Arvind Kejriwal, जो दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक हैं, भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित चेहरों में से एक हैं। मनीष सिसोदिया के साथ शराब घोटाला केस में गिरफ्तारी से लेकर जेल से रिहाई तक का उनका सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। देखा जाए तो एक IAS अधिकारी से राजनेता बनने तक की उनकी यात्रा किसी फिल्म से कम नहीं।
केजरीवाल कितने दिन जेल में रहे?
अरविंद केजरीवाल को 21 मार्च 2024 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली की शराब नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। उन्हें तिहाड़ जेल में बंद किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने 12 सितंबर 2024 को उन्हें जमानत दे दी, जिसके बाद वो जेल से रिहा हुए।
समझने वाली बात यह है कि केजरीवाल कुल मिलाकर लगभग 175 दिन (करीब 6 महीने) जेल में रहे। यह किसी भी सत्तारूढ़ मुख्यमंत्री के लिए एक अभूतपूर्व स्थिति थी। उनकी गिरफ्तारी के दौरान AAP ने इसे राजनीतिक षड्यंत्र बताया था, जबकि केंद्र सरकार ने कहा कि यह कानून का शासन है।
दिलचस्प बात यह है कि जेल में रहते हुए भी केजरीवाल AAP के राष्ट्रीय संयोजक बने रहे, और पार्टी की रणनीति में उनकी भूमिका बनी रही। आतिशी को उनकी जगह अंतरिम मुख्यमंत्री बनाया गया था।
शैक्षणिक योग्यता: एक शानदार छात्र
अगर गौर करें तो अरविंद केजरीवाल की शैक्षणिक पृष्ठभूमि बेहद प्रभावशाली है। उन्होंने 1985 में हिसार के कैंपस स्कूल से 12वीं की परीक्षा पास की। इसके बाद उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) खड़गपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री 1989 में हासिल की।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि IIT खड़गपुर से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करना उस दौर में और आज भी एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। केजरीवाल ने अपनी पढ़ाई में उत्कृष्टता दिखाई और IIT-JEE में सफलता प्राप्त की, जो भारत की सबसे कठिन प्रवेश परीक्षाओं में से एक है।
इसके बाद उन्होंने 1995 में भारतीय राजस्व सेवा (IRS) की परीक्षा में सफलता प्राप्त की और एक कर अधिकारी (Tax Officer) के रूप में अपना करियर शुरू किया। उनकी यह शैक्षणिक उपलब्धि दर्शाती है कि वो केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि एक योग्य और शिक्षित व्यक्ति हैं।
क्या केजरीवाल दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री हैं?
हां, अरविंद केजरीवाल दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने 17 सितंबर 2024 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। यह इस्तीफा उन्होंने जेल से रिहा होने के कुछ दिनों बाद दिया था।
वहीं, केजरीवाल ने तीन बार दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी:
- पहली बार: 28 दिसंबर 2013 (केवल 49 दिन के लिए)
- दूसरी बार: 14 फरवरी 2015 (पूरा कार्यकाल)
- तीसरी बार: 16 फरवरी 2020 (2024 तक)
इससे साफ होता है कि केजरीवाल ने दिल्ली की राजनीति में एक अहम भूमिका निभाई है। उनके इस्तीफे के बाद आतिशी को दिल्ली की नई मुख्यमंत्री बनाया गया।
चिंता का विषय यह था कि केजरीवाल ने स्वेच्छा से इस्तीफा देने की घोषणा की थी और कहा था कि जब तक जनता उन्हें “सफाई का प्रमाण पत्र” नहीं देती, वो CM पद पर वापस नहीं आएंगे। यह एक राजनीतिक दांव था जो आगामी दिल्ली विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर खेला गया।
केजरीवाल पहले क्या थे?
अरविंद केजरीवाल राजनीति में आने से पहले एक भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी थे। उन्होंने 1995 में सिविल सेवा परीक्षा पास की और संयुक्त आयुक्त (Joint Commissioner) के पद तक पहुंचे।
हैरान करने वाली बात यह है कि एक सुरक्षित और प्रतिष्ठित सरकारी नौकरी छोड़कर केजरीवाल ने 2006 में स्वेच्छा से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने यह कदम सामाजिक कार्यकर्ता बनने के लिए उठाया।
इससे पहले, उन्होंने:
- परिवर्तन नाम का एक NGO स्थापित किया था जो आम नागरिकों को उनके अधिकारों के बारे में शिक्षित करता था
- सूचना का अधिकार (RTI) आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई
- अन्ना हजारे के साथ भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
- जन लोकपाल बिल के लिए जोरदार अभियान चलाया
राहत की बात यह है कि केजरीवाल की यह यात्रा दिखाती है कि कैसे एक सामान्य व्यक्ति अपने सिद्धांतों के लिए खड़ा हो सकता है। उन्होंने 2012 में आम आदमी पार्टी (AAP) की स्थापना की, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ एक राजनीतिक विकल्प के रूप में उभरी।
शराब घोटाला केस: क्या है पूरा मामला?
दिल्ली की Excise Policy 2021-22 के तहत आरोप लगाया गया कि नीति में अनियमितताएं की गईं और करीब 100 करोड़ रुपये की अवैध कमीशन राशि ली गई। इस पैसे का इस्तेमाल AAP के चुनावी खर्चों में किया गया होने का आरोप है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) दोनों ने इस मामले में जांच की। केजरीवाल के साथ उनके पूर्व डिप्टी CM मनीष सिसोदिया को भी गिरफ्तार किया गया था।
सवाल उठता है कि क्या यह राजनीतिक प्रतिशोध था या वाकई कानूनी कार्रवाई? AAP का कहना है कि यह BJP की साजिश है, जबकि जांच एजेंसियों का कहना है कि सबूत मौजूद हैं।
राजनीतिक करियर: झोपड़ी से राजमहल तक
केजरीवाल की राजनीतिक यात्रा 2012 में AAP की स्थापना के साथ शुरू हुई। पहली बार 2013 में जब वो CM बने, तो उन्होंने केवल 49 दिन में इस्तीफा दे दिया, क्योंकि जन लोकपाल बिल पास नहीं हो पाया।
लेकिन 2015 में वापसी धमाकेदार रही। AAP ने 70 में से 67 सीटें जीतीं – दिल्ली इतिहास में सबसे बड़ी जीत। इसने साबित किया कि केजरीवाल की राजनीति में दम है।
उनकी सरकार ने कई योजनाएं लागू कीं:
- मोहल्ला क्लीनिक – मुफ्त स्वास्थ्य सुविधा
- बिजली-पानी में सब्सिडी
- सरकारी स्कूलों का कायाकल्प
- मुफ्त बस सेवा महिलाओं के लिए
विवादों से घिरे रहे केजरीवाल
देखा जाए तो केजरीवाल का राजनीतिक सफर विवादों से भरा रहा है। कभी उपराज्यपाल से टकराव, कभी केंद्र सरकार से संघर्ष, कभी CBI-ED की जांच। लेकिन हर बार वो मजबूती से खड़े रहे।
उनके आलोचक कहते हैं कि वो “धरना राजनीति” करते हैं, जबकि समर्थकों का मानना है कि वो सिस्टम से लड़ रहे हैं। सच शायद बीच में कहीं है।
आगे क्या होगा?
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 की शुरुआत में होने की संभावना है। केजरीवाल ने घोषणा की है कि वो दोबारा चुनाव लड़ेंगे और “जनता के कटघरे” में खड़े होंगे।
यह दर्शाता है कि उनकी राजनीतिक यात्रा अभी खत्म नहीं हुई है। जेल की सजा ने उन्हें कमजोर नहीं किया, बल्कि उनके समर्थकों में उन्हें “शहीद” की तरह पेश किया जा रहा है।
AAP का भविष्य: एक नया दौर
आम आदमी पार्टी अब सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है। पंजाब में सरकार है, और गोवा, गुजरात जैसे राज्यों में भी पार्टी ने पैर पसारे हैं। केजरीवाल की जेल यात्रा ने पार्टी को एक नई पहचान दी है।
इसी बीच, पार्टी के अंदर भी नेतृत्व को लेकर सवाल उठे हैं। आतिशी, संजय सिंह, गोपाल राय जैसे नेता अब ज्यादा सक्रिय दिख रहे हैं।
जनता की राय: बंटी हुई
दिल्ली की जनता में केजरीवाल को लेकर राय बंटी हुई है। एक तबका उन्हें ईमानदार क्रांतिकारी मानता है, तो दूसरा तबका उन्हें अवसरवादी राजनेता कहता है।
जमीनी स्तर पर AAP की योजनाओं – खासकर शिक्षा और स्वास्थ्य में – ने लोगों का दिल जीता है। लेकिन शराब घोटाला जैसे मामलों ने छवि पर दाग लगाया है।
मीडिया और केजरीवाल: एक जटिल रिश्ता
केजरीवाल और मीडिया का रिश्ता हमेशा से जटिल रहा है। वो अक्सर मीडिया को “बिका हुआ” बताते हैं, जबकि मीडिया उन पर सवाल उठाता रहता है।
सोशल मीडिया पर AAP की मजबूत उपस्थिति है। पार्टी ने डिजिटल कैंपेनिंग में महारत हासिल की है, जो युवा वोटरों को आकर्षित करती है।
मुख्य बातें (Key Points):
• अरविंद केजरीवाल शराब नीति घोटाला केस में 21 मार्च 2024 को गिरफ्तार हुए और 12 सितंबर 2024 को रिहा हुए – कुल लगभग 175 दिन जेल में रहे
• उन्होंने IIT खड़गपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग (1989) की डिग्री हासिल की और 1995 में IRS अधिकारी बने
• केजरीवाल दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री हैं – उन्होंने 17 सितंबर 2024 को इस्तीफा दिया
• राजनीति से पहले वो IRS अधिकारी थे, फिर सामाजिक कार्यकर्ता बने और 2012 में AAP की स्थापना की
• तीन बार दिल्ली के CM रहे – 2013 (49 दिन), 2015-2020, और 2020-2024
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: केजरीवाल कितने दिन जेल में रहा?
उत्तर: अरविंद केजरीवाल 21 मार्च 2024 को दिल्ली शराब नीति मामले में गिरफ्तार हुए और 12 सितंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद रिहा हुए। इस तरह वो लगभग 175 दिन (करीब 6 महीने) तिहाड़ जेल में रहे। यह किसी सत्तारूढ़ मुख्यमंत्री के लिए अभूतपूर्व स्थिति थी।
प्रश्न 2: केजरीवाल ने कितना पढ़ा लिखा है?
उत्तर: अरविंद केजरीवाल अत्यधिक शिक्षित हैं। उन्होंने 1989 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) खड़गपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद 1995 में भारतीय राजस्व सेवा (IRS) की परीक्षा पास की और संयुक्त आयुक्त के पद तक पहुंचे। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि बेहद मजबूत है।
प्रश्न 3: क्या अरविंद केजरीवाल दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री हैं?
उत्तर: हां, अरविंद केजरीवाल दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने 17 सितंबर 2024 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। वो तीन बार दिल्ली के CM रहे – पहली बार 2013 में (49 दिन), दूसरी बार 2015 में, और तीसरी बार 2020 में। उनके इस्तीफे के बाद आतिशी दिल्ली की नई मुख्यमंत्री बनीं।
प्रश्न 4: केजरीवाल पहले क्या था?
उत्तर: राजनीति में आने से पहले अरविंद केजरीवाल एक भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी थे। उन्होंने 1995-2006 तक टैक्स डिपार्टमेंट में काम किया। 2006 में उन्होंने स्वेच्छा से इस्तीफा दे दिया और सामाजिक कार्यकर्ता बन गए। इसके बाद उन्होंने RTI आंदोलन, अन्ना हजारे के साथ भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में भाग लिया, और 2012 में आम आदमी पार्टी (AAP) की स्थापना की।
प्रश्न 5: दिल्ली शराब नीति घोटाला क्या है?
उत्तर: दिल्ली शराब नीति घोटाला 2021-22 की एक्साइज पॉलिसी से जुड़ा है। आरोप है कि इस नीति में अनियमितताएं की गईं और लगभग 100 करोड़ रुपये की अवैध कमीशन राशि ली गई, जिसका इस्तेमाल AAP के चुनावी खर्चों में किया गया। ED और CBI ने इस मामले में जांच की और केजरीवाल तथा मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया। AAP इसे राजनीतिक षड्यंत्र बताती है।
SOURCES:
- Supreme Court of India – Official judgments and bail orders (September 2024)
- The Times of India – News reports on Kejriwal’s arrest and release
- The Hindu – Coverage of Delhi Excise Policy case
- Indian Express – Political developments and resignation
- Press Trust of India (PTI) – Official statements and press releases
- AAP Official Website – Party statements and biographical information
- Enforcement Directorate (ED) – Official press releases on the case
- IIT Kharagpur Alumni Database – Educational verification
- Wikipedia – Arvind Kejriwal biographical data (cross-verified with multiple sources)
- Government of NCT of Delhi – Official records of Chief Ministers













