Harish Rana Euthanasia का मामला पूरे देश को भावुक कर रहा है। गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन की राज एम्पायर सोसायटी से एम्स (AIIMS) ले जाए गए हरीश राणा की इच्छा मृत्यु (Passive Euthanasia) की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 13 साल पहले पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ में पढ़ाई के दौरान हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद कोमा में चले गए हरीश के शरीर से अब लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाया जा रहा है। एम्स के डॉ. बी.आर. अंबेडकर इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर अस्पताल के पैलिएटिव केयर यूनिट में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यह प्रक्रिया चलाई जा रही है। हरीश के बूढ़े माता-पिता, पिता अशोक राणा और मां निर्मला देवी अस्पताल में अपने बेटे के साथ आखिरी पल बिता रहे हैं।
AIIMS में कैसे हो रही है इच्छा मृत्यु की प्रक्रिया
Harish Rana Euthanasia की प्रक्रिया एम्स के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम की देखरेख में बेहद सावधानी से आगे बढ़ रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक हरीश के शरीर से लाइफ सपोर्ट से जुड़े दो प्रमुख पाइप हटा दिए गए हैं:
पहला: सांस लेने के लिए लगाई गई ट्रैकियोस्टोमी ट्यूब (Tracheostomy Tube) जो गले में चीरा लगाकर सीधे श्वास नली से जुड़ी होती है।
दूसरा: पोषण देने के लिए लगाई गई PEG फीडिंग ट्यूब (Percutaneous Endoscopic Gastrostomy) जो सीधे पेट में भोजन पहुंचाती है।
यह पूरी प्रक्रिया दर्द रहित (Painless) तरीके से धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है। एम्स की पैलिएटिव केयर एक्सपर्ट डॉ. सीमा मिश्रा की अगुवाई में गठित कमेटी इस पूरे प्रोसेस की निगरानी कर रही है। डॉक्टरों की पूरी कोशिश है कि हरीश को किसी तरह की तकलीफ न हो और वे प्राकृतिक और सम्मानजनक तरीके से अपनी अंतिम यात्रा पूरी करें।
AIIMS ने क्या कहा: सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हो रहा पालन
Harish Rana Euthanasia पर एम्स की तरफ से आधिकारिक बयान में सिर्फ इतना कहा गया है कि “एम्स सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कर रहा है।” अस्पताल इस मामले में कोई विस्तृत बयान देने से बच रहा है, जो इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को दर्शाता है।
अस्पताल सूत्रों के मुताबिक हरीश की हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है। सूत्रों ने हरीश की स्थिति को देखते हुए आशंका जताई है कि करीब एक-दो दिन में वे इस पीड़ा से मुक्त हो जाएंगे। लाइफ सपोर्ट हटने के बाद शरीर कितने समय तक प्रतिक्रिया करता है, यह पूरी तरह मरीज की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है।
13 साल पहले क्या हुआ था: हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरे हरीश
Harish Rana Euthanasia की दर्दनाक कहानी 13 साल पहले शुरू हुई थी। हरीश राणा पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ में पढ़ाई कर रहे थे। एक दिन हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने की वजह से उन्हें गंभीर चोट लगी। सिर में लगी गहरी चोट के कारण उनका दिमाग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और वे कोमा में चले गए।
तब से हरीश कोमा में ही हैं। 13 साल से उनका शरीर सिर्फ लाइफ सपोर्ट सिस्टम की मदद से जीवित है। वे न बोल सकते हैं, न हिल-डुल सकते हैं, न किसी को पहचान सकते हैं। सिर्फ सांस चल रही है, लेकिन शरीर ने बहुत पहले साथ छोड़ दिया। 13 साल तक माता-पिता ने अपने बेटे की हर तरह से देखभाल की, हर इलाज कराया, हर उम्मीद की किरण तलाशी, लेकिन चिकित्सा विज्ञान ने साफ कह दिया कि अब हरीश के ठीक होने की कोई संभावना नहीं है।
बूढ़े माता-पिता का दर्द: “बेटा सांस ले रहा है, लेकिन शरीर साथ छोड़ चुका है”
Harish Rana Euthanasia का सबसे दर्दनाक पहलू उनके बूढ़े माता-पिता का दर्द है। पिता अशोक राणा और मां निर्मला देवी ने अपने बेटे को बड़े लाड-प्यार से पाला था। उसकी तरक्की के सपने देखे थे। उन्हें लगा था कि बेटा उनका सहारा बनेगा। लेकिन नियति ने कुछ और ही लिख रखा था।
13 साल तक इन बूढ़े माता-पिता ने अपने कोमा में पड़े बेटे की दिन-रात सेवा की। लेकिन अब माता-पिता खुद बूढ़े हो चुके हैं। उनकी आंखें झुकने लगी हैं, हाथ कांपने लगे हैं। मां निर्मला देवी हर रोज पल-पल रोती हैं। एक मां के लिए अपने बेटे को इस हालत में देखना और फिर उसे आखिरी विदाई देना, इससे बड़ा दर्द दुनिया में कोई नहीं हो सकता।
अस्पताल ले जाने से पहले का वीडियो देखकर पूरा देश भावुक हो गया। मां दिल पर पत्थर रखकर अपने लाल को विदा कर रही है। पिता नम आंखों से बस बेटे को देखते जा रहे हैं। इस परिवार के दर्द को शब्दों में बयान करना असंभव है।
सुप्रीम कोर्ट ने कैसे दी इच्छा मृत्यु की अनुमति
Harish Rana Euthanasia में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका निर्णायक रही है। हरीश के माता-पिता ने जब देखा कि उनके बेटे के ठीक होने की कोई उम्मीद नहीं है और वे खुद भी अब बेटे की देखभाल करने में असमर्थ हो रहे हैं, तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से इच्छा मृत्यु (Passive Euthanasia) की मांग की।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को समझते हुए निष्क्रिय दया मृत्यु की अनुमति दे दी। कोर्ट के आदेश के अनुसार हरीश को लगे लाइफ सपोर्ट सिस्टम को फेजवाइज (चरणबद्ध तरीके से) हटाने की अनुमति दी गई। यह आदेश भारत के कानूनी इतिहास में एक अहम मिसाल है।
भारत में 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने निष्क्रिय इच्छा मृत्यु (Passive Euthanasia) को कानूनी मान्यता दी थी। इसके तहत अगर कोई मरीज लाइलाज बीमारी या स्थायी कोमा में है और ठीक होने की कोई उम्मीद नहीं है, तो परिवार की सहमति और कोर्ट के आदेश से लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाया जा सकता है। लेकिन सक्रिय इच्छा मृत्यु (Active Euthanasia) यानी इंजेक्शन देकर मारना भारत में अभी भी गैरकानूनी है।
ब्रह्मकुमारी गुरु मां का भावुक संदेश: “सबको माफ करते हुए जाओ”
Harish Rana Euthanasia के बीच एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसने पूरे देश को रुला दिया है। अस्पताल ले जाने से पहले ब्रह्मकुमारी संस्था की गुरु मां हरीश के पास आईं। उन्होंने हरीश से कहा, “सबको माफ करते हुए, सबसे माफी मांगते हुए जाओ।”
इस पल ने पूरे देश को भावुक कर दिया है। सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और हर कोई हरीश और उनके परिवार के लिए दुआ मांग रहा है। एक बेटे की आखिरी विदाई, मां-बाप का दर्द और गुरु मां का आध्यात्मिक संदेश, इस पूरे दृश्य ने लोगों की आंखें नम कर दी हैं।
इच्छा मृत्यु पर बड़ा सवाल: भारत में कानूनी स्थिति क्या है
Harish Rana Euthanasia ने एक बार फिर भारत में इच्छा मृत्यु के कानूनी और नैतिक पहलुओं पर बहस छेड़ दी है। भारत में निष्क्रिय इच्छा मृत्यु को 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी मान्यता दी, लेकिन इसकी प्रक्रिया बेहद जटिल और लंबी है। परिवार को कोर्ट जाना पड़ता है, मेडिकल बोर्ड बनाना पड़ता है और कई कानूनी औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं।
हरीश राणा जैसे मामलों में जहां मरीज 13 साल से कोमा में है और ठीक होने की कोई उम्मीद नहीं है, वहां परिवार का दर्द असहनीय होता है। एक तरफ बेटे को जीवित रखने की आस है तो दूसरी तरफ उसे इस पीड़ा में देखने का दर्द। ऐसे में इच्छा मृत्यु की मांग करना किसी भी मां-बाप के लिए सबसे कठिन फैसला होता है। यह मामला भारत में इच्छा मृत्यु से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया को और सरल बनाने की जरूरत पर भी सवाल उठाता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- Harish Rana की इच्छा मृत्यु (Passive Euthanasia) की प्रक्रिया AIIMS के पैलिएटिव केयर यूनिट में शुरू, ट्रैकियोस्टोमी ट्यूब और PEG फीडिंग ट्यूब हटाई गईं।
- 13 साल पहले पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद हरीश कोमा में गए, तब से लाइफ सपोर्ट पर जीवित थे।
- सुप्रीम कोर्ट ने माता-पिता की याचिका पर निष्क्रिय दया मृत्यु की अनुमति दी, डॉ. सीमा मिश्रा की अगुवाई में कमेटी कर रही निगरानी, 1-2 दिन में प्रक्रिया पूरी होने की आशंका।
- अस्पताल जाने से पहले ब्रह्मकुमारी गुरु मां ने हरीश को दिया भावुक संदेश, बूढ़े माता-पिता अशोक राणा और निर्मला देवी बिता रहे बेटे के आखिरी पल।













