Jagjit Singh Dallewal ने फरीदकोट के प्राइमरी कोऑपरेटिव एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट बैंक (PADB), जिसे आम भाषा में ‘लैंड मॉर्गेज बैंक’ कहा जाता है, के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। किसान आगू ने इस बैंक द्वारा किसानों के पहले से दस्तखत किए गए खाली चेकों की कथित दुरुपयोग के मामले में तीखा रुख अख्तियार किया है। देखा जाए तो यह मामला अब पंजाब में एक बड़े किसान आंदोलन का रूप ले चुका है।
डल्लेवाल ने इस मामले की जांच के लिए बनाई गई जांच कमेटी की निष्ठा पर खुलेआम सवाल उठाए हैं। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारी अधिकारी निर्पक्ष जांच करने की बजाय बैंक के दोषी कर्मचारियों को बचाने (शील्ड करने) में लगे हुए हैं।
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क्या है खाली चेकों का विवाद?
अगर गौर करें तो इस विवाद की जड़ बैंक की उस पुरानी कथित प्रक्रिया में है, जिसके तहत बैंक किसानों को कर्जा देते समय जमानत (सिक्योरिटी) के रूप में पहले से दस्तखत किए गए खाली चेक लेता है। प्रदर्शनकारी किसानों का आरोप है कि बैंक बाद में गैर-कानूनी और गैर-वाजिब तरीके से इन चेकों को बाउंस करवाकर किसानों के खिलाफ अदालती केस दर्ज करवाता है और उनकी जमीनों की कुर्की (नीलामी) करता है।
समझने वाली बात यह है कि इनमें वे किसान भी शामिल हैं जो अपना पूरा कर्जा लौटा चुके होने का दावा कर रहे हैं। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि बैंक की इस कथित गलत प्रथा से सैकड़ों किसान परिवार प्रभावित हुए हैं।
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दो सगे भाइयों की खुदकुशी से भड़का मामला
चिंता का विषय यह है कि यह विवाद 23 मार्च को वापरी एक बेहद दुखदाई घटना के बाद जनता आंदोलन में बदल गया। पिंड हरी नौं के दो कर्जाई सगे भाई—जसकरन सिंह (38) और जसविंदर सिंह (34) ने कोटकपूरा नजदीक एक दूसरे का हाथ पकड़कर चलती रेल गाड़ी के आगे छलांग मारकर खुदकुशी कर ली थी।
करीब 25 लाख रुपए के कर्जे के नीचे दबे इन भाइयों की मौत ने पूरे किसान भाईचारे को हिलाकर रख दिया था। हालांकि किसान आगुओं ने माना कि बैंक की इसमें कोई सीधी भूमिका नहीं थी, पर कर्जे के लगातार मानसिक तनाव ने ही उन्हें इस खौफनाक कदम के लिए मजबूर किया।
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70 दिनों के धरने के बाद बनी 7 मेंबरी कमेटी
भारतीय किसान यूनियन (BKU) एकता सिद्धूपुर की अगुवाई में 30 मार्च को शुरू हुए इस आंदोलन के दौरान स्थानीय किसानों द्वारा बैंक के खिलाफ 139 शिकायतें दर्ज करवाई गई थीं। फरीदकोट में बैंक की ब्रांच के सामने 70 दिनों तक चले पक्के मोर्चे के बाद एक 7 मेंबरी साझा कमेटी गठित की गई थी।
दिलचस्प बात यह है कि इस कमेटी में दो किसान यूनियन के नुमाइंदे, तीन सीनियर बैंक अधिकारी, और जिला प्रशासन तथा पुलिस का एक-एक प्रतिनिधि शामिल है। इस साझा कमेटी ने शिकायतों के निपटारे के लिए 10 दिनों का समय तय किया है, जिसके तहत रोजाना करीब 10 केसों की सुनवाई की जा रही है।
‘वन-टाइम सेटलमेंट’ (OTS) की मांग
पीड़ित किसानों की मुख्य मांग है कि कोऑपरेटिव बैंक भी प्राइवेट और अन्य वाणिज्यिक बैंकों की तर्ज पर एक पारदर्शी ‘वन-टाइम सेटलमेंट’ (OTS) स्कीम लेकर आए। किसान जत्थेबंदियों ने चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन ने मुलजिमों की पुश्तपनाही बंद नहीं की और किसानों को इंसाफ नहीं मिला, तो आने वाले दिनों में सूबा स्तरीय बड़ा संघर्ष शुरू किया जाएगा।
राहत की बात यह है कि मामला अब सरकार के ध्यान में आ गया है। हालांकि, सवाल उठता है कि क्या जांच कमेटी निर्पक्ष रूप से काम करेगी या यह सिर्फ दिखावा है?
डल्लेवाल के गंभीर आरोप
किसान आगू जगजीत सिंह डल्लेवाल ने जांच पैनल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कमेटी पीड़ित किसानों को इंसाफ दिलाने की जगह राजनीतिक रसूखवालों और बैंक मैनेजमेंट का पक्ष पूर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि किसान जत्थेबंदियां किसी भी तरह की मिलीभुगत या परदापोशी को बर्दाश्त नहीं करेंगी और दोषियों के खिलाफ तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए।
उम्मीद की किरण यह है कि अगर सरकार समय रहते सही कदम उठाती है तो हजारों किसान परिवारों को राहत मिल सकती है।
मुख्य बातें (Key Points):
- किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने PADB बैंक चेक दुरुपयोग मामले में जांच कमेटी पर गंभीर आरोप लगाए
- दो सगे भाइयों—जसकरन सिंह (38) और जसविंदर सिंह (34)—की 25 लाख रुपए कर्जे के कारण खुदकुशी से मामला गर्माया
- 70 दिनों के धरने के बाद 7 मेंबरी साझा जांच कमेटी गठित की गई
- किसानों ने 139 शिकायतें दर्ज करवाई हैं और वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) स्कीम की मांग की है
- डल्लेवाल ने आरोप लगाया कि कमेटी दोषी बैंक कर्मचारियों को बचाने में लगी है












