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The News Air - Breaking News - ED GMADA Land Scam: 10,000 करोड़ के घोटाले का बड़ा खुलासा

ED GMADA Land Scam: 10,000 करोड़ के घोटाले का बड़ा खुलासा

मोहाली के GMADA दफ्तर में तीन दिन की छापेमारी के बाद ED ने खुलासा किया कि जमीनों की कीमतें घटाकर सरकारी खजाने को लगभग 10 हजार करोड़ रुपए का चूना लगाया गया।

Ajay Kumar by Ajay Kumar
शुक्रवार, 25 सितम्बर 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, पंजाब
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ED GMADA Land Scam
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GMADA Land Scam – मोहाली की जमीन नीलामी में हुए कथित घोटाले ने पंजाब की राजनीति में तूफान खड़ा कर दिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तीन दिन की गहन तलाशी के बाद खुलासा किया है कि ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) की अनविकसित जमीनों की आरक्षित कीमतों को नीलामी से पहले गैर-कानूनी तरीके से घटाया गया, जिससे सरकारी खजाने को करीब 10,000 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचा। इस मामले में आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के नाम सामने आए हैं।

देखा जाए तो यह मामला सिर्फ जमीन की नीलामी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें राजनीतिक दखल, प्रशासनिक मिलीभगत और वित्तीय अनियमितताओं का एक पूरा जाल उजागर हुआ है। ED की जांच में सामने आया कि कैसे बंद कमरों में ली गई बैठकों में बड़े फैसले लिए गए और सरकारी फाइलें दफ्तर के बाहर ले जाई गईं।

🔍 यह भी पढ़ें- Mohali Land Scam: ED ने कोर्ट से मांगी FIR, Altus Builders पर ₹348 करोड़ की हेराफेरी का आरोप


तीन दिन की छापेमारी में क्या-क्या मिला?

ED ने मोहाली स्थित GMADA के मुख्यालय में लगातार तीन दिनों तक तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान अधिकारियों ने दर्जनों फाइलें, कंप्यूटर सिस्टम और मोबाइल फोन जब्त किए। जांच एजेंसी का दावा है कि जब्त किए गए फोन्स से हवाला लेन-देन से जुड़ी चैट्स मिली हैं, जो इस पूरे मामले की गंभीरता को और बढ़ा देती हैं।

अहम बात यह है कि यह छापेमारी अचानक नहीं हुई। दरअसल, CBI ने मेसर्स तिरुपति इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर्स जगमोहन गर्ग और मनमोहन गर्ग के खिलाफ 238 करोड़ रुपए की बैंक धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था। इसी मामले की जांच के दौरान GMADA के भीतर हुई कथित अनियमितताओं की परतें खुलनी शुरू हुईं।

कैसे घटाई गई जमीनों की कीमत?

ED के अनुसार, GMADA की अनविकसित जमीनों की रिजर्व कीमतों (Reserve Prices) को नीलामी से ठीक पहले जानबूझकर कम किया गया। यह काम इतनी चालाकी से किया गया कि बाहर से किसी को पता नहीं चला। लेकिन जब विशेषज्ञों ने इन जमीनों की वास्तविक बाजार कीमत से तुलना की, तो सामने आया कि यहां लगभग 10,000 करोड़ रुपए की गड़बड़ी हुई है।

दिलचस्प बात यह है कि ये फैसले सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया से बाहर जाकर लिए गए। ED का आरोप है कि इससे सियासतदानों और बिल्डरों को सीधा फायदा पहुंचाने का इरादा था।

AAP नेताओं पर क्या हैं आरोप?

ED ने अपनी जांच में सत्येंद्र जैन (आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता) और मनीष सिसोदिया (AAP के पंजाब प्रभारी) के नाम विशेष रूप से उजागर किए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि दोनों नेता GMADA के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से गैर-रस्मी बैठकें करते थे, जिनमें मास्टर प्लान, जमीन अधिग्रहण, मुआवजे की राशि तय करना और नीलामी जैसे अहम नीतिगत फैसलों पर सीधे प्रभाव डाला जाता था।

समझने वाली बात यह है कि ये बैठकें सरकारी दफ्तरों में नहीं, बल्कि चंडीगढ़ के सेक्टर 39 स्थित कोठी नंबर 926 में होती थीं। यह कोठी AAP नेता सनी सिंह आहलूवालिया के नाम पर आवंटित है। ED के अनुसार, GMADA के अधिकारी पूडा भवन से सरकारी फाइलें लेकर इस कोठी पर पहुंचते थे।

और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी। सत्येंद्र जैन के OSD (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) अमरेंद्र झा ने बिना किसी आधिकारिक पद के पूडा भवन में एक कमरा हथिया रखा था, जहां से कथित तौर पर निर्देश जारी किए जाते थे।

57 करोड़ की गैर-कानूनी छूट का मामला

जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ। GMADA अधिकारियों की मिलीभगत से मेसर्स रेमीगेट इंफ्रा डेवलपर्स को 57 करोड़ रुपए के सरकारी बकाए की गैर-कानूनी छूट दी गई। इतना ही नहीं, रद्द किए गए प्लॉट्स को दोबारा उसी कंपनी को आवंटित कर दिया गया। यह सब कैसे संभव हुआ? ED का मानना है कि इसके पीछे राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक भ्रष्टाचार का गठजोड़ था।

किन-किन अधिकारियों के नाम सामने आए?

इस पूरे प्रकरण में कई वरिष्ठ IAS और PCS अधिकारियों के नाम उभरे हैं। इनमें शामिल हैं:

पदनामसेवा
प्रमुख सचिवविकास गर्गIAS
मुख्य प्रशासकसंदीप ऋषिIAS
पूर्व मुख्य प्रशासकराजीव गुप्ताIAS
सहायक मुख्य प्रशासकअमरिंदर माल्हीPCS
भूमि अधिग्रहण कलेक्टररोहित जिंदलPCS

ये सभी अधिकारी ED की जांच के दायरे में हैं और इनसे पूछताछ की जा रही है।

पंजाब सरकार ने क्यों दायर की Habeas Corpus याचिका?

जैसे ही ED की कार्रवाई शुरू हुई, पंजाब सरकार ने रातोंरात पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में Habeas Corpus (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका दायर कर दी। सरकार का आरोप था कि अधिकारियों को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखा जा रहा है और उन्हें अपना काम करने से रोका जा रहा है।

हालांकि, हाई कोर्ट द्वारा नियुक्त वारंट अधिकारी रजन नंदा की जांच रिपोर्ट में साफ हो गया कि किसी भी अधिकारी को गैर-कानूनी ढंग से नहीं रोका गया था और दफ्तर का कामकाज सामान्य रूप से चल रहा था। यह रिपोर्ट आने के बाद पंजाब सरकार ने अपनी याचिका वापस ले ली।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि सरकार की यह हड़बड़ी किस बात का संकेत थी? क्या यह सिर्फ अपने अधिकारियों की सुरक्षा का मामला था या इसके पीछे कुछ और भी था?

जमीन घोटाले का पूरा खेल कैसे खुला?

यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब CBI ने तिरुपति इंफ्रा प्रोजेक्ट्स के खिलाफ बैंक धोखाधड़ी का केस दर्ज किया। जांच के दौरान CBI को GMADA में हुई अनियमितताओं के सुराग मिले। फिर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत जांच शुरू की। तीन दिन की गहन छानबीन में जो तथ्य सामने आए, वे चौंकाने वाले थे।

ED को मिले साक्ष्यों के अनुसार, नीलामी की पूरी प्रक्रिया में हेराफेरी की गई। जिन जमीनों की वास्तविक बाजार कीमत कहीं ज्यादा थी, उन्हें बेहद कम कीमत पर नीलाम किया गया। और इसका सबसे बड़ा फायदा किसे हुआ? कुछ चुनिंदा बिल्डर्स और डेवलपर्स को।

आम आदमी को कैसे पहुंचा नुकसान?

जब सरकारी जमीनें उचित मूल्य पर नहीं बेची जाती हैं, तो सबसे बड़ा नुकसान आम जनता को होता है। 10,000 करोड़ रुपए की यह राशि पंजाब के विकास कार्यों, सड़कों, अस्पतालों, स्कूलों में लग सकती थी। लेकिन कथित तौर पर यह रकम कुछ चुनिंदा लोगों की जेबों में चली गई।

अगर गौर करें तो यह सिर्फ एक वित्तीय घोटाला नहीं है, बल्कि यह जनता के भरोसे के साथ खिलवाड़ है। लोगों ने जिस पार्टी को भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का चेहरा मानकर वोट दिया, उसी के नेताओं पर आज इतने गंभीर आरोप लग रहे हैं।

हवाला लेन-देन के भी मिले सबूत

ED ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि जब्त किए गए मोबाइल फोन्स से हवाला लेन-देन से संबंधित चैट्स मिली हैं। हवाला एक अवैध तरीका है जिसमें बिना बैंकिंग चैनल के पैसों का लेन-देन किया जाता है। यह आमतौर पर काले धन को सफेद करने या अवैध लेन-देन छिपाने के लिए इस्तेमाल होता है।

सवाल उठता है कि GMADA के अधिकारियों को हवाला ट्रांजेक्शन की क्या जरूरत थी? क्या यह रकम उसी जमीन घोटाले से जुड़ी थी? ED की आगे की जांच इन सवालों के जवाब देगी।

राजनीतिक घमासान शुरू

इस खुलासे के बाद पंजाब में राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। विपक्षी दलों ने AAP सरकार पर जमकर हमला बोला है। भाजपा और कांग्रेस नेताओं ने कहा है कि जो पार्टी ईमानदारी का दावा करती थी, वही आज सबसे बड़े घोटाले में फंसी नजर आ रही है।

वहीं, AAP ने इन आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। पार्टी का कहना है कि यह केंद्र सरकार द्वारा विपक्षी दलों को दबाने की साजिश है। लेकिन सवाल यह है कि अगर ये आरोप निराधार हैं, तो फाइलों में इतने सबूत कैसे मिल गए?

आगे क्या होगा?

ED की जांच अभी जारी है। एजेंसी ने कहा है कि जल्द ही और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। कई और लोगों से पूछताछ की जा सकती है। अगर आरोप साबित होते हैं, तो इस मामले में गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।

पंजाब की जनता इस पूरे मामले पर बारीकी से नजर रख रही है। उन्हें यह जानने का पूरा हक है कि उनकी सरकारी जमीनों के साथ क्या हुआ और किसने उनके साथ धोखा किया।


क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

GMADA Land Scam सिर्फ पंजाब का मामला नहीं है। यह पूरे देश में सरकारी संपत्तियों की नीलामी और प्रबंधन पर सवाल खड़े करता है। यह दिखाता है कि कैसे राजनीतिक हस्तक्षेप और प्रशासनिक भ्रष्टाचार मिलकर आम जनता के हितों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

इस मामले से यह भी सीख मिलती है कि जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता और जवाबदेही कितनी जरूरी है। साथ ही, यह भी साबित होता है कि कोई भी राजनीतिक दल या नेता कानून से ऊपर नहीं है।


मुख्य बातें (Key Points):

• ED ने GMADA office में 3 दिन की छापेमारी की और 10,000 करोड़ रुपए के घोटाले का खुलासा किया

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• सत्येंद्र जैन और मनीष सिसोदिया पर चंडीगढ़ की कोठी में गैर-रस्मी बैठकें कर नीतिगत फैसलों को प्रभावित करने का आरोप

• जमीनों की रिजर्व कीमतें गैर-कानूनी तरीके से घटाई गईं, जिससे बिल्डर्स को फायदा पहुंचा

• CBI की 238 करोड़ की bank fraud जांच से इस पूरे मामले का खुलासा शुरू हुआ

• कई वरिष्ठ IAS और PCS अधिकारी जांच के दायरे में, जब्त फोन्स से हवाला लेन-देन के सबूत मिले


FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: GMADA क्या है और यह घोटाला क्यों महत्वपूर्ण है?

GMADA (Greater Mohali Area Development Authority) मोहाली क्षेत्र के विकास के लिए गठित एक सरकारी संस्था है। यह घोटाला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें लगभग 10,000 करोड़ रुपए की सरकारी संपत्ति कम कीमत पर बेची गई, जिससे जनता के पैसों का भारी नुकसान हुआ।

प्रश्न 2: AAP नेताओं सत्येंद्र जैन और मनीष सिसोदिया पर क्या आरोप हैं?

ED का आरोप है कि दोनों नेता GMADA अधिकारियों से गैर-रस्मी बैठकें करते थे और मास्टर प्लान, जमीन अधिग्रहण और नीलामी जैसे महत्वपूर्ण फैसलों को प्रभावित करते थे। ये बैठकें चंडीगढ़ के सेक्टर 39 की एक निजी कोठी में होती थीं, जहां सरकारी फाइलें ले जाई जाती थीं।

प्रश्न 3: ED की जांच में अब तक क्या मिला है?

ED को तीन दिन की तलाशी में कई अहम दस्तावेज, कंप्यूटर डेटा और मोबाइल फोन मिले हैं। जब्त फोन्स से हवाला लेन-देन की चैट्स मिली हैं। साथ ही, 57 करोड़ रुपए की गैर-कानूनी छूट और रद्द प्लॉट्स के पुनः आवंटन के सबूत भी मिले हैं।

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पत्रकारिता में एक दशक से अधिक का ठोस अनुभव रखने वाले अजय कुमार 'शोर से ज़्यादा सार' की पत्रकारिता पर दृढ़ विश्वास करते हैं। वर्तमान में वे The News Air में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे समाचारों की रणनीति, लेखन, तथ्य-सत्यापन (Fact-Checking) और सटीक प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं।पत्रकारिता का सफर और अनुभव - अजय कुमार का करियर ग्राउंड ज़ीरो की रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज़ डेस्क के कुशल प्रबंधन तक विस्तृत है। The News Air में पिछले 3 वर्षों से नेतृत्व करने से पहले, उन्होंने 'दैनिक जागरण' और 'सिटी न्यूज़' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके काम करने के तरीके को बेहद व्यावहारिक और तथ्य-आधारित बनाया है।विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र (Expertise & Beats) - वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा, स्पष्ट तथ्यों और निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं। उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है:राजनीतिक कवरेज: लोकसभा चुनावों और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड और डेस्क रिपोर्टिंग।कानूनी और संसदीय खबरें: संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों की नियमित और रियल-टाइम कवरेज।खोजी पत्रकारिता: ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ रिपोर्टिंग के जरिए अंदरूनी खबरों की पड़ताल।विश्वसनीयता और डिजिटल योगदान (Trust & Authority) - सटीक और प्रामाणिक ख़बरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें पाठकों के बीच एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और फेक न्यूज़ से लड़ने की दिशा में, अजय कुमार गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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