GMADA Land Price को लेकर मोहाली में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) ने सेक्टर 87 में व्यावसायिक क्षेत्र के विस्तार के लिए जमीन के दाम घोषित किए, लेकिन इसके बाद से ही चारों तरफ से इसकी तीखी आलोचना शुरू हो गई है। अथॉरिटी ने जमीन मालिकों से जमीन अधिग्रहण के लिए 4.27 करोड़ से लेकर 5.61 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक की दरें तय की हैं।
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चार गांवों की 196 एकड़ जमीन पर नजर
शुक्रवार को जमीन मालिकों की मौजूदगी में सोहाणा, नानूमाजरा, मानकमाजरा और संभालकी गांवों की कुल 196.44 एकड़ जमीन के लिए यह ऐलान किया गया। यह जमीन सेक्टर 87 के व्यावसायिक हब का विस्तार करने के लिए ली जा रही है।
GMADA के लैंड एक्विजिशन कलेक्टर ने चारों गांवों के लिए अलग-अलग दरें तय कीं, जिसमें सोहाणा में सबसे ज्यादा कीमत रखी गई।
| गांव | क्षेत्रफल (एकड़) | दर (प्रति एकड़) |
|---|---|---|
| सोहाणा | 65 | 5,61,48,209 रुपये |
| नानूमाजरा | 111.46 | 4,55,62,302 रुपये |
| मानकमाजरा | 19.66 | 5,03,47,947 रुपये |
| संभालकी | 2 कनाल | 4,26,65,055 रुपये |
नकद या लैंड पूलिंग, मिलेगा विकल्प
अथॉरिटी के मुताबिक पुनर्वास और पुनर्स्थापन के लिए मूल्य अलग से घोषित किया जाएगा। जमीन मालिकों के पास तय बाजार दर पर नकद मुआवजा लेने या लैंड पूलिंग नीति चुनने की आजादी होगी। यानी किसानों को दो विकल्पों में से कोई एक चुनने का मौका दिया गया है।
किसानों का गुस्सा: “पांच गुना कम कीमत पर लूट”
नंबरदार हरविंदर सिंह सोहाणा और अन्य ग्रामीणों ने इस फैसले का जोरदार विरोध किया। उनका कहना है कि यह मोहाली का सबसे महंगा इलाका है और खुले बाजार में यहां जमीन की कीमत करीब 40 से 50 करोड़ रुपये प्रति एकड़ है।
उनके मुताबिक, “GMADA हमसे बाजार दर से पांच गुना कम कीमत पर जबरदस्ती जमीन अधिग्रहण कर रहा है।” यह बात सुनकर कोई भी समझ सकता है कि किसानों में नाराजगी क्यों इतनी गहरी है।
राजनीतिक दलों ने भी उठाई आवाज
भाजपा पार्षद गुरप्रीत कौर उभा और भाजपा नेता हरदेव सिंह उभा ने जमीन मालिकों के लिए 50 करोड़ रुपये प्रति एकड़ की मांग रखी। वहीं शिरोमणि अकाली दल के जिला अध्यक्ष परविंदर सिंह सोहाणा ने तय कीमत को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि GMADA खुद इस इलाके में 80 से 90 करोड़ रुपये प्रति एकड़ में जमीन बेचता है, फिर भी इतने प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र में जमीन महज 5 करोड़ रुपये प्रति एकड़ में अधिग्रहीत की जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि आज मोहाली जिले में कहीं भी इतनी कम कीमत पर जमीन उपलब्ध नहीं है।
44 लिखित आपत्तियां दर्ज
अधिग्रहण प्रक्रिया के दौरान चारों गांवों के जमीन मालिकों की ओर से कुल 44 लिखित आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। इससे साफ होता है कि यह विरोध सिर्फ बोलचाल तक सीमित नहीं, बल्कि आधिकारिक स्तर पर भी दर्ज हो चुका है।
विकास बनाम किसानों का हक, कौन सही?
देखा जाए तो यह मामला सिर्फ जमीन के दाम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल उठाता है कि विकास प्राधिकरण अपनी ही जमीन को बाद में कई गुना ऊंचे दाम पर क्यों बेचता है। जब GMADA खुद विकसित जमीन को 80-90 करोड़ रुपये प्रति एकड़ में नीलाम करता है, तो किसानों से महज 4-5 करोड़ रुपये में जमीन लेना सवालों के घेरे में आना स्वाभाविक है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अगर यही रुख जारी रहा, तो आने वाले समय में सरकारी भूमि अधिग्रहण परियोजनाओं के खिलाफ किसानों का भरोसा और कमजोर हो सकता है, जिसका असर राज्य के विकास कार्यों पर भी पड़ सकता है।
क्या है पूरा मामला
GMADA मोहाली के सेक्टर 87 में व्यावसायिक क्षेत्र का विस्तार करना चाहता है, जिसके लिए चार गांवों की करीब 196 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की जा रही है। जमीन मालिकों का आरोप है कि तय की गई कीमत बाजार दर से कहीं कम है, जबकि अथॉरिटी खुद इसी इलाके में विकसित जमीन को बहुत ऊंचे दाम पर बेचती है।
मुख्य बातें (Key Points)
- GMADA ने सोहाणा, नानूमाजरा, मानकमाजरा और संभालकी गांवों की जमीन के दाम घोषित किए।
- दरें 4.27 करोड़ से 5.61 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक तय, किसानों ने इसे बाजार भाव से पांच गुना कम बताया।
- भाजपा और अकाली दल नेताओं ने भी मुआवजा बढ़ाने की मांग उठाई।
- अधिग्रहण प्रक्रिया के खिलाफ अब तक 44 लिखित आपत्तियां दर्ज हो चुकी हैं।










