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The News Air - Breaking News - Compromised PM India: “विश्वगुरु नहीं, विश्व चेला!” राहुल गांधी और कांग्रेस ने मोदी सरकार पर साधा निशाना

Compromised PM India: “विश्वगुरु नहीं, विश्व चेला!” राहुल गांधी और कांग्रेस ने मोदी सरकार पर साधा निशाना

खामेनेई की मौत पर PM मोदी की चुप्पी, विदेश मंत्री की जगह विदेश सचिव का ईरानी दूतावास जाना, रूसी तेल खरीदने की इजाजत अमेरिका दे रहा है और ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में भारत की आर्थिक तरक्की पर अमेरिकी रोक का दावा — इन सभी मुद्दों पर कांग्रेस और विशेषज्ञ एकसाथ मोदी सरकार को घेर रहे हैं।

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
शुक्रवार, 6 मार्च 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय
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Compromised PM India
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India Iran Diplomacy Modi Compromised US Control Oil Policy 2026: India Iran Diplomacy: एक तरफ श्रीलंका जैसा छोटा देश ईरानी युद्धपोत को बंदरगाह में शरण दे रहा है, दूसरी तरफ भारत जैसा बड़ा लोकतंत्र आयतुल्लाह खामेनेई की मौत पर अब तक आधिकारिक रूप से खामोश है। यही खामोशी आज देश के अंदर और बाहर सबसे बड़ा सवाल बन गई है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे “Compromised PM” कहा है और कांग्रेस ने कड़े शब्दों में कहा: “यह विश्वगुरु नहीं, विश्व चेला है।”


‘मोदी की चुप्पी पर सवाल: विदेश मंत्री नहीं, विदेश सचिव गए ईरानी दूतावास’

सामान्य कूटनीतिक परंपरा यह होती है कि किसी देश के शीर्ष नेता की मौत पर दूसरे देश के विदेश मंत्री या राष्ट्राध्यक्ष शोक व्यक्त करते हैं। 21 मई 2024 को जब ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी और विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान की मौत हुई थी, तब एस. जयशंकर खुद ईरानी दूतावास गए थे और संवेदना व्यक्त की थी।

लेकिन इस बार जब ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह खामेनेई का निधन हुआ, तो न प्रधानमंत्री मोदी ने कोई बयान दिया, न विदेश मंत्री जयशंकर दूतावास गए। विदेश सचिव विक्रम मिश्री को भेजा गया। ईरान में भारत के राजदूत मोहम्मद फतह अली ने सार्वजनिक रूप से कहा: “भारत की तरफ से हमें कोई संदेश नहीं आया। हमारी कोई बातचीत नहीं हो रही है।”

‘राहुल गांधी का करारा प्रहार: “समझौता कर चुके हैं PM”‘

राहुल गांधी ने कहा: “दुनिया एक बेहद अस्थिर दौर में प्रवेश कर चुकी है। भारत की तेल सप्लाई खतरे में है क्योंकि हमारे 40% से ज़्यादा आयात होर्मुज जलडमरूमध्य से होते हैं। हिंद महासागर में एक ईरानी युद्धपोत डुबो दिया गया और फिर भी PM ने कुछ नहीं कहा। देश को मजबूत नेतृत्व की ज़रूरत है, लेकिन भारत के पास एक ऐसा PM है जो समझौता कर चुका है और जिसने हमारी रणनीतिक स्वायत्तता को छोड़ दिया है।”

कांग्रेस के पवन खेड़ा ने भी तीखा हमला बोला। उनका सवाल था कि PM मोदी इसराइल क्यों गए? नेतन्याहू ने बुलाया और चले गए। और उनके भारत लौटने के 48 घंटों के भीतर इसराइल और अमेरिका ने ईरान पर जंग छेड़ दी और खामेनेई की हत्या हो गई। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह यात्रा इस पूरे घटनाक्रम को वैधता देने के लिए थी?

‘अमेरिका भारत का तेल नीति तय कर रहा है: कांग्रेस का बड़ा आरोप’

इस पूरे विवाद का सबसे तीखा बिंदु यह है कि अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने एलान किया कि भारतीय रिफाइनरियों को 30 दिन का अस्थायी वेवर दिया गया है ताकि वे रूस से तेल खरीद सकें। कांग्रेस का तर्क है कि यह भारत की संप्रभुता का सीधा उल्लंघन है। एक संप्रभु देश खुद तय करता है कि वह किससे तेल खरीदेगा और किससे नहीं।

पवन खेड़ा ने इंग्लिश में कहा: “अब अमेरिका तय करेगा कि हम रूस से तेल खरीदें या न खरीदें। अगर उन्हें पसंद नहीं आया तो वे हमें 50% टैरिफ से दंडित करेंगे।”

‘ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट: भारत की आर्थिक तरक्की पर अमेरिकी रोक?’

एक और खुलासे ने सरकार की मुश्किलें बढ़ाई हैं। Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडाऊ ने कहा है कि अमेरिका भारत को वही आर्थिक फायदे नहीं देगा जो उसने कभी चीन को दिए थे। विश्लेषकों का कहना है इसका सीधा मतलब यह है कि अमेरिका भारत की आर्थिक बढ़त को अपनी शर्तों पर नियंत्रित करना चाहता है। वह नहीं चाहता कि भारत उस स्तर तक पहुँचे जहाँ वो अमेरिका के लिए एक बड़ी प्रतिस्पर्धा बने।

‘विशेषज्ञों की चेतावनी: “खामोशी कूटनीति नहीं है”‘

रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने कहा कि भारत द्वारा आयोजित बहुपक्षीय अभ्यास से लौट रहे ईरानी जहाज को डुबोकर वाशिंगटन ने भारत के समुद्री पड़ोस को ही युद्ध का मैदान बना दिया। यह नौसैनिक मेहमान-नवाज़ी के अनलिखे नियमों का उल्लंघन है और इससे दूसरे देशों को संदेश जाता है कि भारत की एक्सरसाइज में आना सुरक्षा की गारंटी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे PM मोदी की “हिंद महासागर को भारत का पसंदीदा सुरक्षा साझेदार बनाने” की नीति को गहरी चोट लगी है।

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पूर्व राजदूत केसी सिंह ने कहा: “खामोशी कूटनीति नहीं है। हर गुजरते दिन के साथ भारत एक कोने में धकेला जा रहा है। ट्रंप का कोई सगा नहीं है, वो सिर्फ धंधा देखते हैं, फिर BJP यह क्यों सोचती है कि अमेरिका भारत के इस समर्थन का आदर करेगा?”

पूर्व विदेश सचिव कमल सिब्बल की सलाह है: “भारत को अपना आर्थिक मॉडल ऐसा बनाना चाहिए कि वो सिर्फ अमेरिका और इसराइल पर निर्भर न हो। आर्थिक साझेदारों को विविध बनाते रहें और आत्मनिर्भरता पर मज़बूती से ध्यान दें।”

‘श्रीलंका ने दिखाई हिम्मत, भारत खामोश’

इस पूरे प्रकरण में सबसे चुभने वाली तुलना यह है कि श्रीलंका ने ईरानी युद्धपोत IRIS Dena के बचे हुए नाविकों को बचाया और अब ईरान के दूसरे जहाज IRINS Bushehr को त्रिंकोमाली बंदरगाह पर डॉक करने की इजाजत दे दी है। अमेरिका चाहे तो श्रीलंका को मसल सकता है, लेकिन छोटा होने के बावजूद श्रीलंका डरा नहीं।

दूसरी तरफ, भारत जैसा बड़ा देश जो “विश्वगुरु” होने का दावा करता है, वो हिंद महासागर में अपनी ही आंखों के सामने हुई घटना पर आधिकारिक बयान देने में हफ्तों लगा रहा है।

‘भारत की रणनीतिक स्वायत्तता का सवाल’

यह विवाद दरअसल एक बहुत बड़े सवाल को जन्म दे रहा है। क्या भारत आज वाकई एक स्वतंत्र विदेश नीति चला रहा है? क्या मोदी-ट्रंप ट्रेड डील के बाद भारत अमेरिका की लकीर पर चलने को मजबूर हो गया है? 2026 में BRICS की अध्यक्षता भारत के पास है जिसमें रूस, चीन और ईरान जैसे देश हैं। लेकिन इसी दौर में अमेरिका भारत की तेल नीति और आर्थिक तरक्की तय कर रहा है।

कूटनीति में कहा जाता है — “कोई स्थायी मित्र नहीं, कोई स्थायी शत्रु नहीं, सिर्फ स्थायी हित होते हैं।” सवाल यह है कि इस दौर में भारत की “स्थायी हित” की परिभाषा कौन लिख रहा है — दिल्ली या वाशिंगटन?


‘मुख्य बातें (Key Points)’
  • PM मोदी आयतुल्लाह खामेनेई की मौत पर अब तक खामोश हैं। 2024 में विदेश मंत्री जयशंकर ईरानी दूतावास गए थे जबकि इस बार सिर्फ विदेश सचिव विक्रम मिश्री को भेजा गया।
  • ईरान में भारत के राजदूत मोहम्मद फतह अली ने सार्वजनिक रूप से कहा कि भारत की तरफ से कोई संदेश नहीं आया।
  • Bloomberg की रिपोर्ट: अमेरिकी उप विदेश मंत्री ने कहा — अमेरिका भारत को चीन जैसी आर्थिक ताकत नहीं बनने देगा।
  • Brahma Chellaney और पूर्व राजदूत KC Singh सहित कई विशेषज्ञों ने सरकार की चुप्पी और नीति पर गंभीर सवाल उठाए।

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. PM मोदी के इसराइल दौरे को लेकर कांग्रेस ने क्या आरोप लगाया?

उत्तर: कांग्रेस के पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि PM मोदी का इसराइल दौरा संदेहास्पद था क्योंकि उनके भारत लौटने के 48 घंटों के भीतर ईरान पर जंग शुरू हो गई और आयतुल्लाह खामेनेई की हत्या हो गई। कांग्रेस का सवाल है कि क्या यह यात्रा इस पूरे घटनाक्रम को वैधता देने के लिए थी।

Q2. क्या भारत की विदेश नीति अमेरिका के दबाव में है?

उत्तर: यह सबसे विवादित राजनीतिक सवाल है। विपक्ष और कई विशेषज्ञों का तर्क है कि अमेरिका का भारत की तेल नीति तय करना और ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में आर्थिक तरक्की पर रोक का दावा — ये दोनों भारत की रणनीतिक स्वायत्तता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। सरकार का पक्ष है कि यह भारत के अपने हित में लिए गए फैसले हैं।

Q3. श्रीलंका ने ईरानी जहाज को शरण क्यों दी और भारत ने क्यों नहीं?

उत्तर: श्रीलंका ने मानवीय आधार पर ईरानी युद्धपोत IRINS Bushehr को त्रिंकोमाली बंदरगाह में डॉक करने की इजाजत दी। भारत की ओर से कोई आधिकारिक पहल सामने नहीं आई। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अमेरिका को नाराज न करने के लिए चुप है, जबकि छोटा श्रीलंका इस दबाव से बेपरवाह होकर मानवीय ज़िम्मेदारी निभा रहा है।

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अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

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