AAP BJP Switch पंजाब की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है। आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए छह सांसद अब पार्टी की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ का चेहरा बनने जा रहे हैं। देखा जाए तो यह भाजपा की एक बड़ी रणनीतिक चाल है, जिसमें उन नेताओं का इस्तेमाल किया जा रहा है जो कभी AAP के लिए मैदान में उतरे थे।
आज पहली बार राघव चड्ढा और डॉ. संदीप पाठक समेत छह सांसद सदस्य पंजाब भाजपा की मीटिंग में एक साथ शामिल हुए। दिलचस्प बात यह है कि ये सभी नेता 2026 के अप्रैल में पंजाब से राज्यसभा में भेजे गए सात सांसदों में से हैं, जिन्होंने बाद में AAP को अलविदा कह भाजपा का दामन थाम लिया था।
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कौन हैं ये छह सांसद जो AAP से BJP में आए?
भाजपाई बने सांसद सदस्य राघव चड्ढा और संदीप पाठक के अलावा विक्रमजीत सिंह साहनी, हरभजन सिंह, रजिंदर गुप्ता और अशोक मित्तल शामिल हैं। पहली बार है कि यह ग्रुप के रूप में पंजाब भाजपा की मीटिंग में पहुंच रहे हैं।
अगर गौर करें तो अप्रैल 2026 में पंजाब से राज्यसभा में भेजे गए सात सांसद सदस्यों में से छह ने भाजपा का पल्ला पकड़ लिया, जबकि संत बलवीर सिंह सीचेवाल अभी भी AAP का हिस्सा हैं।
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नशा मुक्त पंजाब यात्रा में क्या होगी भूमिका?
भाजपा इन सांसद सदस्यों को यात्रा में अहम भूमिका देगी क्योंकि ये नेता पिछली विधानसभा चुनाव में बड़ी जिम्मेदारी बतौर AAP आगू निभा चुके हैं। भाजपा की नशा मुक्त पंजाब यात्रा की तैयारी के बारे में मीटिंगों का दौर चल रहा है।
सांसद सदस्य रजिंदर गुप्ता लुधियाना और बरनाला में यात्रा के लिए अहम भूमिका निभाएंगे। समझने वाली बात यह है कि भाजपा इन नेताओं की स्थानीय पकड़ और पुरानी AAP छवि का फायदा उठाना चाहती है।
राघव चड्ढा का पंजाब दौरा
राघव चड्ढा का AAP छोड़ने के बाद पंजाब का यह दूसरा दौरा है। वह पहले लुधियाना मीटिंग में भी आ चुके हैं। हाल ही में राघव चड्ढा ने मोहाली से अपनी वोट हटाए जाने से पंजाब की AAP सरकार पर तल्ख टिप्पणी की थी।
डॉ. संदीप पाठक भाजपा में शामिल होने के बाद पहली बार पंजाब पहुंच रहे हैं। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि आम आदमी पार्टी के मूल सदस्य रहे और संसद में पहुंचे ये दोनों नेता अब भाजपा के लिए पंजाब में मैदान संभालेंगे।
क्यों महत्वपूर्ण है यह रणनीति?
पंजाब में 2027 की विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की यह चाल काफी सोची-समझी नजर आती है। ये नेता AAP की अंदरूनी कमजोरियों से अच्छी तरह वाकिफ हैं और जनता के बीच उनकी पहचान भी है।
देखा जाए तो भाजपा इन नेताओं के जरिए AAP के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है। नशा मुक्ति जैसे मुद्दे पर ये नेता पहले भी काम कर चुके हैं, इसलिए इनकी बात में विश्वसनीयता भी दिखेगी।
AAP के लिए बड़ा झटका
सात में से छह सांसदों का भाजपा में चले जाना AAP के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका है। यह दर्शाता है कि पार्टी के अंदर कितनी गहरी दरारें हैं। चेतावनी संकेत यह भी है कि पंजाब में AAP की पकड़ कमजोर हो सकती है।
जिन नेताओं ने कभी AAP को पंजाब में सत्ता दिलाई थी, वही नेता अब उसके खिलाफ मैदान में उतर रहे हैं। यह AAP की साख और विश्वसनीयता पर सवालिया निशान खड़ा करता है।
पंजाब की राजनीति में नया समीकरण
इस घटनाक्रम से पंजाब की राजनीतिक तस्वीर बदल सकती है। भाजपा जो अभी तक पंजाब में कमजोर मानी जाती थी, अब इन अनुभवी चेहरों के साथ अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश में है।
दूसरी ओर, कांग्रेस और अकाली दल भी AAP की इस कमजोरी का फायदा उठाने की फिराक में हैं। 2027 का चुनाव अब पहले से कहीं ज्यादा दिलचस्प और कड़े मुकाबले वाला हो सकता है।
मुख्य बातें (Key Points)
• राघव चड्ढा, संदीप पाठक समेत छह पूर्व AAP सांसद पंजाब BJP की नशा मुक्त यात्रा का चेहरा बनेंगे
• अप्रैल 2026 में पंजाब से राज्यसभा भेजे गए सात में से छह सांसदों ने AAP छोड़कर BJP थामा, केवल संत बलवीर सिंह सीचेवाल AAP में बने हुए हैं
• यह पहली बार है जब सभी छह सांसद एक साथ पंजाब BJP की मीटिंग में शामिल हुए
• भाजपा इन नेताओं की स्थानीय पकड़ और पुरानी AAP छवि का फायदा उठाकर 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही है













