Cyclone Depression Warning को लेकर भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD ने बड़ा अलर्ट जारी किया है। 29 अक्टूबर 2026 को सुबह 8:30 बजे यह डिप्रेशन 19.4 डिग्री उत्तर और 81.9 डिग्री पूर्व के आसपास केंद्रित था, जिसमें हवा की रफ्तार 45-55 किमी प्रति घंटे से लेकर 65 किमी प्रति घंटे तक पहुंच रही थी।
देखा जाए तो यह सिस्टम वेरी सीवियर साइक्लोनिक स्टॉर्म ‘अरनब’ का अवशेष है, जो अब धीरे-धीरे कमजोर होकर डिप्रेशन और फिर वेल मार्क्ड लो प्रेशर एरिया में बदल रहा है। इसी बीच ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल में भारी से अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी जारी कर दी गई है।
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‘डिप्रेशन की स्थिति और हवा की रफ्तार’
अगर गौर करें तो IMD के अनुसार 29 अक्टूबर की दोपहर 11:30 बजे यह सिस्टम 19.9 डिग्री उत्तर और 81.9 डिग्री पूर्व पर पहुंच गया, जहां हवा की गति 35-45 किमी प्रति घंटे से 55 किमी प्रति घंटे तक दर्ज की गई। शाम 5:30 बजे तक यह और कमजोर होकर वेल मार्क्ड लो प्रेशर एरिया में तब्दील हो गया।
| दिनांक/समय (IST) | स्थिति (अक्षांश/देशांतर) | अधिकतम हवा की गति (किमी/घंटा) | श्रेणी |
|---|---|---|---|
| 29.10.26/08:30 | 19.4°N / 81.9°E | 45-55, गस्टिंग 65 | डिप्रेशन |
| 29.10.26/11:30 | 19.9°N / 81.9°E | 35-45, गस्टिंग 55 | डिप्रेशन |
| 29.10.26/17:30 | 21.3°N / 82.0°E | 25-35, गस्टिंग 45 | वेल मार्क्ड लो प्रेशर एरिया |
समझने वाली बात है कि डिप्रेशन का जगदलपुर से सिर्फ 40 किमी उत्तर-उत्तर-पश्चिम, भवानीपटना से 150 किमी और रायपुर से 200 किमी दक्षिण की दूरी पर स्थित होना दिखाता है कि यह सिस्टम छत्तीसगढ़ और ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों के बेहद करीब से गुजर रहा है।
‘राज्यवार भारी बारिश की चेतावनी’
चिंता का विषय यह है कि इस सिस्टम की वजह से कई राज्यों में भारी से अत्यंत भारी बारिश का खतरा बना हुआ है। ओडिशा के अंदरूनी जिलों में 29 अक्टूबर को भारी से बहुत भारी और कुछ जगहों पर अत्यंत भारी बारिश की आशंका जताई गई है। वहीं छत्तीसगढ़ के उत्तरी जिलों में भी इसी तरह की स्थिति बन सकती है।
| राज्य | चेतावनी विवरण | तारीख |
|---|---|---|
| तटीय आंध्र प्रदेश | उत्तर तटीय जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश | 29 अक्टूबर |
| ओडिशा | अंदरूनी जिलों में भारी से अत्यंत भारी बारिश | 29 अक्टूबर |
| छत्तीसगढ़ | उत्तरी जिलों में भारी से अत्यंत भारी बारिश | 29 अक्टूबर |
| झारखंड | कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश | 29-30 अक्टूबर |
| बिहार | उत्तरी जिलों में अत्यंत भारी बारिश | 29-30 अक्टूबर |
| गंगीय पश्चिम बंगाल | तटीय जिलों में भारी बारिश | 29 अक्टूबर |
| उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम | कुछ जगह भारी से अत्यंत भारी बारिश | 29-30 अक्टूबर |
| विदर्भ | उत्तर-पूर्वी जिलों में भारी बारिश | 29-30 अक्टूबर |
| पूर्वी मध्य प्रदेश | कुछ जगह भारी बारिश | 29 अक्टूबर |
| पूर्वी उत्तर प्रदेश | भारी से बहुत भारी बारिश | 29-30 अक्टूबर |
दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे सिस्टम का असर सिर्फ तटीय राज्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे अंदरूनी राज्यों तक भी भारी बारिश का असर पहुंच सकता है। इससे साफ होता है कि यह सिस्टम काफी बड़े भूभाग को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।
‘हवा, समुद्र की स्थिति और मछुआरों के लिए चेतावनी’
वहीं हवा को लेकर भी चेतावनी जारी की गई है। उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और ओडिशा-पश्चिम बंगाल तट के आसपास 35-45 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने का अनुमान है, जो 29 अक्टूबर दोपहर तक जारी रह सकता है। छत्तीसगढ़ के सुरगुजा, जशपुर, कोरिया, रायगढ़, रायपुर समेत कई जिलों में 45-55 किमी प्रति घंटे तक की तेज हवा चलने की आशंका है।
समुद्र की स्थिति भी उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में खराब रहने वाली है, जिस वजह से मछुआरों को 29 अक्टूबर दोपहर तक समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि मोटर बोट और छोटे जहाजों का संचालन भी इस दौरान असुरक्षित माना गया है।
‘संभावित नुकसान और एहतियाती कदम’
हैरान करने वाली बात यह है कि इस सिस्टम से कच्ची सड़कों में दरार, निचले इलाकों में जलभराव और बड़े शहरों में ट्रैफिक जाम जैसी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। केले, पपीता और सहजन जैसी फसलों और बागवानी को भी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई है।
इसका मतलब है कि प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को घर के अंदर रहने और कमजोर ढांचों से दूर रहने की सलाह दी गई है। IMD ने रेल और सड़क यातायात को सूझबूझ से नियंत्रित करने और जलभराव वाले इलाकों में जाने से बचने की अपील की है।
‘दूसरा सिस्टम: दक्षिण अंडमान सागर में नया लो प्रेशर एरिया’
उम्मीद की किरण की तरह राहत की जगह, दूसरी ओर एक नई चिंता भी सामने आई है। 29 अक्टूबर 2026 की सुबह दक्षिण अंडमान सागर और आसपास के क्षेत्र में एक नया लो प्रेशर एरिया बन गया है। यह पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ते हुए 31 अक्टूबर के आसपास दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के पास डिप्रेशन में बदल सकता है।
इसके बाद यह सिस्टम और मजबूत होकर अगले दो दिनों में आंध्र प्रदेश तट की ओर बढ़ने की संभावना जताई गई है। सवाल उठता है कि क्या यह नया सिस्टम भी पहले वाले की तरह भारी बारिश और तेज हवाओं का कारण बनेगा।
जानें पूरा मामला
यह मौसम चेतावनी भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के रीजनल स्पेशलाइज्ड मेटियोरोलॉजिकल सेंटर, नई दिल्ली द्वारा 29 अक्टूबर 2026 को जारी की गई है। यह सिस्टम वेरी सीवियर साइक्लोनिक स्टॉर्म ‘अरनब’ के अवशेष से बना डिप्रेशन है, जो दक्षिण छत्तीसगढ़ और सटे हुए दक्षिण ओडिशा के ऊपर स्थित है। इसके साथ ही दक्षिण अंडमान सागर में बना नया लो प्रेशर एरिया भी आने वाले दिनों में प्रभाव डाल सकता है। IMD ने अगला प्रेस रिलीज 30 अक्टूबर 2026 दोपहर 2:30 बजे जारी करने की बात कही है।
मुख्य बातें (Key Points)
- डिप्रेशन (चक्रवात अरनब का अवशेष) 29 अक्टूबर को छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा के पास कमजोर होकर वेल मार्क्ड लो प्रेशर एरिया में बदल गया।
- ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल में भारी से अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी जारी।
- मछुआरों को 29 अक्टूबर दोपहर तक उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में न जाने की सलाह।
- दक्षिण अंडमान सागर में नया लो प्रेशर एरिया बना, जो आंध्र प्रदेश तट की ओर बढ़ सकता है।










