Chief Election Commissioner EVM Statement ने एक बार फिर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) को लेकर चल रही बहस को संबोधित किया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने लखनऊ में विद्यार्थियों से बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि भारतीय EVM सरकारी कंपनियों द्वारा निर्मित होती हैं और इनमें किसी भी प्रकार की इंटरनेट, ब्लूटूथ या वाई-फाई कनेक्टिविटी नहीं होती।
देखा जाए तो यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्षी दल और कुछ कार्यकर्ता लगातार EVM की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं। समझने वाली बात है कि चुनाव आयोग को बार-बार यह स्पष्टीकरण देना पड़ रहा है कि भारत की चुनाव प्रणाली पारदर्शी और विश्वसनीय है।
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EVM के बारे में CEC ने क्या कहा?
लखनऊ के अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान एक कॉलेज में विद्यार्थियों से बातचीत करते हुए ज्ञानेश कुमार ने कहा:
“भारतीय इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें सरकारी कंपनियों (Public Sector Companies) द्वारा बनाई जाती हैं। इनमें इंटरनेट, ब्लूटूथ या वाई-फाई की कोई कनेक्टिविटी नहीं होती। यह पूरी तरह स्टैंडअलोन मशीनें हैं।”
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि CEC ने खासतौर पर तीन चीजों का जिक्र किया – इंटरनेट, ब्लूटूथ और वाई-फाई। क्योंकि अक्सर यह आरोप लगाया जाता है कि EVM को remotely हैक किया जा सकता है।
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कौन सी सरकारी कंपनियां बनाती हैं EVM?
भारत में EVM दो सरकारी उपक्रमों द्वारा निर्मित की जाती हैं:
| कंपनी | पूरा नाम | स्थान |
|---|---|---|
| BEL | Bharat Electronics Limited | बेंगलुरु |
| ECIL | Electronics Corporation of India Limited | हैदराबाद |
दिलचस्त बात यह है कि ये दोनों कंपनियां रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए भी उपकरण बनाती हैं। इसका मतलब है कि इनकी तकनीकी क्षमता और सुरक्षा मानक बहुत उच्च हैं।
लोकतंत्र का पैमाना: 100 करोड़ मतदाता
CEC ने भारत की चुनाव प्रक्रिया के विशाल पैमाने का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में लगभग 100 करोड़ वोटर हैं। इतने बड़े मतदाता आधार के लिए चुनाव करवाना अपने आप में एक बहुत बड़ा काम है।
और बस यहीं से शुरू होती है भारत की चुनाव प्रक्रिया की जटिलता। सोचिए:
- 100 करोड़ वोटर: दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र
- 10 लाख से ज्यादा पोलिंग स्टेशन
- लाखों EVM मशीनें
- करोड़ों चुनाव कर्मचारी और सुरक्षा बल
हैरान करने वाली बात यह है कि इतने बड़े पैमाने पर चुनाव शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से संपन्न हो जाते हैं।
क्यों EVM पर बार-बार उठते हैं सवाल?
हर चुनाव के बाद, खासकर जब कोई पार्टी हार जाती है, तो EVM पर सवाल उठने लगते हैं:
विपक्ष के आरोप:
- EVM हैक की जा सकती हैं
- इनमें चिप बदली जा सकती है
- Remote से votes बदले जा सकते हैं
- सत्ताधारी पार्टी के पक्ष में गड़बड़ी होती है
चुनाव आयोग का जवाब:
- EVM में कोई वायरलेस कनेक्टिविटी नहीं
- ये standalone मशीनें हैं
- हर चरण में पारदर्शिता और ऑडिट
- VVPAT से वोट की पुष्टि
सवाल उठता है – सच क्या है?
VVPAT: पेपर ट्रेल की व्यवस्था
EVM की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अब VVPAT (Voter Verifiable Paper Audit Trail) की व्यवस्था भी है। यह एक छोटी पर्ची होती है जो वोटर को दिखाती है कि उसका वोट किसे गया।
| EVM | VVPAT |
|---|---|
| इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड | पेपर रिकॉर्ड |
| मशीन में स्टोर | सील्ड बॉक्स में |
| तुरंत काउंटिंग | जरूरत पड़ने पर मिलान |
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि VVPAT एक अतिरिक्त सुरक्षा परत है। अगर किसी को शक है, तो VVPAT स्लिप्स की गिनती करवाकर EVM के नतीजों से मिलान किया जा सकता है।
चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता के कदम
CEC ने यह भी बताया कि भारत में चुनाव संविधान, कानूनों और दिशानिर्देशों के अनुसार करवाए जाते हैं। हर चरण में पारदर्शिता है:
- वोटर लिस्ट तैयारी: पार्टियों के प्रतिनिधि देखते हैं
- EVM की मॉक ड्रिल: मतदान से पहले सभी के सामने टेस्ट
- बूथ एजेंट: हर पार्टी का प्रतिनिधि बूथ पर मौजूद
- काउंटिंग: पार्टी एजेंट हर टेबल पर
- VVPAT मिलान: संदेह होने पर
इससे साफ होता है कि धांधली की गुंजाइश बहुत कम है। लेकिन फिर भी सवाल उठते रहते हैं।
सोशल मीडिया युग में फेक न्यूज से सावधान
CEC ने विद्यार्थियों को विशेष सलाह दी कि सोशल मीडिया के इस दौर में किसी भी जानकारी को स्वीकार करने या आगे भेजने से पहले उसके स्रोत और प्रामाणिकता की जांच जरूर करें।
समझने वाली बात है कि आज के दौर में Fake News एक बड़ी समस्या है। खासकर चुनावों के समय:
- Deepfake videos: नकली वीडियो बनाए जाते हैं
- Manipulated images: फोटो एडिट करके फैलाए जाते हैं
- False claims: झूठे दावे वायरल किए जाते हैं
- Conspiracy theories: साजिश के सिद्धांत गढ़े जाते हैं
दिलचस्प बात यह है कि CEC ने युवाओं को जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनने की सलाह दी।
CEC की व्यक्तिगत यात्रा: मां की इच्छा और देशसेवा
अपनी विद्यार्थी जीवन को याद करते हुए CEC ने बताया कि कैसे उनकी मां की इच्छा और मातृभूमि से लगाव ने उन्हें देश में रहकर सार्वजनिक सेवा करने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने सिविल सर्विसेज परीक्षा पास की और IAS के रूप में अपना करियर शुरू किया।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि CEC ने व्यक्तिगत अनुभव साझा करके छात्रों को प्रेरित करने की कोशिश की। यह दर्शाता है कि वे सिर्फ तकनीकी जानकारी ही नहीं, बल्कि मूल्य भी साझा करना चाहते थे।
चुनाव साक्षरता क्लब: युवाओं को जागरूक करने की मुहिम
CEC ने बताया कि चुनाव आयोग ने Election Literacy Clubs को मजबूत करने के लिए ठोस प्रयास किए हैं। 20 जिलों के प्रिंसिपल, शिक्षकों और विद्यार्थियों से बातचीत के बाद यह यकीन हुआ है कि छात्र चुनाव प्रक्रिया के बारे में पूरी जानकारी रखते हैं।
यह पहल महत्वपूर्ण है क्योंकि:
- युवा वोटर: 18+ उम्र के छात्र पहली बार वोट करते हैं
- जागरूकता जरूरी: चुनाव प्रक्रिया की समझ होनी चाहिए
- Fake News से बचाव: सही जानकारी से गलत अफवाहों का असर कम होता है
- भविष्य के जिम्मेदार नागरिक: शिक्षित मतदाता लोकतंत्र की ताकत हैं
संविधान की धारा 326: सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार
CEC ने संविधान की धारा 326 का हवाला देते हुए 18 साल की उम्र पूरी कर चुके विद्यार्थियों से वोटर के रूप में रजिस्टर होने की अपील की। यह धारा भारत के प्रत्येक नागरिक को 18 साल की उम्र के बाद वोट का अधिकार देती है।
और बस यहीं से शुरू होता है लोकतंत्र में नागरिक की भागीदारी का सफर। वोट सिर्फ एक अधिकार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है।
मुख्य बातें (Key Points)
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि भारतीय EVM में इंटरनेट, ब्लूटूथ या वाई-फाई कनेक्टिविटी नहीं है
- EVM सरकारी कंपनियों BEL और ECIL द्वारा निर्मित होती हैं, ये standalone मशीनें हैं
- भारत में लगभग 100 करोड़ वोटर, चुनाव संविधान और कानून के अनुसार पारदर्शी तरीके से होते हैं
- CEC ने युवाओं को सोशल मीडिया पर फेक न्यूज से सावधान रहने और 18+ छात्रों को वोटर रजिस्ट्रेशन की अपील की










