EVM Court Order: कोर्ट से चुनाव आयोग को लगा बड़ा झटका। EVM में कैसे होती है वोट चोरी, खुलेगा बड़ा राज। Bombay High Court ने दिए EVM की पूरी जांच करने के आदेश।
पहली बार EVM की जांच कराने को मजबूर हुआ चुनाव आयोग। EVM Court Order एक ऐतिहासिक फैसला है। एक तरफ बीजेपी विरोधी दलों को EVM पर बिल्कुल भरोसा नहीं दिख रहा है।
EVM हैक होने और इसके जरिए एक सियासी दल को फायदा पहुंचाने के आरोप चुनाव आयोग पर लगातार लग रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ है बीजेपी और चुनाव आयोग जिनका कहना है कि EVM पूरी तरह से सुरक्षित है।
चुनाव आयोग मजबूर
लेकिन जब बात होती है कि इसकी जांच होनी चाहिए तो दोनों ही इसके लिए तैयार नहीं होते। एक तरफ चुनाव आयोग एक ही रट लगाए रहता है कि उसकी EVM की सुरक्षा बेहद मजबूत है।
EVM Court Order से अब चुनाव आयोग मुश्किल में फंस गया है। EVM की जांच उसे करानी ही पड़ेगी और इसकी पूरी जांच होगी।
क्योंकि इस बार डिमांड नहीं, आदेश आया है। और यह आदेश दिया है हाई कोर्ट ने। पहली बार EVM की फुल जांच के आदेश हाईकोर्ट ने दिए हैं।
महाराष्ट्र चुनाव का मामला
हाई कोर्ट से चुनाव आयोग को बड़ा झटका लगा है क्योंकि पहली बार EVM की पूरी जांच करवाने के लिए चुनाव आयोग अब मजबूर होता दिखाई दे रहा है।
अब तक तो सियासी दल ही EVM की जांच की मांग कर रहे थे। लेकिन चुनाव आयोग की तरफ से हर बार सियासी दलों की डिमांड को नकार दिया जाता था।
EVM Court Order में इस बार चुनाव आयोग से डिमांड नहीं की गई है बल्कि आदेश दिया गया है। यह बात तो आप लोग जानते ही हैं कि महाराष्ट्र का विधानसभा चुनाव भी सवालों में है।
आरिफ नसीम खान की याचिका
यहां पर भी EVM को लेकर सवाल खड़े हुए थे। मरकड़बाड़ी में तो लोगों ने बैलेट से वोटिंग कराने की तैयारी भी कर ली थी।
लेकिन प्रशासन और चुनाव आयोग ने ग्रामीणों की कोशिश को फेल कर दिया था। महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के बाद राहुल गांधी ने EVM से छेड़छाड़ और वोट चोरी का आरोप भी लगाया था।
EVM Court Order अब महाराष्ट्र में हुए चुनाव के मामले में ही आया है। भारत के चुनावी इतिहास में पहली बार उम्मीदवार के सामने EVM की जांच की जाएगी।
ऐतिहासिक फैसला
कोर्ट ने यह ऐतिहासिक फैसला सीनियर कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री आरिफ नसीम खान की उस याचिका पर दिया है।
जिसमें उन्होंने महाराष्ट्र में चांदीवली विधानसभा चुनाव के नतीजों को चुनौती दी थी। खान शिवसेना विधायक दिलीप लांडे के खिलाफ चुनाव हार गए थे।
EVM Court Order पर बताया जाए तो दिलीप भाऊ साहिब लांडे को कुल 144641 वोट मिले थे। वहीं मोहम्मद आरिफ नसीम खान को 144016 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर आए थे।
12 फरवरी को कोर्ट का संकेत
इसी पर खान ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और EVM के जरिए धांधली की आशंका जताई। 12 फरवरी को हाईकोर्ट ने कहा था कि EVM की जांच होनी चाहिए।
अब जस्टिस सोमशेखर सुंदरेसन ने EVM की जांच करने का आदेश दिया है। EVM Court Order में कोर्ट ने कहा है कि आवेदक के लिए जब भी EVM की जांच की अनुमति का आदेश दिया जाता है।
उसके 2 से 3 महीने के अंदर ही चुनाव आयोग को मशीनों का निरीक्षण पूरा करवाना होगा। कोर्ट ने यह भी कहा है कि भारत में इस तरह से कभी उम्मीदवार और अन्य अधिकारियों की उपस्थिति में EVM की जांच नहीं की गई है।
16-17 अप्रैल को जांच
मुंबई उपनगर जिले की डिप्टी रिटर्निंग ऑफिसर अर्चना कदम ने कहा कि 16 और 17 अप्रैल को यह डायग्नोस्टिक चेक होगा।
EVM Court Order के तहत अब खान की मौजूदगी में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) EVM की जांच करेगा। यह पहली बार होगा जब उम्मीदवार की उपस्थिति में जांच होगी।
कोर्ट के इस आदेश के बाद से विपक्षी खेमे में खुशी की लहर है। विपक्षी दलों का कहना है कि यह फैसला उनके लंबे संघर्ष का नतीजा है।
विपक्ष की जीत
उनका दावा है कि अब सच सामने आएगा। चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर जो सवाल उठे हैं उनका जवाब भी मिलेगा। कई नेताओं ने इसे लोकतंत्र की जीत भी बताया है।
EVM Court Order को विपक्ष का यह भी कहना है कि हम लगातार कहते रहे हैं कि EVM की जांच होनी चाहिए। अब कोर्ट ने भी यही कहा है। यह हमारे लिए बड़ी जीत है।
ऐसा इसलिए क्योंकि EVM को लेकर विपक्ष के यह आरोप नए नहीं हैं। लेकिन हर बड़े चुनाव के समय फिर से चर्चा में आ जाते हैं।
विपक्ष के मुख्य आरोप
विपक्ष का आरोप था कि EVM में गड़बड़ी हो सकती है यानी हैकिंग हो सकती है। विपक्षी दलों का कहना है कि EVM को हैक किया जा सकता है या उनमें छेड़छाड़ संभव है।
कुछ नेताओं ने दावा किया कि मशीनें पहले से सेट की जा सकती हैं। हालांकि चुनाव आयोग का कहना है कि EVM स्टैंडअलोन होती है इसलिए हैकिंग संभव नहीं है।
EVM Court Order के बाद विपक्ष की दूसरी मांग VVPAT से मिलान की भी रही है। विपक्ष लगातार मांग करता रहा है कि VVPAT पर्चियों का 100% मिलान होना चाहिए।
VVPAT मिलान की मांग
अभी एक विधानसभा सीट पर केवल पांच बूथों पर ही VVPAT की गिनती होती है। मशीन खराब होने की शिकायतें भी विपक्ष की तरफ से आती रही हैं।
चुनाव के दौरान कई बार ऐसी शिकायतें आती रही हैं कि बटन दबाने पर दूसरी पार्टी को वोट चला जाता है। विपक्ष इन घटनाओं को गंभीर गड़बड़ी मानता है।
EVM Court Order के बाद लेकिन चुनाव आयोग कहता है कि यह तकनीकी खराबी होती है ना कि छेड़छाड़। हालांकि विपक्ष का सवाल है कि जब भी यह खराबी EVM में आती है तब वोट सिर्फ बीजेपी के पक्ष में ही क्यों जाता है?
पारदर्शिता की कमी
इसके अलावा विपक्ष पारदर्शिता की कमी का भी दावा करता है। विपक्ष का कहना है कि EVM का सोर्स कोड सार्वजनिक नहीं है।
मशीन की जांच स्वतंत्र एजेंसियों से नहीं कराई जाती है। EVM Court Order के बाद अब यह सब बदल सकता है।
इन्हीं सब मुद्दों को लेकर EVM पर जिस तरह की शंकाएं हैं, उसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं अभी तक विपक्ष की तरफ से लगाई गई हैं।
बीजेपी सतर्क
कोर्ट ने VVPAT स्लिप मिलान बढ़ाने जैसे कुछ निर्देश भी दिए हैं। लेकिन EVM को पूरी तरह से खारिज नहीं किया है।
EVM Court Order ने इस मुद्दे को फिर गरमा दिया है। जिसके बाद बीजेपी बेहद सतर्क नजर आ रही है। पार्टी का कहना है कि EVM पूरी तरह सुरक्षित और विश्वसनीय है।
और पहले भी कई बार इसकी जांच हो चुकी है। लेकिन जानकारों का कहना है कि कोर्ट के इस आदेश के बाद पार्टी पर दबाव बढ़ गया है।
जानें पूरा मामला
EVM पर लंबे समय से विवाद चल रहा है। विपक्ष लगातार आरोप लगाता रहा कि मशीनों में गड़बड़ी होती है। लेकिन चुनाव आयोग और बीजेपी ने हमेशा इनकार किया।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भी EVM पर सवाल उठे। आरिफ नसीम खान चुनाव हार गए। उन्होंने कोर्ट में याचिका दाखिल की।
EVM Court Order में Bombay High Court ने ऐतिहासिक फैसला दिया। अब पहली बार उम्मीदवार की उपस्थिति में EVM की जांच होगी। 16-17 अप्रैल को BEL जांच करेगा। विपक्ष इसे अपनी बड़ी जीत मान रहा है।
मुख्य बातें (Key Points)
• EVM Court Order: Bombay High Court ने EVM की पूरी जांच का आदेश दिया, चुनाव आयोग को बड़ा झटका
• आरिफ नसीम खान की याचिका पर फैसला, महाराष्ट्र चांदीवली सीट का मामला, 625 वोटों से हारे थे
• पहली बार उम्मीदवार की उपस्थिति में होगी जांच, 16-17 अप्रैल को BEL करेगा डायग्नोस्टिक चेक
• विपक्ष ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया, EVM हैकिंग, VVPAT मिलान, पारदर्शिता के मुद्दे उठाए गए थे
• 2-3 महीने में जांच पूरी करनी होगी, बीजेपी पर दबाव बढ़ा, चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर असर













