Azam Khan Jail Sentence: समाजवादी पार्टी के सीनियर नेता और पूर्व लोकसभा सांसद आजम खान को उत्तर प्रदेश की एक अदालत ने 16 मई 2025 को दो साल की कैद की सजा सुनाई है। रामपुर के MP/MLA कोर्ट ने यह फैसला एक ऐसे मामले में दिया है जो सात साल पुराना है और जिसमें आजम खान ने 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान तत्कालीन जिलाधिकारी (DM) के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी। कोर्ट ने सजा के साथ ही उन पर पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
देखा जाए तो यह मामला केवल एक राजनीतिक बयान का नहीं, बल्कि प्रशासनिक गरिमा और चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का है। आजम खान इस समय पहले से ही रामपुर जेल में अपने बेटे अब्दुल्ला आजम के साथ फर्जी पैन कार्ड मामले में सात साल की सजा काट रहे हैं। अब इस नए फैसले से उनकी कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
9 अप्रैल 2019 की वह विवादित टिप्पणी
यह पूरा मामला 9 अप्रैल 2019 का है। लोकसभा चुनाव का दौर था और समाजवादी पार्टी के सीनियर नेता आजम खान रामपुर जिले के भोट थाना क्षेत्र में चुनाव प्रचार के लिए निकले थे। वहां जनता के बीच अपने भाषण में उन्होंने तत्कालीन जिलाधिकारी अंजनेय कुमार सिंह (जो अब मुरादाबाद के कमिश्नर हैं) को लेकर कुछ ऐसे शब्द इस्तेमाल किए जो सरासर आपत्तिजनक थे।
आजम खान ने भीड़ को संबोधित करते हुए कहा था, “ये कलेक्टर-पलेक्टर से मत डरियो…ये तनखैया हैं, तनखैयों से नहीं डरते हैं। देखें, कैसे बड़े-बड़े अफसर मायावती जी के फोटो के सामने रुमाल निकाल के जूते साफ कर रहे हैं। हां, उन्हीं से है गठबंधन…उन्हीं के जूते साफ कराऊंगा, इंशाल्लाह।”
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि आजम खान ने IAS अधिकारी को “तनखैया” कहा—एक ऐसा शब्द जो सरकारी वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिए अपमानजनक तरीके से इस्तेमाल किया गया। और सबसे गंभीर बात, उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के जूते साफ कराने तक की बात कह डाली।
प्रशासनिक गरिमा को ठेस, चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन
इस बयान के बाद प्रशासनिक अधिकारी नाराज हो गए। आरोप लगाया गया कि चुनावी मंच से इस तरह की टिप्पणी से न केवल प्रशासनिक गरिमा को ठेस पहुंची बल्कि यह चुनाव आचार संहिता का सीधा उल्लंघन भी था।
समझने वाली बात है कि भारत में IAS अधिकारी संवैधानिक पदों पर होते हैं और उनका अपमान केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र का अपमान माना जाता है। इसके बाद रामपुर के भोट थाने में इस मामले में केस दर्ज किया गया।
सात साल बाद आया फैसला, कोर्ट ने क्या कहा?
इस मामले की सुनवाई रामपुर की MP/MLA कोर्ट में हुई। पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की और पूरा ट्रायल चला। 16 मई 2025 को, यानी पूरे सात साल बाद, अदालत ने अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने आजम खान को दोषी पाया और उन्हें दो साल की कैद की सजा सुनाई, साथ ही पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
दिलचस्प बात यह है कि 16 मई को जब यह फैसला आया, तब आजम खान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ही कोर्ट की सुनवाई में शामिल हुए थे, क्योंकि वे पहले से ही रामपुर जेल में बंद हैं।
आजम खान के वकीलों ने क्या तर्क दिया था?
कोर्ट में जब यह मामला चल रहा था, तो आजम खान के वकीलों ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि यह किसी धर्म या समुदाय के ऊपर टिप्पणी नहीं थी। लेकिन अदालत ने माना कि “तनखैया” शब्द एक पूरी कम्युनिटी को निशाना बनाता है—यानी वे सभी लोग जो सरकार से वेतन लेते हैं।
अगर गौर करें, तो “कलेक्टर-पलेक्टर” कहकर और “तनखैया” शब्द का इस्तेमाल करके आजम खान ने न केवल DM बल्कि सभी सरकारी कर्मचारियों का मनोबल गिराने की कोशिश की थी। और फिर “जूते साफ कराने” जैसी बेहद अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया, जिसे कोर्ट ने गंभीरता से लिया।
पहले से ही कई मामलों में फंसे हैं आजम खान
आजम खान फिलहाल कई कानूनी मामलों में घिरे हुए हैं। इस समय वे और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम दोनों रामपुर जेल में बंद हैं। कोर्ट ने इन दोनों को फर्जी पैन कार्ड मामले में पहले ही सात साल की सजा सुनाई थी। अब इस नए फैसले से उनकी सजा की अवधि और बढ़ जाएगी।
देखा जाए तो पिछले कुछ सालों में आजम खान की राजनीतिक और कानूनी स्थिति लगातार कमजोर हुई है। एक समय समाजवादी पार्टी के सबसे प्रभावशाली चेहरों में शुमार रहे आजम खान आज जेल की सलाखों के पीछे हैं।
“तनखैया” शब्द क्यों बना विवाद का केंद्र?
अदालत में यह बहस भी हुई कि आखिर “तनखैया” शब्द इतना आपत्तिजनक कैसे है। न्यायाधीश ने माना कि यह शब्द सरकारी कर्मचारियों के लिए अपमानजनक तरीके से इस्तेमाल किया गया था।
यहां समझने वाली बात यह भी है कि “कलेक्टर” केवल जिलाधिकारी को ही नहीं, बल्कि सभी तनख्वाह पाने वाले सरकारी कर्मचारियों को संदर्भित करता है—जिसमें पत्रकार, शिक्षक, पुलिसकर्मी सभी शामिल हैं। और ऐसे लोगों से “जूते साफ कराने” की बात करना पूरी तरह से अमर्यादित और दंडनीय अपराध माना गया।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और जनता की राय
हालांकि इस फैसले पर अभी तक समाजवादी पार्टी या आजम खान के परिवार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सोशल मीडिया पर इस पर तीखी बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे न्याय की जीत बता रहे हैं तो कुछ इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दे रहे हैं।
चिंता का विषय यह है कि चुनावी मंच से ऐसी भाषा का इस्तेमाल कितना सही है और क्या राजनेताओं को प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ इस तरह बोलने की छूट होनी चाहिए? यह सवाल अब पहले से कहीं ज्यादा प्रासंगिक हो गया है।
मुख्य बातें (Key Points)
- रामपुर की MP/MLA कोर्ट ने आजम खान को 16 मई 2025 को दो साल की जेल और ₹5,000 जुर्माने की सजा सुनाई
- मामला 9 अप्रैल 2019 का है, जब चुनाव प्रचार के दौरान आजम खान ने तत्कालीन DM अंजनेय कुमार सिंह पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी
- आजम खान ने DM को “तनखैया” कहा और मायावती के जूते साफ कराने की बात कही थी
- कोर्ट ने इसे चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन और प्रशासनिक गरिमा को ठेस माना
- आजम खान और उनका बेटा अब्दुल्ला आजम पहले से रामपुर जेल में फर्जी पैन कार्ड मामले में सात साल की सजा काट रहे हैं
- वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आजम खान सुनवाई में शामिल हुए थे













