India Meteorological Department ने अगले दो हफ्तों के लिए देश के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। 16 जुलाई 2026 को जारी इस प्रेस रिलीज़ में बताया गया है कि ओडिशा, बिहार, उत्तराखंड, असम और मेघालय समेत कई राज्यों में अत्यधिक बारिश हो सकती है। देखा जाए तो इस साल मानसून ने पूरे देश को सामान्य से सिर्फ एक दिन देरी से कवर किया है, जो राहत की बात है।
मानसून ने 9 जुलाई को पूरे देश को किया कवर
Ministry of Earth Sciences के अधीन काम करने वाले भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 9 जुलाई को उत्तरी अरब सागर, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के बचे हुए हिस्सों में अपनी एंट्री कर ली। इस तरह सामान्य तारीख 8 जुलाई के मुकाबले सिर्फ एक दिन की देरी से पूरे भारत में मानसून फैल गया।
हालांकि, समझने वाली बात यह है कि 9 से 15 जुलाई के बीच पूरे देश में बारिश सामान्य से 51% कम रही। मध्य और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में बारिश की गतिविधियां काफी सुस्त रहीं।
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पिछले हफ्ते का रेनफॉल डेटा चौंकाने वाला
दिलचस्प बात यह है कि देश के सभी होमोजेनियस क्षेत्रों में पिछले हफ्ते बारिश सामान्य से कम दर्ज की गई। यहां देखिए क्षेत्रवार आंकड़े:
| क्षेत्र | वास्तविक बारिश (मिमी) | सामान्य बारिश (मिमी) | कमी (%) |
|---|---|---|---|
| पूर्व और पूर्वोत्तर भारत | 78 | 100.8 | -23% |
| उत्तर-पश्चिम भारत | 35.7 | 49.1 | -27% |
| मध्य भारत | 16.9 | 69.8 | -76% |
| दक्षिण प्रायद्वीप | 10.8 | 46.4 | -77% |
| पूरा देश | 31.2 | 63.8 | -51% |
अगर गौर करें तो 1 जून से 15 जुलाई 2026 तक संचयी रूप से देश में बारिश सामान्य से 23% कम रही है। यह चिंता का विषय है, खासकर किसानों के लिए।
ओडिशा में 16 जुलाई को एक्सट्रीम हेवी रेनफॉल का खतरा
मौसम विभाग ने Odisha के लिए 16 जुलाई को अत्यधिक भारी बारिश (Extremely Heavy Rainfall) की चेतावनी जारी की है। पश्चिमोत्तर बंगाल की खाड़ी और उत्तरी ओडिशा-पश्चिम बंगाल तट के पास एक लो प्रेशर एरिया बन गया है। यह सिस्टम अगले दो दिनों में उत्तरी ओडिशा और गंगा के मैदानी इलाकों वाले पश्चिम बंगाल में उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ेगा और धीरे-धीरे कमजोर होगा।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पिछले हफ्ते उत्तराखंड और पश्चिम उत्तर प्रदेश में 9 और 10 जुलाई को अलग-थलग जगहों पर बेहद भारी बारिश हुई थी। हिमाचल प्रदेश में भी 10 जुलाई को ऐसी ही स्थिति देखी गई।
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पहले हफ्ते (16-22 जुलाई) का राज्यवार मौसम पूर्वानुमान
आने वाले हफ्ते में कई राज्यों को भारी से अत्यधिक भारी बारिश का सामना करना पड़ सकता है। देखिए विस्तृत राज्यवार अलर्ट:
उत्तराखंड, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर:
जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, Uttarakhand, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली तथा पश्चिम/पूर्व उत्तर प्रदेश में पूरे सप्ताह अलग-थलग स्थानों पर भारी से अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है।
- जम्मू-कश्मीर: 21 जुलाई को बहुत भारी बारिश
- हिमाचल प्रदेश: 19-22 जुलाई को बहुत भारी बारिश
- उत्तराखंड: 18-21 जुलाई को बहुत भारी बारिश
- पूर्व उत्तर प्रदेश: 19-21 जुलाई को बहुत भारी बारिश
पूर्वोत्तर राज्यों में व्यापक बारिश:
Arunachal Pradesh, Assam & Meghalaya, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में पूरे सप्ताह व्यापक भारी बारिश होने की उम्मीद है। असम और मेघालय में 16-19 जुलाई को बहुत भारी बारिश हो सकती है, जबकि अरुणाचल प्रदेश में 17-19 जुलाई को ऐसी स्थिति रहेगी।
पूर्वी भारत:
Bihar, सब-हिमालयन पश्चिम बंगाल और सिक्किम, गंगा के मैदानी इलाके वाला पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा में पूरे सप्ताह अलग-थलग भारी बारिश। बिहार और सब-हिमालयन पश्चिम बंगाल में 18-20 जुलाई को बहुत भारी बारिश, जबकि ओडिशा में 17 जुलाई को बहुत भारी और 16 जुलाई को अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट।
मध्य भारत में सुस्त गतिविधि:
छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश और विदर्भ में सप्ताह भर अलग-थलग भारी बारिश। छत्तीसगढ़ में 16 जुलाई को बहुत भारी बारिश हो सकती है।
पश्चिम और दक्षिण भारत:
कोंकण और गोआ, मध्य महाराष्ट्र तथा तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में 16 जुलाई को अलग-थलग भारी बारिश।
समझने वाली बात है कि पश्चिम-मध्य और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में पूरे सप्ताह बारिश की गतिविधियां सुस्त रहने वाली हैं। उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में अगले 2 दिन ऐसा ही रहेगा।
दूसरे हफ्ते (23-29 जुलाई) का पूर्वानुमान
दूसरे सप्ताह में मानसून ट्रफ कई दिनों तक अपनी सामान्य स्थिति के पास रहने की संभावना है। इस दौरान:
- उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम, काफी व्यापक से व्यापक बारिश
- जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में कुछ दिनों में अलग-थलग भारी से अत्यधिक भारी बारिश
- पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में सप्ताह भर व्यापक बारिश
- गुजरात के तटीय क्षेत्रों, कोंकण और गोआ, तटीय कर्नाटक तथा केरल में कई दिनों तक व्यापक बारिश के साथ अलग-थलग भारी से अत्यधिक भारी बारिश
देखा जाए तो दूसरे हफ्ते में बारिश का पैटर्न थोड़ा बदलेगा और पश्चिमी तट पर गतिविधियां बढ़ेंगी।
तापमान और हीट वेव का अलर्ट
पहले सप्ताह में उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से 2-4°C अधिक रहने की संभावना है।
Heat Wave Warning:
- तटीय आंध्र प्रदेश और यनम तथा रायलसीमा: 16 जुलाई
- Tamil Nadu, पुडुचेरी और कराईकल: 16-17 जुलाई
गर्म और उमस भरे मौसम की स्थिति पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, तटीय आंध्र प्रदेश और यनम, रायलसीमा तथा तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में सप्ताह के कुछ दिनों में बनी रह सकती है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि दूसरे सप्ताह (23-29 जुलाई) में देश के किसी भी हिस्से में हीट वेव की संभावना नहीं है। यह राहत की बात है।
एल नीनो और IOD की स्थिति
भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में एल नीनो की स्थिति बनी हुई है। मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत में समुद्री सतह का तापमान सामान्य से अधिक बना हुआ है। Monsoon Mission Coupled Forecast System (MMCFS) के पूर्वानुमानों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान एल नीनो की स्थिति और मजबूत होने की उम्मीद है।
वहीं, हिंद महासागर में न्यूट्रल इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) की स्थिति बनी हुई है और ये पूरे मानसून सीजन में ऐसे ही बने रहने की संभावना है।
किसानों के लिए कृषि सलाह
मौसम विभाग ने विभिन्न राज्यों के किसानों के लिए महत्वपूर्ण सलाह जारी की है:
ओडिशा: धान, मक्का, दलहन, तिलहन और सब्जी के खेतों में लगातार जल निकासी बनाए रखें। खेत की नालियों को साफ रखें ताकि लंबे समय तक जलजमाव न हो। सिंचाई, उर्वरक और पौध संरक्षण कार्य स्थगित रखें।
असम: गन्ना, सोयाबीन, अरहर, जूट, तिल के खेतों और फलों के बगीचों से अतिरिक्त बारिश के पानी की निरंतर और प्रभावी निकासी करें। जहां खेत की स्थिति अनुमति दे, वहां परिपक्व फसलों की कटाई करें।
छत्तीसगढ़: धान की नर्सरी और मक्का, सोयाबीन, अरहर तथा छोटे बाजरा के खड़े खेतों में निरंतर जल निकासी बनाए रखें।
बिहार, झारखंड: धान, मक्का, तिल और अरहर के खेतों में निरंतर जल निकासी सुनिश्चित करें। सिंचाई, उर्वरक और पौध संरक्षण कार्य तब तक के लिए स्थगित रखें जब तक खेत की स्थिति ठीक न हो जाए।
उत्तराखंड: मूंगफली, सोयाबीन और मक्का की बुवाई स्थगित करें। धान, टमाटर और मिर्च के खेतों में उचित जल निकासी सुनिश्चित करें। बिना बारिश के समय में ही परिपक्व टमाटर की कटाई करें।
पशुपालन और मत्स्य पालन सलाह
- भारी बारिश के दौरान पशुओं को शेड के अंदर रखें और उन्हें संतुलित आहार प्रदान करें
- चारा और फ़ीड को सुरक्षित स्थान पर स्टोर करें ताकि खराब न हो
- उच्च तापमान और हीट वेव वाले क्षेत्रों में पशुओं को साफ, ठंडा पीने का पानी दें
- मुर्गी शेड की छतों को घास से ढकें ताकि गर्मी का प्रतिकूल प्रभाव कम हो
- तालाबों के चारों ओर उचित जाली के साथ निकास बनाएं ताकि अतिरिक्त पानी निकल सके और मछलियां बाहर न निकलें
आंधी-तूफान और तेज हवाओं का अलर्ट
सप्ताह के दौरान मध्य भारत, पूर्वी भारत, पूर्वोत्तर भारत, उत्तर-पश्चिम के मैदानी इलाके, प्रायद्वीपीय भारत, पश्चिमी तट, पश्चिमी भारत और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र के कुछ हिस्सों में बिजली गिरने, तेज हवाओं और अलग-थलग थंडरस्क्वॉल गतिविधि के साथ गरज के साथ आंधी आने की संभावना है।
इससे पेड़ों की शाखाएं टूट सकती हैं, बड़े पेड़ उखड़ सकते हैं, खड़ी फसलों को नुकसान हो सकता है, केला और पपीता के पेड़ों को मामूली से बड़ा नुकसान हो सकता है, और बिजली व संचार लाइनों को क्षति पहुंच सकती है।
लोगों के लिए सुरक्षा सलाह
मौसम विभाग ने जनता से अपील की है कि:
- मौसम की स्थिति पर नजर रखें और स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहें
- घर के अंदर रहें, खिड़कियां और दरवाजे बंद करें और यदि संभव हो तो यात्रा से बचें
- सुरक्षित आश्रय लें; पेड़ों के नीचे आश्रय न लें
- कंक्रीट के फर्श पर न लेटें और कंक्रीट की दीवारों के सहारे न खड़े हों
- बिजली/इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को अनप्लग करें
- तुरंत जल निकायों से बाहर आ जाएं
- बिजली का संचालन करने वाली सभी वस्तुओं से दूर रहें
इस पूर्वानुमान का क्या है महत्व
अगर गौर करें तो यह विस्तृत मौसम पूर्वानुमान कई मायनों में महत्वपूर्ण है। सबसे पहले, यह किसानों को अपनी कृषि गतिविधियों की योजना बनाने में मदद करता है। भारी बारिश वाले क्षेत्रों में किसान समय पर जल निकासी की व्यवस्था कर सकते हैं और फसल नुकसान से बच सकते हैं।
दूसरा, राज्य सरकारों और आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों को बाढ़ के लिए तैयारी करने का समय मिल जाता है। ओडिशा, बिहार, असम जैसे राज्य जो नियमित रूप से बाढ़ का सामना करते हैं, वे अग्रिम चेतावनी के आधार पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा सकते हैं।
तीसरा, आम लोग अपनी दैनिक गतिविधियों और यात्राओं की योजना बना सकते हैं। हीट वेव वाले क्षेत्रों में लोग अतिरिक्त सावधानी बरत सकते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि इस बार का पूर्वानुमान बताता है कि पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बारिश सामान्य से अधिक होने की संभावना है, जबकि देश के बाकी हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होगी। यह असमान वितरण कृषि उत्पादन को प्रभावित कर सकता है।
एल नीनो का प्रभाव चिंताजनक
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि एल नीनो की स्थिति मजबूत हो रही है और यह पूरे मानसून सीजन के दौरान जारी रहने की उम्मीद है। ऐतिहासिक रूप से, एल नीनो वर्षों में भारत में मानसून कमजोर रहता है। यही कारण है कि इस साल अब तक देश में सामान्य से 23% कम बारिश हुई है।
हालांकि, राहत की बात यह है कि इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) न्यूट्रल है। पॉजिटिव IOD अक्सर एल नीनो के नकारात्मक प्रभावों को संतुलित करता है, लेकिन न्यूट्रल IOD का मतलब है कि ऐसा कोई संतुलन नहीं होगा।
इससे साफ होता है कि किसानों और कृषि क्षेत्र को इस साल चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। सरकार को सूखा प्रबंधन की तैयारी करनी चाहिए, खासकर उन क्षेत्रों में जहां बारिश सामान्य से काफी कम रही है।
मुख्य बातें (Key Points)
• भारतीय मौसम विभाग ने 16 से 29 जुलाई 2026 के लिए विस्तृत मौसम पूर्वानुमान जारी किया है, जिसमें कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है
• ओडिशा में 16 जुलाई को अत्यधिक भारी बारिश (Extremely Heavy Rainfall) का अलर्ट जारी, पश्चिमोत्तर बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर एरिया बना हुआ है
• पिछले हफ्ते (9-15 जुलाई) पूरे देश में बारिश सामान्य से 51% कम रही, मध्य भारत में 76% और दक्षिण प्रायद्वीप में 77% की कमी दर्ज की गई
• 1 जून से 15 जुलाई तक संचयी बारिश सामान्य से 23% कम है, जो कृषि क्षेत्र के लिए चिंताजनक संकेत है
• एल नीनो की स्थिति मजबूत हो रही है और पूरे मानसून सीजन के दौरान जारी रहने की उम्मीद, जबकि IOD न्यूट्रल है
• तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश में 16-17 जुलाई को हीट वेव की चेतावनी, लेकिन दूसरे सप्ताह में किसी हीट वेव की संभावना नहीं
• किसानों के लिए विशेष कृषि सलाह जारी – भारी बारिश वाले क्षेत्रों में जल निकासी बनाए रखें और सिंचाई/उर्वरक कार्य स्थगित रखें











