Gold Silver Price Drop : साल 2025 के पहले छह महीने निवेशकों के लिए बड़े उतार-चढ़ाव वाले रहे हैं। आलमी पद्धर पर चल रही भू-राजनीतिक हलचलों और आर्थिक नीतियों के कारण घरेलू बाजार बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। बीती 29 जनवरी के रिकॉर्ड पद्धर से बाद सोने और चांदी की कीमतों में भारी कमी आई है।
देखा जाए तो सोना करीब 20 फीसदी और चांदी 43 फीसदी तक सस्ती हो गई है। सिर्फ सराफा बाजार ही नहीं, बल्कि शेयर बाजार भी इस दबाव से बच नहीं सका। इस दौरान BSE के सूचकांक सेंसेक्स में 11 फीसदी और NSE के निफ्टी में 8.6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
कीमतों में गिरावट के मुख्य कारण
माहिरों के मुताबिक इस मंदवाड़े के मुख्य तौर पर दो बड़े कारण सामने आए हैं:
पहला कारण: अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नए चेयरमैन केविन वार्श द्वारा अपनाए गए सख्त रुख के कारण निवेशकों को व्याज दरों में जल्दी कटौती की उम्मीद खत्म होती जाप रही है। इससे डॉलर मजबूत हुआ है और सोने की मांग पर असर पड़ा है।
दूसरा कारण: अमेरिका-ईरान जंग के कारण पैदा हुआ तणाव है, जिसने ग्लोबल ग्रोथ की रफ्तार को ब्रेक लगा दिए हैं। बढ़ती महंगाई ने शेयर बाजार का सेंटिमेंट कमजोर कर दिया है।
अगर गौर करें तो ये दोनों कारक एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक साथ प्रभावित कर रहे हैं।
कितनी गिरी कीमतें: एक नजर में
| संपत्ति | 29 जनवरी का स्तर (अनुमानित) | वर्तमान गिरावट | प्रभाव |
|---|---|---|---|
| सोना | रिकॉर्ड ऊंचाई | 20% गिरावट | निवेशकों को नुकसान |
| चांदी | रिकॉर्ड ऊंचाई | 43% गिरावट | सबसे ज्यादा प्रभावित |
| BSE सेंसेक्स | – | 11% गिरावट | बड़ा सुधार |
| NSE निफ्टी | – | 8.6% गिरावट | मिडकैप-स्मालकैप प्रभावित |
क्या खरीदारी का सही समय है
बाजार के माहिरों का मानना है कि मौजूदा मंदी के बावजूद आने वाला समय निवेशकों के लिए अच्छा हो सकता है।
केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजे केडिया के अनुसार, शॉर्ट टर्म में ETF (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) से पैसा निकलने के कारण सोने में 2 से 5 फीसदी तक और गिरावट आ सकती है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि साल के अंत तक इसमें 12% से 15% की तेजी देखने को मिल सकती है।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि यह गिरावट एक खरीदारी का मौका हो सकती है, खासकर उन निवेशकों के लिए जो लंबी अवधि के लिए सोचते हैं।
शेयर बाजार में क्या होगा
इक्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक जी. चोकालिंगम का कहना है कि अगले छह महीनों में स्मालकैप और मिडकैप शेयर, लार्जकैप शेयरों (सेंसेक्स-निफ्टी) के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
इसकी वजह यह है कि कई स्मालकैप शेयर अपने सितंबर 2024 के ऊंचे पद्धर से काफी नीचे आ चुके हैं और अब बेहतर वैल्यूएशन पर उपलब्ध हैं।
समझने वाली बात है कि मौजूदा गिरावट ने छोटे शेयरों को आकर्षक बना दिया है।
तकनीकी विश्लेषण क्या कहता है
SBI सिक्योरिटीज के सुदीप शाह के मुताबिक निफ्टी इस समय कंसोलिडेशन (स्थिरता) के दौर से गुजर रहा है। इसलिए 23,730 से 23,700 का पद्धर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट के रूप में काम करेगा।
हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की भारतीय बाजार में पूरी तरह वापसी के लिए अभी 1 से 2 तिमाहियों का समय लग सकता है। वे रुपए की विनिमय दर (एक्सचेंज रेट) में स्थिरता आने की उडीक कर रहे हैं।
यह सावधानी का संकेत है कि तुरंत बड़ा उछाल की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
निवेशकों के लिए रणनीति
इस उथल-पुथल भरे समय में निवेशकों को क्या करना चाहिए:
सोने में निवेश के लिए:
- अगर कीमतें और 2-5% गिरती हैं तो खरीदारी करें
- साल के अंत तक 12-15% रिटर्न की उम्मीद
- लंबी अवधि के लिए निवेश करें
शेयर बाजार के लिए:
- स्मालकैप और मिडकैप में मौके तलाशें
- लार्जकैप में सावधानी बरतें
- FII की वापसी का इंतजार करें
जोखिम प्रबंधन:
- सभी अंडे एक टोकरी में न रखें
- विविधता (डाइवर्सिफिकेशन) बनाए रखें
- इमोशनल ट्रेडिंग से बचें
डॉलर की मजबूती का असर
अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने भारतीय बाजारों को दोहरी मार दी है। जब डॉलर मजबूत होता है तो सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों की मांग घटती है। साथ ही विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिका में निवेश करने लगते हैं।
यह चक्र तब तक जारी रह सकता है जब तक फेडरल रिजर्व अपना सख्त रुख बनाए रखता है।
मुख्य बातें (Key Points):
- 29 जनवरी के रिकॉर्ड से सोना 20% और चांदी 43% तक गिरी
- BSE सेंसेक्स में 11% और निफ्टी में 8.6% गिरावट
- फेड के सख्त रुख और अमेरिका-ईरान तणाव मुख्य कारण
- माहिर कहते हैं साल के अंत तक सोने में 12-15% तेजी संभव












