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The News Air - Breaking News - India Sugar Import: 10 साल बाद भारत में Duty-Free Sugar आयात, घरेलू सप्लाई बढ़ाने के लिए सरकार का बड़ा फैसला

India Sugar Import: 10 साल बाद भारत में Duty-Free Sugar आयात, घरेलू सप्लाई बढ़ाने के लिए सरकार का बड़ा फैसला

दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक होने के बावजूद भारत को करनी पड़ रही चीनी का आयात, 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन रॉ शुगर पर शून्य टैरिफ, त्योहारी सीजन से पहले कीमतें बढ़ने की आशंका।

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
शनिवार, 22 अगस्त 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, बिज़नेस, राष्ट्रीय
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India Sugar Import
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India Allows Duty-Free Sugar Imports : रत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक है, लेकिन फिर भी आज नौबत यह आ गई है कि हमें आयात कराने की जरूरत पड़ रही है। सरकार ने ड्यूटी फ्री इसे अनुमति दी है। सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन ड्यूटी फ्री चीनी आयात की अनुमति 31 अक्टूबर तक दे दी है।

देखा जाए तो यह एक असामान्य स्थिति है। भारत में गन्ने की पैदावार अच्छी होती है और हम चीनी में आत्मनिर्भर माने जाते हैं। फिर अचानक से यह संकट क्यों आया? और सरकार ड्यूटी फ्री क्यों कर रही है?

🔍 यह भी पढ़ें- Helium Crisis: China Export Ban से India पर खतरा, 100% Import Dependent

10 साल बाद शुगर आयात

नॉर्मली क्या होता है कि अगर आपको चीनी बाहर से मंगानी है तो 100% तक की ड्यूटी लगती थी। यही कारण है कि पिछले 10 सालों से भारत में चीनी का आयात नहीं हो रहा था। घरेलू उत्पादन पर्याप्त था और कीमतें भी नियंत्रण में थीं।

समझने वाली बात यह है कि सरकार ने यह कदम क्यों उठाया? इसके पीछे मुख्य कारण है कि भारत में चीनी की घरेलू उपलब्धता कम हो गई है और कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि सरकार ने रॉ शुगर (कच्ची चीनी) का आयात अनुमति दी है, न कि रिफाइंड शुगर का। इसके पीछे भी एक खास रणनीति है।

🔍 यह भी पढ़ें- Elon Musk के X Algorithm पर India का सख्त बयान

कीमतें तेजी से बढ़ीं

अगर आप देखें तो जो एवरेज एक्स-मिल शुगर प्राइस है, यह पिछले साल ₹3,900 प्रति क्विंटल था जो अब बढ़कर ₹5,500 प्रति क्विंटल हो गया है। इन फैक्ट अगर आप रिटेल शुगर प्राइस देखें तो यह एक साल पहले ₹46 प्रति किलो था, अब यह ₹52 प्रति किलो से भी ऊपर चला गया है।

दिलचस्प बात यह है कि जो डिमांड है वह अब यहां से और बढ़ेगी। ध्यान रखें अब तो भारत में फेस्टिव सीजन आना शुरू हो गया है। गणेश चतुर्थी से लेकर बहुत सारे त्यौहार देखने को मिलेंगे – दशहरा, दिवाली। तो इस वक्त क्या होता है कि चीनी की डिमांड और ज्यादा बढ़ जाती है।

पहलूपिछले सालवर्तमानवृद्धि
एक्स-मिल प्राइस₹3,900/क्विंटल₹5,500/क्विंटल41%
रिटेल प्राइस₹46/किलो₹52/किलो13%
पिछले 2 महीने––40%
टेरिफ रेट कोटा क्या है?

सरकार ने यहां पर 10 लाख मीट्रिक टन रॉ शुगर की अनुमति दी है। इससे ज्यादा नहीं। इसे हम टेरिफ रेट कोटा (TRQ) कहते हैं। सरकार यहां पर निर्धारित कर देती है कि आप इतनी ही मात्रा तक ड्यूटी फ्री मंगा सकते हो।

अगर मान लो इतना सभी आयातकों ने मंगा लिया (कुल मिलाकर) तो उसे रोक देंगे। वैसे सरकार ने समय दिया है 31 अक्टूबर तक। लेकिन मान लीजिए अगर 30 सितंबर तक पूरा 10 लाख टन पहले ही आयात हो चुका है जीरो टैरिफ के तहत, तो उसके बाद अगर आप फिर भी मंगाएंगे तो उस पर आपको फिर से 100% तक ड्यूटी पे करनी पड़ सकती है।

यह व्यवस्था इसलिए है ताकि घरेलू उद्योग को नुकसान न हो। अगर असीमित आयात की अनुमति दे दी जाए तो भारतीय गन्ना किसान और चीनी मिलें बुरी तरह प्रभावित होंगी।

रॉ शुगर ही क्यों?

जब आप घर में खाते हैं वह जो शुगर होता है पैकेट में, वह रिफाइंड शुगर होता है। रॉ शुगर बेसिकली इसलिए आयात किया जा रहा है क्योंकि हमारे पोर्ट पर पहले से ही शुगर रिफाइनरीज हैं।

तो जो भी रॉ शुगर आएगा भारत में, वह पहले पोर्ट पर उसकी प्रोसेसिंग की जाएगी रिफाइनरीज में। उसे रिफाइंड शुगर में कन्वर्ट किया जाएगा और तब यहां पर मार्केट में आएगा।

अगर गौर करें तो इसमें एक फायदा यह होगा कि जो रिफाइनरीज हैं उनके पास अच्छा खासा स्टॉक पड़ा हुआ है। अब क्योंकि सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन अनुमति कर दिया है, तो इन रिफाइनरीज को पता है कि इतना शुगर आने वाला है। तो उनके पास जो स्टॉक पड़ा हुआ है लगभग 3 लाख टन का, वह मार्केट में पहले ही रिलीज कर देंगे।

तो इससे भी फिर से जो प्राइस की स्टेबिलिटी है, वह चीनी को लेकर मार्केट में आ जाएगी।

बल्क कंज्यूमर्स पर स्टॉक होल्डिंग रेस्ट्रिक्शन

सरकार ने एक और चीज की है – स्टॉक होल्डिंग रेस्ट्रिक्शन बल्क कंज्यूमर्स के ऊपर। बल्क कंज्यूमर्स जैसे हम घरों में खाते हैं तो हमारे ऊपर नहीं, लेकिन हां जो प्रोडक्ट्स बनाते हैं चीनी के जरिए – जैसे टॉफी, फूड प्रोसेसर्स, बेवरेज कंपनी कोका-कोला, ये सब जहां-जहां भी बड़ी-बड़ी कंपनियां हैं जो स्नैक्स बनाती हैं जिसमें चीनी का इस्तेमाल होता है।

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सरकार कह रही है कि जो भी कंपनी 10 टन शुगर हर महीने इस्तेमाल करती है, उनके ऊपर लिमिट लगेगा कि वो 15 दिन से ज्यादा का स्टॉक अपने पास नहीं रख सकते।

उदाहरण के लिए अगर कोई कंपनी 30 टन शुगर इस्तेमाल करती है प्रोडक्ट बनाने में, तो वह अपने पास मैक्सिमम 15 टन का ही स्टॉक रख सकती है क्योंकि 15 दिन का बोला गया (आधे महीने का)।

समझने वाली बात यह है कि इससे होगा क्या कि यहां पर मार्केट में ज्यादा चीनी की उपलब्धता होगी। और जब सप्लाई ज्यादा होगी, मतलब प्राइस नहीं बढ़ेंगे।

भारत में शुगर की कमी क्यों हुई?

एक कारण बताया जा रहा है कि हो सकता है कि जिस तरह से अब जो शुगरकेन, मोलासेस हैं, इन सबको डायवर्ट किया जा रहा है इथेनॉल प्रोडक्शन में। अब आप सब जानते हैं भारत में इथेनॉल प्रोडक्शन बढ़कर हो रहा है और यह पेट्रोल में मिक्स किया जा रहा है, ब्लेंड किया जा रहा है।

तो यहां पर जो शुगरकेन है हो सकता है – और भारत में ज्यादातर जो इथेनॉल बन रहा है वह शुगरकेन के जरिए बन रहा है। अभी देखो एग्जैक्ट आंकड़ा नहीं है, यह हम कह नहीं सकते कि कितना डायवर्ट किया गया। लेकिन डेफिनेटली यह डायवर्ट हुआ है।

तो इसका भी असर होगा जिसकी वजह से भारत में शुगरकेन की उपलब्धता कम होगी, जिसकी वजह से शुगर का कम प्रोडक्शन हुआ होगा।

दिलचस्प बात यह है कि सरकार ने एक नीति के तहत इथेनॉल प्रोडक्शन बढ़ाया, लेकिन इसका दूसरा साइड इफेक्ट यह हुआ कि चीनी उत्पादन कम हो गया।

ग्लोबल शुगर मार्केट पर असर

भारत ने आज जो निर्णय लिया कि हम आयात करेंगे दुनिया के अलग-अलग देशों से, तो इसका तुरंत असर आपको ग्लोबल शुगर मार्केट में देखने को मिलेगा।

लंदन और न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में वहां पर जो शुगर कंपनियां हैं, उनके जो फ्यूचर के प्राइस हैं, उसमें 4% की वृद्धि देखने को मिली है। क्यों? क्योंकि हमने अनाउंस किया है कि 1 मिलियन टन हम मंगाएंगे।

तो ऑब्वियस सी बात है ग्लोबल मार्केट में भी सप्लाई की कमी होगी और इसकी वजह से उनकी कंपनियों को बेनिफिट होगा।

देशउत्पादन (मिलियन मीट्रिक टन)वैश्विक हिस्सा %
ब्राजील43.824%
भारत32-3516%
यूरोपियन यूनियन––
चाइना––
थाईलैंड––
ब्राजील से ज्यादा आयात

हो सकता है कि ज्यादातर हम जो शुगर है वह ब्राजील से आयात करें। दुनिया का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर है, प्रोड्यूसर है। ग्लोबल प्रोडक्शन में 24% हिस्सा शुगर का ब्राजील का है – 43.8 मिलियन मीट्रिक टन ब्राजील प्रोड्यूस करता है।

भारत सेकंड नंबर पर है – 32-35 मिलियन मीट्रिक टन और 16% हमारा ग्लोबल शेयर है। उसके बाद यूरोपियन यूनियन, चाइना, थाईलैंड।

फिर भी सवाल उठता है कि जब हम दूसरे नंबर के उत्पादक हैं तो आयात की नौबत क्यों आई?

सरकार का बैलेंसिंग एक्ट

जब भी सरकार यह निर्णय लेती है, बहुत ही पॉलिटिकली सेंसिटिव मुद्दा होता है शुगर का। सरकार के ऊपर एक बड़ा डायलेमा होता है:

  • कंज्यूमर्स को देखना है
  • शुगरकेन फार्मर्स को देखना है
  • शुगर मिल को देखना है

कंज्यूमर्स को क्या चाहिए? हमें तो घर में चाहिए कि सस्ते में शुगर आए। शुगरकेन फार्मर क्या चाहता है? उसको ज्यादा प्राइस चाहिए अपने गन्ने पर। और यहां पर जो शुगर मिल है उसको भी ज्यादा प्राइस चाहिए ताकि अल्टीमेटली वही तो पे करेगा फार्मर्स को। अगर उसके पास प्राइस नहीं आएगा अच्छे से तो वह फार्मर्स को पे नहीं कर पाएगा। फिर सरकार को सब्सिडाइज करना पड़ता है।

कहीं न कहीं यह तीनों चीजों को सरकार को बैलेंस करके चलना है।

चिंता का विषय यह है कि अगर किसानों को उचित मूल्य नहीं मिला तो वे गन्ने की खेती छोड़कर दूसरी फसलें उगाने लगेंगे। तब भविष्य में और बड़ा संकट आ सकता है।

मुख्य बातें (Key Points)

  • भारत ने 10 साल बाद चीनी का ड्यूटी फ्री आयात की अनुमति दी, 10 लाख मीट्रिक टन रॉ शुगर 31 अक्टूबर तक
  • चीनी की कीमतें पिछले साल के मुकाबले 40-50% बढ़ीं, रिटेल प्राइस ₹46 से ₹52 प्रति किलो
  • टेरिफ रेट कोटा (TRQ) व्यवस्था, निर्धारित मात्रा के बाद फिर 100% ड्यूटी लागू
  • रॉ शुगर का आयात ताकि पोर्ट पर रिफाइनरीज में प्रोसेसिंग हो, 3 लाख टन स्टॉक मार्केट में रिलीज होगा
  • बल्क कंज्यूमर्स पर 15 दिन का स्टॉक होल्डिंग रेस्ट्रिक्शन, त्योहारी सीजन से पहले कीमत नियंत्रण
  • इथेनॉल प्रोडक्शन में गन्ने का डायवर्जन भी चीनी उत्पादन कम होने का कारण
  • ग्लोबल शुगर मार्केट में 4% वृद्धि, ब्राजील से ज्यादा आयात की संभावना

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: भारत दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक होने के बावजूद चीनी आयात क्यों कर रहा है?

घरेलू उत्पादन में कमी और त्योहारी सीजन में बढ़ती मांग के कारण कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। एक कारण यह भी है कि गन्ने का काफी हिस्सा इथेनॉल प्रोडक्शन में जा रहा है। इसलिए सरकार ने कीमतें स्थिर रखने के लिए 10 लाख टन ड्यूटी फ्री आयात की अनुमति दी है।

प्रश्न 2: टेरिफ रेट कोटा (TRQ) क्या है?

टेरिफ रेट कोटा एक व्यवस्था है जिसमें सरकार एक निश्चित मात्रा तक कम या शून्य टैरिफ पर आयात की अनुमति देती है। इस मामले में 10 लाख टन तक ड्यूटी फ्री है, उसके बाद फिर से 100% ड्यूटी लागू हो जाएगी।

प्रश्न 3: रॉ शुगर का आयात क्यों किया जा रहा है, रिफाइंड शुगर का नहीं?

भारत के पोर्ट्स पर पहले से ही शुगर रिफाइनरीज मौजूद हैं। रॉ शुगर आयात करने से इन रिफाइनरीज को काम मिलेगा और उनके पास जो स्टॉक पड़ा है (लगभग 3 लाख टन) वह भी मार्केट में रिलीज होगा, जिससे कीमतें और स्थिर होंगी।

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अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

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