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The News Air - Breaking News - IMD Weather Forecast: अगले दो हफ्तों में भारी बारिश का अलर्ट, गुजरात-राजस्थान में एक्सट्रीमली हेवी रेनफॉल की चेतावनी

IMD Weather Forecast: अगले दो हफ्तों में भारी बारिश का अलर्ट, गुजरात-राजस्थान में एक्सट्रीमली हेवी रेनफॉल की चेतावनी

23 जुलाई से 5 अगस्त तक का मौसम पूर्वानुमान जारी, पश्चिम भारत में व्यापक बारिश, देश में मानसून 19% कम, किसानों के लिए खास एडवाइजरी।

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
शुक्रवार, 24 जुलाई 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, राष्ट्रीय
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IMD Weather Forecast
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IMD Weather Forecast India के अनुसार अगले दो हफ्तों में देश के कई हिस्सों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 23 जुलाई 2026 को जारी अपने प्रेस रिलीज में चेतावनी दी है कि दक्षिण-पूर्व राजस्थान, गुजरात क्षेत्र, उत्तरी कोंकण और उत्तरी मध्य महाराष्ट्र में अगले 3 दिनों में अलग-अलग स्थानों पर एक्सट्रीमली हेवी रेनफॉल (अत्यधिक भारी वर्षा) की संभावना है।

देखा जाए तो यह मानसून सीजन देश के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। 1 जून से 22 जुलाई 2026 के बीच देश में 19% कम बारिश हुई है, लेकिन अब पश्चिम भारत में अचानक तेज बारिश का दौर शुरू होने वाला है।

🔍 यह भी पढ़ें- IMD Weather Alert: 10 राज्यों में Extremely Heavy Rainfall, Red Alert जारी

पिछले सप्ताह की मुख्य मौसमी घटनाएं

पिछले सप्ताह (16 से 22 जुलाई 2026) के दौरान:

  • उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बना लो प्रेशर एरिया 16 जुलाई को वेल-मार्क्ड लो प्रेशर एरिया में बदल गया
  • यह सिस्टम 17 जुलाई को उत्तरी ओडिशा और झारखंड तक कमजोर होकर 18 जुलाई को समाप्त हो गया
  • इसके कारण ओडिशा में 16-17 जुलाई और छत्तीसगढ़ में 17-18 जुलाई को अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा हुई

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि मानसून ट्रफ 16-19 जुलाई के दौरान अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर में था, जबकि 22 जुलाई को यह अपनी सामान्य स्थिति से दक्षिण में चला गया।

🔍 यह भी पढ़ें- IMD Weather Forecast: अगले 2 हफ्ते भारी बारिश का अलर्ट, जानें किन राज्यों में खतरा

पिछले सप्ताह की वर्षा स्थिति (16-22 जुलाई 2026):

क्षेत्रवास्तविक वर्षा (mm)सामान्य वर्षा (mm)विचलन (%)
पूर्वी एवं पूर्वोत्तर भारत88.497.9-10%
उत्तर-पश्चिम भारत54.852.1+5%
मध्य भारत85.777.8+10%
दक्षिण प्रायद्वीप35.948.6-26%
संपूर्ण देश66.867.3-1%
मानसून सीजन: 1 जून से 22 जुलाई तक की स्थिति

समग्र रूप से, 1 जून से 22 जुलाई 2026 तक देश में 293.3 mm वर्षा हुई जबकि सामान्य 361.5 mm होनी चाहिए थी। यानी 19% की कमी।

चिंता का विषय यह है कि:

  • पूर्वी एवं पूर्वोत्तर भारत: 32% कम वर्षा
  • दक्षिण प्रायद्वीप: 26% कम वर्षा
  • उत्तर-पश्चिम भारत: 13% कम वर्षा
  • मध्य भारत: 9% कम वर्षा

अगर गौर करें तो पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में मानसून सबसे कमजोर रहा है।

💡 यह भी पढ़ें- 8th Pay Commission: सरकारी कर्मचारियों को मिल सकता है ₹75 लाख का HBA!

सप्ताह 1 (23-29 जुलाई): पश्चिम भारत में भारी बारिश

आने वाले पहले सप्ताह में निम्नलिखित मौसम प्रणालियां सक्रिय रहेंगी:

मुख्य मौसम प्रणालियां:

  • मानसून ट्रफ का पश्चिमी सिरा वर्तमान में दक्षिण में है और 2-3 दिन बाद उत्तर की ओर बढ़ेगा
  • निचले स्तर की सोमाली जेट कमजोर रहेगी
  • अरब सागर के उत्तर-पूर्व और सौराष्ट्र तट के पास निचले ट्रोपोस्फीयर में चक्रवाती परिसंचरण विकसित होगा
  • एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित कर रहा है

पहले सप्ताह में अपेक्षित मौसम:

✓ पश्चिम भारत में सामान्य से अधिक वर्षा, व्यापक क्षेत्रों में बारिश
✓ दक्षिण-पूर्व राजस्थान, गुजरात, उत्तरी कोंकण, उत्तरी मध्य महाराष्ट्र में अगले 3 दिनों में अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा
✓ पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के अधिकांश स्थानों पर भारी से अत्यधिक भारी वर्षा
✓ पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में व्यापक वर्षा
✓ उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में सप्ताह के दूसरे भाग में छिटपुट से मध्यम वर्षा

समझने वाली बात यह है कि देश समग्र रूप से अगले 2 दिन सामान्य वर्षा पाएगा, लेकिन सप्ताह के शेष दिनों में सामान्य से कम वर्षा होगी।

सप्ताह 2 (30 जुलाई – 5 अगस्त): दक्षिण भारत में बारिश तेज

दूसरे सप्ताह में मौसम का रुख बदलेगा:

मौसम प्रणालियां:

  • मानसून ट्रफ दक्षिण की ओर खिसकेगा और अपनी सामान्य स्थिति के पास रहेगा
  • एक कमजोर ऑफशोर ट्रफ दक्षिण गुजरात से कर्नाटक तक चलेगा
  • निचले स्तर की सोमाली जेट मजबूत होगी
  • उत्तर और पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण विकसित होगा

दूसरे सप्ताह में अपेक्षित मौसम:

✓ पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में हल्की से मध्यम व्यापक वर्षा, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में कुछ दिन भारी वर्षा
✓ पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में व्यापक वर्षा
✓ कोंकण-गोवा, तटीय कर्नाटक, केरल के तटीय क्षेत्रों में भारी से अत्यधिक भारी वर्षा
✓ प्रायद्वीपीय भारत के शेष हिस्सों में छिटपुट से मध्यम वर्षा

और बस यहीं से शुरू होगा दक्षिण भारत में मानसून का सक्रिय चरण। देश समग्र रूप से सप्ताह 2 में सामान्य वर्षा प्राप्त करेगा।

तापमान पूर्वानुमान: कहां होगी गर्मी?

सप्ताह 1 (23-29 जुलाई):

  • उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ हिस्सों में सामान्य से 2-4°C अधिक अधिकतम तापमान
  • पूर्वोत्तर और दक्षिणी तटीय प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों में भी तापमान अधिक
  • हीट वेव की कोई संभावना नहीं
  • न्यूनतम तापमान सामान्य रहेगा

सप्ताह 2 (30 जुलाई – 5 अगस्त):

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बुधवार, 4 नवम्बर 2026
Aaj Ka Rashifal

Aaj Ka Rashifal: बुधवार को किसे मिलेगा बड़ा फायदा, कौन संभले?

बुधवार, 4 नवम्बर 2026
  • उत्तर-पश्चिम और पूर्वी भारत के मैदानी इलाकों तथा पूर्वोत्तर भारत में 2-4°C अधिक अधिकतम तापमान
  • हीट वेव की कोई संभावना नहीं
El Niño प्रभाव: मानसून पर असर

दिलचस्प बात यह है कि El Niño स्थितियां प्रशांत महासागर के ऊपर बनी हुई हैं:

  • मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक है
  • यह स्थितियां दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान और मजबूत होने की उम्मीद है
  • Monsoon Mission Coupled Forecast System (MMCFS) भी इसकी पुष्टि करता है

वहीं, हिंद महासागर डाइपोल (IOD) तटस्थ स्थिति में है और पूरे मानसून सीजन में ऐसा ही रहने की संभावना है।

सवाल उठता है कि क्या El Niño के कारण ही इस साल मानसून कमजोर रहा है? विशेषज्ञों का मानना है कि हां, इसका प्रभाव साफ दिख रहा है।

किसानों के लिए विशेष एडवाइजरी

IMD ने राज्यवार किसानों के लिए विस्तृत कृषि-मौसम सलाह जारी की है:

गुजरात:

  • धान, कपास, बाजरा, मक्का, मूंगफली और सब्जी के खेतों में निर्बाध जल निकासी बनाए रखें
  • लंबे समय तक जलभराव रोकने के लिए खेत की नालियां साफ रखें
  • निचले इलाकों से अतिरिक्त पानी लगातार निकालें
  • खेती की स्थिति में सुधार होने तक रोपाई और सभी खेती कार्य स्थगित करें

कोंकण और गोवा:

  • धान की नर्सरी, धान और सब्जी के खेतों में निर्बाध जल निकासी बनाए रखें
  • निचले इलाकों से अतिरिक्त पानी लगातार निकालते रहें
  • जहां खेती की स्थिति उपयुक्त हो, केवल वहीं गैप फिलिंग और रोपाई करें

मध्य महाराष्ट्र:

  • खड़ी फसलों में निर्बाध जल निकासी बनाए रखें
  • लंबे समय तक जलभराव रोकने के लिए फसल के खेतों से अतिरिक्त पानी लगातार निकालें
  • खेती की स्थिति में सुधार होने तक सिंचाई, उर्वरक और पौध संरक्षण कार्य स्थगित करें

राजस्थान:

  • बाजरा, मक्का, कपास और दलहन के निचले खेतों से अतिरिक्त पानी निकालें
  • अस्थायी जलभराव रोकने के लिए प्रभावी जल निकासी बनाए रखें

हिमाचल प्रदेश:

  • धान, मक्का, रागी, टमाटर, बैंगन और सेब के बागों में लगातार जल निकासी बनाए रखें
  • जहां खेती की स्थिति उपयुक्त हो, परिपक्व फलों की कटाई करें

असम और मेघालय:

  • धान की नर्सरी, जूट, गन्ना, सोयाबीन और सब्जी के खेतों में निर्बाध जल निकासी सुनिश्चित करें
  • केला, सब्जियां और अन्य कमजोर फसलों को तेज हवाओं से बचाने के लिए सहारा दें

यह दर्शाता है कि भारी बारिश के बीच किसानों को अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए विशेष सावधानी बरतनी होगी।

भारी बारिश: संभावित प्रभाव और सुझाए गए कदम

IMD ने चेतावनी दी है कि भारी से अत्यधिक भारी वर्षा के कारण:

संभावित प्रभाव:

  • निचले इलाकों में स्थानीय बाढ़ और जलभराव
  • शहरी क्षेत्रों में सड़कों पर पानी भरना और अंडरपास बंद होना
  • भारी बारिश के कारण कभी-कभी दृश्यता कम होना
  • जलभराव के कारण प्रमुख शहरों में यातायात व्यवधान
  • कच्ची सड़कों को मामूली नुकसान
  • कमजोर संरचनाओं को नुकसान की संभावना
  • स्थानीय भूस्खलन/कीचड़ स्खलन
  • कुछ क्षेत्रों में बागवानी और खड़ी फसलों को डूबने से नुकसान

सुझाए गए कदम:
✓ अपने गंतव्य के लिए निकलने से पहले अपने मार्ग पर यातायात की स्थिति जांचें
✓ इस संबंध में जारी किए गए किसी भी यातायात सलाह का पालन करें
✓ ऐसे क्षेत्रों में जाने से बचें जहां अक्सर जलभराव की समस्या होती है
✓ कमजोर संरचनाओं में रहने से बचें

पशुधन और मुर्गीपालन के लिए सलाह

उम्मीद की किरण यह है कि IMD ने पशुपालकों के लिए भी सलाह जारी की है:

  • भारी बारिश के दौरान जानवरों को शेड के अंदर रखें
  • उन्हें संतुलित आहार प्रदान करें
  • चारा और फीड को सुरक्षित स्थान पर स्टोर करें
  • उच्च तापमान और हीट वेव वाले क्षेत्रों में जानवरों को स्वच्छ, ठंडा पीने का पानी दें
  • गर्मी के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के लिए मुर्गी शेड की छतों को घास से ढकें
मुख्य बातें (Key Points)
  • IMD ने 23 जुलाई से 5 अगस्त 2026 तक का विस्तृत मौसम पूर्वानुमान जारी किया
  • दक्षिण-पूर्व राजस्थान, गुजरात, उत्तरी कोंकण, उत्तरी मध्य महाराष्ट्र में अगले 3 दिन अत्यधिक भारी वर्षा की चेतावनी
  • देश में 1 जून से 22 जुलाई तक 19% कम वर्षा, पूर्वी भारत में 32% कमी
  • सप्ताह 1 में पश्चिम भारत में सामान्य से अधिक वर्षा, सप्ताह 2 में दक्षिण प्रायद्वीप में बारिश तेज
  • El Niño स्थितियां प्रशांत महासागर में बनी हुई हैं, मानसून पर प्रभाव
  • किसानों के लिए राज्यवार विस्तृत कृषि-मौसम सलाह जारी
  • भारी बारिश के कारण स्थानीय बाढ़, जलभराव, भूस्खलन की संभावना

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: अगले हफ्ते कौन से राज्यों में सबसे ज्यादा बारिश होगी?

उत्तर: अगले 3 दिनों में दक्षिण-पूर्व राजस्थान, गुजरात क्षेत्र, उत्तरी कोंकण और उत्तरी मध्य महाराष्ट्र में अत्यधिक भारी वर्षा होने की संभावना है। सप्ताह 1 में पश्चिम भारत और सप्ताह 2 में कोंकण-गोवा, तटीय कर्नाटक और केरल में भारी बारिश होगी।

प्रश्न 2: इस साल मानसून कमजोर क्यों रहा है?

उत्तर: 1 जून से 22 जुलाई 2026 तक देश में 19% कम वर्षा हुई है। इसका मुख्य कारण प्रशांत महासागर में El Niño स्थितियां हैं, जो दक्षिण-पश्चिम मानसून को कमजोर करती हैं। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में 32% की सर्वाधिक कमी दर्ज की गई है।

प्रश्न 3: किसानों को भारी बारिश में क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

उत्तर: किसानों को खेतों में निर्बाध जल निकासी सुनिश्चित करनी चाहिए, निचले इलाकों से अतिरिक्त पानी लगातार निकालना चाहिए, खेती की स्थिति सुधरने तक रोपाई, सिंचाई और उर्वरक कार्य स्थगित करने चाहिए, और कमजोर फसलों को तेज हवाओं से बचाने के लिए सहारा देना चाहिए।

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अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

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