Auqib Nabi India ODI Debut: गुवाहाटी के असम क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में बुधवार को वह पल आया, जिसका इंतजार जम्मू-कश्मीर को बरसों से था। औकिब नाबी को केएल राहुल ने वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे वनडे से पहले भारत की नीली जर्सी थमाई। यह उनका अंतरराष्ट्रीय डेब्यू था। और यह सिर्फ एक क्रिकेटर का डेब्यू नहीं, पूरी कश्मीर घाटी के क्रिकेट का जश्न था।
नाबी ने ऑलराउंडर नितीश कुमार रेड्डी की जगह प्लेइंग इलेवन में जगह बनाई। स्विंग गेंदबाजी में माहिर, दोनों तरफ गेंद को घुमाने की काबिलियत रखने वाले इस पेसर के लिए यह सफर आसान नहीं था।
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‘104 विकेट और एक सपना’
अगर गौर करें तो औकिब नाबी की असली कहानी रणजी ट्रॉफी के मैदानों में लिखी गई। 2024-25 और 2025-26 सीजन में उन्होंने कुल 104 विकेट झटके। यह आंकड़ा सुनने में साधारण लग सकता है, लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात है कि 2025-26 सीजन में उन्होंने अकेले 17 पारियों में 60 विकेट लिए, और औसत रहा मात्र 12.65।
दिलचस्प बात यह है कि इसी सीजन में जम्मू-कश्मीर ने पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब जीता, और नाबी उस जीत के सबसे बड़े हीरो थे। टूर्नामेंट के लीडिंग विकेट टेकर बने। वह मैच जीताने वाली गेंदें फेंकते रहे, और घाटी का सीना चौड़ा होता रहा।
‘सफेद गेंद में भी दिखाया दम’
लाल गेंद के जादूगर की पहचान बनाने के बाद नाबी ने सफेद गेंद पर भी ध्यान लगाया। 2025 सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में सात मैचों में 15 विकेट ले कर उन्होंने साबित कर दिया कि वह सिर्फ टेस्ट फॉर्मेट के खिलाड़ी नहीं हैं।
इसी प्रदर्शन का नतीजा था कि दिल्ली कैपिटल्स ने 2025 आईपीएल नीलामी में उन्हें 8.4 करोड़ रुपये में खरीदा। यह उनकी पहली आईपीएल बोली थी। और इससे साफ होता है कि घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को देर-सबेर पहचान जरूर मिलती है।
‘बुमराह की चोट बनी मौका’
देखा जाए तो नाबी का सफर कई बार मुश्किल मोड़ों से गुजरा। आईपीएल के बाद उन्हें अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट के लिए नेट बॉलर बनाया गया। भारत A के लिए श्रीलंका A के खिलाफ दो मैचों में छह विकेट लिए, पर भारतीय टीम में जगह नहीं मिली।
फिर जसप्रीत बुमराह की चोट ने उनके लिए दरवाजा खोला। नाबी को श्रीलंका टेस्ट दौरे के लिए टीम में बुलाया गया। हालांकि वहां खेलने का मौका नहीं मिला। पर यही उनका पहला भारतीय टीम कॉल-अप था।
सवाल उठता है कि अगर वहां डेब्यू होता तो क्या होता? जम्मू-कश्मीर के पहले टेस्ट क्रिकेटर का इतिहास रचा जाता। वह सपना अधूरा रहा, पर बुधवार को वनडे डेब्यू के साथ एक नया इतिहास जरूर लिखा गया।
‘J&K क्रिकेट का तीसरा सितारा’
नाबी के इस डेब्यू के साथ वह जम्मू-कश्मीर के तीसरे वनडे क्रिकेटर बन गए। उनसे पहले परवेज रसूल और उमरान मलिक यह मुकाम हासिल कर चुके थे। डेब्यू से पहले उनकी आखिरी लिस्ट ए एंट्री विजय हजारे ट्रॉफी में थी, जहां सात मैचों में 14 विकेट लिए।
राहत की बात यह है कि अब जम्मू-कश्मीर के युवाओं के सामने एक और उदाहरण है कि घाटी से भी भारतीय टीम तक का रास्ता जाता है।
‘क्या कहता है यह डेब्यू’
यह डेब्यू सिर्फ औकिब नाबी का नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट की उस सोच का हिस्सा है जो अब छोटे राज्यों और कम चर्चित क्रिकेट केंद्रों पर भी नजर रखती है। रणजी ट्रॉफी में धमाकेदार प्रदर्शन अब सीधे अंतरराष्ट्रीय दरवाजा खोल रहा है। यह दर्शाता है कि घरेलू क्रिकेट की बुनियाद मजबूत हो रही है और भारतीय चयन समिति अब सिर्फ बड़े केंद्रों तक सीमित नहीं है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- औकिब नाबी ने गुवाहाटी में वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे वनडे में भारतीय टीम में डेब्यू किया।
- केएल राहुल ने उन्हें पहली इंटरनेशनल कैप सौंपी।
- नाबी ने रणजी ट्रॉफी के दो सीजन में 104 विकेट लेकर पहचान बनाई।
- वह जम्मू-कश्मीर के तीसरे वनडे क्रिकेटर बने।
- दिल्ली कैपिटल्स ने उन्हें 8.4 करोड़ में IPL में खरीदा था।












