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The News Air - Breaking News - ED Punjab Police Clash: पंजाब पुलिस लगातार टाल-मटोल कर रही, सबूत देने के बाद भी FIR नहीं

ED Punjab Police Clash: पंजाब पुलिस लगातार टाल-मटोल कर रही, सबूत देने के बाद भी FIR नहीं

नितिन गोहल ने कैसे चलाया ट्रांसफर-पोस्टिंग का रैकेट, पहले से साइन किए ट्रांसफर ऑर्डर लीक, हवाला और जमीनी सौदे, ED का पलटवार

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
बुधवार, 2 सितम्बर 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, पंजाब
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ED Punjab Police Clash
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ED Punjab Police Transfer Scam –पंजाब में अधिकारियों की बदलियां (ट्रांसफर-पोस्टिंग), हवाला लेन-देन और जमीनी सौदों से जुड़े कथित रैकेट के मामले में Enforcement Directorate (ED) और Punjab Police के बीच टकराव और तीखा हो गया है। ED ने गंभीर आरोप लगाया है कि पुख्ता और विस्तृत सबूत साझा करने के बावजूद पंजाब पुलिस इस मामले में FIR दर्ज करने से लगातार भाग रही है। देखा जाए तो, यह केंद्रीय एजेंसी और राज्य सरकार के बीच सीधी टक्कर का मामला बन गया है।

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30 जुलाई और 7 अगस्त को DGP को भेजे गए थे पूरे सबूत

पंजाब सरकार के स्टैंड पर जवाब देते हुए ED ने एक बयान जारी करके बताया कि उसने Prevention of Money Laundering Act (PMLA) की धारा 66(2) के अधीन 30 जुलाई और 7 अगस्त 2026 को पंजाब के DGP के साथ आधिकारिक तौर पर सारे सबूत साझा किए थे।

समझने वाली बात यह है कि एजेंसी के मुताबिक इकट्ठी की गई सामग्री से पता लगता है कि कैसे विचोले निितिन गोहल ने:

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  • पुलिस बदलियों की अर्जियां इकट्ठी कीं
  • पहले से दस्तखत किए ट्रांसफर ऑर्डर लीक किए
  • हवाला रकम का आदान-प्रदान करवाया
  • जमीनी सौदे किए
  • यात्राओं और होटलों के खर्चों के लिए नकद भुगतान का प्रबंध किया
वार-वार लिखित संदेश के बावजूद मामला दर्ज नहीं

केंद्रीय एजेंसी ने कहा कि वार-वार लिखित संदेश भेजने के बावजूद पंजाब पुलिस द्वारा मामला दर्ज न करना एक जरूरी कानूनी प्रक्रिया की उल्लंघना है। यहां ध्यान देने वाली बात है कि PMLA की धारा 66(2) के तहत अगर ED किसी राज्य पुलिस को सबूतों के साथ सूचना देती है तो राज्य पुलिस को FIR दर्ज करना अनिवार्य है।

लेकिन पंजाब पुलिस ने अब तक FIR दर्ज नहीं की है। यह साफ दर्शाता है कि या तो तकनीकी कारण हैं या फिर राजनीतिक दबाव।

🔍 यह भी पढ़ें- बड़ा फैसला: Mission Clean Punjab से पंजाब में सफाई क्रांति की शुरुआत

1 सितंबर को रसीद तक देने से इनकार

ED ने यह गंभीर दोष भी लगाया कि 1 सितंबर को जब एजेंसी का नुमाइंदा जांच रिपोर्टें हाथों-हाथ सौंपने गया तो पुलिस अधिकारियों ने उसकी रसीद (acknowledgement) तक देने से इनकार कर दिया।

दिलचस्प बात यह है कि इसके बाद ED को यह सारे दस्तावेज ईमेल के जरिए आधिकारिक तौर पर भेजने पड़े। यह एक अजीब स्थिति है जहां केंद्रीय एजेंसी को राज्य पुलिस से इस तरह का व्यवहार झेलना पड़े।

निितिन गोहल कौन है और कैसे चलाता था रैकेट?

ED के सबूतों के अनुसार, निितिन गोहल एक विचोला (middleman) था जो पुलिस ट्रांसफर-पोस्टिंग का पूरा रैकेट चला रहा था। उसका काम था:

गतिविधिविवरण
अर्जियां इकट्ठी करनाजो पुलिस अधिकारी/कर्मचारी ट्रांसफर चाहते थे, उनकी अर्जियां लेना
पहले से साइन किए ऑर्डर लीक करनाट्रांसफर ऑर्डर पहले से साइन करवाकर लीक करना
हवाला का इंतजामनकद रकम का आदान-प्रदान हवाला के जरिए
जमीनी सौदेजमीन की खरीद-फरोख्त में कमीशन
यात्रा और होटल खर्चवीआईपी यात्राओं के लिए नकद भुगतान

अगर गौर करें तो यह एक पूरी तरह संगठित रैकेट था जिसमें कई स्तरों पर लोग शामिल थे।

AAP सरकार के दावे बनाम ED के सबूत

पंजाब के मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा था कि ED ने पुख्ता सबूत नहीं दिए हैं। लेकिन ED का कहना है कि उसने:

  • 30 जुलाई 2026 को पहला विस्तृत पत्र भेजा
  • 7 अगस्त 2026 को दूसरा पत्र भेजा
  • 1 सितंबर 2026 को हाथों-हाथ दस्तावेज देने की कोशिश की
  • अंततः ईमेल से सभी दस्तावेज भेजे

तो सवाल यह है कि आखिर सच क्या है? क्या ED के पास सबूत हैं या नहीं? और अगर हैं तो पंजाब पुलिस FIR क्यों नहीं दर्ज कर रही?

पंजाब पुलिस की मजबूरी या राजनीतिक दबाव?

पंजाब पुलिस की स्थिति संवेदनशील है। एक ओर केंद्रीय एजेंसी दबाव बना रही है FIR दर्ज करने का, दूसरी ओर राज्य सरकार कह रही है कि ED के पास पुख्ता सबूत नहीं हैं।

अगर पुलिस FIR दर्ज करती है तो राज्य सरकार नाराज हो सकती है। और अगर नहीं दर्ज करती तो केंद्र सरकार और ED का दबाव बढ़ता रहेगा। यह एक क्लासिक केंद्र-राज्य टकराव का मामला है।

PMLA की धारा 66(2) क्या कहती है?

PMLA की धारा 66(2) कहती है कि अगर ED को किसी मनी लॉन्ड्रिंग या संबंधित अपराध की जानकारी मिलती है, तो वह संबंधित राज्य पुलिस को सूचित कर सकती है। राज्य पुलिस को फिर अपने कानून के तहत कार्रवाई करनी होती है।

लेकिन यहां पंजाब पुलिस कह रही है कि ED ने पूरे सबूत नहीं दिए, जबकि ED कह रही है कि सब कुछ दिया गया है। यह “वह कहे-यह कहे” की स्थिति बन गई है।

अमन अरोड़ा ने कहा था: निष्पक्ष जांच हो तो सबकी जांच हो

याद करें कि अमन अरोड़ा ने कहा था कि अगर जांच निष्पक्ष है तो 2012 से इस विभाग में मंत्री रहे हर व्यक्ति से पूछताछ की जाए। उन्होंने सुखबीर सिंह बादल, कैप्टन अमरिंदर सिंह, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा और सुखजिंदर सिंह सरकारिया का नाम लिया था।

यह एक वैध सवाल है। अगर ट्रांसफर-पोस्टिंग का रैकेट चल रहा था तो क्या यह सिर्फ AAP सरकार के समय शुरू हुआ? या यह पहले से चल रहा था?

केंद्र-राज्य संघर्ष: नया मोर्चा

यह मामला अब सिर्फ जांच का नहीं रह गया है। यह केंद्र सरकार और पंजाब सरकार के बीच एक नया मोर्चा बन गया है। AAP लगातार आरोप लगा रही है कि ED-CBI का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के रूप में किया जा रहा है।

दूसरी ओर, केंद्र सरकार और ED का कहना है कि वे सिर्फ अपना काम कर रहे हैं और राज्य सरकार जानबूझकर जांच में रुकावट डाल रही है।

क्या होगा अगला कदम?

अगर पंजाब पुलिस अगले कुछ दिनों में भी FIR दर्ज नहीं करती है तो ED कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है। वह हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके पंजाब पुलिस को FIR दर्ज करने का निर्देश देने की मांग कर सकती है।

दूसरी ओर, अगर पंजाब सरकार को लगता है कि ED के सबूत अधूरे या गलत हैं, तो वह भी कोर्ट जा सकती है और ED की जांच पर सवाल उठा सकती है।

आम जनता के लिए क्या मायने रखता है?

आम जनता के लिए असली सवाल यह है: क्या पंजाब में पुलिस ट्रांसफर-पोस्टिंग का रैकेट चल रहा था या नहीं? अगर हां, तो दोषी कौन हैं और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?

राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप से परे, जनता को एक निष्पक्ष और पारदर्शी जांच चाहिए। चाहे दोषी AAP के हों, कांग्रेस के हों या अकाली-भाजपा के—सबको कानून के कटघरे में लाया जाना चाहिए।


मुख्य बातें (Key Points)

  • ED ने आरोप लगाया कि पंजाब पुलिस सबूत देने के बाद भी FIR दर्ज नहीं कर रही
  • 30 जुलाई और 7 अगस्त को DGP को विस्तृत सबूत भेजे गए थे
  • निितिन गोहल ने ट्रांसफर-पोस्टिंग, हवाला और जमीनी सौदों का रैकेट चलाया
  • 1 सितंबर को पुलिस ने दस्तावेजों की रसीद देने से इनकार किया
  • केंद्र-राज्य टकराव का नया मोर्चा

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. ED ने पंजाब पुलिस पर क्या आरोप लगाया?

ED ने आरोप लगाया कि पुख्ता सबूत देने के बावजूद पंजाब पुलिस ट्रांसफर-पोस्टिंग रैकेट के मामले में FIR दर्ज नहीं कर रही है और जानबूझकर टाल-मटोल कर रही है।

2. निितिन गोहल कौन है?

ED के अनुसार, निितिन गोहल एक विचोला था जो पुलिस अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग, हवाला लेन-देन और जमीनी सौदों का पूरा रैकेट चला रहा था।

3. क्या पंजाब पुलिस अब FIR दर्ज करेगी?

फिलहाल स्पष्ट नहीं है। पंजाब सरकार का कहना है कि ED ने पूरे सबूत नहीं दिए, जबकि ED कहती है कि सब कुछ दिया जा चुका है। मामला कोर्ट तक जा सकता है।

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अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

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