High Court Permanent Judges: Punjab and Haryana High Court के कार्यकारी चीफ जस्टिस जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने आज दो अतिरिक्त जजों को स्थायी जज के रूप में शपथ दिलाई। जस्टिस हरमीत सिंह ग्रेवाल और जस्टिस दीपिंदर सिंह नलवा ने स्थायी जज के रूप में पद संभाला। Supreme Court of India के कोलेजियम ने पिछले महीने दोनों को स्थायी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।
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जजों की कमी के बीच अहम नियुक्ति
यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट जजों की भारी कमी से जूझ रहा है। हाईकोर्ट में 85 स्वीकृत पद हैं, लेकिन इस समय सिर्फ 55 जज काम कर रहे हैं। यानी करीब एक तिहाई पद खाली पड़े हैं।
अगर गौर करें, तो दो जजों का स्थायी होना राहत जरूर है, लेकिन पूरी समस्या का हल अभी दूर दिखता है। अदालत पर केसों का बोझ बहुत ज्यादा है और जजों की संख्या उस मुकाबले कम है।
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| मुद्दा | आंकड़ा |
|---|---|
| स्वीकृत जज पद | 85 |
| मौजूदा कार्यरत जज | 55 |
| खाली पद | करीब 30 |
| पेंडिंग केस | 4.23 लाख से ज्यादा |
| प्रतीक्षित नियुक्तियां | 10 वकील |
| इस साल रिटायर होने वाले जज | 3 |
10 और नियुक्तियों का इंतजार
हाईकोर्ट को अभी 10 और वकीलों की जज के रूप में नियुक्ति का इंतजार है। इन नामों को सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम पहले ही हरी झंडी दे चुका है। केंद्र सरकार की ओर से इनके नोटिफिकेशन जल्द जारी होने की उम्मीद है।
दिलचस्प बात यह है कि इन संभावित नियुक्तियों में पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों के वकील शामिल हैं। इससे अदालत की न्यायिक क्षमता बढ़ेगी, लेकिन इसके बाद भी कमी पूरी तरह खत्म होने के आसार नहीं हैं।
पेंडिंग केस सबसे बड़ी चुनौती
इस समय हाईकोर्ट में 4 लाख 23 हजार से ज्यादा केस लंबित हैं। पंजाब, हरियाणा और केंद्र शासित प्रदेश Chandigarh के अधिकार क्षेत्र वाली यह अदालत देश की बड़ी संवैधानिक अदालतों में शामिल है।
समझने वाली बात है कि जजों की कमी का सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है। जिन लोगों के केस सालों से चल रहे हैं, उनके लिए हर नियुक्ति उम्मीद की किरण है। लेकिन जब पेंडेंसी इतनी बड़ी हो, तो रफ्तार बढ़ाने के लिए और कदम जरूरी हो जाते हैं।
राहत भी, चुनौती भी
देखा जाए तो High Court Permanent Judges की यह प्रक्रिया अदालत की मजबूती की दिशा में कदम है। फिर भी खाली पदों और आने वाली रिटायरमेंट को देखते हुए न्यायिक ढांचे पर दबाव बना रहेगा।
मुख्य बातें (Key Points)
• दो अतिरिक्त जज स्थायी जज बने।
• हाईकोर्ट में 85 के मुकाबले 55 जज काम कर रहे हैं।
• 10 और नियुक्तियों का इंतजार है।
• 4.23 लाख से ज्यादा केस लंबित हैं।












