Air Marshal Ashutosh Dixit ने बुधवार को Indian Air Force (IAF) के नए उप प्रमुख (Vice Chief) के रूप में पदभार संभाल लिया है। 3500 घंटे से अधिक फाइटर जेट उड़ाने का विशाल अनुभव रखने वाले एयर मार्शल दीक्षित इस साल अक्टूबर में मौजूदा हवाई सेना प्रमुख Air Chief Marshal A.P. Singh के सेवानिवृत्त होने के बाद देश के अगले वायु सेना प्रमुख बनने की दौड़ में सबसे सीनियर अधिकारी हैं। उन्होंने Air Marshal Nagesh Kapoor की जगह ली है, जो सेवानिवृत्त हो गए हैं।
देखा जाए तो यह नियुक्ति भारतीय वायु सेना के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है क्योंकि एयर मार्शल दीक्षित न केवल युद्ध अनुभव रखते हैं बल्कि तीनों सेनाओं के एकीकरण (Jointness) और थिएटर कमांड बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।
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कौन हैं Air Marshal Ashutosh Dixit? जानिए पूरा प्रोफाइल
दिसंबर 1986 में भारतीय वायु सेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन प्राप्त करने वाले एयर मार्शल दीक्षित National Defence Academy (NDA), Defence Services Staff College (बांग्लादेश) और National Defence College के पूर्व छात्र रहे हैं। वह एक Experimental Test Pilot और Qualified Flying Instructor भी हैं।
समझने वाली बात यह है कि एयर मार्शल दीक्षित ने लगभग चार दशकों के अपने शानदार करियर में मिराज-2000, मिग (MiG) सीरीज के कई जेट, जैगुआर, स्वदेशी तेजस (Tejas) और हॉक समेत कई लड़ाकू विमान उड़ाए हैं। इसके अलावा उनके पास AN-32 और अवरो जैसे ट्रांसपोर्ट विमान और हवा में ही ईंधन भरने वाले रिफ्यूलर विमान उड़ाने का भी विशाल अनुभव है।
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कारगिल युद्ध से लेकर Operation Sindoor तक: युद्ध का प्रत्यक्ष अनुभव
अगर गौर करें तो एयर मार्शल दीक्षित की सबसे बड़ी ताकत उनका युद्ध अनुभव है। उन्होंने 1999 में पाकिस्तान के खिलाफ कारगिल युद्ध के दौरान चलाए गए Operation Safed Sagar में सक्रिय भाग लिया था। यह वह ऑपरेशन था जिसमें भारतीय वायु सेना ने पहली बार 1971 के बाद दुश्मन के ठिकानों पर हमले किए थे।
दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने हाल ही में 2025 में Operation Sindoor में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह दोनों ऑपरेशन भारत के सैन्य इतिहास में महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
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किन-किन लड़ाकू विमानों को उड़ा चुके हैं?
एयर मार्शल दीक्षित का फ्लाइंग रिकॉर्ड बेहद प्रभावशाली है:
| विमान श्रेणी | विमान के नाम | विशेषता |
|---|---|---|
| फाइटर जेट | मिराज-2000, मिग सीरीज, जैगुआर, तेजस, हॉक | लड़ाकू विमान |
| ट्रांसपोर्ट | AN-32, अवरो | सैनिक और सामान ढुलाई |
| रिफ्यूलर | एयर-टू-एयर रिफ्यूलर | हवा में ईंधन भरना |
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि उन्होंने स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस को भी उड़ाया है, जो भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है।
CISC के रूप में तीनों सेनाओं के एकीकरण में निभाई अहम भूमिका
Vice Chief बनने से पहले एयर मार्शल दीक्षित Chief of Integrated Defence Staff (CISC) के रूप में सेवाएं दे रहे थे। यह पद Chief of Defence Staff (CDS) के अधीन तीनों सेनाओं (थल, जल और वायु सेना) की साझा संस्था है।
CISC के रूप में उन्होंने तीनों सेनाओं के आपसी तालमेल (Jointness) को बढ़ाने और देश में Theatre Commands स्थापित करने की प्रक्रिया में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कहने का मतलब साफ है कि एयर मार्शल दीक्षित केवल एयर फोर्स के ऑपरेशन ही नहीं बल्कि तीनों सेनाओं के समन्वय को भी गहराई से समझते हैं। उनकी अगुआई में तीनों सेनाओं के एकीकरण के लिए कई साझी नीतियां जारी की गई हैं, जो रक्षा बलों को हर क्षेत्र में मजबूत बनाएंगी।
फ्रंटलाइन बेस से लेकर सेंट्रल एयर कमांड तक: कमांड का अनुभव
एयर मार्शल दीक्षित पश्चिमी सेक्टर में भारतीय वायु सेना के एक फ्रंटलाइन फाइटर बेस और दक्षिणी सेक्टर में एक प्रमुख फाइटर ट्रेनिंग बेस के कमांडर भी रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने Central Air Command की अगुआई भी की है।
यह अनुभव उन्हें ऑपरेशनल और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर मजबूत बनाता है।
अक्टूबर 2026 में बन सकते हैं अगले Air Chief
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मौजूदा वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह अक्टूबर 2026 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। उस समय एयर मार्शल दीक्षित सबसे सीनियर अधिकारी होंगे और सामान्य परंपरा के अनुसार वे ही अगले वायु सेना प्रमुख बनेंगे।
देखा जाए तो उनकी नियुक्ति लगभग तय मानी जा रही है, बशर्ते कोई असाधारण परिस्थिति न हो।
NDA, NDC और बांग्लादेश डिफेंस कॉलेज से शिक्षा
एयर मार्शल दीक्षित ने अपनी शिक्षा देश के सबसे प्रतिष्ठित सैन्य संस्थानों से पूरी की है:
- National Defence Academy (NDA), खड़कवासला, पुणे
- Defence Services Staff College, बांग्लादेश
- National Defence College, नई दिल्ली
यह शिक्षा उन्हें न केवल भारतीय बल्कि क्षेत्रीय सैन्य परिप्रेक्ष्य भी देती है।
Experimental Test Pilot और Flying Instructor की योग्यता
समझने वाली बात यह है कि एयर मार्शल दीक्षित सिर्फ एक फाइटर पायलट नहीं हैं। वह एक Experimental Test Pilot भी हैं, जिसका मतलब है कि उन्हें नए विमानों का परीक्षण करने का प्रशिक्षण और अनुभव है। साथ ही वह Qualified Flying Instructor भी हैं, यानी उन्होंने नए पायलटों को प्रशिक्षण भी दिया है।
यह दोनों योग्ताएं बेहद दुर्लभ हैं और किसी भी वायु सेना प्रमुख के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
Theatre Commands: भारतीय रक्षा का भविष्य
CISC के रूप में अपने कार्यकाल में एयर मार्शल दीक्षित ने Theatre Commands की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान दिया। थिएटर कमांड का मतलब है कि एक भौगोलिक क्षेत्र में तीनों सेनाओं की शक्ति को एक ही कमांड के तहत लाना।
यह भारत की रक्षा रणनीति में एक बड़ा बदलाव है और एयर मार्शल दीक्षित इसके प्रमुख वास्तुकारों में से एक रहे हैं।
एक नजर में Air Marshal Ashutosh Dixit का करियर
| पद/उपलब्धि | विवरण |
|---|---|
| कमीशन | दिसंबर 1986, फाइटर स्ट्रीम |
| फ्लाइंग घंटे | 3500+ घंटे |
| युद्ध अनुभव | कारगिल (Operation Safed Sagar), Operation Sindoor 2025 |
| विशेष योग्यता | Experimental Test Pilot, Qualified Flying Instructor |
| शिक्षा | NDA, Defence Staff College (बांग्लादेश), NDC |
| प्रमुख पद | CISC, Central Air Command प्रमुख, फ्रंटलाइन बेस कमांडर |
| वर्तमान पद | Vice Chief, Indian Air Force (2026) |
| संभावित पद | Chief of Air Staff (अक्टूबर 2026) |
तीनों सेनाओं के एकीकरण के लिए जारी की गई साझी नीतियां
एयर मार्शल दीक्षित की अगुआई में CISC ने तीनों सेनाओं के एकीकरण के लिए कई महत्वपूर्ण नीतियां जारी कीं। इनमें शामिल हैं:
✓ संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम
✓ साझे संसाधनों का उपयोग
✓ एकीकृत संचार प्रणाली
✓ थिएटर कमांड का ढांचा तैयार करना
✓ संयुक्त ऑपरेशनल प्लानिंग
ये नीतियां रक्षा बलों को हर क्षेत्र में मजबूत बनाने में सहायक होंगी।
पश्चिमी और दक्षिणी सेक्टर में कमांड अनुभव का महत्व
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि एयर मार्शल दीक्षित ने पश्चिमी सेक्टर (पाकिस्तान सीमा) में फ्रंटलाइन फाइटर बेस और दक्षिणी सेक्टर में प्रमुख ट्रेनिंग बेस दोनों की कमांड संभाली है।
पश्चिमी सेक्टर का अनुभव उन्हें पाकिस्तान से जुड़े सुरक्षा मुद्दों की गहरी समझ देता है, जबकि ट्रेनिंग बेस का अनुभव उन्हें नई पीढ़ी के पायलटों को तैयार करने की चुनौतियों से परिचित कराता है।
Vice Chief की जिम्मेदारियां और महत्व
Vice Chief of Air Staff भारतीय वायु सेना में दूसरा सबसे बड़ा पद है। Vice Chief की प्रमुख जिम्मेदारियां हैं:
- Chief की अनुपस्थिति में वायु सेना की कमान संभालना
- ऑपरेशनल तैयारियों की निगरानी
- आधुनिकीकरण योजनाओं पर काम करना
- रक्षा मंत्रालय और अन्य सेनाओं के साथ समन्वय
- नीति निर्माण में भागीदारी
और बस यहीं से शुरू होती है Vice Chief की असली परीक्षा… क्योंकि यह पद न केवल प्रशासनिक है बल्कि ऑपरेशनल भी है।
मुख्य बातें (Key Points)
✓ Air Marshal Ashutosh Dixit ने Indian Air Force के Vice Chief के रूप में पदभार संभाला
✓ 3500+ घंटे फाइटर जेट उड़ाने का अनुभव, कारगिल और Operation Sindoor में सक्रिय भागीदारी
✓ अक्टूबर 2026 में Air Chief Marshal A.P. Singh के रिटायर होने पर अगले Air Chief बन सकते हैं
✓ CISC के रूप में तीनों सेनाओं के एकीकरण और Theatre Commands में महत्वपूर्ण भूमिका
✓ Experimental Test Pilot और Qualified Flying Instructor की दुर्लभ योग्यता
✓ मिराज-2000, मिग, जैगुआर, तेजस सहित विभिन्न लड़ाकू विमान उड़ा चुके हैं
✓ NDA, Defence Staff College (बांग्लादेश) और NDC से शिक्षा प्राप्त
✓ पश्चिमी और दक्षिणी सेक्टर में फ्रंटलाइन और ट्रेनिंग बेस की कमांड का अनुभव
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