LIVE | ...
सोमवार, 22 जून 2026
🏅 सोना ... | 🥈 चांदी ...
The News Air
📈 NIFTY 50 ... | 🏦 NIFTY BANK ...
No Result
View All Result
  • होम
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • LIVE
  • राष्ट्रीय
  • अंतरराष्ट्रीय
  • पंजाब
  • सियासत
  • बिज़नेस
    • टेक्नोलॉजी
    • नौकरी
  • स्पेशल स्टोरी
  • धर्म
  • खेल
  • मनोरंजन
  • लाइफस्टाइल
    • काम की बातें
    • हेल्थ
  • WEB STORIES
  • होम
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • LIVE
  • राष्ट्रीय
  • अंतरराष्ट्रीय
  • पंजाब
  • सियासत
  • बिज़नेस
    • टेक्नोलॉजी
    • नौकरी
  • स्पेशल स्टोरी
  • धर्म
  • खेल
  • मनोरंजन
  • लाइफस्टाइल
    • काम की बातें
    • हेल्थ
  • WEB STORIES
No Result
View All Result
The News Air
No Result
View All Result

The News Air - Breaking News - Election Commission SIR Valid: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को मतदाता सूची जांचने का अधिकार दिया

Election Commission SIR Valid: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को मतदाता सूची जांचने का अधिकार दिया

Supreme Court ने Special Intensive Revision को वैध ठहराया, चुनाव आयोग नागरिकता आधार पर कर सकता है मतदाता सूची की जांच

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
मंगलवार, 2 जून 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, सियासत
A A
0
Election Commission SIR Valid
104
SHARES
693
VIEWS
ShareShareShareShareShare

Election Commission SIR Valid: क्या भारत का निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) नागरिकता की जांच कर सकता है? क्या मतदाता सूची से किसी का नाम हटाया जा सकता है? पिछले करीब एक साल से Special Intensive Revision (SIR) को लेकर जो विवाद चल रहा था, उस पर Supreme Court of India ने अपना अहम फैसला सुना दिया है। देखा जाए तो यह फैसला भारतीय लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट ने Association for Democratic Reforms बनाम भारतीय चुनाव आयोग मामले में मतदाता सूचियों में विशेष गहन पुनरीक्षण को वैध ठहराया है और कहा है कि चुनाव आयोग द्वारा किया जा रहा काम उसके अधिकार क्षेत्र में है।

🔍 यह भी पढ़ें- Punjab Municipal Elections: चार नगर कौंसलों में 10 जून को होगा मतदान

SIR क्या है? समझिए पूरी कहानी

सबसे पहले समझते हैं कि आखिर यह SIR (Special Intensive Revision) है क्या? दरअसल मतदाता सूची को शुद्ध करने की एक प्रक्रिया है जिसे एसआईआर के रूप में जाना जाता है। इस प्रक्रिया में Election Commission ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि हम एक-एक वोटर को वेरीफाई करेंगे और उसके आधार पर इलेक्टोरल रोल (मतदाता सूची) तैयार किया जाएगा।

दिलचस्प बात यह है कि पिछली बार SIR 2003 में हुआ था। उसके बाद बीच में आंशिक संशोधन तो किया जा रहा था, लेकिन कभी भी गहन संशोधन का काम नहीं किया गया था। लेकिन अब 2003 के बाद यह गहन संशोधन 2025-26 में हो रहा है।

SIR का मुख्य उद्देश्य क्या था?

चुनाव आयोग ने साफ बता दिया था कि इस प्रक्रिया के मुख्य उद्देश्य हैं:

• जो लोग मृत हो चुके हैं, उनके नामों को हटाना
• जो लोग विस्थापित हो चुके हैं, उनके नाम बदलना या स्थान बदलना
• जो 18 वर्ष पूर्ण कर चुके हैं, उन लोगों को शामिल करना

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि इलेक्टोरल रोल में वही लोग रहें जो वोट करने के योग्य हैं और जीवित हैं। जो योग्य नहीं हैं या जीवित नहीं हैं, उन लोगों को इलेक्टोरल रोल से निकालना बेहतर है।

💡 यह भी पढ़ें- DA Hike January 2026: 5% बढ़ोतरी से 63% होगा महंगाई भत्ता, जानें कितनी बढ़ेगी सैलरी

विवाद की शुरुआत: बिहार से लेकर 12 राज्यों तक

यह काम सबसे पहले बिहार में शुरू हुआ। बिहार के बाद 12 अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह काम किया गया। अब तीसरा फेज शुरू होने वाला है।

लेकिन Association for Democratic Reforms को यह पसंद नहीं आया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की और साफ कहा कि चुनाव आयोग नागरिकता की जांच कर रहा है और बहुत सारे लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं। पहले यह काम बिहार में किया गया, फिर अन्य राज्यों में भी किया गया। अब तीसरा फेज भी उसी तरह से शुरू हो रहा है।

समझने वाली बात यह है कि यह मतदाता सूची की व्यापक समीक्षा करने की एक प्रक्रिया है जिसमें अपात्र और त्रुटिपूर्ण प्रविष्टियों को पहचानकर उन्हें हटाने का काम किया जाता है। केवल पात्र नागरिक ही मतदाता सूची में बने रहते हैं और वही आगे चुनावों में वोट करते हैं।

सुप्रीम कोर्ट के सामने चार बड़े सवाल

जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो कई महत्वपूर्ण प्रश्न थे:

पहला प्रश्न: क्या चुनाव आयोग को SIR कराने का वैधानिक अधिकार है?

दूसरा प्रश्न: क्या इस शक्ति का प्रयोग न्यायसंगत और अनुपातिक ढंग से किया गया है?

तीसरा प्रश्न: क्या SIR की प्रक्रिया वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप है?

चौथा प्रश्न: क्या चुनाव आयोग नागरिकता संबंधी प्रश्नों की जांच कर सकता है?

सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी प्रश्नों का विस्तार से जवाब दिया और एक-एक करके सारी बातें समझाईं।

पहला जवाब: Article 324 का संदर्भ

जब कभी हम भारतीय संविधान का Article 324 पढ़ते हैं तो इसकी खास बात यह होती है कि स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि हमारे देश में चुनाव से जुड़े सभी मामलों का अधिकार चुनाव आयोग को है।

अगर गौर करें तो चुनाव आयोग का जिम्मा है कि यह हमारे देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराए। जब स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की बात Article 324 में आ गई है, तो सारा चुनाव का काम चुनाव आयोग का है।

सुप्रीम कोर्ट ने यहां पर एक महत्वपूर्ण बात जोड़ते हुए कहा कि केवल मतदान का स्वतंत्र और निष्पक्ष होना पर्याप्त नहीं है। मतदान से पहले मतदाता सूची का भी स्वतंत्र और निष्पक्ष होना आवश्यक है। तभी हम यह मानेंगे कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हुआ है।

इसलिए पहले प्रश्न का जवाब देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर समझाया कि बिल्कुल वैधानिक अधिकार है। जब मतदान का अधिकार और चुनाव कराने का अधिकार चुनाव आयोग के पास है, तो मतदाता सूची को तैयार करना, शुद्धिकरण करना, पुनरीक्षण करना – यह सारा जिम्मा भी चुनाव आयोग का ही है।

दूसरा जवाब: 11 दस्तावेज और आधार का मुद्दा

दूसरी बात थी कि क्या इस प्रक्रिया का प्रयोग न्यायसंगत और अनुपातिक ढंग से किया गया है?

जब SIR की कहानी शुरू हुई थी तो शुरुआत में 11 दस्तावेज मांगे गए थे। कहा गया था कि या तो आपको 11 दस्तावेज जमा करने होंगे या फिर 2003 के इलेक्टोरल रोल में अपना नाम दिखाना होगा।

यह भी पढे़ं 👇

historical

June 21 History: आज ही के दिन बना था अमेरिकी संविधान, ब्राजील ने जीता था तीसरा वर्ल्ड कप

रविवार, 21 जून 2026
Breaking News Live Updates

Breaking News Live Updates: आज की हर बड़ी खबर, हर पल अपडेट

रविवार, 21 जून 2026
Monsoon Update 2026

Monsoon Update 2026: 23 जून तक 6 राज्यों में मानसून, बंगाल-सिक्किम में भारी बारिश अलर्ट

रविवार, 21 जून 2026
Breaking News Live Updates 21 June 2026

Breaking News Live Updates 21 June 2026: Big Alerts, हर खबर सबसे पहले

रविवार, 21 जून 2026

यही वाली बात थी कि जो लोग दस्तावेज नहीं दिखा पा रहे हैं, उनके नाम हटाए जा रहे हैं। बहुत सारी बड़ी संख्या में लोग वंचित हो जा रहे हैं मतदान के अधिकार से। यह चीजें ठीक नहीं हैं और भारत में लोगों को वोट देने का अधिकार तो है ही।

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग ने जो भी काम किया है वह न्यायसंगत है। क्यों? क्योंकि:

• सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को आधार को इसमें जोड़ने की सलाह दी थी
• चुनाव आयोग ने बात मानी और आधार को पहचान के दस्तावेज के रूप में मान्यता दी
• आधार नागरिकता का दस्तावेज तो है नहीं, लेकिन पहचान के दस्तावेज के रूप में मान्यता दी गई
• जिन लोगों के नाम हटाए गए, उन्हें सुनवाई का अधिकार मिला
• समय दिया गया, सभी प्रक्रियाएं पूरी हुईं

दिलचस्प बात यह है कि जिन लोगों की नागरिकता को लेकर विवाद था, उन्हें कहा गया कि Ministry of Home Affairs (MHA) को जाकर जानकारी दें। MHA नागरिकता की जांच करेगा।

इसलिए चुनाव आयोग ने कोई भी गलत काम नहीं किया। जो भी काम हो रहा है वह न्यायसंगत और आनुपातिक ढंग से हो रहा है। चीजें बैलेंस्ड हैं।

तीसरा जवाब: वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप

तीसरा सवाल था कि क्या SIR की प्रक्रिया वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप है?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब संविधान में यह कह दिया गया है कि चुनाव कराना और चुनाव से जुड़ा सारा प्रबंध करना – जिसमें मतदाता सूची भी शामिल है – वह सब चुनाव आयोग का काम है, तो यह बिल्कुल वैधानिक है।

चुनाव आयोग ने हर उस व्यक्ति को जगह दी है जिसने दस्तावेज दिए हैं और हर उस व्यक्ति को हटाया जिसने दस्तावेज नहीं दिए हैं। दस्तावेज की शर्त है और भारत में अगर आपको रहना है तो दस्तावेज हर स्थिति में आपके पास होने चाहिए।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अगर दस्तावेज नहीं हैं तो आपको हर चीज में क्यों शामिल किया जाए? भारत में चुनाव की बात केवल वोट डालना नहीं है। अगर मतदाता सूची में आपका नाम शामिल है तो आप केवल वोट ही नहीं डाल सकते, बल्कि चुनाव भी लड़ सकते हैं।

चौथा जवाब: नागरिकता की जांच का अधिकार

सबसे अहम सवाल था – क्या चुनाव आयोग नागरिकता संबंधी प्रश्नों की जांच कर सकता है?

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में क्लियर कहा कि नागरिकता की जांच का मामला तो गृह मंत्रालय के पास है। गृह मंत्रालय का अधिकार होता है कि किसको नागरिक बताएगा और किसको नागरिक नहीं बताएगा।

लेकिन हां, अगर बात आती है SIR की या मतदाता सूची में शामिल होने की, तो नागरिकता से संबंधित प्रश्नों की जांच तो चुनाव आयोग कर सकता है।

ऐसा इसलिए क्योंकि भारत में अगर आप वोट करना चाहते हैं तो भारत में मतदान करने की जो पूर्व शर्त है, वह नागरिकता भी है। यानी अगर आप भारत के नागरिक हैं तो ही आपको वोट करने का अधिकार मिल सकता है। अगर आप नागरिक नहीं हैं तो आपको भारत में वोट करने का अधिकार नहीं मिलेगा।

नागरिकता तो भारत में वोट करने की पूर्व शर्त है। इसलिए इस पूर्व शर्त का पूरा होना जरूरी है। कोई भी व्यक्ति गैर-नागरिक होकर भारत में वोट नहीं कर सकता।

Representation of People Act, 1950: Section 16 का संदर्भ

यह बात Representation of People Act (लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम) की धारा 16 में भी लिखी हुई है कि गैर-नागरिकों को मतदाता सूची में स्थान नहीं दिया जा सकता।

अगर कोई देश से बाहर का व्यक्ति वोट कर रहा है तो देश की व्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। क्योंकि जब हमारा देश है तो हमारे देश में वोट देने का अधिकार भी हमारे देशवासियों को ही है, हमारे नागरिकों को ही है।

ऐसे में अगर कोई घुसपैठिया वोट करता है तो चुनाव की प्रणाली प्रभावित होती है। और ऐसे में वे मुद्दे भी आगे बढ़ते हैं जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए उचित नहीं माने जा सकते।

चुनाव आयोग की संवैधानिक शक्तियां

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग की संवैधानिक और वैधानिक शक्तियां क्या हैं:

• मतदाता सूची के पुनरीक्षण का अधिकार
• वैधानिक ढांचे के अनुरूप काम करना
• मतदाता सूची के तकनीकी प्रबंधन और सत्यापन के लिए सबसे सक्षम संस्था

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग जो भी काम कर रहा है वह कार्य प्रणाली और कानून के अनुरूप है।

अंतरिम आदेशों का पालन

क्या अंतरिम आदेशों द्वारा प्रदान किए गए सुरक्षा उपाय ठीक से लागू हुए? सुप्रीम कोर्ट ने कहा – बिल्कुल हां!

• जब कहा गया कि आधार को स्वीकार करो – किया गया
• जब कहा गया कि हटाए गए मतदाताओं की सूची सार्वजनिक करो – की गई
• सुनवाई का अधिकार भी मिला
• सुनवाई प्रक्रिया में न्यायिक अधिकारियों की सहायता भी सुनिश्चित की गई

इन उपायों को न्यायपालिका ने प्रक्रियात्मक निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण माना था और सारे काम चुनाव आयोग ने किए। चुनाव आयोग ने चीजों को मना नहीं किया। जैसी-जैसी बातें कही गई थीं सुप्रीम कोर्ट द्वारा समय-समय पर, उन सभी बातों का पालन किया गया।

जिन सवालों का जवाब नहीं दिया गया

कुछ ऐसे भी प्रश्न थे जिनके बारे में सुप्रीम कोर्ट ने कुछ नहीं कहा:

पहला: क्या चुनाव से पहले SIR कराना सही है? क्योंकि इससे अत्यधिक बोझ भी पड़ता है और समय भी कम होता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रश्न की जांच नहीं की कि चुनाव से ठीक पहले SIR होने से क्या अतिरिक्त बोझ पड़ता है या नहीं।

दूसरा: पश्चिम बंगाल संबंधित विवाद। दरअसल पश्चिम बंगाल में जिस तरह से लोगों के नाम हटाए गए थे, वहां एक खास सेक्शन इस्तेमाल किया गया था – “Error” (त्रुटि)। केवल इतना बताया गया कि त्रुटियों के आधार पर नाम हटाया जा रहा है, लेकिन एग्जैक्टली त्रुटि क्या है, यह नहीं बताया गया।

माता-पिता का नाम, आयु या अन्य विवरणों में कथित विसंगतियां थीं, जिस वजह से लोगों के नाम हटा दिए गए थे। न्यायालय ने इस पर कोई अंतिम राय नहीं दी है। यह मामला अभी भी रुका हुआ है।

नागरिकता और मतदाता पंजीकरण का संबंध

भारत का मतदाता वही हो सकता है जो भारत का नागरिक है। जो भारत का नागरिक नहीं है, वह भारत में मतदाता होने के योग्य भी नहीं है।

Representation of People Act, 1950 की धारा 16 में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि गैर-नागरिक मतदाता के रूप में पंजीकृत नहीं हो सकता है। इसलिए चुनाव आयोग नागरिकता संबंधी प्रश्नों की जांच कर सकता है।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जो व्यक्ति पहले से मतदाता सूची में शामिल है, उसको तो नागरिक माना जाएगा ही और उसके पक्ष में वैधता के प्रारंभिक अनुमान भी रहेगा।

दस्तावेज मांगे जाएं तो क्या करें?

अगर चुनाव आयोग आपसे दस्तावेज मांगे या किसी भी तरह से स्पष्टीकरण मांगे और आप कोई स्पष्ट स्पष्टीकरण न दे पाएं, चीजों को स्वीकार न कर पाएं, तो फिर नाम हटाए जाने की प्रक्रिया भी आगे हो सकती है।

यानी आपका नाम शामिल है तो ठीक है, कंटिन्यू रहेगा। लेकिन दस्तावेज मांगे जाते हैं तो आपको दिखाने पड़ेंगे। आप यह नहीं कह सकते कि दस्तावेज भी न दिखाएं और बिना दस्तावेज दिखाए आप यह चाहते हैं कि चीजें संतुष्ट भी रहें।

चीजें वेरीफाई की जा रही हैं तो आपको वेरिफिकेशन में कॉपरेट करना पड़ेगा। अदरवाइज चीजें फिर आपके फेवर में नहीं जाएंगी।

मतदाता सूची से नाम हटाने का मतलब

महत्वपूर्ण बात यह है कि मतदाता सूची से नाम हटाने का अर्थ केवल इतना है कि चुनाव आयोग आपको वोट देने से रोक रहा है। इससे अधिक नहीं है।

चुनाव आयोग के माध्यम से इलेक्टोरल रोल में शामिल करना या न करना – यह केवल वोट तक सीमित है। आपको देश से नहीं निकाला जाएगा या इससे एग्जैक्टली आपकी नागरिकता भी डिफाइन नहीं हो रही है।

नागरिकता से जुड़े विवाद सारे जाते हैं केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास, यानी केंद्र सरकार के पास। मामला Citizenship Act, 1955 के तहत सुना जाता है और जो भी फैसला केंद्र सरकार करती है, वह अंतिम होता है।

चुनाव आयोग बनाम गृह मंत्रालय: अधिकारों का विभाजन
विषयचुनाव आयोग का अधिकारगृह मंत्रालय का अधिकार
नागरिकता निर्धारणनहींहां – अंतिम अधिकार
मतदाता सूची में शामिल करनाहांनहीं
नागरिकता की जांच (मतदान के लिए)हां – सीमित दायरे मेंहां – पूर्ण अधिकार
वोट देने का अधिकारहां – निर्णय ले सकता हैनहीं
दस्तावेज वेरिफिकेशनहांहां
SIR का व्यापक प्रभाव

इस फैसले का मतलब है कि:

• चुनाव आयोग के SIR कराने के अधिकार को वैधता मिली
• नागरिकता के आधार पर जांच की जा सकती है
• मतदाता सूची से बाहर किया जा सकता है
• यह दायरा चुनाव आयोग के पास है
• चुनाव आयोग के अधिकारों की पुष्टि हुई
• जो भी किया गया वह सही किया गया
• चीजें वैधानिक हैं

आगे क्या होगा?

अब देखना यह है कि आगे SIR की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ती है और जिन लोगों के नाम हटाए गए, एग्जैक्टली उन लोगों के साथ अब आगे क्या व्यवहार किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद चुनाव आयोग को और मजबूती मिली है। अब वह और भी प्रभावी ढंग से मतदाता सूची का शुद्धिकरण कर सकता है।


मुख्य बातें (Key Points)

• Supreme Court ने Special Intensive Revision (SIR) को वैध ठहराया और चुनाव आयोग के अधिकारों को मान्यता दी
• Article 324 के तहत चुनाव आयोग को मतदाता सूची के प्रबंधन का पूर्ण अधिकार है
• नागरिकता मतदान की पूर्व शर्त है, इसलिए चुनाव आयोग इसकी जांच कर सकता है
• 2003 के बाद पहली बार 2025-26 में गहन संशोधन हो रहा है
• आधार को पहचान दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया गया है
• Representation of People Act की धारा 16 गैर-नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल होने से रोकती है
• मतदाता सूची से नाम हटना केवल वोट देने के अधिकार से संबंधित है, नागरिकता से नहीं


FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: SIR (Special Intensive Revision) क्या है और यह क्यों जरूरी है?

उत्तर: SIR मतदाता सूची को शुद्ध करने की एक विशेष गहन प्रक्रिया है जो 2003 के बाद पहली बार 2025-26 में हो रही है। इसका उद्देश्य मृत व्यक्तियों के नाम हटाना, विस्थापित लोगों की जानकारी अपडेट करना और 18 वर्ष पूर्ण कर चुके नए मतदाताओं को शामिल करना है। यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है।

प्रश्न 2: क्या चुनाव आयोग नागरिकता की जांच कर सकता है?

उत्तर: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नागरिकता का अंतिम निर्धारण गृह मंत्रालय का अधिकार है। लेकिन चुनाव आयोग मतदाता सूची में शामिल करने के संदर्भ में नागरिकता संबंधी प्रश्नों की जांच कर सकता है, क्योंकि नागरिकता मतदान की पूर्व शर्त है। यह जांच सीमित दायरे में होती है।

प्रश्न 3: अगर मेरा नाम मतदाता सूची से हटा दिया जाए तो क्या करूं?

उत्तर: अगर आपका नाम मतदाता सूची से हटाया गया है, तो आपको सबसे पहले हटाए जाने का कारण जानना चाहिए। आपको सुनवाई का अधिकार है और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करके पुनः शामिल होने का आवेदन कर सकते हैं। अगर नागरिकता का मुद्दा है तो गृह मंत्रालय से संपर्क करें। मतदाता सूची से नाम हटना आपकी नागरिकता को प्रभावित नहीं करता, यह केवल वोट देने के अधिकार से संबंधित है।

ताज़ा खबरों के लिए हमसे जुड़ें
Google News
WhatsApp
Telegram
Previous Post

Article 311(2)(c): जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर बिना जांच बर्खास्तगी को दी मंजूरी

Next Post

Kotak Mahindra Bank Scam में BMW खरीदी, ED ने उजागर किया 150 करोड़ का घोटाला

अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

Related Posts

historical

June 21 History: आज ही के दिन बना था अमेरिकी संविधान, ब्राजील ने जीता था तीसरा वर्ल्ड कप

रविवार, 21 जून 2026
Breaking News Live Updates

Breaking News Live Updates: आज की हर बड़ी खबर, हर पल अपडेट

रविवार, 21 जून 2026
Monsoon Update 2026

Monsoon Update 2026: 23 जून तक 6 राज्यों में मानसून, बंगाल-सिक्किम में भारी बारिश अलर्ट

रविवार, 21 जून 2026
Breaking News Live Updates 21 June 2026

Breaking News Live Updates 21 June 2026: Big Alerts, हर खबर सबसे पहले

रविवार, 21 जून 2026
Aaj Ka Rashifal

आज का राशिफल 21 जून 2026: साल का सबसे बड़ा दिन, जानें आपकी किस्मत क्या कहती है

रविवार, 21 जून 2026
AAP Protest

Punjab में AAP का बड़ा प्रदर्शन: Fake Video Controversy में SAD और BJP पर लगाए गंभीर आरोप

शनिवार, 20 जून 2026
Next Post
Kotak Mahindra Bank Scam

Kotak Mahindra Bank Scam में BMW खरीदी, ED ने उजागर किया 150 करोड़ का घोटाला

Punjab Farmer Loan Waiver Scheme

Punjab Farmer Loan Waiver Scheme आई, डिफॉल्टर किसानों को मिलेगी नई जिंदगी

MLA Raman Arora's arrest

AAP MLA Raman Arora ED के सामने पेश, पार्टी में बढ़ी बेचैनी

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

The News Air

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।

Google News Follow us on Google News

  • About
  • Editorial Policy
  • Privacy & Policy
  • Disclaimer & DMCA Policy
  • Contact

हमें फॉलो करें

No Result
View All Result
  • प्रमुख समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • सियासत
  • राज्य
    • पंजाब
    • चंडीगढ़
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • महाराष्ट्र
    • पश्चिम बंगाल
    • उत्तर प्रदेश
    • बिहार
    • उत्तराखंड
    • मध्य प्रदेश
    • राजस्थान
  • काम की बातें
  • नौकरी
  • बिज़नेस
  • टेक्नोलॉजी
  • मनोरंजन
  • धर्म
  • हेल्थ
  • स्पेशल स्टोरी
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
  • WEB STORIES

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।