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The News Air - Breaking News - Strait of Hormuz India: ईरान ने भारत को दी होर्मुज से गुज़रने की इजाजत, अमेरिका ने भी रूसी तेल खरीदने का रास्ता खोला

Strait of Hormuz India: ईरान ने भारत को दी होर्मुज से गुज़रने की इजाजत, अमेरिका ने भी रूसी तेल खरीदने का रास्ता खोला

ईरान ने अमेरिका, इसराइल और यूरोप के लिए होर्मुज बंद रखते हुए भारत और चीन सहित गैर-पश्चिमी देशों को इजाजत दी, अमेरिकी ट्रेजरी ने भारतीय रिफाइनरियों को 30 दिन का वेवर देकर रूस के पहले से खरीदे तेल के लेनदेन को मंज़ूरी दी।

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
शुक्रवार, 6 मार्च 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, अंतरराष्ट्रीय, बिज़नेस
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Strait of Hormuz India
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Strait of Hormuz India Open Iran US Sanctions Russia Oil 2026 : Strait of Hormuz India: एनर्जी बाजार में भारत के नज़रिए से आज एक साथ दो बड़े घटनाक्रम सामने आए। पहला: ईरान ने साफ एलान किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य भारत और चीन जैसे गैर-पश्चिमी देशों के जहाजों के लिए खुला है। दूसरा: अमेरिकी ट्रेजरी ने भारतीय रिफाइनरियों को 30 दिन का विशेष वेवर देते हुए अंतर्राष्ट्रीय जल में अटके रूसी तेल के लेनदेन को पूरा करने की इजाजत दी। ये दोनों खबरें भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज़ से बेहद अहम हैं।


‘ईरान का फैसला: पश्चिम के लिए बंद, गैर-पश्चिम के लिए खुला’

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अमेरिका, इसराइल, यूरोप और NATO से जुड़े किसी भी देश का जहाज अगर होर्मुज से गुज़रता है, या उनके लिए तेल या गैस ले जाता है, तो उसे पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा। लेकिन ईरान ने इस जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद नहीं किया है।

ईरान का संदेश एकदम साफ है: गैर-पश्चिमी देशों के जहाज वहाँ से गुज़र सकते हैं। इस श्रेणी में चीन, भारत और अन्य एशियाई देश शामिल हैं। विश्लेषक इसे भारत के लिए ‘ऑयल होप’ बता रहे हैं क्योंकि पहले ऐसी आशंका थी कि भारत को भी गंभीर परेशानी होगी।

‘होर्मुज की भूगोल: इतना अहम क्यों है यह पतला रास्ता?’

होर्मुज जलडमरूमध्य एक तरफ ईरान और दूसरी तरफ ओमान के बीच स्थित है। इसके सबसे संकरे बिंदु पर इसकी चौड़ाई मात्र 33 किलोमीटर है और शिपिंग लेन सिर्फ 3 किलोमीटर चौड़ी है, प्रत्येक दिशा में। यह छोटी सी नहर फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ती है।

दुनिया का 20% कच्चा तेल और कतर से निकलने वाली भारी मात्रा में LNG गैस इसी रास्ते से गुज़रती है। हर दिन यहाँ से 20 से 21 मिलियन बैरल तेल पास होता है। सऊदी अरब, इराक, बहरीन, कतर — इन सभी देशों का तेल और गैस निर्यात इसी मार्ग से होता है। आयातकों में भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोपीय देश शामिल हैं।

‘ईरान ने होर्मुज पूरी तरह बंद क्यों नहीं किया?’

यह एक स्वाभाविक सवाल है। जवाब यह है कि होर्मुज ईरान के लिए भी उतना ही ज़रूरी है जितना दूसरों के लिए। ईरान अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होने वाले निर्यात से करता है। इसके अलावा अगर होर्मुज पूरी तरह बंद हो जाता तो अमेरिकी नौसेना का सीधा बड़े पैमाने पर हस्तक्षेप तय था। ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि अमेरिकी नौसेना हर जहाज को एस्कॉर्ट करने के लिए तैयार है।

चीन का भी इस मामले में दबाव है क्योंकि वो अपना करीब 15% तेल ईरान से मंगाता है। होर्मुज पूरी तरह बंद होने पर चीन की अर्थव्यवस्था को भी गहरी चोट पहुँचती।

‘ईरान की असली चाल: असममित युद्ध से पश्चिम की कमर तोड़ना’

ईरान जानता है कि अमेरिकी नौसेना से सीधे मैदान में भिड़ना मुमकिन नहीं है। इसीलिए उसकी रणनीति असममित युद्ध (Asymmetric Warfare) की है। इसका मकसद है: पश्चिमी देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाना, तेल की कीमतों को ऊपर करना और शिपिंग बाजार में डर का माहौल बनाना।

सबसे अहम हथियार है पश्चिमी और एशियाई हितों के बीच दरार डालना। अगर पश्चिमी टैंकर वहाँ से नहीं गुजरेंगे लेकिन एशियाई टैंकरों को इजाजत होगी, तो अमेरिका और यूरोप, एशिया के खिलाफ नाराज होंगे। यह रणनीति पहले से काम करने लगी है। कतर पर ईरानी हमले के बाद यूरोप में गैस की कीमतें 50% उछल गईं।

‘अमेरिका का 30 दिन का वेवर: असली कहानी क्या है?’

अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने ट्वीट करके बताया कि ट्रंप के एनर्जी एजेंडे के तहत तेल और गैस उत्पादन अब तक के सर्वोच्च स्तर पर है। साथ ही वैश्विक बाजार में तेल का प्रवाह बनाए रखने के लिए ट्रेजरी के OFAC (Office of Foreign Assets Control) ने भारतीय रिफाइनरियों को 30 दिन का अस्थायी वेवर दिया है।

लेकिन यहाँ एक महत्वपूर्ण बारीकी है। भारत नया रूसी तेल नहीं खरीद सकता। यह वेवर केवल उस रूसी तेल के लिए है जो पहले से अंतर्राष्ट्रीय जल में अटके हुए जहाजों में रखा है। प्रतिबंधों की वजह से ट्रांजैक्शन और इंश्योरेंस पर रोक थी जिसके कारण ये जहाज तट तक नहीं आ पा रहे थे। इस वेवर से वो लेनदेन पूरे हो सकते हैं और Reliance Industries जैसी कंपनियाँ उस तेल को अपनी रिफाइनरियों तक ला सकती हैं।

इस खबर के आते ही Reliance के शेयर करीब 1.5 से 2% उछल गए।

‘भारत की रूसी तेल पर निर्भरता: आंकड़ों की कहानी’

यूक्रेन-रूस युद्ध शुरू होने से पहले भारत रूस से महज 1 से 2% तेल खरीदता था। लेकिन 2022 में रूस पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंध लगते ही भारत ने सस्ता रूसी तेल खरीदना बढ़ा दिया। 2023 तक यह 30% हो गया और 2024-25 में 35 से 40% तक पहुँच गया।

ट्रंप के दबाव के बाद यह घटकर हाल के महीनों में काफी कम हुआ है, लेकिन रिपोर्टों के मुताबिक भारत अप्रत्यक्ष रूप से अभी भी रूसी तेल खरीद रहा है। यहाँ विरोधाभास यह है कि ट्रंप दावा करते हैं कि भारत रूसी तेल नहीं खरीद रहा, जबकि रिपोर्टें उलटा कहती हैं।

भारत अपनी 85% कच्चे तेल की ज़रूरत आयात से पूरी करता है। देश में घरेलू उत्पादन सीमित है। पहले के प्रमुख सप्लायर थे इराक, सऊदी अरब, UAE और कुवैत।

‘विपक्ष का वार: “कब तक चलेगा यह ब्लैकमेल?”‘

इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार और बीजेपी पर हमला बोला है। विपक्ष का सवाल है कि अमेरिका कौन होता है यह तय करने वाला कि भारत कब रूस से तेल खरीदे और कब नहीं? यह भारत की ऊर्जा संप्रभुता पर सीधा हमला है। सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि क्या यह मोदी-ट्रंप ट्रेड डील का हिस्सा है जिसमें भारत अमेरिका की लकीर पर चलेगा?


‘मुख्य बातें (Key Points)’
  • ईरान के IRGC ने होर्मुज को अमेरिका, इसराइल, यूरोप और NATO के जहाजों के लिए पूरी तरह बंद किया, लेकिन भारत, चीन और गैर-पश्चिमी देशों के लिए खुला रखा।
  • अमेरिकी ट्रेजरी के Scott Bessent ने Reliance जैसी भारतीय रिफाइनरियों को 30 दिन का अस्थायी वेवर दिया, लेकिन यह सिर्फ पहले से अंतर्राष्ट्रीय जल में खड़े रूसी तेल टैंकरों के लिए है, नई खरीद के लिए नहीं।
  • होर्मुज से दुनिया का 20% कच्चा तेल और कतर की LNG गुज़रती है, यूरोप में गैस की कीमतें 50% उछल चुकी हैं।
  • भारत 2022 से पहले रूस से 1-2% तेल लेता था जो 2024-25 में बढ़कर 35-40%

    हो गया था।


FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. ईरान ने Strait of Hormuz भारत के लिए क्यों खुला रखा?

उत्तर: ईरान की रणनीति पश्चिमी और एशियाई देशों के बीच दरार डालना है। भारत और चीन जैसे देश ईरान के पारंपरिक मित्र हैं और ईरान इन देशों से टकराव नहीं चाहता। इसके अलावा अगर होर्मुज पूरी तरह बंद होता तो चीन का भी भारी नुकसान होता और अमेरिकी नौसेना का बड़ा हस्तक्षेप तय था।

Q2. अमेरिकी ट्रेजरी के 30-दिन वेवर का भारत पर क्या असर होगा?

उत्तर: भारतीय रिफाइनरियाँ, खासकर Reliance, अंतर्राष्ट्रीय जल में अटके रूसी तेल के टैंकरों का लेनदेन पूरा कर सकती हैं। यह नया तेल खरीदने की इजाजत नहीं है। इससे Reliance के शेयर 2% तक उछले और भारत की तात्कालिक ऊर्जा ज़रूरतों को थोड़ी राहत मिल सकती है।

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Q3. क्या भारत स्वतंत्र रूप से रूस से तेल खरीद सकता है?

उत्तर: भारत का आधिकारिक रुख यह रहा है कि रूसी तेल खरीदना उसका रणनीतिक हित और ऊर्जा नीति का हिस्सा है। 2024-25 में भारत का 35-40% तेल रूस से आता था। लेकिन अमेरिकी दबाव के बाद यह मात्रा घटी है और अब 30 दिन का वेवर सिर्फ पुराने अटके हुए शिपमेंट के लिए है, नई खरीद के लिए नहीं।

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अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

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