Farmer ID Registration Issue: उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, किसानों की Farmer ID बनाने का अभियान अंतिम चरण में पहुंच चुका है, लेकिन अभी भी करीब 1.07 लाख किसानों की फार्मर आईडी नहीं बन सकी है।
जिले में कुल 5 लाख 36 हजार 854 किसानों की फार्मर आईडी बनाने का लक्ष्य रखा गया था। इसके लिए 1915 गांवों में कई बार विशेष शिविर भी लगाए गए।
कृषि विभाग के अनुसार अब तक करीब 4 लाख 29 हजार 512 किसानों की फार्मर आईडी बन चुकी है। लेकिन बड़ी संख्या में किसानों का पंजीकरण अभी भी अधूरा है।
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क्यों अटकी है फार्मर आईडी?
अब सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में किसानों की फार्मर आईडी क्यों अटकी है?
कृषि विभाग के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी वजह आधार कार्ड और खतौनी में दर्ज नाम या अन्य विवरण का अलग-अलग होना है। जब दोनों दस्तावेजों की जानकारी मेल नहीं खाती, तो सत्यापन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती है और फार्मर आईडी जारी नहीं हो पाती है।
समझने वाली बात यह है कि अगर आपके आधार में “राम कुमार” लिखा है और खतौनी में “रामकुमार” या “राम कुमार वर्मा” लिखा है, तो सिस्टम इसे अलग-अलग व्यक्ति मान लेता है।
| समस्या | प्रभावित किसान | समाधान |
|---|---|---|
| आधार-खतौनी में नाम अलग | अधिकांश | दोनों में एक जैसा नाम कराएं |
| अंश निर्धारण लंबित | हजारों | तहसील से संपर्क करें |
| गांव से बाहर | कई हजार | मोबाइल पर पंजीकरण |
| लापरवाही | कुछ सौ | तुरंत शिविर में जाएं |
अंश निर्धारण भी समस्या
इसके अलावा कई मामलों में तहसील स्तर पर अंश निर्धारण की प्रक्रिया भी लंबित है। यही वजह है कि कई किसानों का पंजीकरण पूरा नहीं हो सका है।
कुछ किसान रोजगार के कारण गांव से बाहर हैं, इसलिए भी अब तक अपना पंजीकरण वह नहीं करा पाए हैं।
अगर गौर करें तो यह एक बड़ी समस्या है क्योंकि बिना फार्मर आईडी के किसान कई सरकारी योजनाओं से वंचित रह जाएंगे।
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लापरवाही पर हुई थी कारवाई
रिपोर्ट के मुताबिक फार्मर आईडी बनाने में लापरवाही को लेकर पहले कुछ कर्मचारियों पर कारवाई भी हो चुकी है। बावजूद इसके अभी तक लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं हो पाया है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि जिम्मेदार अधिकारियों पर दबाव बढ़ाया जा रहा है।
फिर से लगेंगे शिविर
कृषि विभाग का कहना है कि यदि शासन से निर्देश मिलते हैं, तो फिर गांव-गांव फिर से विशेष शिविर लगाए जाएंगे ताकि जिन किसानों की फार्मर आईडी अभी तक नहीं बनी है, उनका पंजीकरण पूरा कराया जा सके।
साथ ही जो किसान अभी आवेदन कर रहे हैं, उनके मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जा सके।
क्यों जरूरी है फार्मर आईडी?
दरअसल फार्मर आईडी अब सिर्फ एक दस्तावेज नहीं रह गई है। भविष्य में:
- किसान सम्मान निधि
- सरकारी गोदामों से खाद-बीज वितरण
- कृषि विभाग की अन्य योजनाओं का लाभ
इन सभी के लिए यह महत्वपूर्ण होती जा रही है।
दिलचस्प बात यह है कि बिना फार्मर आईडी के PM Kisan की अगली किस्त भी रुक सकती है।
किसानों को क्या करना चाहिए?
इसलिए जिन किसानों के आधार और खतौनी के विवरण में अंतर है, उन्हें जल्द से जल्द अपने दस्तावेजों में सुधार कराने की सलाह दी जा रही है।
यह करें:
- आधार और खतौनी में नाम एक जैसा कराएं
- यदि अंश निर्धारण लंबित है तो तहसील से संपर्क करें
- नजदीकी फार्मर आईडी शिविर में जाएं
- यदि गांव से बाहर हैं तो मोबाइल पर संपर्क करें
विभाग की कोशिश
उप कृषि निदेशक सुभाष मौर्या के अनुसार कर्मचारी गांव-गांव जाकर फार्मर रजिस्ट्री का काम कर रहे हैं। जो किसान गांव में नहीं हैं, उनसे मोबाइल पर संपर्क कर उनका पंजीकरण कराने का प्रयास भी किया जा रहा है।
समझने वाली बात यह है कि विभाग अपनी पूरी कोशिश कर रहा है, लेकिन किसानों को भी सक्रिय होना होगा।
मुख्य बातें (Key Points):
- देवरिया में 1.07 लाख किसानों की फार्मर आईडी नहीं बन सकी
- आधार-खतौनी में नाम का अलग होना सबसे बड़ी समस्या
- 1915 गांवों में शिविर लगाए गए लेकिन लक्ष्य अधूरा
- फार्मर आईडी के बिना PM Kisan और अन्य योजनाओं से वंचित
- जल्द से जल्द दस्तावेजों में सुधार कराएं










