Digital Arrest Scam CBI Raid: डिजिटल अरेस्ट (गिरफ्तारी के घपले) नाम के साइबर अपराध को बढ़ावा देने वाले बुनियादी ढांचे पर एक बड़ी कार्रवाई करते हुए सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने 16 राज्यों में तलाशी अभियान चलाया। विवरणों के अनुसार पंजाब, गुजरात, दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, असम, पश्चिम बंगाल, मणिपुर, कर्नाटक और उड़ीसा में 80 से अधिक स्थानों पर समन्वित तलाशी ली गई।
यह तलाशी एक चल रही जांच के हिस्से के रूप में की गई थी, जिसका उद्देश्य डिजिटल अरेस्ट स्कैम के 200 से अधिक मामलों में शामिल एक लक्षित संचालन नेटवर्क को तोड़ना था।
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शेल कंपनियां और म्यूल अकाउंट: 2 गिरफ्तार
शेल कंपनियों को शामिल करने और ‘म्यूल’ (mule) बैंक खाते खोलने और चलाने में कथित शामिलता के लिए चेन्नई और कोलकाता से दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है।
देखा जाए तो ये खाते कथित तौर पर अपराध से प्राप्त लगभग 2 करोड़ रुपये की संदिग्ध राशि को मनी लॉन्ड्रिंग के लिए इस्तेमाल किए गए थे।
समझने वाली बात यह है कि ‘म्यूल अकाउंट’ वे बैंक खाते होते हैं जिनका उपयोग ठगों द्वारा ठगी से प्राप्त धन को एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है ताकि उसका ट्रेल गायब हो जाए।
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फर्जी सुप्रीम कोर्ट वेबसाइट का खुलासा
CBI ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट से मिलती-जुलती URL वाली एक फर्जी वेबसाइट का पर्दाफाश किया था।
धोखेबाज कथित तौर पर डिजिटल अरेस्ट के नाम के तहत पीड़ितों को धोखा देने के लिए इस गलत तरीके से रजिस्टर्ड डोमेन का उपयोग करते थे। सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से प्राप्त शिकायत के आधार पर CBI ने FIR दर्ज की थी और मामले की जांच शुरू की थी।
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डिजिटल अरेस्ट स्कैम: कैसे काम करता है यह घपला?
डिजिटल अरेस्ट स्कैम में ठग खुद को पुलिस, CBI, ED, नारकोटिक्स विभाग या सीमा शुल्क अधिकारी बताकर लोगों को फोन या वीडियो कॉल करते हैं। वे पीड़ित को डराते हैं कि उनके नाम पर कोई गंभीर अपराध दर्ज है—जैसे ड्रग्स की तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग या पहचान की चोरी।
फिर वे व्यक्ति को “डिजिटल अरेस्ट” में रखने का दावा करते हैं और उसे कहते हैं कि वह तब तक किसी से संपर्क नहीं कर सकता जब तक मामला “क्लियर” नहीं हो जाता। इसके बाद वे पैसे की मांग करते हैं।
अगर गौर करें तो यह पूरी तरह से मनोवैज्ञानिक दबाव और डर का खेल है।
उन्नत फोरेंसिक टूल्स से बुनियादी ढांचे की पहचान
उन्नत फोरेंसिक टूल्स और तकनीकी विशेषज्ञता का लाभ उठाते हुए CBI ने भारत और विदेशों में काम कर रहे आपराधिक बुनियादी ढांचे के महत्वपूर्ण तत्वों की पहचान की।
जांच से पता चला है कि अपराधियों ने अपनी धोखाधड़ी वाली गतिविधियों को भरोसेमंद बनाने के लिए अदालतों और विभिन्न कानून लागू करने वाली एजेंसियों द्वारा जारी किए गए फर्जी आदेशों समेत जाली और गढ़े हुए दस्तावेज अपलोड किए थे।
तलाशी में क्या-क्या मिला?
तलाशी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, मोबाइल फोन और बैंक लेन-देन से संबंधित रिकॉर्ड जब्त किए गए। अधिकारियों ने बताया कि इन सामग्रियों की विस्तृत फोरेंसिक जांच और विश्लेषण किया जा रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि CBI को ऐसे सबूत भी मिले हैं जो यह दर्शाते हैं कि भारतीय नागरिकों के अलावा, कई अन्य देशों के नागरिकों को भी इसी नेटवर्क द्वारा ठगा गया हो सकता है।
16 राज्यों में समन्वित कार्रवाई का पैमाना
यह ऑपरेशन अपने आप में इस बात का सबूत है कि यह साइबर अपराध नेटवर्क कितना फैला हुआ था। 16 राज्यों में एक साथ कार्रवाई करना बताता है कि CBI ने महीनों तक इस नेटवर्क पर नजर रखी होगी।
| राज्य श्रेणी | राज्य |
|---|---|
| उत्तर भारत | पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान |
| दक्षिण भारत | तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक |
| पश्चिम भारत | गुजरात, महाराष्ट्र |
| पूर्व भारत | पश्चिम बंगाल, असम, उड़ीसा, मणिपुर |
| मध्य भारत | मध्य प्रदेश |
अंतरराष्ट्रीय आयाम: विदेशी नागरिक भी शिकार
CBI सूत्रों ने बताया कि संबंधित अधिकार क्षेत्रों में कानून लागू करने वाली एजेंसियों को उचित चैनलों के माध्यम से सचेत किया जा रहा है, और यह जानकारी दी कि मामले की जांच अभी भी जारी है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह केवल एक भारतीय समस्या नहीं है बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क है।
सरकार और जागरूकता अभियान
पिछले कुछ महीनों में सरकार ने डिजिटल अरेस्ट स्कैम को लेकर कई जागरूकता अभियान चलाए हैं। गृह मंत्रालय और साइबर सुरक्षा विभाग ने बार-बार लोगों को चेतावनी दी है कि:
- कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर “डिजिटल अरेस्ट” नहीं करती
- कोई भी अधिकारी फोन पर पैसे की मांग नहीं करता
- ऐसी किसी भी कॉल को तुरंत काट देना चाहिए और साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर रिपोर्ट करना चाहिए
मुख्य बातें (Key Points)
- CBI ने 16 राज्यों में 80+ स्थानों पर डिजिटल अरेस्ट स्कैम के खिलाफ छापेमारी की
- चेन्नई और कोलकाता से 2 व्यक्ति गिरफ्तार
- लगभग 2 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा
- फर्जी सुप्रीम कोर्ट वेबसाइट का पर्दाफाश
- 200+ मामलों में शामिल आपराधिक नेटवर्क को तोड़ने का प्रयास
- विदेशी नागरिक भी इसी नेटवर्क के शिकार हो सकते हैं
- आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और मोबाइल फोन जब्त













