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The News Air - Breaking News - Article 371 Ladakh: बड़ा फैसला, अब 7 जिलों में Hill Council

Article 371 Ladakh: बड़ा फैसला, अब 7 जिलों में Hill Council

लद्दाख को मिलेगा विशेष संवैधानिक दर्जा, Article 371 फ्रेमवर्क के तहत यूटी लेवल इलेक्टेड बॉडी और सभी 7 जिलों में हिल काउंसिल बनेगी।

Ajay Kumar by Ajay Kumar
बुधवार, 15 जुलाई 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, राष्ट्रीय, स्पेशल स्टोरी
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Article 371 Ladakh
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Article 371 Ladakh को लेकर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला आ चुका है। सरकार ने लद्दाख के लिए एक नए संवैधानिक और प्रशासनिक ढांचे का प्रस्ताव रखा है, जो अभी तक भारत में कहीं और लागू नहीं हुआ है। लद्दाख के चीफ सेक्रेटरी आशीष कुंद्रा ने केंद्र सरकार और लद्दाखी प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श के बाद इसकी घोषणा की है।

देखा जाए तो 2019 में Article 370 हटने के बाद लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। शुरुआत में लोग खुश थे क्योंकि दशकों की मांग पूरी हुई थी, लेकिन बाद में कई मुद्दे सामने आए। लद्दाख में कोई विधानसभा नहीं थी, जनप्रतिनिधित्व की कमी थी, और स्थानीय लोगों को डर था कि बाहरी लोग आकर जमीनें खरीद लेंगे और उनकी संस्कृति खतरे में पड़ जाएगी।

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क्या है नया फ्रेमवर्क

सरकार ने लद्दाख के लिए तीन प्रमुख घोषणाएं की हैं। पहला, एक यूनियन टेरिटरी लेवल की इलेक्टेड बॉडी बनाई जाएगी। यह विधानसभा नहीं होगी, लेकिन एक ऐसी संस्था होगी जिसके सदस्यों को जनता चुनेगी और जो स्थानीय मुद्दों पर फैसले ले सकेगी।

दूसरा, सभी सात जिलों में ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल बनाई जाएगी। अभी तक सिर्फ लेह और कारगिल में हिल काउंसिल थी, लेकिन अब नुब्रा, शाम, चांगथांग, जांस्कर और द्रास में भी अलग-अलग हिल काउंसिल होंगी। इन काउंसिल के पास स्थानीय सड़कों, ग्रामीण विकास, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन जैसे मामलों में अधिकार होंगे।

तीसरा, Article 371 के तहत लद्दाख के लिए विशेष संवैधानिक सुरक्षा प्रावधान लाए जाएंगे। यह भूमि, रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण से जुड़े होंगे।

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आर्टिकल 371 क्या है और कैसे काम करता है

समझने वाली बात यह है कि Article 371 कोई एक समान प्रावधान नहीं है। यह संविधान में अलग-अलग राज्यों की जरूरतों के हिसाब से बनाए गए विशेष प्रावधानों का समूह है। जैसे Article 371 में महाराष्ट्र और गुजरात के लिए अलग विकास बोर्ड हैं, Article 371A में नागालैंड के लिए प्रथागत कानूनों की सुरक्षा है, Article 371B में असम के लिए आदिवासी समितियां हैं।

अब सरकार लद्दाख के लिए भी इसी तर्ज पर एक अलग प्रावधान बनाएगी जो लद्दाख की समस्याओं का समाधान करेगा। यह प्रावधान भूमि स्वामित्व, स्थानीय रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण को लेकर होगा।

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क्यों नहीं दी स्टेटहुड या सिक्स्थ शेड्यूल

अगर गौर करें तो लद्दाख के प्रतिनिधियों ने चार मुख्य मांगें रखी थीं: राज्य का दर्जा, सिक्स्थ शेड्यूल में शामिल करना, संवैधानिक सुरक्षा और अलग पब्लिक सर्विस कमीशन। लेकिन सरकार ने न तो स्टेटहुड दी और न ही सिक्स्थ शेड्यूल में डाला।

सरकार का तर्क है कि लद्दाख एक संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र है जहां चीन और पाकिस्तान की सीमाएं लगती हैं। सियाचिन ग्लेशियर, गलवान घाटी, पैंगोंग त्सो, डेपसांग मैदान जैसे रणनीतिक क्षेत्र यहां हैं। इसलिए केंद्र का सीधा नियंत्रण जरूरी है।

सिक्स्थ शेड्यूल के बारे में सरकार का कहना है कि यह खास तौर पर पूर्वोत्तर के कुछ क्षेत्रों के लिए बना है। अगर लद्दाख को इसमें डाला जाएगा तो देश के कई अन्य हिस्सों से भी ऐसी मांग उठने लगेगी।

गवर्नेंस स्ट्रक्चर कैसा होगा

दिलचस्प बात यह है कि लद्दाख की शासन व्यवस्था तीन स्तरीय होगी। सबसे ऊपर केंद्र सरकार होगी, उसके नीचे उपराज्यपाल (Lieutenant Governor) होंगे जिन्हें केंद्र नियुक्त करेगा। फिर यूटी लेवल की इलेक्टेड बॉडी आएगी। उसके नीचे सात जिलों की हिल काउंसिल होंगी और सबसे नीचे गांव पंचायतें।

यह एक थ्री-टियर डेमोक्रेटिक स्ट्रक्चर है जो यूनियन टेरिटरी का दर्जा बनाए रखते हुए लोगों को ज्यादा भागीदारी देगा।

17 नए तहसील भी बनेंगे

सरकार ने यह भी घोषणा की है कि लद्दाख में 17 नए तहसील बनाए जाएंगे। पहले सिर्फ 15 तहसील थे, अब कुल 32 हो जाएंगे। तहसील का महत्व इसलिए है क्योंकि लोग वहां जाकर आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र जैसे जरूरी दस्तावेज बनवाते हैं।

अभी तक लद्दाख में तहसील कम होने से लोगों को 150-300 किलोमीटर तक जाना पड़ता था। अब हर इलाके में तहसील होने से यह समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी।

सोनम वांगचुक का आंदोलन

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि सोनम वांगचुक ने भी इस मुद्दे पर कई बार उपवास और आंदोलन किए हैं। वे लद्दाख के पर्यावरण संरक्षण, रोजगार सुरक्षा और विशेष दर्जे की मांग कर रहे थे। हालांकि सरकार ने सभी मांगें नहीं मानी हैं, लेकिन Article 371 फ्रेमवर्क एक बड़ा कदम जरूर है।

वांगचुक अभी जंतर-मंतर पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर भूख हड़ताल पर हैं, लेकिन लद्दाख के मुद्दे पर भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है।


मुख्य बातें (Key Points):

  • लद्दाख को Article 371 के तहत विशेष संवैधानिक दर्जा मिलेगा
  • यूटी लेवल की इलेक्टेड बॉडी बनेगी (विधानसभा नहीं)
  • सभी 7 जिलों में हिल काउंसिल बनाई जाएगी
  • 17 नए तहसील बनेंगे (कुल 32)
  • लद्दाख यूनियन टेरिटरी ही रहेगा, राज्य नहीं बनेगा

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: लद्दाख को राज्य का दर्जा क्यों नहीं दिया गया?

लद्दाख संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र है जहां चीन और पाकिस्तान की सीमाएं लगती हैं। केंद्र सरकार सुरक्षा कारणों से सीधा नियंत्रण रखना चाहती है।

प्रश्न 2: Article 371 फ्रेमवर्क से लद्दाख को क्या फायदा होगा?

इससे स्थानीय लोगों को भूमि, रोजगार और संस्कृति की सुरक्षा मिलेगी। यूटी लेवल की इलेक्टेड बॉडी और 7 हिल काउंसिल बनने से लोगों को फैसलों में भागीदारी मिलेगी।

प्रश्न 3: सिक्स्थ शेड्यूल और Article 371 में क्या अंतर है?

सिक्स्थ शेड्यूल खास तौर पर पूर्वोत्तर के आदिवासी क्षेत्रों के लिए है, जबकि Article 371 अलग-अलग राज्यों की जरूरतों के हिसाब से बनाया जाता है।

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पत्रकारिता में एक दशक से अधिक का ठोस अनुभव रखने वाले अजय कुमार 'शोर से ज़्यादा सार' की पत्रकारिता पर दृढ़ विश्वास करते हैं। वर्तमान में वे The News Air में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे समाचारों की रणनीति, लेखन, तथ्य-सत्यापन (Fact-Checking) और सटीक प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं।पत्रकारिता का सफर और अनुभव - अजय कुमार का करियर ग्राउंड ज़ीरो की रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज़ डेस्क के कुशल प्रबंधन तक विस्तृत है। The News Air में पिछले 3 वर्षों से नेतृत्व करने से पहले, उन्होंने 'दैनिक जागरण' और 'सिटी न्यूज़' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके काम करने के तरीके को बेहद व्यावहारिक और तथ्य-आधारित बनाया है।विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र (Expertise & Beats) - वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा, स्पष्ट तथ्यों और निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं। उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है:राजनीतिक कवरेज: लोकसभा चुनावों और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड और डेस्क रिपोर्टिंग।कानूनी और संसदीय खबरें: संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों की नियमित और रियल-टाइम कवरेज।खोजी पत्रकारिता: ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ रिपोर्टिंग के जरिए अंदरूनी खबरों की पड़ताल।विश्वसनीयता और डिजिटल योगदान (Trust & Authority) - सटीक और प्रामाणिक ख़बरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें पाठकों के बीच एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और फेक न्यूज़ से लड़ने की दिशा में, अजय कुमार गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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