Heat Waves in India: भारत में क्लाइमेट चेंज का असर अब सिर्फ चिलचिलाती दोपहर तक सीमित नहीं रहा। घुटन भरी रातें और बढ़ती नमी करोड़ों लोगों के लिए एक नया और खतरनाक संकट बनती जा रही हैं। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरमेंट एंड वाटर (CEEW) की ताज़ा स्टडी “जिला स्तरीय हीट रिस्क आकलन 2025” ने ऐसे तथ्य सामने रखे हैं जो हर भारतीय को सोचने पर मजबूर कर देते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक देश के 57% जिलों में, जहाँ करीब 76% आबादी रहती है, भीषण गर्मी का गंभीर खतरा मँडरा रहा है।
734 जिलों का विश्लेषण, 40 साल का डेटा
इस स्टडी में देश के 734 जिलों का गहन विश्लेषण किया गया है। 1982 से 2022 तक के बदलते मौसमी रुझानों को 35 अलग-अलग इंडिकेटर्स के आधार पर परखा गया है। यह अब तक का सबसे व्यापक जिला-स्तरीय हीट रिस्क आकलन माना जा रहा है।
CEEW के डेटा के अनुसार देश के 417 जिले हाई रिस्क कैटेगरी में हैं, जबकि 200 जिले मीडियम रिस्क में आते हैं।
दिल्ली सबसे आगे, ये 10 राज्य सबसे ज़्यादा खतरे में
सबसे ज़्यादा हीट रिस्क वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की टॉप 10 सूची में दिल्ली पहले स्थान पर है। इसके बाद क्रमशः आंध्र प्रदेश, गोवा, केरल, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, कर्नाटक, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश का नाम आता है।
खास बात यह है कि यह खतरा सिर्फ बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है। दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे बड़े आर्थिक केंद्रों के साथ-साथ महाराष्ट्र, केरल, उत्तर प्रदेश और बिहार के ग्रामीण इलाके भी गंभीर जोखिम में हैं।
खेतों में काम करने वाले मज़दूर सबसे कमजोर
इन ग्रामीण इलाकों में खेतों में काम करने वाले मज़दूरों को खुले आसमान के नीचे लंबे समय तक काम करना पड़ता है। ऐसे में उन्हें गर्मी का सबसे ज़्यादा सामना करना पड़ता है और उनके लिए खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यह वह तबका है जिसके पास न कूलर है, न AC और न ही गर्मी से बचाव का कोई ठोस इंतज़ाम।
रातें बन रही हैं नई जानलेवार चुनौती
रिपोर्ट की सबसे चिंताजनक बात यह है कि गर्म रातों में तेज़ी से बढ़ोतरी हो रही है। 2012 से 2022 के बीच देश के करीब 70% जिलों में हर गर्मी के मौसम में कम से कम पाँच अतिरिक्त बेहद गर्म रातें दर्ज की गई हैं।
CEEW के CEO डॉ. अरुणाभा घोष के मुताबिक जब रात का तापमान सामान्य से ज़्यादा रहता है तो शरीर को दिन की गर्मी से उबरने का मौका नहीं मिलता। इसकी वजह से हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बहुत बढ़ जाता है।
उत्तर भारत में बढ़ती ह्यूमिडिटी: एक नया संकट
रिपोर्ट में एक और बड़ा खतरा सामने आया है, वो है उत्तर भारत में तेज़ी से बढ़ती ह्यूमिडिटी यानी नमी। जिन इलाकों को पहले सूखा माना जाता था, वहाँ अब नमी का स्तर तेज़ी से ऊपर जा रहा है।
पिछले 10 सालों में इंडो-गैंगेटिक मैदानों में रिलेटिव ह्यूमिडिटी करीब 10% बढ़ी है। कानपुर, जयपुर, दिल्ली और वाराणसी जैसे शहरों में ह्यूमिडिटी का स्तर 30-40% से बढ़कर अब 40-50% तक पहुँच गया है। ज़्यादा नमी की वजह से महसूस होने वाला तापमान असली तापमान से 3 से 5 डिग्री ज़्यादा लगता है, जिससे शरीर का प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम यानी पसीना निकलने की प्रक्रिया भी बाधित होती है।
समाधान क्या है: जिला स्तर पर चाहिए एक्शन
CEEW के सीनियर प्रोग्राम लीड डॉ. विश्वास चिताली का कहना है कि अब वक्त आ गया है जब जिला स्तर पर हीट एक्शन प्लान को सख्ती से लागू किया जाए। कुछ राज्यों जैसे महाराष्ट्र, ओडिशा और गुजरात ने इस दिशा में कदम उठाए हैं, लेकिन इसे अब पूरे देश में फैलाने की ज़रूरत है।
रिपोर्ट में कुछ अहम सुझाव भी दिए गए हैं। हीट वेव को डिज़ास्टर कैटेगरी में शामिल किए जाने के बाद राज्य अब स्टेट डिज़ास्टर मिटिगेशन फंड का इस्तेमाल कर सकते हैं। शहरों और गाँवों में कूल रूफ, नेट ज़ीरो कूलिंग शेल्टर और अर्ली वार्निंग सिस्टम को बढ़ावा देने की भी सिफारिश की गई है। साथ ही हीट एक्शन प्लान में सिर्फ दिन के तापमान ही नहीं, बल्कि गर्म रातों और ह्यूमिडिटी के डेटा को भी शामिल करने की बात कही गई है।
भीषण गर्मी अब भविष्य की चेतावनी नहीं, वर्तमान की सच्चाई है
CEEW की यह रिपोर्ट एक स्पष्ट संकेत है कि भीषण गर्मी अब आने वाले कल की चेतावनी नहीं, बल्कि आज की ज़मीनी सच्चाई बन चुकी है। इससे निपटने के लिए सिर्फ जागरूकता पर्याप्त नहीं है, बल्कि नीतिगत और संरचनात्मक बदलावों की तत्काल ज़रूरत है। आम आदमी के लिए यह खबर एक चेतावनी है कि गर्मी का मौसम अब सिर्फ पंखा चलाने और ठंडा पानी पीने से नहीं गुज़रने वाला, इसके लिए सरकार से लेकर समाज तक हर स्तर पर तैयारी ज़रूरी है।
मुख्य बातें (Key Points)
- CEEW की रिपोर्ट में 734 जिलों का विश्लेषण, 1982 से 2022 तक का डेटा शामिल।
- देश के 57% जिले हाई/मीडियम हीट रिस्क में, 76% आबादी प्रभावित।
- दिल्ली सबसे ज़्यादा हीट रिस्क वाले राज्यों की सूची में सबसे ऊपर।
- 2012-2022 के बीच 70% जिलों में हर सीज़न में 5 अतिरिक्त गर्म रातें दर्ज।
- इंडो-गैंगेटिक मैदानों में ह्यूमिडिटी 10% बढ़ी, महसूस होने वाला तापमान 3-5 डिग्री ज़्यादा।








