LIVE | ...
रविवार, 6 सितम्बर 2026
🏅 सोना ... | 🥈 चांदी ...
The News Air
📈 NIFTY 50 ... | 🏦 NIFTY BANK ...
No Result
View All Result
  • होम
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • LIVE
  • राष्ट्रीय
  • अंतरराष्ट्रीय
  • पंजाब
  • सियासत
  • बिज़नेस
    • टेक्नोलॉजी
    • नौकरी
  • स्पेशल स्टोरी
  • धर्म
  • खेल
  • मनोरंजन
  • लाइफस्टाइल
    • काम की बातें
    • हेल्थ
  • WEB STORIES
  • होम
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • LIVE
  • राष्ट्रीय
  • अंतरराष्ट्रीय
  • पंजाब
  • सियासत
  • बिज़नेस
    • टेक्नोलॉजी
    • नौकरी
  • स्पेशल स्टोरी
  • धर्म
  • खेल
  • मनोरंजन
  • लाइफस्टाइल
    • काम की बातें
    • हेल्थ
  • WEB STORIES
No Result
View All Result
The News Air
No Result
View All Result

The News Air - Breaking News - Gurmeet Ram Rahim Parole: 16वीं बार जेल से बाहर, विवाद तेज

Gurmeet Ram Rahim Parole: 16वीं बार जेल से बाहर, विवाद तेज

डेरा सच्चा सौदा मुखी गुरमीत राम रहीम को फिर मिली 30 दिन की Parole, 2017 से 16वीं रिहाई पर सवाल।

Ajay Kumar by Ajay Kumar
मंगलवार, 26 मई 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, राष्ट्रीय
A A
0
Dera Sacha Sauda Chief Gurmeet Ram Rahim Singh
105
SHARES
697
VIEWS
ShareShareShareShareShare

Gurmeet Ram Rahim Parole पर मंगलवार को एक बार फिर सुनारिया जिला जेल से बाहर आ गया है। डेरा सच्चा सौदा के मुखी को इस बार 30 दिनों की पैरोल दी गई है। बलात्कार मामले में अगस्त 2017 में विशेष CBI न्यायालय द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद से यह 16वीं बार है जब उन्हें पैरोल या फरलो पर रिहा किया गया है। यह लगातार रिहाई न्याय व्यवस्था और पैरोल नीति पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

विवरण के अनुसार, गुरमीत राम रहीम मंगलवार सुबह करीब 6:35 बजे सख्त पुलिस सुरक्षा प्रबंधों के बीच एक SUV में जेल से बाहर निकले। इससे पहले जनवरी 2026 में भी उन्हें 40 दिनों की पैरोल दी गई थी।

🔍 यह भी पढ़ें- Gurmeet Ram Rahim Parole: रेप–मर्डर दोषी को 40 दिन की रिहाई

एक नजर में राम रहीम का मामला

देखा जाए तो यह मामला केवल एक व्यक्ति की रिहाई का नहीं, बल्कि पूरी न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता का है। गुरमीत राम रहीम को अपनी दो महिला शिष्याओं के साथ बलात्कार के मामले में 20 साल की सजा सुनाई गई थी। 2017 में पंचकूला की विशेष CBI अदालत ने उन्हें दोषी करार दिया था।

विवरणजानकारी
दोषसिद्धि का वर्षअगस्त 2017
अदालतविशेष CBI कोर्ट, पंचकूला
आरोपदो महिला शिष्याओं से बलात्कार
सजा20 साल कारावास
वर्तमान जेलसुनारिया जिला जेल, हरियाणा
कुल पैरोल/फरलो16 बार (2017 से)
नवीनतम पैरोल अवधि30 दिन
पिछली पैरोलजनवरी 2026 (40 दिन)
16 बार की रिहाई पर उठते सवाल

अगर गौर करें, तो 2017 से अब तक 16 बार पैरोल या फरलो मिलना कोई सामान्य बात नहीं है। सवाल उठता है कि जिस व्यक्ति को गंभीर अपराध में 20 साल की सजा सुनाई गई हो, उसे इतनी बार जेल के बाहर क्यों जाने दिया जा रहा है?

और बस यहीं से शुरू हुई विवाद की असली कहानी… महिला अधिकार संगठनों और पीड़ितों के वकीलों ने बार-बार इस पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह न्याय व्यवस्था का मजाक है और पीड़ितों के साथ धोखा है।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पैरोल की इतनी बार मंजूरी के पीछे क्या कारण हैं? क्या यह सिर्फ कानूनी प्रक्रिया का पालन है या फिर कोई राजनीतिक या सामाजिक दबाव भी काम कर रहा है?

💡 यह भी पढ़ें- DA Hike January 2026: 5% बढ़ोतरी से 63% होगा महंगाई भत्ता, जानें कितनी बढ़ेगी सैलरी

पैरोल और फरलो में क्या अंतर है

समझने वाली बात यह है कि पैरोल और फरलो दोनों अलग-अलग हैं। पैरोल आमतौर पर किसी आपातकालीन पारिवारिक कारण, गंभीर बीमारी या अन्य विशेष परिस्थितियों में दी जाती है। वहीं फरलो एक नियमित छुट्टी होती है जो लंबी सजा काट रहे कैदियों को समाज से जुड़े रहने के लिए दी जाती है।

लेकिन दिलचस्प बात यह है कि राम रहीम के मामले में पैरोल की मंजूरी इतनी बार और इतनी लंबी अवधि के लिए दी गई है कि यह सामान्य प्रक्रिया से हटकर लगती है।

2017 का फैसला और उसके बाद की हिंसा

जब अगस्त 2017 में CBI कोर्ट ने गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दिया था, तो हरियाणा और पंजाब में भारी हिंसा भड़क गई थी। डेरा समर्थकों ने सड़कों पर उपद्रव मचाया, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और कई लोगों की जान गई थी।

यह भी पढे़ं 👇

September 6 History

इतिहास के पन्नों से: 6 सितंबर को घटी ये बड़ी घटनाएं, लंदन की महान आग से लेकर मैगलन की ऐतिहासिक यात्रा तक

रविवार, 6 सितम्बर 2026
IMD Alert

IMD Alert: East Rajasthan-MP में Very Heavy Rainfall, दिल्ली में भी भारी बारिश, 6 राज्यों में Orange Warning

रविवार, 6 सितम्बर 2026
Breaking News Live Updates 6 September

Breaking News Live Updates 6 September 2026: Top Alerts, हर बड़ी खबर सबसे पहले

रविवार, 6 सितम्बर 2026
Aaj Ka Rashifal 6 September 2026

आज का राशिफल 6 सितंबर 2026: मेष से मीन तक सभी राशियों का भविष्यफल

रविवार, 6 सितम्बर 2026

उस समय सुरक्षा बलों को बड़ी संख्या में तैनात करना पड़ा था। पंचकूला, सिरसा और आसपास के इलाकों में कर्फ्यू लगाना पड़ा था। चिंता का विषय यह भी है कि हर बार जब राम रहीम को पैरोल मिलती है, तो सुरक्षा व्यवस्था पर भारी खर्च आता है।

पीड़ितों और महिला संगठनों की आपत्ति

महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह बार-बार की रिहाई पीड़ितों के लिए मानसिक यातना है। जिन महिलाओं ने हिम्मत जुटाकर अदालत में गवाही दी थी, उनके लिए यह देखना कि अपराधी बार-बार जेल से बाहर आ रहा है, बेहद दुखदायी है।

एक महिला संगठन की प्रतिनिधि ने कहा, “यह न्याय का मजाक है। अगर सजा सुनाई गई है तो उसे पूरी होनी चाहिए। पैरोल के नाम पर हर बार रिहा करना गलत संदेश देता है।”

राहत की बात तो यह होनी चाहिए थी कि न्याय मिलने के बाद पीड़ितों को शांति मिले, लेकिन हकीकत इसके उलट है।

🔍 यह भी पढ़ें- Punjab SKOCH Award: पराली जलाने में 94% की गिरावट, पंजाब को मिला राष्ट्रीय SKOCH Silver Award

राजनीतिक कनेक्शन पर सवाल

अगर गौर करें तो डेरा सच्चा सौदा का राजनीतिक प्रभाव कोई छिपी बात नहीं है। हरियाणा और पंजाब में चुनावों के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों ने डेरा के समर्थन की कोशिश की है। डेरा के लाखों अनुयायी हैं और उनके वोट किसी भी चुनाव में निर्णायक साबित हो सकते हैं।

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि राम रहीम को बार-बार पैरोल देने के पीछे राजनीतिक दबाव भी हो सकता है। हालांकि इसका कोई ठोस सबूत नहीं है, लेकिन समय-समय पर ऐसी अटकलें लगती रही हैं।

उम्मीद की किरण तभी दिखेगी जब न्याय व्यवस्था पूरी तरह से राजनीतिक दखल से मुक्त होकर काम करे।

कानूनी प्रक्रिया क्या कहती है

दिलचस्प बात यह है कि पैरोल देने के लिए जेल नियमों में स्पष्ट प्रावधान हैं। लेकिन इन नियमों की व्याख्या और उनका पालन कैसे किया जाए, यह जेल प्रशासन और संबंधित राज्य सरकार पर निर्भर करता है।

आमतौर पर गंभीर अपराधों में सजा काट रहे कैदियों को पैरोल देने से पहले कई बातों पर विचार किया जाता है – जैसे कैदी का व्यवहार, जेल में बिताया गया समय, पैरोल का कारण और सुरक्षा संबंधी चिंताएं।

लेकिन राम रहीम के मामले में यह सभी मानदंड कितने सख्ती से लागू किए जा रहे हैं, यह सवाल बना हुआ है।

सुनारिया जेल से सुरक्षा के बीच रवानगी

मंगलवार सुबह जब गुरमीत राम रहीम सुनारिया जेल से बाहर निकले, तो सख्त सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती की गई थी। उन्हें एक SUV में बैठाकर ले जाया गया।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि हर बार जब राम रहीम को पैरोल मिलती है, तो सुरक्षा पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। यह खर्च आखिरकार जनता के टैक्स से ही आता है।

अन्य मामले भी लंबित हैं

समझने वाली बात यह भी है कि राम रहीम के खिलाफ केवल बलात्कार का ही मामला नहीं है। उन पर पत्रकार राम चंदर छत्रपति की हत्या के मामले में भी आरोप हैं। इसके अलावा डेरा प्रबंधक रणजीत सिंह की हत्या के मामले में भी वह आरोपी हैं।

कई मामले अभी भी अदालतों में लंबित हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब कोई व्यक्ति इतने गंभीर आरोपों का सामना कर रहा हो, तो क्या उसे इतनी आसानी से पैरोल मिलनी चाहिए?

समाज पर क्या असर होता है

जब किसी दोषी को बार-बार पैरोल मिलती है, तो इसका समाज पर भी असर पड़ता है। यह संदेश जाता है कि अगर आप प्रभावशाली हैं या आपके पास बड़ी संख्या में समर्थक हैं, तो कानून आपके लिए लचीला हो सकता है।

यह खासकर उन पीड़ितों के लिए दुखदायी है जो न्याय की उम्मीद में अदालतों का दरवाजा खटखटाते हैं। अगर दोषी सजा काटने के बजाय बार-बार बाहर आता रहे, तो न्याय का मतलब ही खो जाता है।

अगले 30 दिन में क्या होगा

अब गुरमीत राम रहीम को 30 दिनों की पैरोल मिली है। इस दौरान वह अपने आश्रम या निर्धारित स्थान पर रहेंगे। पैरोल की शर्तों के अनुसार, उन्हें किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग नहीं लेना है और किसी भी तरह की भाषण या सभा नहीं करनी है।

लेकिन अतीत में ऐसा देखा गया है कि पैरोल के दौरान भी उनके समर्थक बड़ी संख्या में उनसे मिलने पहुंचते हैं। यह भी चिंता का विषय है क्योंकि यह सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है।

जानें पूरा मामला

Gurmeet Ram Rahim Parole का यह मामला केवल एक व्यक्ति की रिहाई का नहीं, बल्कि भारतीय न्याय व्यवस्था, पैरोल नीति और कानून के समान लागू होने का मामला है। जब आम अपराधियों को पैरोल मिलने में कठिनाई होती है, तो प्रभावशाली लोगों को इतनी बार रिहाई क्यों मिल जाती है?

यह सवाल तब तक जीवित रहेगा जब तक पैरोल प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही नहीं आती। न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि वह दिखना भी चाहिए।

मुख्य बातें (Key Points)
  • गुरमीत राम रहीम को 30 दिनों की पैरोल मिली, मंगलवार सुबह 6:35 बजे सुनारिया जेल से रिहा हुए।
  • अगस्त 2017 में दोषसिद्धि के बाद से यह 16वीं बार है जब उन्हें पैरोल/फरलो पर रिहा किया गया।
  • बलात्कार मामले में 20 साल की सजा सुनाई गई थी, पंचकूला की विशेष CBI अदालत ने दोषी करार दिया था।
  • बार-बार की रिहाई पर महिला संगठनों, पीड़ितों और कानूनी विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं, न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर असर पड़ रहा है।
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: गुरमीत राम रहीम को किस मामले में सजा हुई थी?

उत्तर: गुरमीत राम रहीम को अपनी दो महिला शिष्याओं के साथ बलात्कार के मामले में अगस्त 2017 में पंचकूला की विशेष CBI अदालत द्वारा दोषी करार दिया गया था और 20 साल की सजा सुनाई गई थी।

प्रश्न 2: राम रहीम को कितनी बार पैरोल या फरलो मिल चुकी है?

उत्तर: 2017 में सजा सुनाए जाने के बाद से यह 16वीं बार है जब गुरमीत राम रहीम को पैरोल या फरलो पर जेल से रिहा किया गया है। इस बार उन्हें 30 दिनों की पैरोल मिली है।

प्रश्न 3: बार-बार पैरोल मिलने पर विवाद क्यों है?

उत्तर: गंभीर अपराध में सजा काट रहे व्यक्ति को इतनी बार (16 बार) पैरोल मिलना न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। महिला संगठनों और पीड़ितों का कहना है कि यह न्याय का मजाक है और राजनीतिक या सामाजिक प्रभाव की वजह से हो सकता है।

ताज़ा खबरों के लिए हमसे जुड़ें
Google News
WhatsApp
Telegram
Previous Post

CNG Price Hike: 15 दिन में चौथा झटका, Petrol 100 पार

Next Post

CBSE Re-evaluation: 17000 आवेदनों में फंसे छात्र, हेल्पलाइन भी फेल

Ajay Kumar

Ajay Kumar

पत्रकारिता में एक दशक से अधिक का ठोस अनुभव रखने वाले अजय कुमार 'शोर से ज़्यादा सार' की पत्रकारिता पर दृढ़ विश्वास करते हैं। वर्तमान में वे The News Air में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे समाचारों की रणनीति, लेखन, तथ्य-सत्यापन (Fact-Checking) और सटीक प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं।पत्रकारिता का सफर और अनुभव - अजय कुमार का करियर ग्राउंड ज़ीरो की रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज़ डेस्क के कुशल प्रबंधन तक विस्तृत है। The News Air में पिछले 3 वर्षों से नेतृत्व करने से पहले, उन्होंने 'दैनिक जागरण' और 'सिटी न्यूज़' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके काम करने के तरीके को बेहद व्यावहारिक और तथ्य-आधारित बनाया है।विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र (Expertise & Beats) - वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा, स्पष्ट तथ्यों और निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं। उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है:राजनीतिक कवरेज: लोकसभा चुनावों और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड और डेस्क रिपोर्टिंग।कानूनी और संसदीय खबरें: संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों की नियमित और रियल-टाइम कवरेज।खोजी पत्रकारिता: ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ रिपोर्टिंग के जरिए अंदरूनी खबरों की पड़ताल।विश्वसनीयता और डिजिटल योगदान (Trust & Authority) - सटीक और प्रामाणिक ख़बरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें पाठकों के बीच एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और फेक न्यूज़ से लड़ने की दिशा में, अजय कुमार गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

Related Posts

September 6 History

इतिहास के पन्नों से: 6 सितंबर को घटी ये बड़ी घटनाएं, लंदन की महान आग से लेकर मैगलन की ऐतिहासिक यात्रा तक

रविवार, 6 सितम्बर 2026
IMD Alert

IMD Alert: East Rajasthan-MP में Very Heavy Rainfall, दिल्ली में भी भारी बारिश, 6 राज्यों में Orange Warning

रविवार, 6 सितम्बर 2026
Breaking News Live Updates 6 September

Breaking News Live Updates 6 September 2026: Top Alerts, हर बड़ी खबर सबसे पहले

रविवार, 6 सितम्बर 2026
Aaj Ka Rashifal 6 September 2026

आज का राशिफल 6 सितंबर 2026: मेष से मीन तक सभी राशियों का भविष्यफल

रविवार, 6 सितम्बर 2026
Sachin Pilot Punjab Congress Incharge

Congress Leadership Reshuffle: सचिन पायलट बने पंजाब के नए प्रभारी, भूपेश बघेल को मिली असम की जिम्मेदारी

शनिवार, 5 सितम्बर 2026
Sond

बिजली संकट: Punjab में 1,500 MW उत्पादन घटा, केंद्र पर कोयला कमी का आरोप

शनिवार, 5 सितम्बर 2026
Next Post
CBSE Re-evaluation

CBSE Re-evaluation: 17000 आवेदनों में फंसे छात्र, हेल्पलाइन भी फेल

Punjab CM Mann

CM Mann Prediction: कांग्रेस को बताया मुख्य प्रतिद्वंद्वी, सियासी बवाल

Chinese Yuan

Chinese Yuan: क्या खत्म होगी Dollar की बादशाहत? 6.8349 का सच

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

The News Air

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।

Google News Follow us on Google News

  • About
  • Editorial Policy
  • Privacy & Policy
  • Disclaimer & DMCA Policy
  • Contact

हमें फॉलो करें

No Result
View All Result
  • प्रमुख समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • सियासत
  • राज्य
    • पंजाब
    • चंडीगढ़
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • महाराष्ट्र
    • पश्चिम बंगाल
    • उत्तर प्रदेश
    • बिहार
    • उत्तराखंड
    • मध्य प्रदेश
    • राजस्थान
  • काम की बातें
  • नौकरी
  • बिज़नेस
  • टेक्नोलॉजी
  • मनोरंजन
  • धर्म
  • हेल्थ
  • स्पेशल स्टोरी
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
  • WEB STORIES

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।