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The News Air - Breaking News - CBSE Re-evaluation: 17000 आवेदनों में फंसे छात्र, हेल्पलाइन भी फेल

CBSE Re-evaluation: 17000 आवेदनों में फंसे छात्र, हेल्पलाइन भी फेल

लुधियाना केंद्र में 17 हजार से अधिक Re-evaluation अर्जियां, अध्यापकों की कमी और तकनीकी खराबी से परेशान छात्र, धुंधली कॉपी और गायब पन्नों की शिकायत।

Ajay Kumar by Ajay Kumar
मंगलवार, 26 मई 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, पंजाब
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CBSE Re-evaluation
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CBSE Re-evaluation के लिए लुधियाना स्थित CBSE के क्षेत्रीय कार्यालय में 17,000 से अधिक आवेदनों की बाढ़ आ गई है। कक्षा 12वीं के नतीजे आने के बाद छात्रों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बड़ी संख्या में विद्यार्थी अपनी उत्तर-पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन की मांग कर रहे हैं और स्पष्ट खामियों की ओर इशारा कर रहे हैं, जहां डिजिटल रूप से मूल्यांकन की गई शीट पर परीक्षकों द्वारा दिए गए अंक CBSE की वेबसाइट पर अपलोड किए गए कुल स्कोर से मेल नहीं खा रहे।

इस निराशा को और बढ़ाते हुए, बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर लगातार तकनीकी खराबी आ रही है। बोर्ड सूत्रों ने खुलासा किया है कि उपलब्ध अध्यापकों की भारी कमी के कारण पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया धीमी गति से चल रही है, जिससे छात्रों और शिक्षकों दोनों में व्यापक चिंता पैदा हो गई है।

🔍 यह भी पढ़ें- CBSE बड़ा बदलाव: Class 9-10 में 3 Languages अनिवार्य, दो भारतीय भाषाएं जरूरी

एक नजर में समस्या का पैमाना

देखा जाए तो यह केवल एक-दो छात्रों की समस्या नहीं है। लुधियाना क्षेत्रीय कार्यालय में विभिन्न विषयों और स्ट्रीम के लिए 17,000 से अधिक Re-evaluation आवेदन जमा हो चुके हैं। यह संख्या इतनी बड़ी है कि एक विशाल बैकलॉग बन गया है।

समस्या का क्षेत्रविवरण
कुल आवेदन17,000+ (लुधियाना केंद्र)
मुख्य शिकायतमार्किंग में गणना की गलती
तकनीकी समस्यावेबसाइट बार-बार क्रैश होना
अध्यापक की कमीगंभीर स्तर पर
धुंधली कॉपीकई छात्रों को मिली
गायब पन्नेकुछ मामलों में
डुप्लीकेट पेजएक ही पन्ना दो बार अपलोड
हेल्पलाइन स्थितिकाम नहीं कर रही
मार्किंग में गड़बड़ी की शिकायत

अगर गौर करें, तो सबसे बड़ी समस्या यह है कि डिजिटल कॉपी पर परीक्षक द्वारा दिए गए अंक और अंतिम परिणाम में दिखाए गए अंक मेल नहीं खा रहे। एक छात्रा ने बताया कि जब उसने अपनी उत्तर-पुस्तिका की डिजिटल कॉपी डाउनलोड की, तो पाया कि प्रत्येक उत्तर पर दिए गए अंकों को जोड़ने पर जो कुल आता है, वह रिजल्ट में दिखाए गए कुल अंकों से अलग था।

और बस यहीं से शुरू हुई छात्रों की परेशानी की असली कहानी… जिन छात्रों ने महीनों मेहनत की, जिनका करियर इन अंकों पर निर्भर है, वे अब सिस्टम की गड़बड़ियों का शिकार हो रहे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि CBSE ने 2026 से कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के लिए On-Screen Marking (OSM) प्रणाली लागू करने का फैसला किया था। यह भौतिक से डिजिटल मूल्यांकन की ओर बदलाव था। नई प्रणाली के तहत, उत्तर-पुस्तिकाओं को स्कैन करके कंप्यूटर पर मूल्यांकन किया जाना था।

🔍 यह भी पढ़ें- CBSE 12th Result 2026 में On Screen Marking पर विवाद, बोर्ड ने AI इस्तेमाल के आरोपों पर दी सफाई

OSM सिस्टम का उद्देश्य और वास्तविकता

समझने वाली बात यह है कि OSM प्रणाली का उद्देश्य क्या था:

  • कुल गणना को स्वचालित करना
  • मानवीय गलती को कम करना
  • पारदर्शिता में सुधार करना
  • यात्रा की जरूरत के बिना परीक्षकों की व्यापक भागीदारी को सक्षम बनाना

लेकिन हकीकत यह है कि जो सिस्टम गलतियां कम करने के लिए लाया गया था, वही सिस्टम अब गड़बड़ियों का स्रोत बन गया है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि तकनीक का इस्तेमाल तभी सफल होता है जब उसे सही तरीके से लागू किया जाए और पर्याप्त ट्रेनिंग दी जाए।

गायब पन्ने और डुप्लीकेट पेज का मामला

अराजकता को और बढ़ाते हुए, गंभीर गलतियां सामने आई हैं। कुछ विद्यार्थियों ने देखा कि उनकी उत्तर-पुस्तिका का एक ही पन्ना पोर्टल पर दो बार अपलोड किया गया था। वहीं कुछ अन्य मामलों में महत्वपूर्ण पन्ने पूरी तरह से गायब थे।

एक छात्र ने बताया, “मैंने अपनी गणित की कॉपी चेक की तो पाया कि एक सवाल का पेज दो बार स्कैन हो गया और दूसरे सवाल का पेज ही गायब है। अब मुझे उस सवाल के नंबर कैसे मिलेंगे?”

इसके अलावा, छात्र सर्वर की खराबियों और अपनी उत्तर-पुस्तिकाओं की धुंधली डिजिटल कॉपी से जूझ रहे हैं, जिससे स्वतंत्र तस्दीक करना लगभग असंभव हो गया है। सवाल उठता है कि जब स्कैनिंग की गुणवत्ता ही खराब हो, तो छात्र कैसे अपनी कॉपी की सही जांच कर पाएंगे?

🔍 यह भी पढ़ें- CBSE Revaluation Portal Issue: 12वीं के छात्रों की बढ़ी परेशानी

वेबसाइट और हेल्पलाइन की विफलता

चिंता का विषय यह भी है कि जब छात्र मदद के लिए CBSE से संपर्क करने की कोशिश करते हैं, तो वहां भी निराशा हाथ लगती है। स्पष्टता प्राप्त करने की कोशिशें नाकाम रही हैं, क्योंकि विद्यार्थियों की शिकायत है कि CBSE द्वारा जारी किया गया हेल्पलाइन नंबर सिर्फ एक बीप के बाद ही कट जाता है।

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एक अभिभावक ने गुस्से में कहा, “हमने 50 बार से ज्यादा हेल्पलाइन नंबर पर कॉल किया, लेकिन कभी कोई उठाता ही नहीं। ईमेल का भी कोई जवाब नहीं आता। आखिर हम कहां जाएं?”

दूसरी ओर, CBSE की वेबसाइट पर भी लगातार तकनीकी खराबी आ रही है। छात्रों को अपनी डिजिटल कॉपी डाउनलोड करने में घंटों लग जाते हैं। कई बार वेबसाइट क्रैश हो जाती है या पेज लोड नहीं होता।

लुधियाना में 17,000+ आवेदनों का बैकलॉग

बोर्ड सूत्रों ने बताया कि लुधियाना क्षेत्रीय कार्यालय में विभिन्न विषयों के लिए 17,000 से अधिक Re-evaluation आवेदन जमा हो चुके हैं। यह संख्या इतनी बड़ी है कि अध्यापकों की मौजूदा संख्या से इसे संभालना मुश्किल हो गया है।

उपलब्ध अध्यापकों की भारी कमी के कारण पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया धीमी चल रही है। अध्यापकों को हिदायत दी जा रही है कि जब उनके विषयों से संबंधित पेपर समीक्षा के लिए तैयार हों तो वे क्षेत्रीय केंद्र पर रिपोर्ट करें।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि गर्मी के मौसम में शिक्षकों पर पेपर चेकिंग के लिए कार्यालय जाने का दबाव डाला जा रहा है। एक अध्यापक ने कहा, “हम पहले ही शुरुआती जांच के दौरान भारी मुश्किलों का सामना कर चुके हैं। अब फिर से गर्मी में रोज लुधियाना जाना पड़ रहा है।”

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डिजिटल मार्किंग प्रक्रिया में क्या हुआ गलत

दिलचस्प बात यह है कि OSM प्रणाली में प्रत्येक मूल्यांकनकर्ता को लगभग 20 उत्तर पुस्तकें दी गई थीं। लेकिन कई शिक्षकों ने शिकायत की है कि:

  • स्कैन की गई कॉपियां धुंधली थीं
  • कभी-कभी पेज उल्टे स्कैन हो जाते थे
  • सिस्टम में लॉगिन करने में दिक्कत आती थी
  • अंकों को दर्ज करते समय सर्वर धीमा हो जाता था

अगर गौर करें, तो तकनीकी तैयारी की कमी साफ दिख रही है। एक नई प्रणाली लागू करने से पहले व्यापक ट्रायल और ट्रेनिंग जरूरी होती है, जो शायद पर्याप्त नहीं थी।

छात्रों को मिली थी सीमित समय सीमा

CBSE ने वेबसाइट पर बेमिसाल ट्रैफिक के कारण कक्षा 12वीं की उत्तर-पुस्तिकाओं की स्कैन की गई फोटोकॉपी प्राप्त करने की अंतिम तिथि 25 मई तक बढ़ा दी थी। विद्यार्थियों को स्कैन की गई कॉपी प्राप्त करने के बाद वेरिफिकेशन/पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन देने के लिए दो दिन तक का समय मिला।

लेकिन समझने वाली बात यह है कि जब वेबसाइट ही ठीक से काम नहीं कर रही थी, तो दो दिन का समय पर्याप्त नहीं था। कई छात्रों ने बताया कि उन्हें अपनी कॉपी डाउनलोड करने में ही एक-दो दिन लग गए, और फिर उनके पास जांच करने और आवेदन देने का समय ही नहीं बचा।

विषयवार समस्याएं

राहत की बात तो यह होनी चाहिए थी कि सभी विषयों में मार्किंग सही हो, लेकिन कई विषयों में विशेष रूप से समस्याएं सामने आई हैं:

गणित और विज्ञान विषयों में: कई छात्रों ने शिकायत की कि स्टेप-वाइज मार्किंग सही नहीं हुई। कुछ स्टेप्स के अंक गायब हैं या गलत जोड़े गए हैं।

भाषा के पेपर में: व्याकरण और रचनात्मक लेखन के सेक्शन में अंकों का वितरण स्पष्ट नहीं है।

सामाजिक विज्ञान में: लंबे उत्तरों के पेज गायब होने की सबसे ज्यादा शिकायत इसी विषय में आई है।

अभिभावकों और छात्रों का गुस्सा

अभिभावकों और छात्रों में भारी निराशा और गुस्सा है। एक अभिभावक ने कहा, “हमारे बच्चों ने पूरे साल मेहनत की। अब सिस्टम की गड़बड़ी के कारण उनका भविष्य दांव पर लग गया है। कॉलेज एडमिशन शुरू हो रहे हैं, लेकिन सही मार्कशीट नहीं मिल रही।”

छात्रों का कहना है कि Re-evaluation में समय लगेगा, और तब तक उनके पसंदीदा कॉलेजों में प्रवेश की समय सीमा निकल जाएगी। यह उनके करियर के साथ खिलवाड़ है।

उम्मीद की किरण तभी दिखेगी जब CBSE इस मामले को गंभीरता से ले और तेजी से Re-evaluation पूरा करे।

शिक्षकों की भी मुश्किलें

अध्यापक भी बराबर निराश हैं। एक शिक्षक ने कहा, “हमने शुरुआती जांच में ही भारी मुश्किलों का सामना किया। सिस्टम धीमा था, कॉपियां धुंधली थीं। अब हमें फिर से बुलाया जा रहा है Re-evaluation के लिए, वो भी गर्मी में।”

कई शिक्षकों ने यह भी कहा कि उन्हें पर्याप्त ट्रेनिंग नहीं दी गई थी OSM सिस्टम के लिए। जल्दबाजी में लागू की गई यह प्रणाली अब सबके लिए मुसीबत बन गई है।

CBSE को क्या करना चाहिए

देखा जाए तो CBSE को तुरंत कुछ कदम उठाने चाहिए:

  1. वेबसाइट और सर्वर को सुधारें: तकनीकी खराबियों को दूर करने के लिए बेहतर IT सपोर्ट लगाएं।
  2. हेल्पलाइन को सक्रिय करें: छात्रों की शिकायतों को सुनने और जवाब देने के लिए पर्याप्त स्टाफ लगाएं।
  3. अधिक शिक्षक नियुक्त करें: Re-evaluation को तेजी से पूरा करने के लिए अतिरिक्त शिक्षकों की व्यवस्था करें।
  4. समय सीमा बढ़ाएं: छात्रों को अधिक समय दें ताकि वे अपनी कॉपी ठीक से जांच सकें।
  5. स्पष्ट संचार: नियमित अपडेट जारी करें कि Re-evaluation कब तक पूरा होगा।
जानें पूरा मामला

CBSE Re-evaluation का यह मामला केवल अंकों की गड़बड़ी का नहीं है। यह एक बड़े सिस्टम की विफलता को दर्शाता है जहां तकनीक को बिना तैयारी के लागू किया गया। लाखों छात्रों का भविष्य इन अंकों पर निर्भर है, और किसी भी गड़बड़ी का सीधा असर उनके करियर पर पड़ता है।

जब तक CBSE इस समस्या को गंभीरता से नहीं लेगा और ठोस कदम नहीं उठाएगा, तब तक छात्रों और अभिभावकों की परेशानी जारी रहेगी।

मुख्य बातें (Key Points)
  • लुधियाना CBSE कार्यालय में 17,000 से अधिक Re-evaluation आवेदन जमा हो चुके हैं, बड़ा बैकलॉग बन गया है।
  • मुख्य शिकायत: डिजिटल कॉपी पर दिए गए अंक और अंतिम परिणाम में अंतर, गायब पन्ने, डुप्लीकेट पेज और धुंधली कॉपियां।
  • वेबसाइट बार-बार क्रैश हो रही है, हेल्पलाइन काम नहीं कर रही, छात्रों को मदद नहीं मिल पा रही।
  • अध्यापकों की भारी कमी के कारण Re-evaluation प्रक्रिया धीमी, 2026 में लागू OSM प्रणाली में तकनीकी खामियां सामने आईं।
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: CBSE Re-evaluation के लिए लुधियाना में कितने आवेदन आए हैं?

उत्तर: लुधियाना स्थित CBSE के क्षेत्रीय कार्यालय में विभिन्न विषयों और स्ट्रीम के लिए 17,000 से अधिक Re-evaluation आवेदन जमा हो चुके हैं, जिससे बड़ा बैकलॉग बन गया है।

प्रश्न 2: छात्रों को डिजिटल कॉपी में क्या समस्याएं मिल रही हैं?

उत्तर: छात्रों को मुख्य रूप से तीन समस्याएं मिल रही हैं: परीक्षक द्वारा दिए गए अंकों और अंतिम स्कोर में अंतर, कुछ पन्ने पूरी तरह गायब या डुप्लीकेट, और धुंधली स्कैन की गई कॉपियां जिन्हें पढ़ना मुश्किल है।

प्रश्न 3: CBSE की हेल्पलाइन क्यों काम नहीं कर रही?

उत्तर: छात्रों की शिकायत है कि CBSE द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर सिर्फ एक बीप के बाद ही कट जाता है और कोई जवाब नहीं मिलता। साथ ही वेबसाइट पर भी लगातार तकनीकी खराबी आ रही है, जिससे मदद मिलना मुश्किल हो गया है।

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