें कि कितनी चीनी, नमक, वसा और कैलोरी है।

प्रमाणीकरण चेक करें: FSSAI लाइसेंस नंबर, ISO सर्टिफिकेशन आदि देखें।

ब्रांड रिसर्च करें: इंटरनेट पर उस उत्पाद के बारे में रिव्यू और विश्लेषण पढ़ें।

बहुत सस्ता = संदिग्ध: अगर कोई उत्पाद बाजार से बहुत सस्ता है तो सावधान रहें।

चमकदार दावों से बचें: “100% Natural”, “Chemical Free”, “Fat Burner” जैसे दावे अक्सर मार्केटिंग गिमिक होते हैं।

वैज्ञानिक प्रमाण की जरूरत

FSSAI की मांग एकदम सही है। अगर कोई कंपनी कोई स्वास्थ्य संबंधी दावा करती है तो उसके पास क्लिनिकल ट्रायल, लैब टेस्ट रिपोर्ट और वैज्ञानिक अध्ययन होने चाहिए। सिर्फ मार्केटिंग की भाषा से काम नहीं चलेगा।

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दिलचस्प बात यह है कि विदेशों में ये नियम बहुत सख्त हैं। अमेरिका की FDA (Food and Drug Administration) और यूरोप की EFSA (European Food Safety Authority) किसी भी हेल्थ क्लेम के लिए सालों की रिसर्च और ठोस प्रमाण मांगती हैं। भारत में भी अब FSSAI इसी दिशा में काम कर रहा है।

आगे क्या होगा?

अब सभी नोटिस प्राप्त कंपनियों को निर्धारित समय सीमा में अपना जवाब देना होगा। उन्हें अपने दावों के पक्ष में वैज्ञानिक प्रमाण पेश करने होंगे। अगर वे ऐसा नहीं कर पातीं तो उन्हें:

  • भ्रामक दावे हटाने होंगे
  • पैकेजिंग बदलनी होगी
  • जुर्माना भरना होगा
  • कुछ मामलों में उत्पाद वापस बुलाने होंगे

FSSAI के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, “उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और उनके अधिकारों के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी कंपनियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वह भ्रामक लेबल्स और विज्ञापनों में तुरंत सुधार करें। नहीं तो उनके खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सख्त दंडात्मक कारवाई और भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।”

यह पहला कदम है, और भी आएंगे

FSSAI Action on Food Brands यह पहला कदम है। आने वाले महीनों में FSSAI और भी कई कंपनियों की जांच कर सकता है। खासकर हेल्थ फूड, ऑर्गेनिक उत्पाद, प्रोटीन सप्लीमेंट और बेबी फूड की कैटेगरी में भ्रामक दावे बहुत आम हैं।

समझने वाली बात यह है कि यह सिर्फ सरकारी कार्रवाई नहीं बल्कि उपभोक्ता जागरूकता का मामला भी है। जब तक हम खुद सजग नहीं होंगे और लेबल नहीं पढ़ेंगे, कंपनियां हमें भ्रमित करती रहेंगी।

मुख्य बातें (Key Points)
  • FSSAI ने 12 से अधिक बड़े फूड ब्रांड्स को भ्रामक दावों के लिए नोटिस भेजा
  • Kinder Joy, Saffola, Master Chow, Bellamy’s Paneer समेत कई उत्पाद जांच में
  • “No Added Sugar” वाले जूस में 49% गन्ने का रस (शुगर का बड़ा स्रोत)
  • “100% Natural” पनीर पर आपत्ति, प्रोसेस्ड उत्पाद को नेचुरल नहीं कह सकते
  • कंपनियों को वैज्ञानिक प्रमाण पेश करने होंगे वरना जुर्माना और कार्रवाई
  • उपभोक्ताओं को सलाह: बड़े दावों पर भरोसा न करें, लेबल जरूर पढ़ें
  • खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1: FSSAI ने किन ब्रांड्स पर कार्रवाई की है?

FSSAI ने Kinder Joy, Saffola, Master Chow, Bellamy’s Natural Paneer, Rasna Mango Drink, Amul Cheese और कई अन्य बड़े ब्रांड्स को नोटिस भेजा है। इन उत्पादों पर “No Added Sugar”, “100% Natural” और “Rich in Vitamins” जैसे दावों को भ्रामक पाया गया है।

एक मैंगो जूस में 49% गन्ने का रस मिलाया गया था जो खुद शुगर (सुक्रोज) का बड़ा स्रोत है। भले ही अलग से चीनी न डाली गई हो, लेकिन गन्ने के रस के जरिए भारी मात्रा में शुगर मौजूद है। इसलिए यह दावा भ्रामक है।

Q3: उपभोक्ता के रूप में मुझे क्या सावधानी रखनी चाहिए?

हमेशा उत्पाद के पीछे लिखी Ingredients List और Nutrition Facts पढ़ें। बड़े-बड़े दावों पर आंख बंद करके भरोसा न करें। FSSAI लाइसेंस नंबर चेक करें और ऑनलाइन रिव्यू देखें। स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में एक्सपर्ट की सलाह लें।

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पत्रकारिता में एक दशक से अधिक का ठोस अनुभव रखने वाले अजय कुमार 'शोर से ज़्यादा सार' की पत्रकारिता पर दृढ़ विश्वास करते हैं। वर्तमान में वे The News Air में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे समाचारों की रणनीति, लेखन, तथ्य-सत्यापन (Fact-Checking) और सटीक प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं।पत्रकारिता का सफर और अनुभव - अजय कुमार का करियर ग्राउंड ज़ीरो की रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज़ डेस्क के कुशल प्रबंधन तक विस्तृत है। The News Air में पिछले 3 वर्षों से नेतृत्व करने से पहले, उन्होंने 'दैनिक जागरण' और 'सिटी न्यूज़' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके काम करने के तरीके को बेहद व्यावहारिक और तथ्य-आधारित बनाया है।विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र (Expertise & Beats) - वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा, स्पष्ट तथ्यों और निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं। उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है:राजनीतिक कवरेज: लोकसभा चुनावों और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड और डेस्क रिपोर्टिंग।कानूनी और संसदीय खबरें: संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों की नियमित और रियल-टाइम कवरेज।खोजी पत्रकारिता: ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ रिपोर्टिंग के जरिए अंदरूनी खबरों की पड़ताल।विश्वसनीयता और डिजिटल योगदान (Trust & Authority) - सटीक और प्रामाणिक ख़बरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें पाठकों के बीच एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और फेक न्यूज़ से लड़ने की दिशा में, अजय कुमार गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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