Governor Reshuffle India: केंद्र की मोदी सरकार ने एक बड़े प्रशासनिक फेरबदल में पश्चिम बंगाल, बिहार, दिल्ली, तमिलनाडु समेत 9 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राज्यपालों और उपराज्यपालों की नई नियुक्तियाँ की हैं। इस फेरबदल में तीन बिल्कुल नए चेहरों को पहली बार राज्यपाल का पद सौंपा गया है। सबसे चर्चित नाम है लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन का, जिन्हें बिहार का नया राज्यपाल बनाया गया है।
‘राज्यपाल फेरबदल’ की पूरी लिस्ट: कौन कहाँ गया?’
यह फेरबदल एक साथ कई राज्यों में हुआ है, जिसे समझना ज़रूरी है। बिहार में पूर्व राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान की जगह लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन को नियुक्त किया गया है। आरिफ मोहम्मद खान के इस्तीफे के बाद उनका अगला कदम क्या होगा, यह अभी साफ नहीं हुआ है।
दिल्ली के उपराज्यपाल पद से विनय कुमार सक्सेना को हटाकर तरणजीत सिंह संधू को नया एलजी बनाया गया है। यह एक बिल्कुल नई नियुक्ति है। विनय कुमार सक्सेना को अब लद्दाख का उपराज्यपाल बनाया गया है।
लद्दाख के पूर्व उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता को अब हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया है। हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला को तेलंगाना का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
‘महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में बड़ा बदलाव’
तेलंगाना के पूर्व राज्यपाल विष्णु देवर्मा को अब महाराष्ट्र का राज्यपाल बनाया गया है। उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन के उपराष्ट्रपति बनने के बाद से गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत महाराष्ट्र का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे थे।
पश्चिम बंगाल में राज्यपाल सीवी आनंद बोस के इस्तीफे के बाद तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि को पश्चिम बंगाल का नया राज्यपाल बनाया गया है। अब तमिलनाडु का अतिरिक्त प्रभार केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आरलेकर को सौंपा गया है।
नागालैंड के लिए तीसरी बिल्कुल नई नियुक्ति हुई है। नंद किशोर यादव, जो बीजेपी के पूर्व मंत्री रह चुके हैं, उन्हें नागालैंड का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। इससे पहले मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला नागालैंड के कार्यवाहक राज्यपाल की ज़िम्मेदारी निभा रहे थे।
‘बिहार के नए राज्यपाल: जानिए कौन हैं Lt. Gen. Syed Ata Hasnain?’
इस पूरे फेरबदल में सबसे चर्चित नाम लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन का है। वे एक सेवानिवृत्त और अत्यंत सम्मानित सैन्य अधिकारी हैं। भारतीय सेना में उन्होंने मिलिट्री सेक्रेटरी जैसा अहम पद संभाला था, जिसमें सेना के अधिकारियों की नियुक्ति और प्रशासनिक ज़िम्मेदारियाँ शामिल होती हैं।
उन्होंने जम्मू-कश्मीर में 15 कोर की कमान संभाली, जो कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों और सुरक्षा व्यवस्था के लिए ज़िम्मेदार है। इसके अलावा उन्होंने 21 कोर का भी नेतृत्व किया, जिसे ‘सुदर्शन चक्र कोर’ के नाम से भी जाना जाता है। यह एक स्ट्राइक कोर है।
‘श्रीलंका से रवांडा तक, फैला है उनका सैन्य अनुभव’
जनरल हसनैन का सैन्य करियर बेहद विस्तृत रहा है। उन्होंने श्रीलंका में ऑपरेशन पवन में हिस्सा लिया, पंजाब में चरमपंथ विरोधी अभियानों में योगदान दिया और संयुक्त राष्ट्र (UN) के लिए भी सेवाएं दीं। संयुक्त राष्ट्र की पोस्टिंग के दौरान वे मोजांबिक और रवांडा में तैनात रहे।
एक खास तथ्य यह है कि जनरल हसनैन उसी 4 गढ़वाल राइफल यूनिट में कमीशन हुए थे, जिसे उनके पिता ने खड़ा किया था। 30 जून 2013 को सेना से रिटायर्ड होने के बाद उन्हें 2018 में कश्मीर सेंट्रल यूनिवर्सिटी का चांसलर बनाया गया और फरवरी 2020 में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) का सदस्य नियुक्त किया गया। वे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की सूचना और संचार समिति के सदस्य भी रहे हैं।
उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल (2013) और उत्तम युद्ध सेवा मेडल (2012) से नवाज़ा जा चुका है। रिटायरमेंट के बाद वे ‘Track Two’ जैसी राजनयिक बैठकों में भाग लेते रहे और विवेकानंद फाउंडेशन में विजिटिंग फेलो भी रहे।
‘दिल्ली के नए LG तरणजीत सिंह संधू: अमेरिका में भारत का चेहरा रहे अनुभवी डिप्लोमेट’
दिल्ली के नए उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू 1988 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी रहे हैं। उन्हें अमेरिका से जुड़े मामलों में भारत के सबसे अनुभवी डिप्लोमेट में से एक माना जाता है। फरवरी 2020 से जनवरी 2024 तक वे अमेरिका में भारत के राजदूत रहे और संयुक्त राष्ट्र में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया।
रिटायरमेंट के बाद वे बीजेपी में शामिल हुए और 2024 के लोकसभा चुनाव में अमृतसर से उम्मीदवार रहे, हालाँकि उन्हें सफलता नहीं मिली थी। अब उन्हें दिल्ली जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील केंद्र शासित प्रदेश की बागडोर सौंपी गई है।
‘हिमाचल से तेलंगाना पहुंचे शिव प्रताप शुक्ला: बीजेपी के सीनियर नेता’
इस फेरबदल में एक और अहम नाम है शिव प्रताप शुक्ला का। वे बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं और गोरखपुर से चार बार विधायक रह चुके हैं। इसके अलावा वे उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद और बीजेपी सरकार में राज्य वित्त मंत्री भी रह चुके हैं। अब हिमाचल प्रदेश से उन्हें तेलंगाना का राज्यपाल बनाया गया है।
‘राज्यपाल बदलाव का सियासी मतलब क्या है?’
इस पूरे फेरबदल को महज प्रशासनिक बदलाव नहीं कहा जा सकता। बिहार में एक सेवानिवृत्त सैन्य जनरल की नियुक्ति, दिल्ली में एक अनुभवी डिप्लोमेट को एलजी बनाना, और पश्चिम बंगाल में आर.एन. रवि जैसे विवादास्पद और सख्त छवि वाले अधिकारी की तैनाती — ये सभी बदलाव संकेत देते हैं कि केंद्र सरकार राज्यों के साथ अपने प्रशासनिक समीकरणों को नए सिरे से तय करना चाहती है। पश्चिम बंगाल में राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच लंबे समय से तनाव का माहौल रहा है, ऐसे में आर.एन. रवि की नियुक्ति निश्चित तौर पर एक मजबूत संदेश है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- बिहार के नए राज्यपाललेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन हैं, जो पूर्व में मिलिट्री सेक्रेटरी, 15 कोर और 21 कोर के कमांडर तथा NDMA सदस्य रह चुके हैं।
- दिल्ली के नए उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू 1988 बैच के IFS अधिकारी हैं और अमेरिका में भारत के राजदूत रह चुके हैं।
- पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस के इस्तीफे के बाद आर.एन. रवि को नया राज्यपाल बनाया गया है।
- नागालैंड, दिल्ली और बिहार में तीन बिल्कुल नई नियुक्तियाँ हुई हैं।








