Amit Shah Punjab Rally 2027 Elections: पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 का बिगुल बज चुका है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 14 मार्च को पंजाब के मोगा में “बदलाव रैली” आयोजित करने का ऐलान किया है जिसे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संबोधित करेंगे। यह रैली पंजाब की राजनीति में BJP की दावेदारी को मजबूत करने का सबसे बड़ा कदम है, खासकर तब जब पार्टी 2020 में शिरोमणि अकाली दल (SAD) से गठबंधन टूटने के बाद से पंजाब में अपनी जमीन तलाश रही है। BJP की योजना 2027 में पंजाब की सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की है।
मोगा क्यों? पंजाब की राजनीति में इस जिले का “लकी चार्म” कनेक्शन
मोगा का चुनाव रैली के लिए चयन कोई संयोग नहीं है। पंजाब के मालवा क्षेत्र में केंद्रीय स्थान पर बसा मोगा जिला राज्य की राजनीति में एक खास जगह रखता है। राजनीतिक दल मोगा को अपना “लकी चार्म” मानते हैं और हर चुनाव में अपने अभियान की शुरुआत यहीं से करते हैं। यह इलाका किसान आंदोलन का गढ़ भी माना जाता है, जिससे यहां से चुनावी बिगुल बजाना और भी प्रतीकात्मक हो जाता है।
दिलचस्प बात यह है कि इससे ठीक पहले 16 फरवरी को सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी मोगा में ही अपनी विशाल “ड्रग विरोधी रैली” आयोजित की थी, जिसे AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत मान ने संबोधित किया था। अब BJP ने उसी मोगा को चुनकर AAP को सीधी चुनौती दे दी है — यह संदेश साफ है कि जंग का मैदान तय हो चुका है।
2022 में सिर्फ 2 सीटें जीती थीं — अब क्या बदलेगा?
पंजाब में BJP की राजनीतिक यात्रा उतार-चढ़ाव भरी रही है। 2020 में कृषि कानूनों को लेकर पैदा हुए विवाद के बाद शिरोमणि अकाली दल से दशकों पुराना गठबंधन टूट गया। 2022 के विधानसभा चुनाव में BJP ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की तत्कालीन पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस (PLC) और SAD (संयुक्त) के साथ मिलकर चुनाव लड़ा, लेकिन नतीजा निराशाजनक रहा — BJP को सिर्फ 2 सीटें मिलीं।
अब 2027 में पार्टी की रणनीति पूरी तरह बदल चुकी है। BJP सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी में है। अमित शाह की मोगा रैली इसी नई रणनीति का पहला बड़ा कदम है। पार्टी यह दिखाना चाहती है कि उसे पंजाब में किसी गठबंधन की जरूरत नहीं — वो अपने दम पर AAP को सत्ता से बाहर कर सकती है।
“16 मार्च को 4 साल पूरे होंगे, एक भी वादा पूरा नहीं हुआ” — BJP का AAP पर हमला
BJP के राज्य कार्यकारी अध्यक्ष अश्विनी शर्मा ने गुरुवार को चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अमित शाह की रैली का ऐलान किया और AAP सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पंजाब का हर तबका हर मोर्चे पर परेशान है और जनता ने AAP को सत्ता से बाहर करने का मन बना लिया है। लोग अब BJP को बदलाव का विश्वसनीय विकल्प मान रहे हैं।
शर्मा ने कहा कि 16 मार्च को “रिमोट-कंट्रोल्ड” मुख्यमंत्री भगवंत मान की AAP सरकार को सत्ता में चार साल पूरे हो जाएंगे। इन चार वर्षों में चुनावी गारंटियां और वादे पूरे करना तो दूर, AAP सरकार पंजाब में कानून का शासन सुनिश्चित करने में भी विफल रही है। सत्ता में आने से पहले जो भी वादे किए गए थे, उन सब पर सरकार ने यू-टर्न ले लिया है।
“पंसारी की दुकान तक पहुंच रहे एक्सटॉर्शन कॉल” — कानून-व्यवस्था पर गंभीर आरोप
अश्विनी शर्मा ने पंजाब की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सबसे गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पंजाब में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है, जबकि ड्रग और माइनिंग माफिया से जुड़ा भ्रष्टाचार चरम पर है। स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था बिगड़ती जा रही है और कर्मचारियों को समय पर वेतन और पेंशन नहीं मिल रही।
किसानों के मुद्दे पर शर्मा ने कहा कि भगवंत मान ने हर फसल पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) देने का वादा पूरा नहीं किया, बल्कि पिछले चार वर्षों में केंद्र द्वारा भेजी गई गेहूं और धान की MSP में भी कटौती हुई है।
सबसे चौंकाने वाला आरोप यह था कि अब एक्सटॉर्शन कॉल सिर्फ बड़े व्यापारियों को नहीं, बल्कि आटा-दाल बेचने वाले छोटे पंसारियों तक पहुंच रहे हैं। गांवों, कस्बों और शहरों में रोजाना चेन स्नैचिंग की घटनाएं हो रही हैं। कबड्डी खिलाड़ियों की दिनदहाड़े हत्या हो रही है। गैंगस्टर खुलेआम गोलियां चला रहे हैं और अब तो थाना और SSP ऑफिस के बाहर भी बेखौफ होकर वारदातें हो रही हैं।
AAP बनाम BJP — मोगा बना पंजाब की राजनीति का नया अखाड़ा
पंजाब की राजनीतिक तस्वीर अब तेजी से बदल रही है। एक तरफ AAP ने 16 फरवरी को मोगा में ड्रग विरोधी रैली करके अपनी उपलब्धियां गिनाईं और दूसरी तरफ BJP ने 14 मार्च को उसी मोगा में “बदलाव रैली” का ऐलान करके सीधा संदेश दिया कि अब मुकाबला AAP बनाम BJP का होगा।
पंजाब में कांग्रेस और अकाली दल जैसी पारंपरिक पार्टियां कमजोर पड़ती दिख रही हैं। ऐसे में BJP की यह आक्रामक रणनीति दो बातें साफ करती है — पहली, पार्टी अब पंजाब को गंभीरता से ले रही है और दूसरी, अमित शाह जैसे बड़े नेता को रैली का चेहरा बनाकर BJP यह बताना चाहती है कि पंजाब उसकी प्राथमिकता सूची में काफी ऊपर आ चुका है।
हालांकि, सिर्फ 2 सीटों के आधार से 117 सीटों पर अकेले लड़ने का लक्ष्य — यह BJP के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होगा। किसान आंदोलन की यादें अभी ताजा हैं, कृषि कानूनों का दंश अभी भी पंजाब के गांवों में महसूस होता है और अकाली दल से टूटा गठबंधन सिख वोटबैंक में BJP की पैठ को और मुश्किल बनाता है। ऐसे में अमित शाह की मोगा रैली कितनी जमीन बना पाती है, यह 2027 के चुनावी समीकरण तय करेगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- अमित शाह 14 मार्च को मोगा में BJP की “बदलाव रैली” को संबोधित करेंगे — पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 का औपचारिक बिगुल बजाया गया; BJP सभी 117 सीटों पर अकेले लड़ने की तैयारी में है।
- AAP सरकार पर गंभीर आरोप — कानून-व्यवस्था ध्वस्त, ड्रग-माइनिंग माफिया से जुड़ा भ्रष्टाचार चरम पर, छोटे पंसारियों तक पहुंच रहे एक्सटॉर्शन कॉल, थाने और SSP ऑफिस के बाहर बेखौफ वारदातें।
- मोगा का रणनीतिक महत्व — 16 फरवरी को AAP ने यहां ड्रग विरोधी रैली की थी; अब BJP ने उसी मोगा को चुनकर सीधी चुनौती दी; मालवा क्षेत्र का यह जिला किसान आंदोलन का गढ़ और राजनीतिक दलों का “लकी चार्म” माना जाता है।
- 2022 में BJP को सिर्फ 2 सीटें मिली थीं — 2020 में अकाली दल से गठबंधन टूटने के बाद पंजाब में BJP की जमीन कमजोर रही; अब अकेले 117 सीटों पर लड़ने का लक्ष्य बेहद चुनौतीपूर्ण होगा।








