आठ पार्टियों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को विरोध पत्र सौंपा


नई दिल्ली, 30 जुलाई (The News Air)

शिरोमणी अकाली दल ने आज लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से आठ पार्टियों की अगुवाई करते हुए मांग की कि वह संसद में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर के इस दावे की जांच के लिए संयुक्त संसदीय कमेटी (जेपीसी) का गठन करें कि केंद्र के पास चल रहे किसान आंदोलन में किसानों की मौतों का कोई रिकार्ड नही है।

इस संबंध में शिरोमणी अकाली दल, बसपा, एनसीपी, सीपीआई, सीपीआई-एम, आरएलपी, जम्मू एंड कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस तथा शिव सेवा ने लोकसभा अध्यक्ष को एक विरोध पत्र सौंपा।

पूर्व केंद्रीय मंत्री तथा बठिंडा की सांसद सरदारनी हरसिमरत कौर बादल ने भी कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों से अनुरोध किया कि वे कल राष्ट्रपति से मिलने वाले सांसदों के प्रतिनिधिमंडल में शामिल हों, ताकि केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की जा सके तथा ससंद में तीनों खेती कानूनों को निरस्त करने की चर्चा की जाए।

आज विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे गए ज्ञापन का ब्यौरा देते हुए सरदारनी हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि सांसदों ने बताया कि कृषि मंत्री ने यह कहकर गंभीर चूक की है कि केंद्र सरकार के पास किसान आंदोलन के दौरान किसानों की मौतों का कोई रिकाॅर्ड नही है। ‘‘ यह ‘‘अन्नदाता’’के  बलिदानों को भूलाने वाली बात है , जो आठ महीनों से तीनों काले कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं’’। उन्होने कहा कि  कि कृषि मंत्री ने किसान आंदोलन के दौरान मारे गए 537  किसानों के शहीद होने का स्पष्ट सबूत होने के बावजूद यह दावा करना हैरान करने वाला है।

स्पीकर से इस मुददे पर तुरंत हस्तक्षेप करने का अनुरोध करते हुए सांसदों ने कहा कि कृषि मंत्री को सलाह दी जानी चाहिए कि वे अपनी गलत टिप्पणियों के लिए किसान समुदाय से माफी मांगें। उन्होने कहा कि स्पीकर को एक संयुक्त संसदीय कमेटी का गठन करना चाहिए ताकि चल रहे किसान आंदोलन में मारे गए लोगों की कुल संख्या का पता लगाया जा सके और पीड़ित परिवारों के पुनर्वास के तरीके तथा साधन सुझाए जाने चाहिए।

सांसद, स्पीकर के ध्यान में यह बात भी लाए कि कृषि मंत्री ने कहा था कि तीनों खेती कानूनों के संबंध में किसानों के मन की आशंकाओं को समझने के लिए कोई अध्ययन नही किया गया है। ‘‘ उन्होने स्वयं स्वीकार किया है कि किसानों तथा उनके प्रतिनिधियों से इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया लेने के लिए कोई कदम नही उठाया गया है’’। सरदारनी हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि जेपीसी के गठन से   अब फीडबैक को इकटठा कर और आवश्यक कार्रवाई के लिए सरकार को सौंपने का काम किया जा सकता है।

सांसदों द्वारा स्पीकर के ध्यान में यह भी लाया गया कि मेहनतकश किसान तीनों खेती कानूनों को लागू करने के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं, तथा ये कानून बिना किसानों से परामर्श किए संसद के माध्यम से लागू कर दिए गए, फिर भी सरकार किसानों की शिकायतों को स्वीकार करने यां हल करने से इंकार कर रही है। ‘‘ वास्तव में किसानों को बदनाम करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं’’। सांसदों ने कहा कि जेपीसी का गठन कर किसानों की आवाज सरकार तथा संसद तक पहुंचाने का अहम जरिया बन सकती है’’।


Leave a comment

Subscribe To Our Newsletter

Subscribe To Our Newsletter

Join our mailing list to receive the latest news and updates from our team.

You have Successfully Subscribed!