पंजाब में कांग्रेस पार्टी आए दिन विवादों में उलझती जा रही है, एक चिट्ठी से मचा घमासान

चंडीगढ़, 29 जुलाई (The News Air)
पंजाब (Punjab) में कांग्रेस पार्टी आए दिन विवादों में उलझती ही जा रही है। अब पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ (Sunil Jakhar) का AICC महासचिव के.सी वेणुगोपाल (KC Venugopal) के नाम लिखा पत्र पार्टी के लिए नई परेशानी का कारण बन रहा है. अध्यक्ष पद पर रहते हुए लिखे इस पत्र में सुनील जाखड़ ने कैबिनेट मंत्री राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी (Rana Gurmit Singh Sodhi) को पार्टी से हटाने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने सोढ़ी पर कांग्रेस के साथ भीतर घात के दोष लगाए हैं। सुनील जाखड़ की तरफ़ से यह पत्र ज़मीन मुआवज़े में गड़बड़ी को लेकर लिखा गया था।
पत्र में आख़िर क्या है?- इस पत्र में पंजाब सरकार की ओर से सोढ़ी के ख़िलाफ़ 1.83 करोड़ रुपए की वसूली के लिए मुक़दमा दायर करने की बात कही गई है। इसके अलावा विभाग ने सोढ़ी और उनके परिवार को ख़िलाफ़ ‘राज्य के साथ धोखा’ करने के लिए आपराधिक कार्रवाई की भी मांग की है। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने वसूली की रक़म को महज़ ‘छोटा और शुरुआती हिस्सा’ बताया है।
सुनील जाखड़ ने पत्र में आरोप लगाया है कि सोढ़ी ने ‘पिछली शिअद-भाजपा सरकार के समर्थन से तथ्यों को छिपाकर और ग़लत तरीक़े से पेश कर’ यह ‘दोहरा मुआवज़ा’ हासिल किया था. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सोढ़ी को नोटिस दिया है.
क्या है दोहरे मुआवज़े का मामला- सोढ़ी की 11 एकड़ ज़मीन को पहली बार पीडब्ल्यूडी ने 1962 में अधिग्रहित किया था. इसके बाद 2013 उनकी ज़मीन का अधिग्रहण हुआ. 1962 और 2014 में ही उन्हें सरकार की तरफ़ से मुआवज़ा दिया गया था. इसके बाद उन्होंने नए भूमि अधिग्रहण क़ानून के तहत 77 करोड़ रुपये के मुआवज़े की तीसरी बार मांग की. यह मामला राज्य के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नज़र में आया. उन्होंने ही इसके ख़िलाफ़ जांच के आदेश दिए थे.
सुनील जाखड़ को क्या है डर?- पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने कहा है कि अगर अदालत ने सोढ़ी के पक्ष में फ़ैसला सुना दिया, तो यह कांग्रेस की छवि और आगामी चुनाव को बहुत नुक्सान पहुंचाएगा. उन्होंने कहा कि संगरूर और पटरान इलाक़े के किसान मुआवज़े की राशि को 40 लाख प्रति एकड़ से बढ़ाकर 70 लाख रुपये करने के लिए विरोध कर रहे हैं, क्योंकि उनकी ज़मीन दिल्ली-कर्ता हाईवे के लिए अधिग्रहित की जा रही है. जाखड़ को लगता है कि मोहन के उत्तर गांव में सोढ़ी की ज़मीन की तुलना में संगरूर बेल्ट ज़्यादा महंगा क्षेत्र है।
उन्होंने अपने पत्र में सवाल किया कि लिंक रोड के पास इस ज़मीन की मौजूदा कलेक्टर दर 6 लाख 72 हज़ार 300 रुपये प्रति एकड़ है. अगर सोढ़ी 7 करोड़ रुपये प्रति एकड़ हासिल करने में सफल हो जाते हैं, तो पंजाब का कौन सा किसान इससे कम क़ीमत में अपनी ज़मीन अधिग्रहित करने देने के लिए राज़ी होगा.
अकाली दल का नाम शामिल क्यों किया गया- सुनील जाखड़ ने इस बात पर ज़ोर दिया कि मामला सार्वजनिक होने के बाद भी अकाली दल ने इसका विरोध नहीं किया. साथ ही उन्होंने कहा कि दोहरे मुआवज़े का मामला 2007 और 2017 में सामने आया और उस दौरान अकाली सत्ता में थे. कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया है कि सुखबीर बादल के कहने पर ही पीडब्ल्यूडी ने इस बात को नज़रअंदाज किया कि 1962 में ज़मीन का अधिग्रहण हुआ था और 31 जनवरी 1962 को अधिसूचनाएँ भी जारी की गई थीं. इसके अलावा उन्होंने यह भी सवाल किया है कि शिअद और बीजेपी ने क्यों नियमों से अलग हटकर सोढ़ी की मदद की. उन्होंने 2015 में सोढ़ी को डिस्टिलरीज लाइसेंस दिए जाने का मुद्दा भी उठाया है.
कांग्रेस के बीच ताज़ा विवाद में भी सक्रिय रहे हैं सोढ़ी- कांग्रेस में चल रहे अंदरूनी विवाद में सोढ़ी ने कैप्टन के संकटमोचक की भूमिका निभाई थी. फ़िलहाल, सोढ़ी की तरफ़ से इस पत्र को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में सोढ़ी के करीबियों के हवाले से लिखा गया है कि यह पत्र ‘अमरिंदर सिंह को कमज़ोर’ करने के लिए ‘सीएम विरोधी लॉबी’ का एक प्रयास है. क्योंकि उन्होंने तनाव के बीच सीएम का साथ दिया था.

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