ATF Price Hike ने हवाई यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के सूत्रों के अनुसार घरेलू एयरलाइनों के लिए एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतों में 5.46 फीसदी यानी 6.28 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया है। इस बढ़ोतरी के बाद हवाई डीजल की कीमत 115 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 121.28 रुपये प्रति लीटर हो गई है।
देखा जाए तो यह लगातार दूसरा महीना है जब तेल कंपनियों ने हवाई ईंधन की कीमतों में इजाफा किया है। इसका सीधा असर आम यात्रियों की जेब पर पड़ने वाला है।
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एयरलाइनों का खर्च बढ़ेगा, टिकट भी महंगे होंगे
कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी से घरेलू एयरलाइनों का खर्च बढ़ेगा, जिसका सीधा असर हवाई किरायों पर पड़ सकता है। अगर गौर करें तो भारत में किसी भी एयरलाइन के कुल संचालन खर्चे का लगभग 35 से 40 फीसदी हिस्सा सिर्फ हवाई ईंधन पर ही खर्च होता है। समझने वाली बात यह है कि जब ईंधन महंगा होता है, तो एयरलाइनें यह बोझ यात्रियों पर डालती हैं।
हालांकि, टिकटों की कीमतों में बदलाव यात्रियों की मांग, एयरलाइनों के बीच मुकाबले और उपलब्ध सीटों पर भी निर्भर करेगा। दिलचस्प बात यह है कि त्योहारों के मौसम में जब मांग ज्यादा होती है, तो कीमतें और भी तेजी से बढ़ सकती हैं।
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पिछले महीनों का हिसाब
इससे पहले 1 अगस्त को भी ATF की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया था, जबकि जुलाई महीने में 5 रुपये की कटौती की गई थी। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि तेल कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को ATF की कीमतों में बदलाव करती हैं।
अगर तीन महीनों का हिसाब लगाएं, तो जुलाई में 5 रुपये की कमी के बावजूद, अगस्त और सितंबर में कुल मिलाकर 11.28 रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है। इसका मतलब साफ है – हवाई सफर लगातार महंगा हो रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार: असली कारण यहां छिपा है
हवाई ईंधन की कीमतों में यह इजाफा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतों के कारण हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जलडमरू (Strait of Hormuz) के जरिए तेल की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा बना हुआ है।
सवाल उठता है कि आखिर यह जलडमरू इतना महत्वपूर्ण क्यों है? दरअसल, दुनिया की करीब 21 फीसदी तेल सप्लाई इसी रास्ते से होती है। अगर यहां कोई संकट आता है, तो तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं।
कच्चे तेल की कीमतें: मौजूदा स्थिति
अंतरराष्ट्रीय बाजार में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चा तेल 86 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर और ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के नजदीक पहुंच गया है। देखा जाए तो पिछले तीन महीनों में कच्चे तेल में लगभग 10-12 डॉलर की बढ़ोतरी हुई है।
इसका मतलब है कि आने वाले महीनों में ATF और भी महंगा हो सकता है। और अगर ऐसा हुआ, तो हवाई सफर आम आदमी की पहुंच से बाहर होता जाएगा।
यात्रियों पर असर: क्या करें?
अगर आप जल्द ही हवाई सफर की योजना बना रहे हैं, तो जल्दी टिकट बुक कर लें। एयरलाइनें आमतौर पर पहले से बुक किए गए टिकटों की कीमतें नहीं बढ़ातीं। लेकिन नए टिकटों की कीमतें जरूर बढ़ सकती हैं।
दिलचस्प बात यह है कि कुछ एयरलाइनें “फ्यूल सरचार्ज” के नाम पर अलग से शुल्क वसूल सकती हैं। इसलिए टिकट बुक करते समय पूरी कीमत जरूर चेक करें।
सरकार की भूमिका: क्या कर सकती है?
एविएशन सेक्टर को बूस्ट देने के लिए सरकार ATF पर टैक्स कम कर सकती है। फिलहाल, ATF पर केंद्र और राज्य दोनों सरकारें टैक्स लगाती हैं। अगर इन टैक्स में कटौती की जाए, तो कीमतें काबू में आ सकती हैं।
हालांकि, सरकार के लिए यह आसान नहीं है क्योंकि टैक्स से राजस्व मिलता है। लेकिन समझने वाली बात यह है कि अगर हवाई सफर सस्ता होगा, तो ज्यादा लोग यात्रा करेंगे और लंबे समय में राजस्व बढ़ेगा।
मुख्य बातें (Key Points):
• ATF की कीमत में 6.28 रुपये प्रति लीटर (5.46%) की बढ़ोतरी, अब 121.28 रुपये लीटर
• लगातार दूसरा महीना इजाफा – अगस्त में 5 रुपये, सितंबर में 6.28 रुपये बढ़ा
• एयरलाइनों का 35-40% खर्च सिर्फ ईंधन पर, हवाई किराए बढ़ने की संभावना
• अंतरराष्ट्रीय तनाव – अमेरिका-ईरान विवाद से होर्मुज जलडमरू से तेल सप्लाई का खतरा













