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The News Air - Breaking News - आखिरी घड़ी में Nayab Saini का पलटा फैसला, Akali Dal रैली छोड़ी!

आखिरी घड़ी में Nayab Saini का पलटा फैसला, Akali Dal रैली छोड़ी!

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैणी का संत लॉन्गोवाल की बरसी पर अकाली दल पुनर सुरजीत के मंच पर जाने का कार्यक्रम रद्द, भाजपा की आंतरिक बैठक के बाद लिया गया फैसला।

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
गुरूवार, 20 अगस्त 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, पंजाब, हरियाणा
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Cm Nayab Saini All Party Meeting
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Nayab Saini Longowal Rally: हरियाणा की राजनीति में गुरुवार को एक अहम मोड़ आया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैणी का आखिरी समय पर श्रोमणी अकाली दल (पुनर सुरजीत) की रैली में शामिल होने का कार्यक्रम रद्द हो गया। यह रैली संत हरचंद सिंह लॉन्गोवाल की 41वीं बरसी के मौके पर आयोजित की जानी थी। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाजपा के आंतरिक दबाव और आगामी चुनावों को देखते हुए यह फैसला लिया गया।

देखा जाए तो यह केवल एक कार्यक्रम रद्द करना नहीं है। बल्कि पंजाब और हरियाणा की राजनीति में एक बड़ा संकेत है। खासकर तब जब श्रोमणी अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात के बाद भाजपा-अकाली गठबंधन की अटकलें तेज हो गई थीं।

समझने वाली बात यह है कि एक तरफ तो भाजपा और मुख्य अकाली दल के बीच रिश्तों को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री का अकाली दल के एक अन्य धड़े के साथ मंच साझा करना राजनीतिक रूप से भ्रम की स्थिति पैदा कर सकता था।

🔍 यह भी पढ़ें- Haryana Bank Fraud: 590 करोड़ घोटाले पर CM Nayab Saini का बड़ा बयान

आखिरी घड़ी में क्यों बदला फैसला?

अहम सूत्रों के अनुसार, बुधवार को भारतीय जनता पार्टी की एक महत्वपूर्ण बैठक में इस मामले पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में यह चिंता जताई गई कि अगर मुख्यमंत्री सैणी अकाली दल (पुनर सुरजीत) के मंच को साझा करते हैं, तो इससे राजनीतिक संदेश गलत जा सकता है।

दिलचस्प बात यह है कि मंगलवार को मुख्यमंत्री सैणी की सुरक्षा टीम का एक दल लॉन्गोवाल पहुंचा था। वहां हेलीपैड के लिए जगह का निरीक्षण भी किया गया था। सीनियर नेता गोबिंद सिंह लॉन्गोवाल ने सुरक्षा दल को दो स्थानों पर हेलीपैड की जगह दिखाई थी। लेकिन अंतिम समय पर यह कार्यक्रम रद्द कर दिया गया।

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यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि तैयारियां पूरी हो चुकी थीं। सुरक्षा व्यवस्था तक देख ली गई थी। लेकिन फिर भी अचानक से यह निर्णय बदल गया। इससे साफ होता है कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस पर गंभीरता से विचार किया होगा।

💡 यह भी पढ़ें- AC Working Science: ठंडा नहीं कर रहा तो Mechanic बुलाने से पहले जानें

अकाली दल (पुनर सुरजीत) का पक्ष

श्रोमणी अकाली दल (पुनर सुरजीत) के मुख्य प्रवक्ता जगजीत सिंह कोहली ने बताया कि मंगलवार को मुख्यमंत्री हरियाणा की सुरक्षा टीम का दल लॉन्गोवाल आया था। तैयारियां पूरी की गई थीं और पहले तो मुख्यमंत्री सैणी के मंच पर आने का कार्यक्रम था। लेकिन अब प्रोग्राम रद्द होने की बात कही जा रही है।

उन्होंने कहा, “हमने सभी व्यवस्थाएं कर ली थीं। लेकिन अचानक से यह खबर मिली कि मुख्यमंत्री जी नहीं आ रहे हैं।”

अगर गौर करें, तो यह अकाली दल (पुनर सुरजीत) के लिए भी एक झटका है। क्योंकि हरियाणा के मुख्यमंत्री का आना उनके लिए एक बड़ी राजनीतिक उपलब्धि होती।

भाजपा का रुख और राजनीतिक समीकरण

भारतीय जनता पार्टी संगरूर की जिला अध्यक्ष दमन बाजवा ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैणी का पहले संत लॉन्गोवाल की बरसी समागम में आने का कार्यक्रम था। लेकिन अब वह रद्द हो गया है।

सूत्रों ने बताया कि अगर पुनर सुरजीत दल के मंच पर मुख्यमंत्री सैणी बैठते, तो उस मंच से केंद्र सरकार के खिलाफ भी कोई बयान आ सकता था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह जोखिम भाजपा नहीं उठाना चाहती थी।

और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी। दरअसल, हाल के दिनों में श्रोमणी अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात हुई थी। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि क्या भाजपा और अकाली दल फिर से गठबंधन की ओर बढ़ रहे हैं?

ऐसे में अगर मुख्यमंत्री सैणी अकाली दल के दूसरे धड़े (पुनर सुरजीत) के मंच पर जाते, तो यह एक नई राजनीतिक बहस को जन्म देता। यह पूरे समीकरण को गड़बड़ा सकता था।

आंतरिक विरोध भी एक कारण

सूत्रों ने यह भी बताया कि श्रोमणी अकाली दल (मुख्यधारा) के नेताओं ने भी आंतरिक रूप से सैणी के पुनर सुरजीत दल के मंच पर जाने का विरोध किया था। इससे साफ होता है कि पंजाब की राजनीति में अकाली दल के दोनों धड़ों के बीच की दूरी अभी भी गहरी है।

कहने का मतलब साफ है कि भाजपा किसी एक पक्ष को नाराज नहीं करना चाहती। अगर वह पुनर सुरजीत दल के करीब जाती, तो मुख्यधारा अकाली दल नाराज हो सकती थी। और अभी भाजपा के लिए अपने विकल्प खुले रखना जरूरी है।

क्या है राजनीतिक संदेश?

राजनीतिक हलकों में यह माना जा रहा है कि यह फैसला आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर लिया गया है। भाजपा इस समय पंजाब और हरियाणा दोनों में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में जुटी है।

ऐसे में किसी एक धड़े के साथ खुलकर मंच साझा करना, जबकि दूसरे धड़े के साथ गठबंधन की संभावना बनी हुई है, राजनीतिक रूप से जोखिम भरा हो सकता था। इसलिए भाजपा ने सावधानी बरतते हुए मुख्यमंत्री को इस कार्यक्रम से अलग रखने का फैसला किया।

सिआसी जानकार कह रहे हैं कि अगर मुख्यमंत्री सैणी आज अकाली दल (पुनर सुरजीत) के साथ मंच साझा कर लेते, तो आगामी चुनावों के मद्देनजर एक और नई सिआसी चर्चा छिड़ जानी थी। यह भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता था।

संत हरचंद सिंह लॉन्गोवाल: एक संक्षिप्त परिचय

संत हरचंद सिंह लॉन्गोवाल पंजाब के एक प्रमुख सिख नेता और धार्मिक व्यक्तित्व थे। उन्होंने 1980 के दशक में पंजाब में शांति स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार के साथ ऐतिहासिक समझौता किया था। इसे ‘राजीव-लॉन्गोवाल समझौता’ के नाम से जाना जाता है।

उनकी हत्या 20 अगस्त 1985 को की गई थी। हर साल उनकी बरसी पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और कार्यकर्ता श्रद्धांजलि देने के लिए इकट्ठा होते हैं। उन्हें पंजाब में शांति के लिए काम करने वाले एक महान नेता के रूप में याद किया जाता है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल यह साफ नहीं है कि मुख्यमंत्री सैणी भविष्य में किसी अन्य कार्यक्रम में अकाली दल (पुनर सुरजीत) के नेताओं के साथ मंच साझा करेंगे या नहीं। लेकिन इतना तय है कि भाजपा अपनी हर चाल को सोच-समझकर चल रही है।

हरियाणा और पंजाब की राजनीति में यह घटना एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। खासकर तब जब आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियां जोरों पर हैं।

यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा आने वाले समय में किस अकाली धड़े के साथ गठबंधन करती है या अकेले चुनाव लड़ने का फैसला करती है। फिलहाल तो यह तय है कि पार्टी अपने सभी विकल्प खुले रख रही है।


मुख्य बातें (Key Points):
  • हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैणी ने अंतिम समय पर अकाली दल (पुनर सुरजीत) की रैली में शामिल होने से मना कर दिया
  • यह कार्यक्रम संत हरचंद सिंह लॉन्गोवाल की 41वीं बरसी के मौके पर आयोजित था
  • भाजपा की आंतरिक बैठक में इस मामले पर चर्चा के बाद यह फैसला लिया गया
  • राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनाव और अकाली दल (मुख्यधारा) के साथ संभावित गठबंधन को देखते हुए यह कदम उठाया गया
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: नायब सिंह सैणी ने लॉन्गोवाल रैली से क्यों कदम पीछे खींचा?

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, भाजपा की आंतरिक बैठक में चिंता जताई गई कि अकाली दल (पुनर सुरजीत) के मंच पर जाना राजनीतिक रूप से भ्रम पैदा कर सकता है। खासकर जब मुख्य अकाली दल के साथ गठबंधन की संभावना बनी हुई है।

प्रश्न 2: संत हरचंद सिंह लॉन्गोवाल कौन थे?

संत हरचंद सिंह लॉन्गोवाल 1980 के दशक में पंजाब के प्रमुख सिख नेता थे। उन्होंने राजीव गांधी के साथ ऐतिहासिक शांति समझौता किया था। उनकी हत्या 20 अगस्त 1985 को हुई थी।

प्रश्न 3: क्या भाजपा और अकाली दल फिर से गठबंधन करेंगे?

हाल ही में सुखबीर सिंह बादल की PM मोदी से मुलाकात के बाद ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं। लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

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अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

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