Harbhajan Singh Old Video Controversy: पंजाब में एक बार फिर हरभजन सिंह विवादों में घिर गए हैं। भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद और पूर्व क्रिकेटर ने आम आदमी पार्टी सरकार को घेरने के लिए एक वीडियो शेयर किया, जो बाद में 2018 की पुरानी निकली। यह वीडियो फतेहगढ़ साहिब जिले के पिंड जलहण के सरकारी हाई स्कूल में शौचालयों की कथित खस्ताहाल स्थिति को दिखाती है।
देखा जाए तो यह पहली बार नहीं है जब हरभजन सिंह गुमराह करने वाली सामग्री शेयर करने के आरोपों का सामना कर रहे हैं। कुछ दिन पहले ही राजस्थान की एक वीडियो को पंजाब का बताकर शेयर करने पर उन्हें आलोचना झेलनी पड़ी थी।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि टर्बनेटर के नाम से मशहूर हरभजन सिंह, जो खुद को पंजाब का सच्चा हितैषी बताते हैं, बार-बार ऐसी गलतियां क्यों कर रहे हैं? क्या यह राजनीतिक एजेंडा है या सिर्फ लापरवाही?
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राजस्थान वीडियो विवाद के बाद फिर फंसे
दरअसल, हरभजन सिंह ने अपने X (पूर्व में Twitter) हैंडल पर लगातार दो वीडियो शेयर किए। पहली वीडियो में फतेहगढ़ साहिब जिले के पिंड जलहण के सरकारी हाई स्कूल में शौचालयों की खराब स्थिति दिखाई गई। वीडियो में एक NGO कार्यकर्ता यह बताता है कि लड़कियों के शौचालय में न तो छत है और न ही पानी की उचित व्यवस्था।
कार्यकर्ता का दावा है कि भारी गर्मी और उमस के दौरान, पानी की कमी के कारण छात्राओं को स्कूल के समय के दौरान पानी पीने से परहेज करना पड़ता है ताकि उन्हें बदबूदार शौचालयों का उपयोग न करना पड़े।
हरभजन ने पोस्ट के साथ लिखा: “सच्च ना बोलो नहीं तां तुहानू वी पेड ट्रोल कहि दित्ता जावेगा।” (सच मत बोलो नहीं तो तुम्हें भी पेड ट्रोल कह दिया जाएगा।)
सोशल मीडिया यूजर्स ने की पोल खोल
अगर गौर करें, तो वीडियो शेयर करने के कुछ घंटों के भीतर ही सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने इसकी प्रामाणिकता की जांच शुरू कर दी। कई यूजर्स ने यह दावा किया कि यह वीडियो 2018 में बनाई गई थी और YouTube पर उपलब्ध है।
समझने वाली बात यह है कि 2018 में पंजाब में कांग्रेस की सरकार थी, मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह थे। यानी यह वीडियो आम आदमी पार्टी के कार्यकाल की नहीं है।
सोशल मीडिया हैंडलर्स ने तुरंत उस वीडियो को खोज निकाला और उस तारीख को टैग किया जब यह वीडियो कथित तौर पर बनाई गई थी और YouTube पर प्रकाशित की गई थी। इसके बाद हरभजन के अकाउंट पर आलोचनाओं की बाढ़ आ गई।
एक यूजर ने लिखा: “हरभजन पाजी, यह वीडियो 2018 की है जब कांग्रेस की सरकार थी। आप भाजपा के एजेंट बनकर झूठ क्यों फैला रहे हो?”
दूसरे ने कहा: “एक दिन राजस्थान की वीडियो, दूसरे दिन 6 साल पुरानी वीडियो। क्या यही है आपकी पत्रकारिता?”
दूसरी वीडियो पर नहीं हुई आलोचना
दिलचस्प बात यह है कि हरभजन द्वारा शेयर की गई दूसरी वीडियो की कोई आलोचना नहीं हुई। इस वीडियो में लुधियाना जिले के पिंड तलवंडी के निवासियों ने एक लोक मिलनी कार्यक्रम के दौरान गिल विधानसभा क्षेत्र के विधायक जीवन सिंह संगोवाल को घेरा था।
साफ तौर पर गुस्से में आए ग्रामीणों ने बढ़ती नशे की समस्या और गांव में बुनियादी ढांचे की खस्ताहाल स्थिति समेत कई मुद्दे उठाए। उन्होंने विधायक पर कार्रवाई करने में असफल रहने का आरोप भी लगाया।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह वीडियो हालिया प्रतीत होती है और इसकी प्रामाणिकता पर किसी ने सवाल नहीं उठाए।
राजस्थान वीडियो विवाद: पहली बड़ी गलती
हरभजन की ये ताजा पोस्ट उस घटना के कुछ दिन बाद आई हैं जब पंजाब में उनके द्वारा एक वीडियो शेयर करने को लेकर सियासी तूफान उठा था। उस वीडियो में दो व्यक्ति कथित तौर पर नशे की हालत में दिखाई दे रहे थे, जिसे उन्होंने राज्य के “जॉम्बी ड्रग” संकट की उदाहरण के रूप में पेश किया था।
पंजाब पुलिस ने बाद में स्पष्ट किया कि वीडियो असल में राजस्थान के श्री गंगानगर में रिकॉर्ड की गई थी और इसका पंजाब से कोई संबंध नहीं था।
अपनी पोस्ट का बचाव करते हुए हरभजन ने कहा था कि इस तथ्य का कि खास वीडियो राजस्थान की थी, इसका मतलब यह नहीं है कि पंजाब में नशे का कोहराम मौजूद नहीं है।
कहने का मतलब साफ है कि हरभजन अपनी गलती मानने की बजाय उसे जस्टिफाई करने की कोशिश कर रहे थे।
AAP सरकार की प्रतिक्रिया
इस दौरान, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने पूर्व क्रिकेटर के आरोपों के खिलाफ कानूनी विकल्पों पर विचार करने की धमकी दी थी। उन्होंने कहा: “हरभजन सिंह बार-बार झूठी और गुमराह करने वाली सामग्री शेयर कर रहे हैं। हम इस मामले में कानूनी कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं।”
आम आदमी पार्टी के कई नेताओं ने हरभजन पर निशाना साधते हुए कहा कि वे भाजपा के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए जनता को गुमराह कर रहे हैं।
AAP नेता और विधायक राघव चड्ढा ने ट्वीट किया: “पहले राजस्थान की वीडियो, अब 2018 की पुरानी वीडियो। हरभजन सिंह जी, कृपया तथ्यों की जांच करें। जनता अब आपके इन हथकंडों को समझ चुकी है।”
राज्यसभा सीट विवाद भी याद आया
यह याद रखना जरूरी है कि इससे पहले मई में, पूर्व क्रिकेटर से राज्यसभा सदस्य बने हरभजन सिंह ने आम आदमी पार्टी पर राज्यसभा की टिकटें “बेचने” का आरोप लगाकर पंजाब की सियासी हलचल मचा दी थी।
X पर पोस्ट करते हुए हरभजन ने लिखा था: “मैनू गद्दार कहिण वालियां, पहिलां आपणे लोकां नूं पुच्छो कि पंजाब दी राज्य सभा सीट किन्ने विच विकी सी। मैं दस्सांगा कि किस नूं किन्नी रिश्वत मिली अते किस वल्लों मिली। अते पंजाब नूं लुट्टण अते लाला नूं माल पहुंचाउण लई किस नूं मंत्री जां चौंकीदार बणाया गया।”
(मुझे गद्दार कहने वालों, पहले अपने लोगों से पूछो कि पंजाब की राज्यसभा सीट कितने में बिकी थी। मैं बताऊंगा कि किसे कितनी रिश्वत मिली और किसकी तरफ से मिली। और पंजाब को लूटने और लाला को माल पहुंचाने के लिए किसे मंत्री या चौकीदार बनाया गया।)
इन आरोपों ने तब बड़ा विवाद खड़ा किया था, लेकिन हरभजन ने कोई सबूत पेश नहीं किया था।
क्रिकेटर से राजनेता तक का सफर
हरभजन सिंह, जो “टर्बनेटर” के नाम से मशहूर हैं, ने भारतीय क्रिकेट टीम के लिए एक शानदार करियर बनाया। वे दुनिया के सबसे सफल ऑफ-स्पिनरों में से एक माने जाते हैं।
लेकिन क्रिकेट से राजनीति में आने के बाद उनका सफर उतना आसान नहीं रहा। बार-बार विवादों में फंसना और गुमराह करने वाली सामग्री शेयर करने के आरोप उनकी छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
समझने वाली बात यह है कि सोशल मीडिया के युग में कोई भी सामग्री मिनटों में वायरल हो जाती है। लेकिन तथ्यों की जांच करना भी उतना ही आसान हो गया है। और जब एक सांसद गलत जानकारी शेयर करता है, तो यह और भी गंभीर मामला बन जाता है।
सोशल मीडिया की ताकत और जिम्मेदारी
आज के समय में सोशल मीडिया एक शक्तिशाली हथियार है। खासकर जब आपके पास हरभजन जैसे लाखों फॉलोअर्स हों। लेकिन इस शक्ति के साथ जिम्मेदारी भी आती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रभावशाली व्यक्तियों को किसी भी सामग्री को शेयर करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करनी चाहिए। खासकर जब वह राजनीतिक प्रकृति की हो।
दिल्ली विश्वविद्यालय में मीडिया अध्ययन के प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार कहते हैं: “जब एक सार्वजनिक हस्ती, विशेष रूप से एक सांसद, गलत जानकारी शेयर करता है, तो यह न केवल उनकी विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि लोगों को गुमराह भी करता है और सामाजिक ध्रुवीकरण बढ़ाता है।”
पंजाब की असली समस्याएं
हालांकि, इस पूरे विवाद के बीच एक बात साफ है – पंजाब में वास्तव में कई समस्याएं हैं। नशे की समस्या, स्कूलों की हालत, बुनियादी ढांचे की कमी – ये सभी वास्तविक मुद्दे हैं जिन पर ध्यान देने की जरूरत है।
लेकिन इन मुद्दों को उठाने का तरीका सही होना चाहिए। पुरानी या गलत वीडियो शेयर करके सरकार को घेरने की कोशिश करना न केवल अनैतिक है, बल्कि यह वास्तविक मुद्दों को भी कमजोर करता है।
सवाल उठता है कि क्या हरभजन सिंह इन गलतियों से सीखेंगे या आगे भी ऐसे ही विवादों में फंसते रहेंगे?
मुख्य बातें (Key Points):
- हरभजन सिंह ने फतेहगढ़ साहिब के स्कूल की खस्ताहाल स्थिति दिखाती वीडियो शेयर की जो 2018 की पुरानी निकली
- सोशल मीडिया यूजर्स ने तुरंत तथ्य-जांच कर वीडियो की असलियत सामने रख दी
- कुछ दिन पहले ही राजस्थान की वीडियो को पंजाब का बताकर शेयर करने पर विवाद हुआ था
- AAP सरकार ने कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है













