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The News Air - Breaking News - Justice Swarna Kanta Sharma ने Kejriwal की याचिका खारिज, बोलीं- दबाव में नहीं आएगी अदालत

Justice Swarna Kanta Sharma ने Kejriwal की याचिका खारिज, बोलीं- दबाव में नहीं आएगी अदालत

दिल्ली हाईकोर्ट की जज ने शराब नीति केस से हटने से किया इनकार, पक्षपात के आरोपों को बताया बेबुनियाद और अटकलबाजी

The News Air Team by The News Air Team
मंगलवार, 21 अप्रैल 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, सियासत
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Arvind Kejriwal Delhi High Court
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Justice Swarna Kanta Sharma ने दिल्ली एक्साइज पॉलिसी केस में बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें जज से केस से हटने की मांग की गई थी। 20 अप्रैल को दिल्ली हाईकोर्ट में खुली अदालत में फैसला सुनाते हुए जस्टिस शर्मा ने साफ शब्दों में कहा कि वह इस मामले से खुद को अलग नहीं करेंगी और सुनवाई जारी रखेंगी।

देखा जाए तो यह फैसला सिर्फ एक केस की सुनवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता और जजों पर लगाए जाने वाले आरोपों को लेकर एक मजबूत संदेश भी है। जस्टिस शर्मा ने अपने फैसले में कहा कि अगर वह इस तरह की याचिका मान लेती हैं तो गलत संदेश जाएगा कि दबाव डालकर किसी भी केस से किसी भी जज को हटाया जा सकता है।

केजरीवाल ने लगाए थे पक्षपात के गंभीर आरोप

अरविंद केजरीवाल ने 13 अप्रैल को दिल्ली हाईकोर्ट में खुद पेश होकर करीब डेढ़ घंटे तक अपनी दलील रखी थी। उन्होंने 10 वजहें गिनाते हुए कहा था कि उन्हें Justice Swarna Kanta Sharma से निष्पक्ष सुनवाई मिलने को लेकर गंभीर शंका है। केजरीवाल का आरोप था कि जज के फैसलों में एक साफ पैटर्न दिखता है जिसमें ईडी और सीबीआई की दलीलों को ज्यादा तवज्जो दी जा रही है।

दिलचस्प बात यह है कि केजरीवाल ने सिर्फ कानूनी तर्क ही नहीं दिए बल्कि जज के निजी जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि को भी सवालों के घेरे में लाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि Justice Swarna Kanta Sharma चार बार अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रमों में शामिल हो चुकी हैं, जो आरएसएस से जुड़ा वकीलों का संगठन माना जाता है।

और बस यहीं से शुरू हुआ असली विवाद। केजरीवाल ने यह भी आरोप लगाया कि जस्टिस शर्मा के बच्चे केंद्र सरकार की तरफ से वकालत करते हैं और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अधीन काम करते हैं। ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ऐसे हालात में पूरी तरह निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद की जा सकती है?

जस्टिस शर्मा का तल्ख जवाब, तोड़े सभी तर्क

Justice Swarna Kanta Sharma ने केजरीवाल के हर आरोप का विस्तार से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अगर कोई जज पद की शपथ लेता है तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि उसका परिवार भी इस पेशे में नहीं आने की शपथ ले रहा है। जज के बच्चे या परिवार अपनी जिंदगी कैसे जिएंगे, यह कोई भी तय नहीं कर सकता।

समझने वाली बात यह है कि जस्टिस शर्मा ने इस तर्क को बहुत ही सशक्त तरीके से रखा। उन्होंने कहा कि अगर नेताओं के बच्चे राजनीति में आ सकते हैं तो जजों के बच्चे वकालत क्यों नहीं कर सकते? क्या जज बनने का मतलब यह है कि आपके परिवार का भविष्य भी बंधक हो जाए?

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस शर्मा ने साफ कहा कि बिना किसी ठोस सबूत के कोई पक्षकार किसी जज पर सवाल नहीं उठा सकता। अदालत कोई धारणाओं का मंच नहीं है। पक्षपात का जो डर बताया गया है वह सिर्फ अटकलों पर आधारित है।

गलत मिसाल कायम नहीं होने देंगी अदालत

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि Justice Swarna Kanta Sharma ने अपने फैसले में एक बड़ा और दूरगामी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अगर मैं ऐसी याचिकाएं मान लूं तो यह एक गलत मिसाल बनेगी जहां सब कुछ किसी पक्षकार की निजी सहूलियत पर निर्भर हो जाएगा।

अदालत पीछे नहीं हटेगी क्योंकि ऐसा करना संस्था की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाएगा। इससे साफ होता है कि जज न्यायपालिका की गरिमा और स्वतंत्रता को लेकर बेहद गंभीर हैं।

जस्टिस शर्मा ने आगे कहा कि अदालत किसी मीडिया नैरेटिव के आगे नहीं झुकेगी। चिंता की बात यह है कि इस मामले को मीडिया नैरेटिव से जोड़ने की कोशिश की जा रही है जिसमें बिना जवाबदेही के बदनाम करने जैसी बातें भी शामिल हैं।

मैंने कभी अपनी ड्यूटी से पीछे नहीं हटना सीखा

अगर गौर करें तो Justice Swarna Kanta Sharma के शब्दों में एक मजबूत संकल्प झलकता है। उन्होंने कहा कि मामले से हट जाना आसान होता है। लेकिन उन्होंने कभी अपनी ड्यूटी से पीछे हटना नहीं सीखा।

उन्होंने यह भी कहा कि बिना वजह बताए खुद को अलग कर लेना आसान होता, लेकिन इससे यह बहस और बढ़ती कि क्या जजों को डराकर फैसले बदले जा सकते हैं। मैंने अपने सामने आए हर सवाल पर बिना डरे फैसला किया है। इस अदालत को आरोपों और इशारों से दबाया नहीं जा सकता।

जब भी जरूरत पड़ेगी, यह अदालत अपने फैसले पर डटी रहेगी। चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों ना हों। यही कहते हुए जस्टिस शर्मा ने खुद को मामले से हटाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।

क्या है पूरे शराब नीति केस की असली कहानी?

दरअसल यह पूरा मामला दिल्ली की शराब नीति से जुड़े भ्रष्टाचार केस से संबंधित है। 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया था। इसके बाद सीबीआई इस फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची।

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मामला Justice Swarna Kanta Sharma के पास इसलिए आया क्योंकि उनके पास ऐसे मामलों की सुनवाई होती है। फिर 9 मार्च को हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उस हिस्से पर रोक लगा दी जिसमें जांच अधिकारी के खिलाफ कारवाई की बात कही गई थी।

आरोप लगा कि यह आदेश बिना आरोपियों की दलील सुने दिया गया था। इसके बाद अरविंद केजरीवाल और पांच अन्य लोगों ने हाईकोर्ट में अर्जी दी कि जस्टिस शर्मा इस केस से खुद को अलग कर लें। उनका कहना था कि उन्हें निष्पक्ष सुनवाई को लेकर शक है।

13 अप्रैल को हुई थी करीब 4 घंटे की मैराथन सुनवाई

13 अप्रैल को इस मामले पर करीब 4 घंटे तक लंबी सुनवाई हुई। अरविंद केजरीवाल ने खुद कोर्ट में उपस्थित होकर अपनी बात रखी। उन्होंने 10 वजहें गिनाते हुए समझाया कि क्यों उन्हें लगता है कि उन्हें इस अदालत से निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिल सकती।

राहत की बात यह है कि अदालत ने दोनों पक्षों को पूरा मौका दिया अपनी बात रखने का। हालांकि अंत में Justice Swarna Kanta Sharma ने साफ कर दिया कि वह मामले से नहीं हटेंगी और सुनवाई जारी रहेगी।

न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर उठे गंभीर सवाल

हैरान करने वाली बात यह है कि यह मामला अब सिर्फ एक केस की सुनवाई तक सीमित नहीं रह गया है। इसने न्यायपालिका की स्वतंत्रता, जजों पर आरोप लगाने की प्रक्रिया और मीडिया ट्रायल जैसे गंभीर मुद्दों को सामने ला दिया है।

Justice Swarna Kanta Sharma ने अपने फैसले में कहा कि जजों पर व्यक्तिगत हमले दरअसल पूरे न्याय व्यवस्था पर हमले होते हैं। और ऐसे हमलों का असर संस्था को झेलना पड़ता है ना कि सिर्फ एक जज को।

इससे साफ होता है कि जज इस मामले को एक बड़े परिप्रेक्ष्य में देख रही हैं। यह सिर्फ अरविंद केजरीवाल बनाम सरकार का मामला नहीं है, बल्कि यह न्यायपालिका की मर्यादा और स्वतंत्रता का सवाल बन गया है।

क्या होगा अब आगे?

सवाल उठता है कि अब इस मामले में क्या होगा? Justice Swarna Kanta Sharma ने याचिका खारिज करके साफ कर दिया है कि वह सुनवाई जारी रखेंगी। अब शराब नीति केस में सीबीआई की अपील पर सुनवाई आगे बढ़ेगी।

इसी बीच, यह मामला राजनीतिक गलियारों में भी गर्म बहस का विषय बना हुआ है। आम आदमी पार्टी और उसके नेताओं ने इस फैसले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है, जबकि विपक्षी दल भी इस पर अपनी राय रख रहे हैं।

दूसरी ओर, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला आने वाले समय में एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है। खासकर उन मामलों में जहां किसी जज से हटने की मांग की जाती है।

न्यायिक जवाबदेही बनाम न्यायिक स्वतंत्रता की बहस

यहां समझने वाली बात यह है कि यह मामला एक बड़ी बहस को जन्म दे रहा है। एक तरफ न्यायिक जवाबदेही की बात है तो दूसरी तरफ न्यायिक स्वतंत्रता का सवाल। क्या किसी जज से उनके निजी जीवन, परिवार या सामाजिक उपस्थिति के आधार पर सवाल पूछे जा सकते हैं?

Justice Swarna Kanta Sharma का फैसला इस दिशा में एक मजबूत संदेश देता है कि जजों की स्वतंत्रता पर सवाल नहीं उठाए जा सकते जब तक कि ठोस सबूत न हों। सिर्फ धारणाओं और अटकलों के आधार पर किसी जज को हटाने की मांग नहीं की जा सकती।

वहीं, कुछ कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायिक पारदर्शिता के लिए यह जरूरी है कि जजों से सवाल पूछे जा सकें। हालांकि इस पर भी सवाल है कि किस हद तक और किस तरीके से।

मीडिया ट्रायल की भी उठी चिंता

Justice Swarna Kanta Sharma ने अपने फैसले में मीडिया नैरेटिव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस मामले को मीडिया नैरेटिव से जोड़ने की कोशिश की जा रही है जिसमें बिना जवाबदेही के बदनाम करने जैसी बातें शामिल हैं।

यह टिप्पणी इस बात की ओर इशारा करती है कि कैसे कई बार अदालती मामले मीडिया में एक खास तरीके से पेश किए जाते हैं जो न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।

चिंता का विषय यह है कि क्या मीडिया ट्रायल न्यायिक प्रक्रिया में बाधा बन रहा है? क्या इससे जजों पर अनुचित दबाव बन रहा है? ये सवाल अब व्यापक बहस का हिस्सा बन गए हैं।


मुख्य बातें (Key Points)

• Justice Swarna Kanta Sharma ने अरविंद केजरीवाल की केस से हटने की याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया है

• जस्टिस शर्मा ने कहा कि दबाव डालकर किसी भी जज को नहीं हटाया जा सकता, यह गलत मिसाल होगी

• केजरीवाल ने जज पर पक्षपात और हितों के टकराव के आरोप लगाए थे जिन्हें बेबुनियाद बताया गया

• यह मामला दिल्ली शराब नीति से जुड़े भ्रष्टाचार केस से संबंधित है जिसमें सीबीआई ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है

• फैसले ने न्यायिक स्वतंत्रता, जवाबदेही और मीडिया ट्रायल जैसे गंभीर मुद्दों पर बहस छेड़ दी है


FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: Justice Swarna Kanta Sharma ने अरविंद केजरीवाल की याचिका क्यों खारिज की?

जस्टिस शर्मा ने याचिका इसलिए खारिज की क्योंकि उन्होंने केजरीवाल के पक्षपात के आरोपों को बेबुनियाद और सिर्फ अटकलों पर आधारित बताया। उन्होंने कहा कि अगर वह ऐसी याचिका मान लेतीं तो गलत मिसाल बनती कि दबाव डालकर किसी भी जज को हटाया जा सकता है।

प्रश्न 2: अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस शर्मा पर क्या आरोप लगाए थे?

केजरीवाल ने आरोप लगाया था कि जस्टिस शर्मा आरएसएस से जुड़े अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रमों में गई हैं और उनके बच्चे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ काम करते हैं जो केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं है।

प्रश्न 3: दिल्ली शराब नीति केस में अब क्या होगा?

अब Justice Swarna Kanta Sharma शराब नीति केस में सुनवाई जारी रखेंगी। सीबीआई ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया गया था। हाईकोर्ट में इसी अपील पर सुनवाई होगी।

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